एम.एस.एम.ई. में नवीनता लाना : नए भारत की चुनौती

यहां एक नई पहल के बारे में बताया गया है जो छोटे संगठनों के लिए नवीन विचारों को सामने लाने के लिए एक मंच प्रदान करती है।

 एम.एस.एम.ई. में नवीनता लाना : नए भारत की चुनौती

मोदी सरकार ने देश में नवीनता और उद्यमता को बढ़ावा देने के लिए एक नयी पहल शुरू की है जिसमे भारत के स्टार्ट-अप और एम.एस.एम.ई. क्षेत्र के भागीदारी का दायरा बढ़ाया गया है | नीति आयोग के संरक्षण के अंतर्गत उनकी प्रमुख पहल अटल नवाचार मिशन (एआईएम) के तत्वावधान में शुरू किए गए इस कार्यक्रम में एप्लाइड रिसर्च एंड इनोवेशन में घरेलू उद्यमियों की क्षमताओं का दोहन किया जाना है।

निति आयोग सी.ई.ओ. अमिताभ कांत ने इसके लॉन्च में कहा कि इसे शुरू करने के पीछे विचार यह था कि भारतीय स्टार्ट-अप और एम.एस.एम.ई. को ज्यादा नया, लचीला, तकनीक चालित, और अनुसंधान और विकास उन्मुख बनाया जाये ।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस पहल पर नज़र रखेंगे जिसे पहले औपचारिक रूप से आत्मनिर्भर भारत ए.आर.आई.एस.ई.-अटल न्यू इंडिया चैलेंज का नाम दिया गया था| इसरो की 4 मंत्रालयों द्वारा सहायता की जाएगी -रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, और आवास और शहरी विकास मंत्रालय | इन मंत्रालयों के अंतर्गत विभिन्न विभागों को भी शामिल किया गया है |

अटल न्यू इंडिया चैलेंज योजना

सबसे पहले, इस योजना के तहत भारतीय स्टार्ट-अप और एम.एस.एम.ई. को उद्योगों के विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों का सामना करने के लिए एप्लाइड शोध आधारित अनुसंधानों को विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी |

उदाहरण के लिए, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के सामने चुनौती यह है कि वाणिज्यिक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कचरे का प्रभावी उपयोग और मौद्रीकरण कैसे करें | इसी तरह, स्वास्थ मंत्रालय एक ऐसे नवाचार की तलाश कर रहा है जो महामारी के आने की भविष्यवाणी करते हुए उसके पुराने डाटा और वक्र का आंकलन करे |

कुल मिलाकर, 15 क्षेत्रों का पता लगाया गया है जहाँ अनोखी चुनौतियों को पूरा करने के लिए नवाचार का उपयोग किया जा सकता है | उद्यमी जो व्यवहारिक नवाचार जमा करेगा ,उन्हें नौ महीने से लेकर एक साल तक 50 लाख रुपये तक की सहायक अनुदान प्राप्त होगी जिससे वो सूक्ष्म उपयोगी प्रोटोटाइप बना सके |

केंद्रीय सरकार और उसके विभिन्न मंत्रालय या विभाग संभवतः नए उत्पाद और तकनीक के पहले खरीदार होंगे|

इनोवेशन पालिसी

'द अटल न्यू इंडिया चैलेंज' कार्यक्रम मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से मेल खाता है जो भारतीय स्टार्ट-अप को विशिष्ट समस्या के समाधानों और उत्पादों को नए विचारों के साथ विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है |

अगस्त 2020 में,जब सरकार ने 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबन्ध लगा दिया था जिसने भारत के डाटा गोपनीयता कानून को भंग किया था,तब इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के मंत्रालय ने 'आत्मनिर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज' पेश किया| इसने एक और कार्यक्रम लॉन्च किया-जिसका नाम 'चुनौती' है - जिसका उद्देश्य कोविड-19 प्रकोप के बाद आने वाली चुनौतियों को सम्बोधित करते हुए समाधान विकसित करने के लिए स्टार्टअप को प्रोत्साहित करना है |

इसी तरह, द डिफेन्स इंडिया स्टार्टअप चैलेंज, रक्षा मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया एक कार्यक्रम, जो स्टार्ट-अप और एम.एस.एम.ई. की क्षमता और काबिलियत को लिवरेज करके सशस्त्र बल की ज़रूरतों को पूरा करते हैं |

अंतिम पंक्तियाँ

ये चुनौतियां ए.आई.एम.,अटल नवाचार मिशन का हिस्सा है,जो देश में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए है | 2016 में हरी झंडी मिलने के बाद, ए.आई.एम. को नए विचार उत्पन्न करने के लिए प्लेटफार्म देने के रूप में बनाया गया था | इसके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के स्टेक- धारकों को सहभागिता के लिए अवसर प्रदान करना था | द अटल न्यू इंडिया चैलेंज कार्यक्रम, इस विचार को एम.एस.एम.ई. और स्टार्ट अप तक लाता है | 

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