विभिन्न प्रकार के रिटर्नों के बारे में जानकर निवेशों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करें

निवेशों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए इस्तेमाल होने वाले विभिन्न प्रकार के रिटर्न के बारे में जानें।

विभिन्न प्रकार के रिटर्नों के बारे में जानकर निवेशों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करें

निवेश करते समय हमारी सबसे अहम चिंता होती है - रिटर्न। रिटर्न जितना अधिक होगा हम निवेश के लिए उतना ही अधिक आकर्षित होंगे। अन्य कारक, जैसे कि किसी परिसंपत्ति श्रेणी का चयन करते समय निवेशक सुरक्षा और तरलता पर भी विचार करते हैं। जब रिटर्न की बात आती है, ये कई प्रकार के होते हैं, जो प्रायः विभिन्न गणना विधियों पर आधारित होते हैं। विभिन्न प्रकार के रिटर्न को लेकर आप जितना स्पष्ट रहेंगे, आप अपने निवेशों से उतनी ही अधिक आय पाने में सक्षम बनेंगे। 

आइए सामान्य किस्म के रिटर्नों पर एक नज़र डालते हैं और वे कैसे आपके निवेशों को प्रभावित करते हैं, जानते हैं।

ऐब्सॉल्यूट रिटर्न

इसे प्वाइंट-टु-प्वाइंट रिटर्न के रूप में भी जाना जाता है, ऐब्सॉल्यूट रिटर्न किसी निवेश में समय के साथ प्रतिशत वृद्धि या कमी होता है। हालांकि, यह ऐब्सॉल्यूट रिटर्न फंड की एक सरल गणना है, जो अवधि पर विचार नहीं करती है। इसलिए, एक ऊंचा ऐब्सॉल्यूट रिटर्न जरूरी नहीं कि लाभकारी हो, क्योंकि यह आपको प्रति वर्ष रिटर्न को नहीं बताता है। पर ऐब्सॉल्यूट रिटर्न की गणना कैसे करें? आइए एक उदाहरण पर विचार करते हैं। यदि आप Rs 1,000 का निवेश करते हैं और यह पांच वर्ष में बढ़कर Rs 3,000 हो जाता है, तो ऐब्सॉल्यूट रिटर्न फॉर्मूला इस प्रकार बनेगा: 100 x [(3,000–1,000)/1,000] = 200%

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रोलिंग रिटर्न

कुल निवेश अवधि में रिटर्न की दर की गणना करने की बजाए, रोलिंग रिटर्न छोटी अवधि के रिटर्नों का औसत देता है। उदाहरण के लिए, म्यूचुअल फंड्स रोलिंग रिटर्न्स, रिटर्न की परिपक्वता दर की बजाए फंड की प्रदर्शन यात्रा को दर्शाएंगे। रोलिंग रिटर्न्स का इस्तेमाल अक्सर ऐब्सॉल्यूट ग्रोथ की बजाए रिटर्न्स की निरंतरता का पता लगाने में किया जाता है। इसलिए जहां तीन-वर्षीय रोलिंग रिटर्न किसी अवधि के लिए औसत वार्षिक रिटर्न दिखाएगा, वहीं 12-महीने का रोलिंग रिटर्न आपको पिछले एक वर्ष में प्रदर्शन को जानने में मदद करेगा। इसका इस्तेमाल निवेश की अवधि में किसी समय पर निवेश के प्रदर्शन के आकलन के लिए किया जा सकता है।

रिटर्न की इंटर्नल रेट

यदि निवेश नियमित रूप से किए जाते हैं या यदि आप इसकी अंतिम परिपक्वता से पहले कोई धनराशि प्राप्त करते हैं, तो निवेश के ऊपर रिटर्न की गणना को आइआरआर विधि से किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, आइए मान लेते हैं कि किसी प्रॉजेक्ट का आरंभिक निवेश रु. 10 लाख है और रिटर्न की उम्मीद पांच साल के लिए रु. 3 लाख वार्षिक है - पर प्रॉजेक्ट के समापन के केवल तीन साल बाद। इसलिए, यह कैपिटल बजटिंग सिद्धांतों के इस्तेमाल की ही तरह है, जो फ्यूचर कैश के वर्तमान मूल्य पर विचार करता है। आइआरआर ऑनलाइन कैल्कुलेटर आपको प्रॉजेक्ट पर रिटर्न की दर का पता लगाने में मदद कर सकता है।

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रिटर्न की एक्सटेंडेड इंटर्नल रेट

यदि आपको आइआरआर की गणना करनी होती है, तो भुगतान समान अवधि में किया या प्राप्त करना होता है। हालांकि, यदि भुगतान का पैटर्न अनियमित है, तो रिटर्न की एक्सटेंडेड इंटर्नल रेट (एक्सआइआरआर) सही फॉर्मूला है। आइआरआर और एक्सआइआरआर गणना एक फंक्शन के रूप में माइक्रोसॉफ्ट एक्सल में भी उपलब्ध है।

कंपाउंड ऐन्युअल ग्रोथ रेट

यदि आप किसी निवेश द्वारा वार्षिक धनात्मक दर की गणना करना चाहते हैं, तो सीएजीआर एक लोकप्रिय विधि है। सीएजीआर की मदद से निवेश पर रिटर्न की वर्ष-दर-वर्ष दर का पता लगाया जा सकता है। यह आपको विभिन्न वर्षों में दर में उतार-चढ़ावों को सुगम बनाने में मदद करता है। हालांकि, सीएजीआर कैल्कुलेटर निवेश की अस्थिरता या उससे जुड़ी जोखिम जैसी पहलुओं पर विचार नहीं करता है।

भले ही आप रिटर्न के आधार पर आप किसी निवेश का आकलन और चयन कर रहे हैं या आप निवेश के प्रदर्शन की जांच कर रहे है, रिटर्न की दर की जानकारी अहम है। विभिन्न प्रकार के रिटर्न को लेकर आप जितना स्पष्ट रहेंगे, आप अधिक सटीक निवेश प्रबंधन में सक्षम बनेंगे। खुद को कम्पाउंडिंग के जादू का लाभ दिलाइए वित्त के इस जादू के बारे में अधिक जानें 

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