अपने बैंक बचत खाते से ज़्यादा ब्याज कैसे पाएं?

आइए अपने बचत खाते से ज़्यादा ब्याज पाने के तरीके जानें.

अपने बैंक बचत खाते से ज़्यादा ब्याज कैसे पाएं?

बैंक में अपने पैसे जमा करना भविष्य के लिए बचत करने का एक लोकप्रिय तरीका है. यह एक सदियों पुराना तरीका रहा है और इससे आप अपने पैसे को जब चाहें आसानी से निकाल सकते हैं. हालांकि, बचत खाते में पैसे रखने का एक बड़ा नुकसान यह है कि इसमें आपके पैसे पर मिलने वाला ब्याज बदलती दरों पर निर्भर करता है. अन्य निवेशों की तुलना में ब्याज की कम दर मिलने के कारण, आपके बैंक में जमा पैसे महंगाई से मुक़ाबला करने के लिए काफ़ी नहीं होते.  

स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा से आप अपनी बचत राशि पर ज़्यादा ब्याज दर कमा सकते हैं. इस सुविधा के बारे में यहाँ बताया जा रहा है.

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स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा क्या है?

स्वीप-इन स्वीप-आउट एक ऐसी सुविधा है जिसे आप किसी भी बैंक में चुन सकते हैं. जब आप इस सुविधा को चुनते हैं, तो आप एक न्यूनतम राशि (या सीमा राशि) तय करते हैं जो आप अपनी बचत या चालू खाते में पाना चाहते हैं. जब आपका बैंक बैलेंस इस राशि से ज़्यादा हो जाता है, तो आपका बैंक अपने आप अतिरिक्त धनराशि को स्वीप-इन डिपॉज़िट में ट्रांसफ़र कर देता है. इस डिपॉज़िट की अवधि एक और पांच साल के बीच की हो सकती है, और मिलने वाला ब्याज डिपॉज़िट की अवधि और जमा किए पैसे पर निर्भर करता है. हालांकि, मिलने वाला ब्याज आपके बचत खाते की तुलना में ज़्यादा होता है.

स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा पाने के लिए क्या करना होगा?

यूं तो हरेक बैंक के लिए मानदंड अलग हो सकते हैं, लेकिन इस सुविधा को पाने के लिए आपको बैंक के साथ कम से कम 25,000 रुपये की एफडी शुरू करनी होगी. आप अपने बैंक के साथ एक प्रीमियम खाता भी खोल सकते हैं जिसमें हर महीने या हर तीन महीने में 25,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये जमा रखने होते हैं. 

स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा लेने के क्या फ़ायदे हैं?

आपको अपने बैंक में स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा चुनने के कई फ़ायदे मिलते हैं:

इससे ज़्यादा दर पर ब्याज मिलता है: इस सुविधा को लेने से, आपको अपने सामान्य बैंक खाते की तुलना में ज़्यादा दर पर ब्याज मिलता है, जिससे आप लंबे समय में ज़्यादा पैसा बना सकते हैं. 

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यह आपको पैसे बढ़ाने में मदद करता है: इस सुविधा का इस्तेमाल पैसे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है ताकि आप मुश्किल घड़ी में अपनी ज़रूरतों को पूरा कर सकें. इससे आपके अन्य निवेश और बचत सुरक्षित रहते हैं
मुश्किल समय में पैसे निकाल सकते हैं: अगर आपके नियमित बचत खाते में पैसे कम हो जाते हैं, तो पर LIFO (लास्ट इन फर्स्ट आउट) नियम के हिसाब से फंड्स सीधे आपके बचत खाते में ट्रांसफ़र कर दिए जाएंगे.
इसमें कोई पेनल्टी नहीं लगती: स्वीप-इन स्वीप-आउट डिपॉज़िट से अपने फंड वापस लेने का विकल्प बहुत ही आसान है. अगर आप अपना पैसा जल्दी वापस लेना चाहते हैं तो आपको कोई जुर्माना या फीस नहीं देनी होगी, जैसा कि फिक्स्ड डिपॉज़िट के मामले में होता है. 
स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा चुनने से पहले आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

हालाँकि स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा के कई फ़ायदे हैं, लेकिन इसे चुनने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा: 

  • हरेक बैंक के लिए ब्याज दर, अवधि, अमाउंट वगैरह अलग-अलग होंगे. अपनी पैसे से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प चुनें, इसके लिए अलग-अलग बैंकों से मिलने वाली सुविधाओं की तुलना करें.
  • भले ही इससे बचत खाते की तुलना में ज़्यादा ब्याज दर मिलती हो, फिर भी यह एक फिक्स्ड अकाउंट की तुलना में कम है. अगर आपको लगता है कि आपको लंबे समय तक पैसे निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, तो फिक्स्ड डिपॉज़िट में निवेश करना एक बेहतर विचार हो सकता है जिसमें ब्याज दर ज़्यादा होती है.

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अगर आपमें ज़्यादा जोखिम लेने की हिम्मत नहीं हैं, तो स्वीप-इन स्वीप-आउट सुविधा एक बढ़िया निवेश विकल्प हो सकता है. हालांकि, आपको यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि हर बैंक क्या ऑफ़र करता है ताकि आप अपनी बचत का ज़्यादा फ़ायदा उठा सकें.  यहां बताया गया है कि महामारी के दौरान एक डिजिटल बचत खाता किस तरह आपके काम आ सकता है.

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