Best investment plan: बेस्ट इन्वेस्टमेंट प्लान चुनते समय ध्यान देने वाली बातें

सावधानी न बरतने पर निवेशकों को नुकसान होने की संभावना

निवेशकों के लिए आवश्यक पाँच सावधानियां

How to pick best investment plan: निवेशकों को समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की जाँच करते रहना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो संभव है कि आप अपना मुनाफा गंवा दें। समय पर बाजार की खबर न रखने, निवेश रोक देने और निवेश को दोबारा शुरू करने से आपके पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंच सकता है। अक्सर निवेशक कुछ सामान्य गलतियां कर जाते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए कुछ सावधानियाँ जरूरी हैं। यहाँ ऐसे ही पाँच मुख्य सावधानियों के बारे में बता रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: ७ सुनहरे वित्तीय नियम

निवेश से जुड़ी पाँच सावधानियां

1. नियमित अंतराल पर निवेश पोर्टफोलियो की जाँच न करना: निवेश आपके घर की छत जैसा होता है। अगर छत में कोई छेद हो और आप उस पर ध्यान न दें तो बारिश के मौसम क्या होगा? इसका पता चलने पर क्या आप छेद बंद करवाने के लिए बरसात खत्म होने का इंतजार करेंगे या तुरंत उसे बंद करने का इंतजाम करेंगे? हमें निवेश पोर्टफोलियो के साथ भी वही करना चाहिए। गलती को तुरंत सुधारना ज़रूरी है। ऐसा न करने पर मुनाफे से हाथ धो सकते हैं। अपने पोर्टफोलियो की नियमित जांच करते रहें, अपना निवेश और लाभ सुरक्षित रखें। 

2. रिस्क प्रोफाइल में किसी बदलाव पर ध्यान न देना: अगर निवेशक लंबे समय तक अपने पोर्टफोलियो पर ध्यान नहीं देते, तो बड़े जोखिम में पड़ सकते हैं। निवेश की रिस्क प्रोफाइल बदलती रहती है। म्यूचुअल फंड भी अपने मेंडेट्स बदलकर दूसरी श्रेणी में चले जाते हैं। वे ओरिजनल रिस्क प्रोफाइल से बंध कर नहीं रहते। नेशनल पेंशन स्कीम भी निवेश नियमों में बदलाव करती रहती है। डेबिट फंड में लिक्विडिटी या क्रेडिट प्रोफाइल में किसी भी गड़बड़ पर ध्यान देना और निवेश की रिस्क प्रोफाइल में किसी भी बदलाव पर गौर करके सही कदम उठाना चाहिए।

3. निवेश आय पर कर की देनदारी बढ़ाना: अक्सर लोगों के पोर्टफोलियो में निवेश आय पर कर की देनदारी को अधिक बढ़ाने की गलती मिल जाती है। कई लोग निवेश विकल्प का चयन करते समय कर की देनदारी पर ध्यान नहीं देते, जिसके कारण उनका लाभ काफी कम हो जाता है। लोकप्रिय निवेश विकल्पों के साथ लागतों पर भी ध्यान दें। पारंपरिक बीमा योजनाएं भारी लागत वाली होती हैं, जो शुरुआती वर्षों के आपके प्रीमियम का एक हिस्सा हजम कर जाती हैं। पहले साल के प्रीमियम पर 70 से 90 प्रतिशत तक की और हर नवीकरण पर 15 से 20 प्रतिशत की लागत आ जाती है। साथ ही इन योजनाओं को सरेंडर करने पर भारी जुर्माना होता है, जो समय से पहले निकासी को मुश्किल बना देता है। किसी भी निवेश विकल्प का चुनाव करते समय निवेश राशि, ब्याज की आय और मैच्योरिटी की रकम पर लगनेवाले कर पर ध्यान देना और कम कर देनदारी वाले निवेश विकल्प चुनना चाहिए। कई स्मॉल स्कीमों में निवेशक की कर देनदारी नहीं होती है। ऐसे निवेश विकल्प ईईई स्टेटस के साथ आते हैं, इनमें निवेश, ब्याज आय और मैच्योरिटी की रकम तीनों पर कर में छूट मिलती है।

4. लिक्विडिटी पर ध्यान न देना: निवेश पोर्टफोलियो में लिक्विडिटी पर खास ध्यान देना चाहिए। अक्सर निवेशक लाभ और सुरक्षा के बारे में सावधान रहते हैं, पर लिक्विडिटी को भूल जाते हैं। पोर्टफोलियो में वित्तीय आकस्मिकता के लिए हमेशा पर्याप्त लिक्विडिटी रहनी चाहिए। हमें महामारी के समय को याद रखना चाहिए। आपके पास हमेशा कुछ राशि ऐसी जगह पर होनी चाहिए, जहां से उसे कभी भी निकाल सकें।

5. समय पर मुनाफा कमाने से चूकना: समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को जांच कर सही कदम न उठाते पर मुनाफे को गंवाने का खतरा रहता है। बाजार को टाइम करने, निवेश रोकने और दोबारा निवेश शुरू करने से आपके पोर्टफोलियो को नुकसान हो सकता है। इक्विटी में निवेश करते समय टार्गेट और स्टॉपलॉस रखना सही होता है। इससे निवेश पर जोखिम कम किया जा सकता है। गिरावट का अंदेशा होने पर बिकवाली करने वाले निवेशक को पछताना नहीं पड़ता। अगर बाजार ऊंचाई की ओर बढ़ता है, तो वह फिर से बाजार में पैसा लगा सकता है। बाजार में तेजी को पकड़ने के लिए लगातार निवेश करना एक सही फैसला है।

यह भी पढ़ें: मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान निफ़्टी ५० से बेहतर रिटर्न कैसे पाए?

Safe Investments in Today's Falling Market

How to pick best investment plan: निवेशकों को समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की जाँच करते रहना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो संभव है कि आप अपना मुनाफा गंवा दें। समय पर बाजार की खबर न रखने, निवेश रोक देने और निवेश को दोबारा शुरू करने से आपके पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंच सकता है। अक्सर निवेशक कुछ सामान्य गलतियां कर जाते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए कुछ सावधानियाँ जरूरी हैं। यहाँ ऐसे ही पाँच मुख्य सावधानियों के बारे में बता रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: ७ सुनहरे वित्तीय नियम

निवेश से जुड़ी पाँच सावधानियां

1. नियमित अंतराल पर निवेश पोर्टफोलियो की जाँच न करना: निवेश आपके घर की छत जैसा होता है। अगर छत में कोई छेद हो और आप उस पर ध्यान न दें तो बारिश के मौसम क्या होगा? इसका पता चलने पर क्या आप छेद बंद करवाने के लिए बरसात खत्म होने का इंतजार करेंगे या तुरंत उसे बंद करने का इंतजाम करेंगे? हमें निवेश पोर्टफोलियो के साथ भी वही करना चाहिए। गलती को तुरंत सुधारना ज़रूरी है। ऐसा न करने पर मुनाफे से हाथ धो सकते हैं। अपने पोर्टफोलियो की नियमित जांच करते रहें, अपना निवेश और लाभ सुरक्षित रखें। 

2. रिस्क प्रोफाइल में किसी बदलाव पर ध्यान न देना: अगर निवेशक लंबे समय तक अपने पोर्टफोलियो पर ध्यान नहीं देते, तो बड़े जोखिम में पड़ सकते हैं। निवेश की रिस्क प्रोफाइल बदलती रहती है। म्यूचुअल फंड भी अपने मेंडेट्स बदलकर दूसरी श्रेणी में चले जाते हैं। वे ओरिजनल रिस्क प्रोफाइल से बंध कर नहीं रहते। नेशनल पेंशन स्कीम भी निवेश नियमों में बदलाव करती रहती है। डेबिट फंड में लिक्विडिटी या क्रेडिट प्रोफाइल में किसी भी गड़बड़ पर ध्यान देना और निवेश की रिस्क प्रोफाइल में किसी भी बदलाव पर गौर करके सही कदम उठाना चाहिए।

3. निवेश आय पर कर की देनदारी बढ़ाना: अक्सर लोगों के पोर्टफोलियो में निवेश आय पर कर की देनदारी को अधिक बढ़ाने की गलती मिल जाती है। कई लोग निवेश विकल्प का चयन करते समय कर की देनदारी पर ध्यान नहीं देते, जिसके कारण उनका लाभ काफी कम हो जाता है। लोकप्रिय निवेश विकल्पों के साथ लागतों पर भी ध्यान दें। पारंपरिक बीमा योजनाएं भारी लागत वाली होती हैं, जो शुरुआती वर्षों के आपके प्रीमियम का एक हिस्सा हजम कर जाती हैं। पहले साल के प्रीमियम पर 70 से 90 प्रतिशत तक की और हर नवीकरण पर 15 से 20 प्रतिशत की लागत आ जाती है। साथ ही इन योजनाओं को सरेंडर करने पर भारी जुर्माना होता है, जो समय से पहले निकासी को मुश्किल बना देता है। किसी भी निवेश विकल्प का चुनाव करते समय निवेश राशि, ब्याज की आय और मैच्योरिटी की रकम पर लगनेवाले कर पर ध्यान देना और कम कर देनदारी वाले निवेश विकल्प चुनना चाहिए। कई स्मॉल स्कीमों में निवेशक की कर देनदारी नहीं होती है। ऐसे निवेश विकल्प ईईई स्टेटस के साथ आते हैं, इनमें निवेश, ब्याज आय और मैच्योरिटी की रकम तीनों पर कर में छूट मिलती है।

4. लिक्विडिटी पर ध्यान न देना: निवेश पोर्टफोलियो में लिक्विडिटी पर खास ध्यान देना चाहिए। अक्सर निवेशक लाभ और सुरक्षा के बारे में सावधान रहते हैं, पर लिक्विडिटी को भूल जाते हैं। पोर्टफोलियो में वित्तीय आकस्मिकता के लिए हमेशा पर्याप्त लिक्विडिटी रहनी चाहिए। हमें महामारी के समय को याद रखना चाहिए। आपके पास हमेशा कुछ राशि ऐसी जगह पर होनी चाहिए, जहां से उसे कभी भी निकाल सकें।

5. समय पर मुनाफा कमाने से चूकना: समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को जांच कर सही कदम न उठाते पर मुनाफे को गंवाने का खतरा रहता है। बाजार को टाइम करने, निवेश रोकने और दोबारा निवेश शुरू करने से आपके पोर्टफोलियो को नुकसान हो सकता है। इक्विटी में निवेश करते समय टार्गेट और स्टॉपलॉस रखना सही होता है। इससे निवेश पर जोखिम कम किया जा सकता है। गिरावट का अंदेशा होने पर बिकवाली करने वाले निवेशक को पछताना नहीं पड़ता। अगर बाजार ऊंचाई की ओर बढ़ता है, तो वह फिर से बाजार में पैसा लगा सकता है। बाजार में तेजी को पकड़ने के लिए लगातार निवेश करना एक सही फैसला है।

यह भी पढ़ें: मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान निफ़्टी ५० से बेहतर रिटर्न कैसे पाए?

Safe Investments in Today's Falling Market

Expert Article block example

संवादपत्र

संबंधित लेख