घर खरीदने से पहले आपके विचार करने के लिए 5 अहम सवाल

यहाँ उन सवालों की एक सूची दी जा रही है जिन पर आपको घर खरीदने का फ़ैसला लेने से पहले विचार करना चाहिए.

घर खरीदने से पहले आपके विचार करने के लिए 5 अहम सवाल

खरीदारी से जुड़े ऐसे फ़ैसलों में ट्रेड-ऑफ आम हैं जिनका इस्तेमाल कम होता है या जिनकी वैल्यू कम है. हालांकि, घर खरीदना इस पर बहुत निर्भर करता है कि आपकी ज़रूरतें और प्राथमिकताएं क्या हैं, और एक बार फ़ैसला करने के बाद इसको बदलने की गुंजाइश नहीं बचती है. प्रॉपर्टी खरीदने के लिए जितना पैसा चाहिए होता है और उसका एक स्थायी एसेट के तौर पर होना आपको फ़ैसला लेने से पहले कई ज़रूरी बातों को सोचने के लिए मजबूर कर देता है. 

यहां कुछ ऐसे सवाल दिए गए हैं, जिनकी ज़रूरत आपको घर खरीदने का फ़ैसला लेने से पहले पड़ेगी.

1. घर खरीदें या किराए पर लें - क्या बेहतर है?

आपको सबसे पहले इस सवाल पर विचार करना चाहिए - क्या किराए पर रहना घर खरीदने से बेहतर विकल्प है? अलग-अलग कैलकुलेटर मौजूद हैं जिनकी मदद से आप घर खरीदने और किराए पर रहने के बीच के अंतर को समझ सकते हैं. जो परिवार किसी जगह पर पांच साल या उससे ज़्यादा समय तक रहने के बारे में सोच रहे हैं, उनके लिए प्रॉपर्टी खरीदना किराए पर रहने से बेहतर विकल्प है. इसके फ़ायदों में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ना, अपना एसेट होना, टैक्स में फ़ायदे जैसी चीज़ें शामिल हैं. हालांकि, जो लोग कम समय के लिए किसी जगह पर रहने के बारे में सोच रहे हैं (जैसे, 5 साल से कम), घर किराए पर लेना उनके लिए बेहतर विकल्प है.

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2. रहने के लिए तैयार प्रॉपर्टी लें या वो प्रॉपर्टी लें जो अभी बन रही है?

इस सवाल का जवाब पाने के लिए आपको कई बातों पर गौर करना होगा. याद रखें, भले ही आपको नई प्रॉपर्टी में जाने की जल्दी हो, तब भी आपको अपना फ़ैसला सभी विकल्पों पर गौर करके ही लेना चाहिए. कीमत के हिसाब से सोचें, तो एक बन रही प्रॉपर्टी आपको ललचा सकती है क्योंकि उस पर बहुत से ऑफ़र भी दिए जाते हैं. RERA होने के बावजूद, प्रॉपर्टी बनके तैयार होने में या प्रॉपर्टी का पज़ेशन मिलने में लगने वाली देरी आपको परेशान कर सकती है, ख़ास तौर पर कोरोना जैसी महामारी के दौर में जहाँ मंदी भी अपना अलग असर डाल रही है. अगर आप शहर में बसने की सोच रहे हैं, पज़ेशन लेने की जल्दी में नहीं हैं, और घर खरीदने के खर्चों को कम करना चाहते हैं, तो एक बन रही प्रॉपर्टी आपके लिए अच्छी पंसद साबित हो सकती है. वहीँ दूसरी ओर, अगर आप कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं, या अगर आप जल्दी से अपने नए घर में जाना चाहते हैं, तो सबसे अच्छा विकल्प होगा एक ऐसा घर खरीदना जो पज़ेशन के लिए तैयार हो.

3. क्या कीमतें गिरने का इंतज़ार करने का फ़ायदा है?

रेज़िडेंशियल रियल एस्टेट की वैल्यू को देखते हुए, खरीदार अक्सर कीमतें गिरने का इंतज़ार करते हैं, और कीमतों में 1% तक की गिरावट से भी बहुत फ़र्क पड़ सकता है. कीमतें गिरने के लालच में पड़ना, कभी-कभी लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है. अन्य उत्पादों/सेवाओं की कीमतों के विपरीत, रियल एस्टेट की कीमतें कई बातों पर निर्भर करती हैं. किसी जगह की वैल्यू बदलने या घटने की संभावना कम ही होती है. इसी तरह, कीमतों में गिरावट केवल तभी संभव है जब डेवलपर्स अपनी बैलेंस शीट को बनाए रखने के लिए कीमतें घटाने को तैयार हों. जाने-माने डेवलपर्स के प्राइम लोकेशन में मौजूद प्रोजेक्ट पर कीमतों में बदलाव की संभावना कम होती है. इंडस्ट्री के विशेषज्ञ मानते हैं कि जो भी सुधार होना था, वह पिछले एक दशक में हो चुका है, और आगे इसमें कोई कटौती दिखने की संभावना नहीं है. इसलिए, कीमतों में बदलाव से पहले निर्णय लेना एक बेहतर विकल्प है, जिसके परिणामस्वरूप भविष्य में मांग बढ़ने के साथ-साथ आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू भी बढ़ती है.

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4. 'सुरक्षित' बजट कैसा होना चाहिए? क्या मुझे अपने ख़र्चों पर लगाम कसनी चाहिए?

चाहे महामारी से पहले या बाद कैसी भी परिस्थिति रही हो, आपको खरीदारी का फ़ैसला लेते समय एक सरल नियम का पालन करना होगा. लोन, प्रॉपर्टी वगैरह के लिए समान मासिक किस्तों (ईएमआई) का प्रतिशत आपकी आय के 35% से अधिक नहीं होना चाहिए. अगर आपके ख़र्च बढ़ते हैं, तो अनिश्चितता बढ़ सकती है, इसलिए समझदारी से फ़ैसला लेना और अपनी आय का 35% अपनी कुल ईएमआई के लिए निकालकर रखना ज़रूरी है. आपको इसमें डाउन पेमेंट को पूरा करने के लिए लिया गया लोन भी शामिल करना होगा. हालांकि, डाउन पेमेंट के लिए लोन लेना कोई फ़ायदे का सौदा नहीं है, लेकिन कभी-कभी आपके पास इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता. ऐसे मामलों में भी, टोटल रिपेमेंट आपकी आय के 35% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए.

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5. क्या अनिश्चितता के इस दौर में प्रॉपर्टी की तुलना में कहीं और निवेश करना एक बेहतर विकल्प होगा?

फाइनेंशियल प्रॉडक्ट और रियल एस्टेट दोनों निवेश के विपरीत छोर पर हैं, इसलिए दोनों के बीच में कोई समानता बिठाना मुश्किल है. हालांकि, अनिश्चित समय में एसेट एक्वीजीशन बहुत लुभावना विकल्प हो सकता है है क्योंकि शेयर बाज़ार इन परिस्थितियों में बहुत अस्थिर हो सकते हैं और फाइनेंशियल प्रॉडक्ट या तो आपको शानदार रिटर्न दे सकते हैं या आपको खस्ताहाल बनाकर छोड़ सकते हैं. हालांकि यह आपकी जोखिम लेने की क्षमता पर भी निर्भर हो सकता है, लेकिन फिर भी पैसे बचाकर एक ऐसी प्रॉपर्टी लेने में समझदारी होगी जिसके दाम बढ़ने की संभावना ज़्यादा हो. हालाँकि, लंबी अवधि (उदाहरण के लिए, 30 वर्ष) के लिए तुलना करने से कोई स्पष्ट तस्वीर तो नहीं मिलती, लेकिन अनिश्चितता और नकदी संकट के दौर में बहुत दूर की सोचना भी सही नहीं होगा. प्रॉपर्टी की ईएमआई भरने के लिए आपको मजबूरी में ज़्यादा पैसे बचाने पड़ते हैं, हालांकि फाइनेंशियल प्रॉडक्ट के मामले में ऐसा नहीं है जहाँ आपके फ़ैसले खर्चों की बाकी प्राथमिकताओं से प्रभावित हो सकते हैं. अपने होमटाउन या किसी बड़े शहर में घर खरीदना: इसमें आर्थिक रूप से क्या फ़ायदा है? इस लेख को पढ़ें जो आपको समझदारी से फ़ैसला करने में मदद करेगा?




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