भारत में पूंजीगत लाभ को समझने के लिए आपकी मार्गदर्शिका [भाग 1]

यदि आप उस पुराने घर को बेचने की योजना बना रहे हैं जो आपके माता-पिता ने आपके लिए छोड़ दिया, तो आप पर कर लगाया जाएगा।

भारत में पूंजीगत लाभ को समझने के लिए आपकी मार्गदर्शिका [भाग 1]

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर अधिनियम के तहत पेश किए गए कुछ कर लाभों के लिए आखिरी समय को बढ़ाते हुए व्यावसायिक पूंजी की तलाश कर रहे उद्यमियों को सहारा प्रदान किया है।

अगले दो वर्षों में , उद्यमियों को संपत्ति, मकान समेत, बेचने से प्राप्त धन पर पूंजीगत लाभ कर का भुगतान नहीं करना होगा,यदि वे उस धन का उपयोग परियोजनाओं के वित्तपोषण के उद्देश्य से करेंगे । 2013 में पेश किया गया यह प्रावधान 31 मार्च, 2019 को समाप्त हो गया। अब यह पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ 31 मार्च, 2021 तक चलेगा।

वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम के तहत भी इसी खंड से संबंधित अन्य उपायों की घोषणा की। लेकिन इस चर्चा के उद्देश्य के लिए, हम पूंजीगत लाभ कर पर ध्यान केंद्रित करेंगे: यह क्या होता है? आप इसकी गणना कैसे करते हैं? और पूंजीगत लाभ और पूंजीगत संपत्ति क्या हैं?

पूंजीगत संपत्ति

पूंजीगत संपत्ति को किसी भी प्रकार की संपत्ति के रूप में परिभाषित किया गया है, जिस पर आपका अधिकार हो और जो आपके व्यवसाय या पेशे से जुड़ी हो भी सकती है या नहीं भी । आपके पास अपार्टमेंट या कार जैसी कोई भी संपत्ति एक पूंजीगत संपत्ति मानी जा सकती है , भले ही आप एक गृहिणी या कामकाजी महिला हों और उद्यमी न हों।

हालांकि, कुछ वस्तुओं को आयकर की गणना करते समय एक पूंजीगत संपत्ति की परिभाषा से बाहर रखा गया है। इनमें चल संपत्ति और व्यक्तिगत वस्तु शामिल हैं जो करदाता या किसी आश्रित परिवार के सदस्य द्वारा व्यक्तिगत उपयोग के लिए रखे गए हैं। चल संपत्ति में फर्नीचर और कुछ निर्दिष्ट प्रकार के बॉन्ड शामिल हों सकते हैं , जबकि व्यक्तिगत वस्तु परिधान हो सकते हैं।

इसके अलावा, एक विशेष प्रकार की संपत्ति है जिसे पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि है।

इसी तरह, यदि आप एक उद्यमी हैं और एक व्यवसाय चलाते हैं - यहां तक ​​कि एक छोटी इकाई या टेलरिंग बुटीक की तरह, तो आप किसी भी स्टॉक-इन-ट्रेड, उपभोज्य दुकानों या अपने व्यवसाय या पेशे के लिए कच्चे माल पर छूट का आनंद ले सकते हैं।

फिर से, कुछ चल संपत्ति और व्यक्तिगत वस्तुएं आयकर उद्देश्यों के लिए पूंजीगत संपत्ति के रूप में अर्हता प्राप्त करेंगे। ये होंगे:

  • आभूषण।
  • पुरातात्विक संग्रह।
  • रेखाचित्र, पेंटिंग और मूर्तियों जैसे कला का कोई भी काम।

संपत्ति के प्रकार

पूंजीगत संपत्ति के दो मुख्य प्रकार हैं:

1. अल्पकालिक पूंजीगत संपत्ति |

2. दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्ति।

ये कितने महीनों से आपके अधिकार में है और संपत्ति चल है या नहीं,इस पर निर्भर करती हैं।

अल्पकालिक पूंजीगत संपत्ति

यदि किसी संपत्ति को 36 महीनों से अधिक समय तक अधिकृत नहीं रखा गया है, तो उसे एक अल्पकालिक पूंजीगत संपत्ति माना जाएगा। हालांकि, अचल संपत्तियों जैसे भूमि, भवन और घर की संपत्ति के मामले में, वित्तीय वर्ष 2017-18 से अधिकरण की अवधि को घटाकर 24 महीने कर दिया गया है।

इस प्रकार, 24 महीने तक अधिकृत रखे गए किसी घर की बिक्री से उत्पन्न होने वाली किसी भी आय को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ माना जाएगा, बशर्ते कि संपत्ति 31 मार्च, 2017 के बाद बेची गई हो ।

दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्ति

यदि किसी संपत्ति को 36 महीनों से अधिक समय के लिए रखा जाता है, तो उसे एक दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्ति माना जाता है।

हालांकि, संपत्ति का एक विशिष्ट समूह अल्पकालिक पूंजीगत संपत्ति माना जाएगा यदि वह 12 महीने या उससे कम समय के लिए अधिकृत हो,बशर्ते हस्तांतरण की तारीख 10 जुलाई 2014 के बाद हो (खरीद की तारीख चाहे जो भी हो)। लेकिन अगर 12 महीने से अधिक समय तक रखा जाता है, तो उन्हें दीर्घकालिक संपत्ति माना जाएगा। ये संपत्ति हैं:

  • भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी में इक्विटी या प्राथमिकता शेयर।
  • भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध प्रतिभूति, जैसे डिबेंचर, बॉन्ड प्रतिभूति आदि।
  • यू.टी.आई. की इकाइयाँ।
  • इक्विटी-उन्मुख म्यूचुअल फंड की इकाइयाँ।
  • शून्य-कूपन बांड।

विरासत में मिली संपत्ति , एक वसीयत में मिली संपत्ति या एक उपहार के रूप में अधिग्रहण की गई संपत्ति के मामले में , वह अवधि जिसमे यह संपत्ति पिछले मालिक के पास थी, शामिल की जाती है यह पता लगाने के लिए कि यह अल्पकालिक या दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्ति है।

इसी तरह, बोनस शेयर या अधिकृत शेयर के मामले में, होल्डिंग की अवधि उनकी तारीखों से निर्धारित होती है।

पूंजीगत लाभ और कर

पूंजीगत लाभ किसी भी पूंजीगत संपत्ति से अर्जित लाभ है। उदाहरण के लिए, अपने पुश्तैनी आभूषणों को बेचने से आपको जो भी लाभ होगा, वह पूंजीगत लाभ होगा। हालांकि, यदि आप एक पुराने सोफे सेट पर एक अच्छा पैसा बनाते हैं, तो इसे पूंजीगत लाभ नहीं माना जाएगा। पूंजीगत लाभ या तो अल्पकालिक या दीर्घकालिक होते हैं।

पूंजीगत लाभ कर के संबंध में, पूंजीगत संपत्ति की बिक्री से सभी वित्तीय लाभ आयकर के अधीन हैं। इसे पूंजीगत लाभ कर कहा जाता है।

कर गणना

दीर्घकालिक और अल्पकालिक लाभ पर लगाया गया कर क्रमशः 10% और 15% से शुरू होता है, और उनकी गणना अलग तरीके से की जाती है।

अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर

अल्पकालिक परिसंपत्ति बिक्री के मामले में (यानी अगर संपत्ति खरीद के 36 महीने के भीतर बेची जाती है), तो आपकी आय में पूंजीगत लाभ जोड़ा जाता है, और आपको अपने स्लैब के अनुसार आयकर देना होगा। उदाहरण के लिए, यदि आप 20% कर स्लैब के अंतर्गत आते हैं, तो आपके अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 20% कर लगेगा।

अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के लिए कोई सूचकांक लाभ उपलब्ध नहीं हैं। मुद्रास्फीति के बाद जनता की क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए मूल्य सूचकांक के माध्यम से आय भुगतान को समायोजित करने के लिए इंडेक्सेशन का उपयोग किया जाता है।

यह सूत्र अल्पकालिक पूंजीगत लाभ की गणना कर सकता है:

अल्पकालिक पूंजीगत लाभ = बिक्री पर मुआवजा - अधिग्रहण की लागत + सुधार की लागत + हस्तांतरण की लागत।

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के लिए, आप मुद्रास्फीति सूचकांक की लागत का लाभ उठा सकते हैं।

पूंजीगत लाभ की गणना इस सूत्र द्वारा की जा सकती है:

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ = बिक्री पर मुआवजा - अधिग्रहण की अनुक्रमित लागत + सुधार की अनुक्रमित लागत + हस्तांतरण खर्च + छूट ।

54 छूट, 54A, 54B, 54D, 54EC54F, 54G और 54GA के तहत विभिन्न छूट भी उपलब्ध हैं। कर राशि की गणना इन वर्गों के तहत आपके द्वारा योग्य कुल कटौती को काट कर की जानी चाहिए।

पूंजीगत लाभ राशि को सभी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में उपलब्ध पूंजीगत लाभ खाता योजना में तब तक रखा जाता है जब तक कि यह निवेश न हो जाए।

म्युचुअल फंड लाभ

जैसा कि पहले कहा गया था, शेयरों की किसी भी प्रकार की बिक्री, म्यूचुअल फंड (ऋण और इक्विटी), अचल संपत्ति, सोना, आदि को पूंजीगत लाभ माना जाता है। ये लाभ कर योग्य हैं और आपको वित्तीय वर्ष के लिए अपने आयकर रिटर्न दाखिल करते समय में अपनी बिक्री की सुचना देनी चाहिए।

अपनी कर देयता का आकलन करने और अपने कर रिटर्न को सही ढंग से दर्ज करने के लिए, आपको इक्विटी और डेब्ट म्युचुअल फंड के लिए वित्तीय वर्ष के दौरान अर्जित पूंजीगत लाभ को जानना होगा, आप इसे पूंजीगत लाभ विवरणों में पा सकते हैं।

के.ए.आर.वि.वाई. , कैम्स ,एफ .टी.ए.एम.आई.एल. और एस.बी.एफ.एस. जैसे रजिस्ट्रार ने निवेशकों को मेल-बैक स्टेटमेंट के रूप में अपने पोर्टफोलियो के समेकित दृश्य को देखने की अनुमति देने की सुविधा प्रदान की है, बशर्ते उन्होंने उनके द्वारा बनाए गए फोलियो में एक ईमेल पता पंजीकृत किया हो।

उदाहरण के लिए, यदि आप कैम्स में पंजीकृत हैं, तो विवरणों को मैन्युअल रूप से दर्ज करने के बजाय आप बस एक साधित लाभ विवरण अपलोड कर सकते हैं, जो कि कैम्स सर्विस्ड फंड में वर्तमान और पिछले वित्तीय वर्षों के लिए आपके निवेश प्रदर्शन, पूंजीगत लाभ और आय का एक समेकन है।

निम्नलिखित भाग बताएगा कि यह कैसे किया जाता है:

  • www.camsonline.com पर जाएं,
  • शीर्ष मेनू पर 'निवेशक सेवा' पर क्लिक करें,
  • बाईं ओर स्थित मेनू से ‘मेलबैक सर्विसेज' चुनें।
  • 'समेकित वास्तविक लाभ विवरण' पर क्लिक करें।
  • फिर अपना पंजीकृत ईमेल पता, और एक पासवर्ड दर्ज करें, जो कि आपका वास्तविक पासवर्ड नहीं हो सकता है, लेकिन वह सिर्फ कैम्स द्वारा फ़ाइल या विवरण को एन्क्रिप्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है, जो एक घंटे के भीतर भेज दिया जाएगा। आपको विवरण खोलने के लिए दिए गए पासवर्ड का उपयोग करना होगा ।

यह केवल तभी उत्पन्न होगा जब आपके पास किसी विशेष वर्ष में कोई नया रिडेम्पशन या स्विच हो। इस बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए पूंजी बाजार के प्रारम्भिक मार्गदर्शिकापर एक नज़र डालें।

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