टीडीएस को समझने के लिए आपको ये सारी बातें जाननी चाहिए

आप टीडीएस से परिचित होंगे, लेकिन यहां इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य दिए गए हैं जो आपको टीडीएस और इसकी संपूर्ण अवधारणा के बारे में बेहतर जानकारी देंगे।

टीडीएस को समझने के लिए आपको ये सारी बातें जाननी चाहिए

टीडीएस के बारे में याद रखने योग्य सात महत्वपूर्ण बातें

स्रोत पर कर कटौती (TDS) "जैसा आप कमाते हैं, वैसा भुगतान करें" की अवधारणा पर काम करता है। यह वेतन, ब्याज, कमीशन, किराया आदि जैसे कुछ भुगतानों पर लगाया जाने वाला आयकर का ही एक रूप है। भुगतान करने से पहले व्यक्ति टीडीएस काटता है। स्रोत पर कर काटने से कर चोरी कम होती है क्योंकि भुगतान किए जाने से पहले ही इसे काट लिया जाता है। आपको अपने विभिन्न लेनदेन के लिए, टीडीएस के विवरण के लिए एक टीडीएस प्रमाणपत्र मिलता है।

यहां इसकी बुनियादी जानकारी की एक वीडियो है, जिसमें बताया गया है कि टीडीएस और टीडीएस रिफंड कैसे काम करते हैं। 

टीडीएस के बारे में जानने योग्य सात बातें

टीडीएस एक व्यापक विषय है, और हम इससे संबंधित विभिन्न विषयों पर पूरे दिन बात कर सकते हैं। लेकिन सब कुछ आप के ऊपर डालने के बजाए, हमने अपने टीडीएस गाइड में यहां कुछ तथ्य एकत्र किए हैं जिन्हें आप पसंद करेंगे।

1. वेतन पर टीडीएस दर

वेतन पर लागू टीडीएस दरें व्यक्तिगत आयकर स्लैब दरों के समान होती हैं। यदि आप अभी तक 60 वर्ष के नहीं हैं और आपकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपए से कम है, तो टीडीएस देयता शून्य होगी। 2.5 से 5 लाख रुपए कमाने वालों को 5% टीडीएस की दर से भुगतान करना होगा। 

यदि आप 5 से 7.5 लाख रुपए कमाते हैं, तो आपके लिए टीडीएस दर 10% होगी और जो 7.5 से 10 लाख रुपए कमाते हैं, उनके लिए 15% की दर से स्रोत पर कर कटौती की जाएगी।

यदि आपकी आय 10 से 12.5 लाख रुपए है, तो 20% टीडीएस दर लागू होगी। 12.5 से 15 लाख रुपए कमाने वाले लोगों के लिए, टीडीएस की दर 25% तक बढ़ जाती है और 15 लाख की वार्षिक आय वाले लोगों के लिए, टीडीएस दर 30% हो जाती है।

टीडीएस की दरों को आसानी से समझने के लिए यहां एक टीडीएस चार्ट दिया गया है।

टीडीएस चार्ट

मौजूदा टीडीएस स्लैब पुराने की तुलना में अधिक व्यापक हो गया है। पिछले टीडीएस स्लैब के अनुसार, यदि आपकी आय 2,50,000 रुपए तक थी, तो टीडीएस की दर शून्य थी, 2,50,000 से 5,00,000 रुपए की आय वाले लोगों के लिए यह दर 5% थी, 5,00,000 से 10,00,000 रुपए की आय वाले लोगों के लिए यह दर 20% थी और यदि आपकी आय 10,00,000 रुपए से ज्यादा थी तो टीडीएस की दर 30% थी।

2. टीडीएस थ्रेशहोल्ड सीमा

थ्रेसहोल्ड सीमा वह भुगतान राशि है जिस तक आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार किसी टीडीएस की आवश्यकता नहीं है। यदि भुगतान निर्धारित सीमा से अधिक है तभी टीडीएस लागू होता है। उदाहरण के लिए, धारा 194J के अनुसार, यदि पेशेवर शुल्क 30,000 रुपए से कम है, तो कोई टीडीएस नहीं लगेगा। यानी 30,000 रुपए थ्रेशहोल्ड सीमा है। हालांकि, इस सीमा से अधिक होने पर पेशेवर शुल्क पर भी टीडीएस काट लिया जाएगा। 

3.  ब्याज का आवंटन

टीडीएस चालान फॉर्म में ब्याज भुगतान की एक शर्त है, लेकिन इस चालान के माध्यम से भुगतान किए गए ब्याज को ब्याज देयता के साथ समायोजित नहीं किया जाता है। जब आप चालान के संबंध में आईटीआर दाखिल कर रहे होते हैं, तो उसकी राशि से ब्याज आवंटित किया जाता है। आयकर विभाग इस आवंटित ब्याज का उपयोग किसी भी संभावित ब्याज देयता को संतुलित करने के लिए करता है। आपको याद रखना चाहिए कि चालान नहीं, बल्कि रिटर्न के आधार पर ब्याज भुगतान का निर्धारण होता है।

4. ब्याज की गणना

यदि टीडीएस जमा करने में देरी होती है तो ब्याज का भुगतान किया जाता है जिसकी गणना प्रत्येक महीने की देरी या उसके हिस्से के आधार पर की जाती है। उदाहरण के लिए, मान लें कि कर 27 मई की नियत तारीख को काटा गया था और 9 जून को जमा किया गया था। इसका मतलब है कि काटे गए टीडीएस का आंशिक रूप से मई और जून दोनों में उपयोग किया गया। इसलिए, दो महीने का ब्याज देय होगा। हालांकि, अगर 31 मई को कर डेबिट काटा गया था, तो ब्याज केवल एक महीने के लिए देय होगा। 

टीडीएस ब्याज गणना की व्याख्या करते हुए परफेक्ट टैक्स ऐंड अकाउंटिंग सॉल्यूशंस का एक वीडियो यहां दिया गया है।

5. भुगतान की विधि

टीडीएस चालान भरते समय आपको ड्रॉपडाउन सूची से भुगतान की विधि का वर्णन करना होगा। टीडीएस पर्ची में प्रत्येक लाइन रिकॉर्ड में भुगतान के प्रकार का यह खंड होता है, और आपको प्रत्येक अनुभाग के लिए अलग चालान नहीं करना पड़ता है।  

6. अधिशेष टीडीएस जमा

यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप अतिरिक्त टीडीएस जमा को संभाल सकते हैं:

आप उसी या अगले वित्तीय वर्ष में भविष्य की कटौती के खिलाफ पुराने चालान या टीडीएस पर्ची से अधिशेष मूल्य लागू कर सकते हैं।

आप टीडीएस समाधान विश्लेषण और सुधार सक्षम प्रणाली के पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं या रिफंड के लिए संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। हालांकि, यह एक बहुत लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है।

7. अग्रिम कर

जो वेतनभोगी हैं और टीडीएस के दायरे में आते हैं, उन्हें अग्रिम कर का भुगतान करने से छूट दी गई है। हालांकि, गैर-वेतनभोगी आय जैसे ब्याज से आय, पूंजीगत लाभ, किराया इत्यादि पर अग्रिम कर लगाया जाएगा। इसके अलावा, यदि स्रोत पर एकत्र किया गया आपका कर उस वर्ष के लिए देय करों से अधिक है, तो आपके लिए अग्रिम कर का भुगतान करना आवश्यक नहीं है।

निष्कर्ष

स्रोत पर कर कटौती एक बड़ा विषय है। यहां, हमने अपनी टीडीएस गाइड में सात आवश्यक बातों का उल्लेख किया है ताकि आप इसे बेहतर ढंग से समझ सकें। हालांकि, टीडीएस केवल इन्हीं सात बातों तक सीमित नहीं है। इसे और भी बेहतर ढंग से समझने के लिए आपको किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी। 

टीडीएस के बारे में याद रखने योग्य सात महत्वपूर्ण बातें

स्रोत पर कर कटौती (TDS) "जैसा आप कमाते हैं, वैसा भुगतान करें" की अवधारणा पर काम करता है। यह वेतन, ब्याज, कमीशन, किराया आदि जैसे कुछ भुगतानों पर लगाया जाने वाला आयकर का ही एक रूप है। भुगतान करने से पहले व्यक्ति टीडीएस काटता है। स्रोत पर कर काटने से कर चोरी कम होती है क्योंकि भुगतान किए जाने से पहले ही इसे काट लिया जाता है। आपको अपने विभिन्न लेनदेन के लिए, टीडीएस के विवरण के लिए एक टीडीएस प्रमाणपत्र मिलता है।

यहां इसकी बुनियादी जानकारी की एक वीडियो है, जिसमें बताया गया है कि टीडीएस और टीडीएस रिफंड कैसे काम करते हैं। 

टीडीएस के बारे में जानने योग्य सात बातें

टीडीएस एक व्यापक विषय है, और हम इससे संबंधित विभिन्न विषयों पर पूरे दिन बात कर सकते हैं। लेकिन सब कुछ आप के ऊपर डालने के बजाए, हमने अपने टीडीएस गाइड में यहां कुछ तथ्य एकत्र किए हैं जिन्हें आप पसंद करेंगे।

1. वेतन पर टीडीएस दर

वेतन पर लागू टीडीएस दरें व्यक्तिगत आयकर स्लैब दरों के समान होती हैं। यदि आप अभी तक 60 वर्ष के नहीं हैं और आपकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपए से कम है, तो टीडीएस देयता शून्य होगी। 2.5 से 5 लाख रुपए कमाने वालों को 5% टीडीएस की दर से भुगतान करना होगा। 

यदि आप 5 से 7.5 लाख रुपए कमाते हैं, तो आपके लिए टीडीएस दर 10% होगी और जो 7.5 से 10 लाख रुपए कमाते हैं, उनके लिए 15% की दर से स्रोत पर कर कटौती की जाएगी।

यदि आपकी आय 10 से 12.5 लाख रुपए है, तो 20% टीडीएस दर लागू होगी। 12.5 से 15 लाख रुपए कमाने वाले लोगों के लिए, टीडीएस की दर 25% तक बढ़ जाती है और 15 लाख की वार्षिक आय वाले लोगों के लिए, टीडीएस दर 30% हो जाती है।

टीडीएस की दरों को आसानी से समझने के लिए यहां एक टीडीएस चार्ट दिया गया है।

टीडीएस चार्ट

मौजूदा टीडीएस स्लैब पुराने की तुलना में अधिक व्यापक हो गया है। पिछले टीडीएस स्लैब के अनुसार, यदि आपकी आय 2,50,000 रुपए तक थी, तो टीडीएस की दर शून्य थी, 2,50,000 से 5,00,000 रुपए की आय वाले लोगों के लिए यह दर 5% थी, 5,00,000 से 10,00,000 रुपए की आय वाले लोगों के लिए यह दर 20% थी और यदि आपकी आय 10,00,000 रुपए से ज्यादा थी तो टीडीएस की दर 30% थी।

2. टीडीएस थ्रेशहोल्ड सीमा

थ्रेसहोल्ड सीमा वह भुगतान राशि है जिस तक आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार किसी टीडीएस की आवश्यकता नहीं है। यदि भुगतान निर्धारित सीमा से अधिक है तभी टीडीएस लागू होता है। उदाहरण के लिए, धारा 194J के अनुसार, यदि पेशेवर शुल्क 30,000 रुपए से कम है, तो कोई टीडीएस नहीं लगेगा। यानी 30,000 रुपए थ्रेशहोल्ड सीमा है। हालांकि, इस सीमा से अधिक होने पर पेशेवर शुल्क पर भी टीडीएस काट लिया जाएगा। 

3.  ब्याज का आवंटन

टीडीएस चालान फॉर्म में ब्याज भुगतान की एक शर्त है, लेकिन इस चालान के माध्यम से भुगतान किए गए ब्याज को ब्याज देयता के साथ समायोजित नहीं किया जाता है। जब आप चालान के संबंध में आईटीआर दाखिल कर रहे होते हैं, तो उसकी राशि से ब्याज आवंटित किया जाता है। आयकर विभाग इस आवंटित ब्याज का उपयोग किसी भी संभावित ब्याज देयता को संतुलित करने के लिए करता है। आपको याद रखना चाहिए कि चालान नहीं, बल्कि रिटर्न के आधार पर ब्याज भुगतान का निर्धारण होता है।

4. ब्याज की गणना

यदि टीडीएस जमा करने में देरी होती है तो ब्याज का भुगतान किया जाता है जिसकी गणना प्रत्येक महीने की देरी या उसके हिस्से के आधार पर की जाती है। उदाहरण के लिए, मान लें कि कर 27 मई की नियत तारीख को काटा गया था और 9 जून को जमा किया गया था। इसका मतलब है कि काटे गए टीडीएस का आंशिक रूप से मई और जून दोनों में उपयोग किया गया। इसलिए, दो महीने का ब्याज देय होगा। हालांकि, अगर 31 मई को कर डेबिट काटा गया था, तो ब्याज केवल एक महीने के लिए देय होगा। 

टीडीएस ब्याज गणना की व्याख्या करते हुए परफेक्ट टैक्स ऐंड अकाउंटिंग सॉल्यूशंस का एक वीडियो यहां दिया गया है।

5. भुगतान की विधि

टीडीएस चालान भरते समय आपको ड्रॉपडाउन सूची से भुगतान की विधि का वर्णन करना होगा। टीडीएस पर्ची में प्रत्येक लाइन रिकॉर्ड में भुगतान के प्रकार का यह खंड होता है, और आपको प्रत्येक अनुभाग के लिए अलग चालान नहीं करना पड़ता है।  

6. अधिशेष टीडीएस जमा

यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप अतिरिक्त टीडीएस जमा को संभाल सकते हैं:

आप उसी या अगले वित्तीय वर्ष में भविष्य की कटौती के खिलाफ पुराने चालान या टीडीएस पर्ची से अधिशेष मूल्य लागू कर सकते हैं।

आप टीडीएस समाधान विश्लेषण और सुधार सक्षम प्रणाली के पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं या रिफंड के लिए संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। हालांकि, यह एक बहुत लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है।

7. अग्रिम कर

जो वेतनभोगी हैं और टीडीएस के दायरे में आते हैं, उन्हें अग्रिम कर का भुगतान करने से छूट दी गई है। हालांकि, गैर-वेतनभोगी आय जैसे ब्याज से आय, पूंजीगत लाभ, किराया इत्यादि पर अग्रिम कर लगाया जाएगा। इसके अलावा, यदि स्रोत पर एकत्र किया गया आपका कर उस वर्ष के लिए देय करों से अधिक है, तो आपके लिए अग्रिम कर का भुगतान करना आवश्यक नहीं है।

निष्कर्ष

स्रोत पर कर कटौती एक बड़ा विषय है। यहां, हमने अपनी टीडीएस गाइड में सात आवश्यक बातों का उल्लेख किया है ताकि आप इसे बेहतर ढंग से समझ सकें। हालांकि, टीडीएस केवल इन्हीं सात बातों तक सीमित नहीं है। इसे और भी बेहतर ढंग से समझने के लिए आपको किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी। 

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