आपकी जेब को मज़बूत बनाने के लिए 9 विटामिन सप्लीमेंट

आइए जानें कि एक बड़े नज़रिए के साथ फाइनेंशियल प्लानिंग के सभी पहलुओं पर कैसे नज़र रखें.

आपकी जेब को मज़बूत बनाने के लिए 9 विटामिन सप्लीमेंट

जिस तरह से अलग-अलग विटामिन आपको स्वस्थ रखने में एक भूमिका निभाते हैं, उसी तरह से फाइनेंशियल प्लानिंग के विभिन्न पहलू एक आर्थिक रूप से सुरक्षित जीवन जीने में आपकी मदद कर सकते हैं. हालांकि इनमें से हरेक पहलू अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग तरीके से काम कर सकता है, लेकिन अहम बात यह है कि ये सभी पहलू बेहद ज़रूरी हैं.  आइए कुछ ऐसे तरीकों को देखें, जिन्हें एक साथ जोड़ें तो, आपको अपने फाइनेंस को सही तरह से मैनेज करने में मदद मिल सकती है.

1.बजट बनाना

अपने पर्सनल फाइनेंस पर नियंत्रण पाने के लिए बजट बनाना सबसे अच्छा तरीका है. बजट बनाने से पहले, फाइनेंस से जुड़ी अपनी सभी जानकारी और दस्तावेज़ एक जगह पर रखें. इसमें आय के सभी स्रोत, ख़र्चे, देनदारी और क़र्ज़, और निवेश से जुड़ी जानकारी शामिल होनी चाहिए. इससे आपको अपनी मासिक आय और खर्चों को कैलकुलेट करने में मदद मिलेगी. आप एक कदम और आगे जा सकते हैं और अपनी आय और खर्च के फिक्स्ड और वेरिएबल हिस्सों की पहचान कर सकते हैं. बजट बना लेने के साथ, आप अपनी बचत को बढ़ाने के लिए अपने खर्चों को एडजस्ट कर सकते हैं. 

2.खर्चों पर नज़र रखना

अगर हम पेमेंट करने के लिए कैश, वॉलेट बैलेंस, क्रेडिट कार्ड, नेटबैंकिंग और विभिन्न अन्य तरीकों के इस्तेमाल के नज़रिए से देखें, तो आजकल खर्चों पर नज़र रखना पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल हो गया है. आपने मासिक खर्चों, जैसे कि यूटीलिटी बिल या क्रेडिट कार्ड बकाया का पेमेंट करने के लिए एक अकाउंट ऑटो-डेबिट भी सेट अप किया होगा. इन पर नज़र रखने के लिए, हर महीने अपने खर्चों को समझने के लिए किसी एक्सपेंस ट्रैकिंग ऐप या किसी एक्सेल स्प्रेडशीट का इस्तेमाल करें. नियमित नज़र रखने से से आपको उन खर्चों की पहचान करने में मदद मिलेगी जिनसे आप बच सकते थे - चाहे यह कोई सब्सक्रिप्शन हो जिसका आप शायद ही कभी इस्तेमाल करते हैं या कोई यूटिलिटी बिल जिसका आप ज़रूरत से ज़्यादा पेमेंट कर रहे हैं.

3.इंश्योरेंस

इंश्योरेंस - फाइनेंशियल प्लानिंग का एक ज़रूरी - मगर अक्सर अनदेखा किया गया हिस्सा है. इंश्योरेंस का फ़ायदा यह है कि आपको बड़ा कवर पाने के लिए हर महीने सिर्फ़ थोड़े पैसे जमा करने पड़ते हैं. हेल्थ, लाइफ़, प्रॉपर्टी और गाड़ी के लिए इंश्योरेंस कवर कुछ ऐसे उपलब्ध इंश्योरेंस हैं जिनमें सभी को निवेश करना चाहिए. टर्म या लाइफ इंश्योरेंस की बात करें, तो इनसे आपके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने में भी मदद मिल सकती है, अगर वे आप पर निर्भर हैं.

4.डैट (Debt) मैनेजमेंट

कम से कम या बिल्कुल भी क़र्ज़ न होना आपकी आर्थिक स्थिति को और भी मज़बूत कर सकता है. क़र्ज़ लेने पर उस पर चुकाया जाने वाला ब्याज एक अतिरिक्त ख़र्च बनता है. क़र्ज़ से छुटकारा पाकर आप इस बोझ से बच सकते हैं.  इसलिए, अपने क़र्ज़ को तेज़ी से जल्द से जल्द चुकाने का प्रयास करें (देख लें कि कोई ऐसा क्लॉज़ न हो जिससे आपको जल्दी क़र्ज़ चुकाने के लिए पेनल्टी लगती हो). आप अन्य तरीकों से भी अपने क़र्ज़ को खत्म कर सकते हैं, जैसे आय का एक और स्रोत जोड़कर, इस्तेमाल न हो रहे एसेट को बेचकर और कई बार अपने बजट को देखकर ताकि आप कुछ पैसे अपने क़र्ज़ चुकाने में लगा सकें.

कंटिनजेंसी फंड बनाना

कंटिनजेंसी या इमरजेंसी फंड बनाने का मतलब है अपनी आय से कुछ बचत करना और भविष्य की किसी भी घटना के लिए इस फंड को तैयार रखना. इसके लिए आप जो पैसे बचाना चाहते हैं, वे आपके द्वारा निवेश या अन्य ख़र्चों के लिए तय रकम से अलग होने चाहिए. आपके इमरजेंसी फंड में कम से कम छह महीने का ख़र्चा चलाने का पैसा होना चाहिए. इससे, आपको अचानक होने वाले किसी मेडिकल खर्च या नौकरी चली जाने की स्थिति में वापस अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद मिल सकती है.

6.इन्वेस्टमेंट प्लानिंग

अपने इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग करना भविष्य में आपके पैसे की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है. आपके वित्तीय लक्ष्यों और आप जो हासिल करना चाहते हैं उसके आधार पर, एक ऐसा इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो बनाएं जो आपको अपनी पसंद के मुताबिक रिटर्न दिला सके और आपकी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से भी सही हो. फिक्स्ड डिपॉजिट और सरकारी सेविंग्स स्कीम जैसे जोखिम-मुक्त निवेशों से लेकर मार्किट-लिंक्ड म्यूचुअल फंड और इक्विटी तक, इन्वेस्टमेंट आपके अल्पकालिक और दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं. 

7.रिटायरमेंट प्लानिंग

प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड को नौकरीपेशा लोगों के वेतन पैकेज में जोड़ा जाता है, लेकिन सिर्फ़ इसके आधार पर उनकी रिटायरमेंट प्लानिंग की ज़रूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता. आपको भविष्य के ख़र्चों, रिटायरमेंट के बाद के आय स्रोत, लाइफ़ एक्स्पेक्टेंसी जैसी बातों पर भी गौर करना होगा ताकि आप यह समझ सकें कि आपको अपने रिटायरमेंट के लिए कितनी बचत करने की ज़रूरत है. आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग में कोई कॉर्पस बनाना या कम उम्र में किराए से नियमित आय पाने जैसी चीज़ें शामिल होनी चाहिए.

8.टैक्स प्लानिंग

पैसे बचाने के लिए समझदारी भरी टैक्स प्लानिंग वित्तीय वर्ष की शुरुआत में करनी चाहिए, न कि आखिरी मिनटों में. जब आप पूरे वर्ष के लिए प्लान करते हैं, तो आप टैक्स-फ्रेंडली निवेश के साधनों से नियमित बचत कर सकते हैं जिससे आपका हर महीने का बजट भी नहीं बिगड़ता. अगर आप टैक्स प्लानिंग नहीं करते हैं, तो आप आखिर में निवेश करके टैक्स तो बचा लेंगे लेकिन आपके दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य अटक जाएंगे.  

9.एस्टेट प्लानिंग

जिस तरह इंश्योरेंस आपके जीवनकाल में आपकी सुरक्षा करता है, उसी तरह से एस्टेट प्लानिंग से आपकी मृत्यु के बाद भी आपके परिवार की देखभाल होती है, जब आपकी संपत्ति पूरी तरह से आपके उत्तराधिकारियों को दी गई और उनमें बराबर बाँट दी गई हो. इसके हिस्से के रूप में, अपनी सभी टैंजिबिल और इनटैंजिबिल एसेट का जायज़ा लें और अपनी वर्थ कैलकुलेट करें. यह भी ज़रूरी है कि आप अपने लाभार्थियों की पहचान करें और उनका नाम अपनी वसीयत में रखें ताकि बाद में कोई मतभेद न रहे. साथ ही, एक अच्छे वकील को भी नियुक्त करें जिसे एस्टेट प्लानिंग की अच्छी समझ हो, और अपनी बदलती इच्छाओं के अनुसार इस वसीयत को समय-समय पर अपडेट करें. 

फाइनेंशियल प्लानिंग के इन विभिन्न पहलुओं का इस्तेमाल करके, आप अपने पैसों का सही हिसाब कर सकते हैं. प्लानिंग, बचत और इन्वेस्टमेंट करके, आप धीरे-धीरे आर्थिक तौर पर आज़ादी की तरफ़ अहम कदम बढ़ा सकते हैं.  




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