छोटे व्यवसाय शुरू करने के बारे में 5 मिथक जिन्हें महिलाओं को मानना ​​बंद करना होगा

हमारे पास देश में और अधिक महिला सीईओ होंगी जब आप जैसी महिलाएं इन सामान्य मिथकों को मानना ​​बंद कर देंगी और निर्णय लें ।

छोटे व्यवसाय शुरू करने के बारे में 5 मिथक जिन्हें महिलाओं को मानना ​​बंद करना होगा

जीवन की चुनौतियों में से एक संघर्ष का सामना करना और उन पर काबू पाना होता है। लेकिन एक महिला के रूप में, आपके संघर्ष आमतौर पर पुरुषों की तुलना में अधिक विविध और अनुचित होते हैं। इनमें से कुछ संघर्ष शरीर की रचना के कारण होते हैं, लेकिन बहुत सारे समाज और लिंग भूमिकाओं के कारण होते हैं। इसलिए, यदि आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन लोगों की उन सभी बातों को सुनकर त्रस्त हो चुके हैं, जो लोग आपको एक उद्यमी होने से हतोत्साहित करने के लिए कहते हैं, तो आपको एक कदम पीछे लेकर चीजों को निष्पक्ष रूप से देखने की जरूरत है।

किसी को भी आपको अपने व्यावसायिक सपनों को साकार करने से रोकने क्यों दिया जाए? एक महिला के रूप में, यहां कुछ सबसे सामान्य मिथक हैं जिन्हें आपको स्पष्ट करने की आवश्यकता है।

1. महिलाएं पुरुषों की तरह उद्यमशील नहीं होती हैं

परंपरागत रूप से, दुनिया के पितृसत्तात्मक समाजों में पुरुषों ने हमेशा अपना अधिकार जमाया है। घर के मुखिया होने से लेकर कंपनी के प्रमुख होने तक, पुरुषों के पास ही सभी वित्तीय और निर्णय लेने की शक्तियां रही हैं। बेशक, पिछले कुछ दशकों में, महिलाएं इन बंधनों को तोड़कर अपना रास्ता बना रही हैं। लेकिन यही तो बात है - उन्हें पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक लड़ना और संघर्ष करना पड़ता है अगर उनको अपनी आवाज़ सुनानी हो और बोर्डरूम में खुद के लिए जगह बनानी हो।

जब कोई व्यवसाय चलाने की बात आती है तो भी चीजें वैसी ही होती हैं। इसके कारण, कई महिलाओं का मानना ​​है कि उद्यमशीलता पुरुषों के लिए एक और क्षेत्र है जो स्वाभाविक रूप से उनके लिए बना है। यह सही नहीं है, क्योंकि उद्यमशीलता कम से कम आनुवंशिक तो नहीं होता है। अध्ययनों से पता चला है कि महिलाओं के पास नेतृत्व और प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण सभी खूबियां होती हैं जो उन्हें पुरुषों की तुलना में उद्यमशीलता में बेहतर बनाते हैं। महिलाएं पुरुषों की तुलना में बेहतर निर्णय लेने वाले, अधिक महत्वाकांक्षी, बेहतर योजनाकार और ज़रूरत से अधिक आत्मविश्वास के शिकार नहीं होती है।

2. महिलाओं में उद्यमी बनने के लिए कौशल की कमी होती है

इस मिथक का कुछ औचित्य हो सकता है। जैसा कि हमने देखा, पुरुषों ने हमेशा सत्ता के पदों को धारण किया है। जब वे कंपनियों में काम करते हैं, तो उनके लिए कॉर्पोरेट ऊंचाइयों पर चढ़ना और उन पदों और अनुभवों को हासिल करना आसान और त्वरित होता है जो उन्हें अपने कौशल का निर्माण करने में मदद करें। महिलाओं को आमतौर पर, यह अवसर नहीं दिया जाता है। इसलिए, जबकि यह सच हो सकता है कि उद्यमशीलता की दौड़ की शुरुआती रेखा पर, एक आदमी में एक महिला की तुलना में अधिक कौशल हो सकता है, पर फिर भी महिलाएं अभी भी अपना व्यवसाय कभी भी शुरू कर सकती हैं और इन कौशल को काम करते-करते सीख सकती हैं। महिलाएं आमतौर पर कौशल सीखने और लोगों और प्रक्रियाओं को समझने में तेज और होशियार होती हैं।

इस मिथक का एक अन्य कारण यह भी है कि महिलाओं के कई रोल मॉडल नहीं होते हैं। भारत में लगभग 58 मिलियन उद्यमी हैं, जिनमें से केवल 14% महिलाएँ हैं! लेकिन यह आपको अपने सपनों के पीछे दौड़ने का और एक कारण देता है ताकि आप छोटी -छोटी लड़कियों की पूरी पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बन सकें।

3. आपके बच्चों और परिवार को नुकसान होगा

इसे एक मिथक के रूप में स्वीकार करना कठिन हो सकता है, यह देखते हुए कि एक महिला को कितनी बार यह सुनना पड़ता होगा , चाहे वह एक उद्यमी हो या एक गृहिणी के अलावा कुछ भी कर रही हो। लेकिन यह वास्तव में, एक मिथक है। कर्मचारी होने की तुलना में एक उद्यमी के रूप में, महिलाओं के पास समय सीमा की अधिक ढील होती है । इसका मतलब यह नहीं है कि उनके पास अधिक खाली समय होगा - वे वहाँ भी व्यस्त ही होंगे। लेकिन अगर उन्हें शाम 5 बजे अपने बच्चे के स्कूल में नृत्य देखने जाना है, तो वे इसके लिए जा सकते हैं और फिर देर रात तक अपना काम कर सकते हैं जिसमे उन्हें किसी को कोई स्पष्टीकरण या बहाना देने की ज़रूरत भी नहीं होगी|

यदि आप अपने सपनों को पूरा करने का साहस करते हैं, तो आप अपने बच्चों को भी ऐसा ही करना सिखाएँगे, खासकर यदि आपकी बेटी हो । यदि आपकी बेटी आपको बिना अपराधबोध के काम करते हुए और अपने करियर पर उतना ही ध्यान केंद्रित करते हुए देखती है, जितना कि उसके पिता करते हैं, तो वह बड़ी होकर एक स्मार्ट युवा महिला बनेगी, जो ऐसा ही करेगी और वह वे सब बलिदान नहीं देगी जो समाज उससे कराना चाहता है।

4. महिलाओं को खुद ही सब कुछ करना पड़ता है

एक कहावत है, 'उद्यमी लोग वे हैं जो सप्ताह में 40 घंटे काम करने से बचने के लिए सप्ताह में 80 घंटे काम करेंगे'। यह सच है कि आपको एक कॉर्पोरेट जॉब की तुलना में एक उद्यमी के रूप में अधिक घंटे काम करना होगा, खासकर शुरुआत में जब आप चीजों को सेट कर रहे हैं और अपने व्यवसाय को स्थिर कर रहे हैं। लेकिन पहले कुछ वर्षों के बाद, चीजें आसान होने लगती है ।

आप एक कोर टीम का निर्माण कर सकते हैं और उन्हें नौकरी पर रख सकते हैं,ऐसे लोग जिन पर आप पर्याप्त भरोसा कर सकते हैं - उनकी क्षमता, इरादों और समर्पण पर - जिससे परिणाम को लेकर चिंतित या घबराहट महसूस किए बिना आप उन्हें काम को सौंप पाएं। एक उद्यमी के रूप में, आपको सभी महत्वपूर्ण फैसले करने होंगे, लेकिन आपको स्वयं सब कुछ नहीं करना होगा। यदि आप इस मिथक को मानने लगते हैं, तो आप एक प्रर्वतक और रचनात्मक विचारक नहीं बन पाएंगे - जो एक सफल उद्यमी के लिए सबसे आवश्यक चीजें हैं।

5. महिलाओं के लिए धन प्राप्त करना असंभव है

अपने छोटे व्यवसाय को शुरू करने के लिए पैसा इक्कट्ठा करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह असंभव तो बिलकुल नहीं है। ऐसी महिलाओं की मदद करने के लिए कई सरकारी योजनाएं हैं जिन्हे अपना एक छोटा सा व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसे की ज़रूरत है । कई बैंक कम ब्याज दरों पर महिलाओं को उनके व्यवसायों के लिए ऋण प्रदान करते हैं। आजकल, ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म जैसे बहुत सारे वैकल्पिक वित्तपोषण विकल्प उपलब्ध हैं।

वैकल्पिक रूप से, आप अपनी वित्तीय योजना के बारे में रणनीतिक हो सकते हैं और कुछ वर्षों में अपने छोटे व्यवसाय को शुरू करने के लिए आवश्यक धन की बचत कर सकते हैं। व्यक्तिगत वित्त की मूल बातें - जैसे बजट और निवेश - को सही से समझ लेने से आपको एक उद्यमी के रूप में अपने व्यवसाय के लिए बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी ।

जब आप कुछ नया शुरू करते हैं, तो बहुत से ऐसे लोग हो सकते हैं जो आपको निचे खींचने की कोशिश करें । एक महिला के रूप में, आपको यह समझना होगा कि जो लोग आपके सपनों को समझते हैं , उन्हें इन सबसे कोई परेशानी नहीं होगी , और जिन्हे परेशानी होती है,वे आपके सपनो को कभी नहीं समझेंगे |




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