Google Pay की मदद से क्रेडिट कार्ड के बिना खरीदारी करने के बारे में जानें

यहां बताया गया है कि आप Google Pay से जनरेट किए गए वर्चुअल टोकन का इस्तेमाल करके सुरक्षित रूप से किस तरह पेमेंट कर सकते हैं.

Google Pay की मदद से क्रेडिट कार्ड के बिना खरीदारी करने के बारे में जानें

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, भारत में मार्च 2020 में 3 बिलियन डिजिटल पेमेंट किए गए थे. हालांकि, अप्रैल में इन पेमेंट की संख्या घटकर 2.36 बिलियन रह गई, लॉकडाउन में ग्राहकों द्वारा खर्च में कटौती करना और ई-कॉमर्स कंपनियों का कुछ दिनों के लिए काम रोक देना इसकी ख़ास वजहें रहीं. 

देश में डिजिटल पेमेंट की वैल्यू पिछले पांच वर्षों में, 55% की प्रभावशाली सीएजीआर की दर से बढ़ी है. 

Google डिजिटल पेमेंट स्पेस के टॉप प्राइवेट प्लेयर्स में से एक है. Google ने अपना Google Pay ऐप निकाला, जो मुख्य रूप से यूपीआई सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया था, जिसमें Google Pay इस्तेमाल करने वाला कोई भी व्यक्ति जनरेट किए गए यूपीआई ​​आईडी का इस्तेमाल करके बैंक को सीधे पेमेंट कर सकता है. हालाँकि, इससे पहले Google Pay में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने का कोई तरीका नहीं था.

ज़्यादातर भारतीयों को अभी भी वेबसाइटों पर अपने क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स भरने में डर लगता है. यहां तक ​​कि उन्हें अपना क्रेडिट कार्ड किसी दुकानदार को देना भी खतरे से खाली नहीं लगता. बहुत से यूज़र्स के मन में इस बात का डर रहता है कि कहीं उनकी किसी जानकारी का कोई ग़लत इस्तेमाल न कर ले. खैर, Google इसके लिए एक आसान तरीका लेकर आया है जिसे पेमेंट टोकनाइज़ेशन कहा जाता है.

टोकनाइज़ेशन किस तरह काम करता है

क्रेडिट कार्ड नंबर और इससे जुड़ी बाकी जानकारी को संवेदनशील माना जाता है. अगर इसका दुरुपयोग किया जाता है, तो इससे उस व्यक्ति की जेब भी खाली हो सकती है जिसके नाम पर क्रेडिटकार्ड है. Google Pay आपके 16 अंकों के क्रेडिट कार्ड नंबर को एक वर्चुअल टोकन नंबर में बदलता है जिसका इस्तेमाल यूज़र पेमेंट करने के लिए कर सकता है.
पेमेंट टोकनाइज़ेशन से यूज़र को बहुत आसानी होगी क्योंकि उसे अपना क्रेडिट कार्ड हर जगह ले जाने की ज़रूरत नहीं होगी और उनका फोन ही पेमेंट मशीन की तरह से काम करेगा. इस तकनीक के माध्यम से यूज़र ऑनलाइन बिल पेमेंट या खरीदारी कर सकता है.

कॉन्टेक्टलैस पीओएस पर पेमेंट करना

कॉन्टेक्टलैस पॉइंट-ऑफ़-सेल के मामले में, आपका फ़ोन (अगर इसमें एनएफसी की सुविधा है) आपके क्रेडिट कार्ड के रूप में काम करता है. इसी तरह, ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान भी, जब Google Pay के माध्यम से पेमेंट करने का विकल्प चुना जाता है, तो यूज़र यूपीआई या यूज़र द्वारा जोड़े गए कार्ड का इस्तेमाल करके पेमेंट कर सकता है. यूज़र को एक ही Google Pay एकाउंट के साथ कई कार्ड जोड़ने की सुविधा भी रहती है.  

यूज़र के डेटा की सुरक्षा करना

डेटा प्रोटेक्शन का भी पूरा इंतज़ाम होता है, क्योंकि Google Pay द्वारा जनरेट पेमेंट टोकन के इस्तेमाल से कार्ड की जानकारी नहीं दिखती है. इसके अलावा, टोकन उस फोन पर ही काम करेगा जो क्रेडिट कार्ड से लिंक्ड है. अगर यूज़र ने नया फ़ोन लिया है तो उसे हरेक कार्ड को दोबारा कॉन्फ़िगर करना पड़ेगा. इससे यह पक्का हो जाएगा कि अगर ऐप की कोई कॉपी दूसरे किसी फ़ोन पर इस्तेमाल हो रही है तब भी हैकर्स आपकी जानकारी का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. कार्ड खो जाने के मामले में, यूज़र अपने Google खाते के ज़रिए कार्ड को हटा भी सकते हैं. इससे ग्राहक के डेटा की सुरक्षा भी होती है और डेटा के गलत इस्तेमाल या क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी की संभावना भी कम रहती है.

उपलब्धता

Google Pay के माध्यम से क्रेडिट कार्ड पेमेंट की सुविधा वर्तमान में सिर्फ़ एंड्रॉइड फोन पर उपलब्ध है. इसे आईओएस डिवाइस पर कब लॉन्च किया जाएगा, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. इस सेवा का इस्तेमाल सिर्फ़ एक्सिस बैंक और एसबीआई के वीज़ा कार्ड्स के लिए ही किया जा सकता है.

आगे के लिए ख़ास जानकारी

जहाँ एक ओर दुनिया कैश से पेमेंट के डिजिटल तरीकों की ओर बढ़ रही है, ऐसे में टोकनाइज़ेशन की सुविधा Google Pay की ओर से एक और महत्वपूर्ण कदम है. डिजिटल पेमेंट के इस तरीके का उद्देश्य है कि डेटा सुरक्षा के बारे में ग्राहकों की चिंताओं को दूर किया जाए और पेमेंट के डिजिटल तरीकों के ज़्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा मिले. वित्त वर्ष 2014 में भारत में डिजिटल पेमेंट की मात्रा 4055 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है और गूगल का यह नया कदम इस लक्ष्य को हासिल में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा. 

संबंधित लेख