EPFO interest rate may hike: ईपीएफ (EPF) के ब्याज बढ़ने के आसार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ EPFO ) के निवेश की रणनीति बदलने के साफ आसार दिख रहे हैं, अधिक रिटर्न पर ध्यान केंद्रित होगा।

ईपीएफओ देता है बेहतर रिटर्न

EPFO interest rate: बाजार की हलचल पर ध्यान दें तो ऐसे आसार साफ नजर आ रहे हैं जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के ब्याज बढ़ने की संभावना हो सकती है। माना जा रहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) निवेश को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव करने की योजना बना रहा है। संगठन का ध्यान निवेश से प्राप्त होने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करने पर केंद्रित होगा। 

ईपीएफ (EPF) के ब्याज बढ़ने के आसार

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ईपीएफओ अपनी रणनीति में मुनाफ़े को बढ़ाने के लिए बदलाव करने पर काम कर रहा है। संगठन की कोशिश रहेगी कि क्रमबद्ध तरीके से इस योजना पर अमल करते हुए अंशधारकों को अधिक ब्याज दे सके। फिलहाल इस वित्त वर्ष के दौरान सरकार द्वारा ईपीएफ खाताधारकों को 8.10% की दर से ब्याज दिया जायेगा। इस विषय पर अधिक जानकारी रखने वालों की मानें तो वित्त निवेश और लेखापरीक्षा समिति एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के माध्यम से इक्विटी निवेश के लिए 10% मुनाफ़े का लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। वहीं शेयर बाजार में आई हालिया तेजी का लाभ उठाने के लिए ईटीएफ को बार-बार रिडीम करने का सुझाव भी दिया गया है। 

केंद्रीय न्यासी बोर्ड की मंजूरी 

यह प्रस्ताव अभी केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सामने रखा गया है। बोर्ड की मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। ईपीएफओ ने अपनी निवेश की रणनीति में बदलाव किया है जिसकी एक वजह मौजूदा समय में इक्विटी में डेट (Debt) और अन्य निवेशकों से मिलने वाले बेहतर रिटर्न को माना जा रहा है। साथ ही श्रम मंत्रालय भी इक्विटी निवेश पर सहमत दिखाई देता है। 

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

निवेश की नई रणनीति 

वर्तमान में यदि ईपीएफओ की रणनीति को देखें तो पहले साल इक्विटी में लगाया गया पैसा चौथे साल में बाहर कर लिया जाता है। इसे ‘फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट’ कहते हैं, लेकिन परेशानी यह है कि बाजार यदि नीचे चल रहा हो तो निवेश का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाता। 

इसलिए अब अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए 10% वार्षिक मुनाफ़े का लक्ष्य निर्धारित करने की योजना है। साथ ही दैनिक निकासी की भी सुविधा रहेगी जिससे रिडीम पॉलिसी में पारदर्शिता आएगी और रिटर्न में वृद्धि देखने को मिलेगी। इसके साथ ही ईटीएफ का निवेश अब चार वर्ष की जगह पाँच वर्ष करने का प्रस्ताव है। 

एनपीएस से प्रतिस्पर्धा 

ईपीएफओ आने वाले समय में एनपीएस यानी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से प्रतिस्पर्धा करता दिखता है। एनपीएस के निवेशकों को पिछले 12 वर्षों में 10% की दर से औसत दर से मुनाफा मिला है। हाल ही में पेंशन फंड नियामक द्वारा नियमों में परिवर्तन किए गए थे। जिसके बाद न्यूनतम राशि की सीमा को खत्म कर दिया गया था। साथ ही पैसों को कितनी बार भी जमा करने की सुविधा दी गई थी जो पहले सीमित थी। माना जा रहा है ईपीएफओ अब न्यूनतम रिटर्न की गारंटी वाला निवेश बन सकता है।

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

EPFO interest rate: बाजार की हलचल पर ध्यान दें तो ऐसे आसार साफ नजर आ रहे हैं जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के ब्याज बढ़ने की संभावना हो सकती है। माना जा रहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) निवेश को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव करने की योजना बना रहा है। संगठन का ध्यान निवेश से प्राप्त होने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करने पर केंद्रित होगा। 

ईपीएफ (EPF) के ब्याज बढ़ने के आसार

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ईपीएफओ अपनी रणनीति में मुनाफ़े को बढ़ाने के लिए बदलाव करने पर काम कर रहा है। संगठन की कोशिश रहेगी कि क्रमबद्ध तरीके से इस योजना पर अमल करते हुए अंशधारकों को अधिक ब्याज दे सके। फिलहाल इस वित्त वर्ष के दौरान सरकार द्वारा ईपीएफ खाताधारकों को 8.10% की दर से ब्याज दिया जायेगा। इस विषय पर अधिक जानकारी रखने वालों की मानें तो वित्त निवेश और लेखापरीक्षा समिति एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के माध्यम से इक्विटी निवेश के लिए 10% मुनाफ़े का लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। वहीं शेयर बाजार में आई हालिया तेजी का लाभ उठाने के लिए ईटीएफ को बार-बार रिडीम करने का सुझाव भी दिया गया है। 

केंद्रीय न्यासी बोर्ड की मंजूरी 

यह प्रस्ताव अभी केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सामने रखा गया है। बोर्ड की मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। ईपीएफओ ने अपनी निवेश की रणनीति में बदलाव किया है जिसकी एक वजह मौजूदा समय में इक्विटी में डेट (Debt) और अन्य निवेशकों से मिलने वाले बेहतर रिटर्न को माना जा रहा है। साथ ही श्रम मंत्रालय भी इक्विटी निवेश पर सहमत दिखाई देता है। 

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निवेश की नई रणनीति 

वर्तमान में यदि ईपीएफओ की रणनीति को देखें तो पहले साल इक्विटी में लगाया गया पैसा चौथे साल में बाहर कर लिया जाता है। इसे ‘फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट’ कहते हैं, लेकिन परेशानी यह है कि बाजार यदि नीचे चल रहा हो तो निवेश का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाता। 

इसलिए अब अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए 10% वार्षिक मुनाफ़े का लक्ष्य निर्धारित करने की योजना है। साथ ही दैनिक निकासी की भी सुविधा रहेगी जिससे रिडीम पॉलिसी में पारदर्शिता आएगी और रिटर्न में वृद्धि देखने को मिलेगी। इसके साथ ही ईटीएफ का निवेश अब चार वर्ष की जगह पाँच वर्ष करने का प्रस्ताव है। 

एनपीएस से प्रतिस्पर्धा 

ईपीएफओ आने वाले समय में एनपीएस यानी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से प्रतिस्पर्धा करता दिखता है। एनपीएस के निवेशकों को पिछले 12 वर्षों में 10% की दर से औसत दर से मुनाफा मिला है। हाल ही में पेंशन फंड नियामक द्वारा नियमों में परिवर्तन किए गए थे। जिसके बाद न्यूनतम राशि की सीमा को खत्म कर दिया गया था। साथ ही पैसों को कितनी बार भी जमा करने की सुविधा दी गई थी जो पहले सीमित थी। माना जा रहा है ईपीएफओ अब न्यूनतम रिटर्न की गारंटी वाला निवेश बन सकता है।

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संवादपत्र

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