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महिला के तौर पर परिवारिवारिक संपत्ति में हिस्सेदारी के अधिकार के लिए ये जानना जरूरी है।

Daughter's guide to property

संपत्ति की विरासत के कानून हमेशा महिलाओं के पक्ष में नहीं रहे हैं। हालांकि इसमें नवंबर 2005 में बदलाव आया। 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधिन करते हुए ये अधिकार दिया कि महिलाएं जन्म के साथ ही संपत्ति की उत्तराधिकारी मानी जाएं। इसका मतलब ये हुआ कि आप पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा मांग सकती हैं, शादी के पहले भी और शादी के बाद भी बशर्ते आप वयस्क हों।   

क्या शादीशुदा बेटी का पिता की संपत्ति में हक है?

2005 में हुए हिंदू उत्तराधिकार कानून संशोधन के बाद विवाहित या अविवाहित बेटी को पिता के हिंदू अविभाजित परिवार का हिस्सा माना जाता है, इस आधार पर पिता की संपत्ति में हक का कानूनी अधिकार मिल जाता है।

हालांकि इस अधिकार का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब:

-जब आपके पिता की मृत्यु 9 सितंबर 2005 के बाद हुई हो।  

विवाहित महिला के तौर पर पैतृक संपत्ति में आपके क्या हैं अधिकार?

कोई भी संपत्ति जो बीते चार पीढ़ियों तक पुरुषों के बीच अविभाजित चली आ रही हो उसे पैतृक संपत्ति माना जाता है। कोई संपत्ति उस स्थिति में भी पैतृक संपत्ति बन जाती है अगर किसी  पिता की मौत अपनी संपत्ति की वसीयत के बिना ही हो जाती है। हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 के तहत आप जन्म के साथ ही अपने भाइयों बहनों के साथ संपत्ति के आधिकार के हकदार हो जाते हैं, आप संपत्ति में हिस्सा मांग सकते हैं।

ये 9 सितंबर 2005 से सभी जीवित उत्तराधिकारियों पर लागू होता है, भले ही वे कब पैदा हुए हों।

हालांकि आप इन स्थितियों में पिता की संपत्ति में कोई कानूनी हक नहीं मांग सकते यदि:

-यदि पिता ने संपत्ति अपने दम पर हासिल की है न कि इसे विरासत में पाया है

-पिता ने संपत्ति अपने साधने से जुटाई है और आपको वसीयत से बाहर रखा है

-लेकिन पिता ने अपने दम पर संपत्ति हासिल की है और बिना वसीयत बनाए ही उनकी मौत हो जाती है तो ये पैतृक संपत्ति मानी जाएगी। इस स्थिति में मां और भाइयों के साथ आपके पास भी संपत्ति में बराबर का कानून हक है।

क्या दादाजी की संपत्ति में शादीशुदा औरत के तौर पर आपका कानूनी हक है?

हर किसी की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी और अधिकार है, बशर्ते कि वो पुरुषों की चार पीढ़ियों के बीच अविभाजित रही है या फिर बिना वसीयत बनाए ही पिता की मौत हो गई हो। हालांकि यदि आपके दादाजी ने अपने दम पर ही संपत्ति जुटाई है न कि विरासत में मिली है और बिना वसीयत बनाए ही उनकी मौत हो जाती है तो आपके पिता या माता संपत्ति के अधिकारी होंगे न कि आप। आपका और आपके भाइयों-बहनों का केवल उस स्थिति में ही दादा की संपत्ति में अधिकार होगा जब आपके पिता की मौत दादाजी से पहले ही हो जाए।

क्या एक शादीशुदा महिला के पास अपनी मां की मौत के बाद अपने नाना की संपत्ति में अधिकार है?

आपके नाना ने संपत्ति चाहे खुद के दम पर जुटाई हो या फिर विरासत में मिली हो आपकी मां और उनके भाई बहनों ही कानूनी उत्तराधिकारी होंगे और उनका ही उस संपत्ति पर अधिकार होगा।

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