How to avoid online fraud: ऑनलाइन लेनदेन के समय रखें ध्यान

सहूलियत और नए चलन के अनुसार ऑनलाइन लेनदेन बढ़ा है और उसके साथ ही बढ़ी है वित्तीय धोखाधड़ी भी।

avoiding Online Fraud

How to avoid online fraud: पिछले दो सालों में ऑनलाइन लेनदेन की संख्या भारत में बहुत अधिक बढ़ गई है। सभी तरह की खरीदारी अब ऑनलाइन की जा रही है और आनेवाले त्यौहारों के मौसम में यह खरीदारी और भी बढ़ेगी। ऐसे में पाया जाता है कि कई बार लोगों को कई आकर्षक प्रस्ताव या फ़िशिंग ईमेल मिलते हैं और ग्राहक उसका शिकार बन जाते हैं। बिज़नेस के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार ऑनलाइन जालसाजी करनेवाले लोग ऑनलाइन विक्रेता बनकर कई तरह के लुभावने प्रस्ताव देकर ठगी करते हैं। इन सभी समस्याओं से बचने के लिए इस लेख में कुछ आसान उपाय बताए जा रहे हैं।

क्लिक करने से पहले सोचें 

यदि आपको अपने मेलबॉक्स में ऐसी मेल या सूचना या संदेश मिला है जो मुफ्त उपहारों का प्रस्ताव देता हो या लुभावने ऑफ़र देता हो तो सावधान हो जाइए। ये फ़िशिंग ईमेल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की कोशिश हो सकती है। अविश्वसनीय छूट या बहुत बड़ी मात्रा में कैशबैक के वादे से फ़ोन को हैक करने और साइबर धोखाधड़ी की जाती है। खरीदारी के जोश और मुफ्त उपहार बटोरने के लिए क्लिक करने से पहले एक बार सोचिए कि कहीं आप मुसीबत तो नहीं बुला रहे। ऑफर पर क्लिक करने से पहले वेबसाइट, विक्रेता, और प्रस्ताव की प्रामाणिकता की जाँच जरूर कर लें।

इसके लिए यूआरएल (URL) को एक बार जरूर देख लें और उसमें सुरक्षा स्थिति एचटीटीपीएस (HTTPS) पर अवश्य ध्यान दें। जिस लिंक पर आपको संदेह हो उसे क्लिक न करना पहली सावधानी होगी। लेकिन यदि आप लिंक सुरक्षित पाते हैं तो लिंक को क्लिक करने के बजाय पूरा यूआरएल टाइप करना बेहतर है।

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

ऑनलाइन लेनदेन के लिए अलग खाता 

यदि आप अपना सभी पैसा, पूरी बचत और आमदनी एक ही खाते में रखते हैं तो आप को और सावधानी बरतनी होगी। किसी भी ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले से आप अपनी पूरी कमाई खतरे में डाल सकते हैं। किसी भी एक फ़िशिंग ईमेल या ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले से आपकी पूरी रकम चुराई जा सकती है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए एक अलग खाता खोलें और इसमें सुरक्षा की कई परतें लगा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एयरटेल पेमेंट्स बैंक एक बहुत ही सुरक्षित सुविधा उपलब्ध कराता है। हमारे रोज़मर्रा के ऑनलाइन लेनदेन के लिए इसमें सुरक्षा की अतिरिक्त परत शामिल है। आपकी अनुमति के बगैर बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर नहीं किए जाते हैं। 

लेनदेन के लिए पासवर्ड या क्यूआर कोड का उपयोग 

डिजिटली भुगतान करना हमारे जीवन का आवश्यक अंग बन गया है। एक क्लिक या स्कैन के सहारे हम भुगतान चुटकी में निपटा सकते हैं। लेकिन यह अपने साथ अतिरिक्त समस्या और उससे जुड़े खतरे भी लेकर आता है। भुगतान के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए दिया जाता है। हो सकता है कि ये क्यूआर कोड सत्यापित न हो। क्यूआर कोड या यूपीआई कोड पर भुगतान करने से पहले उसे सत्यापित जरूर करें। उसके बाद ही भुगतान करें। क्यूआर कोड के द्वारा हैकिंग आदि का खतरा नहीं होता, लेकिन अकाउंट से पैसा निकाला जा सकता है।

अपने खर्च पर हमेशा ध्यान रखें 

अधिक खर्च का समय हो तो कई मौकों पर आप ऑनलाइन शॉपिंग या खाने के बिल आदि के लिए निरंतर ऑनलाइन भुगतान करते हैं। ऐसे में सारे भुगतान बैंक के खातों से किए जा रहे हों तो उन पर ध्यान रखते हुए आप अनाधिकृत भुगतान आसानी से ढूँढ़ सकते हैं। अपने तमाम खर्चों को आप लेनदेन के खाते और मुख्य बैंक खाते के आधार पर अलग-अलग कर सकते हैं। डिजिटल भुगतान के खाते में एक सीमित रकम रखें जिससे धोखाधड़ी के मामले में अधिक नुकसान टाला जा सकता है। अपने सभी खर्चों को सूचीबद्ध कर लें और साथ ही उन्हें भुगतान के आधार पर क्रमबद्ध कर लें ताकि उन पर बराबर नज़र रखी जा सके।

पिछले तीन सालों में 42% भारतीयों के साथ फ्रॉड 

जैसे-जैसे जीपे (Gpay ) फ़ोनपे (Phonepe) एवं अन्य ऐप के माध्यम से डिजिटल भुगतान की संख्या बढ़ रही है। उसी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। एक निजी कंपनी द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत में पिछले तीन वर्षों में लगभग 42% लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले हो चुके हैं। इसमें गंभीर मसला यह है कि इन सभी मामलों में 74% लोगों को पैसे वापस नहीं मिले हैं। 

अक्टूबर 2021 में किए गए लोकल सर्किल सर्वेक्षण के अनुसार 29% नागरिकों ने अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड के पिन अपने नजदीकी लोगों के साथ साझा किए। 4% नागरिकों ने पिन को अपने घरेलू और कार्यालय के कर्मचारियों को बताया। इसी सर्वेक्षण से यह भी तथ्य सामने आया कि 33% नागरिक अपने बैंक खातों, डेबिट या क्रेडिट कार्ड और एटीएम कार्ड के पासवर्ड भी कंप्यूटर पर स्टोर करके रखते हैं। आधार और पैन नंबर को भी मेल पर ही स्टोर किया जाता है। 11% उन लोगों का था जिन्होंने यह जानकारी अपनी मोबाइल फ़ोन के संपर्क में दर्ज कर रखी है। 

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

How to avoid online fraud: पिछले दो सालों में ऑनलाइन लेनदेन की संख्या भारत में बहुत अधिक बढ़ गई है। सभी तरह की खरीदारी अब ऑनलाइन की जा रही है और आनेवाले त्यौहारों के मौसम में यह खरीदारी और भी बढ़ेगी। ऐसे में पाया जाता है कि कई बार लोगों को कई आकर्षक प्रस्ताव या फ़िशिंग ईमेल मिलते हैं और ग्राहक उसका शिकार बन जाते हैं। बिज़नेस के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार ऑनलाइन जालसाजी करनेवाले लोग ऑनलाइन विक्रेता बनकर कई तरह के लुभावने प्रस्ताव देकर ठगी करते हैं। इन सभी समस्याओं से बचने के लिए इस लेख में कुछ आसान उपाय बताए जा रहे हैं।

क्लिक करने से पहले सोचें 

यदि आपको अपने मेलबॉक्स में ऐसी मेल या सूचना या संदेश मिला है जो मुफ्त उपहारों का प्रस्ताव देता हो या लुभावने ऑफ़र देता हो तो सावधान हो जाइए। ये फ़िशिंग ईमेल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की कोशिश हो सकती है। अविश्वसनीय छूट या बहुत बड़ी मात्रा में कैशबैक के वादे से फ़ोन को हैक करने और साइबर धोखाधड़ी की जाती है। खरीदारी के जोश और मुफ्त उपहार बटोरने के लिए क्लिक करने से पहले एक बार सोचिए कि कहीं आप मुसीबत तो नहीं बुला रहे। ऑफर पर क्लिक करने से पहले वेबसाइट, विक्रेता, और प्रस्ताव की प्रामाणिकता की जाँच जरूर कर लें।

इसके लिए यूआरएल (URL) को एक बार जरूर देख लें और उसमें सुरक्षा स्थिति एचटीटीपीएस (HTTPS) पर अवश्य ध्यान दें। जिस लिंक पर आपको संदेह हो उसे क्लिक न करना पहली सावधानी होगी। लेकिन यदि आप लिंक सुरक्षित पाते हैं तो लिंक को क्लिक करने के बजाय पूरा यूआरएल टाइप करना बेहतर है।

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ऑनलाइन लेनदेन के लिए अलग खाता 

यदि आप अपना सभी पैसा, पूरी बचत और आमदनी एक ही खाते में रखते हैं तो आप को और सावधानी बरतनी होगी। किसी भी ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले से आप अपनी पूरी कमाई खतरे में डाल सकते हैं। किसी भी एक फ़िशिंग ईमेल या ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले से आपकी पूरी रकम चुराई जा सकती है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए एक अलग खाता खोलें और इसमें सुरक्षा की कई परतें लगा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एयरटेल पेमेंट्स बैंक एक बहुत ही सुरक्षित सुविधा उपलब्ध कराता है। हमारे रोज़मर्रा के ऑनलाइन लेनदेन के लिए इसमें सुरक्षा की अतिरिक्त परत शामिल है। आपकी अनुमति के बगैर बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर नहीं किए जाते हैं। 

लेनदेन के लिए पासवर्ड या क्यूआर कोड का उपयोग 

डिजिटली भुगतान करना हमारे जीवन का आवश्यक अंग बन गया है। एक क्लिक या स्कैन के सहारे हम भुगतान चुटकी में निपटा सकते हैं। लेकिन यह अपने साथ अतिरिक्त समस्या और उससे जुड़े खतरे भी लेकर आता है। भुगतान के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए दिया जाता है। हो सकता है कि ये क्यूआर कोड सत्यापित न हो। क्यूआर कोड या यूपीआई कोड पर भुगतान करने से पहले उसे सत्यापित जरूर करें। उसके बाद ही भुगतान करें। क्यूआर कोड के द्वारा हैकिंग आदि का खतरा नहीं होता, लेकिन अकाउंट से पैसा निकाला जा सकता है।

अपने खर्च पर हमेशा ध्यान रखें 

अधिक खर्च का समय हो तो कई मौकों पर आप ऑनलाइन शॉपिंग या खाने के बिल आदि के लिए निरंतर ऑनलाइन भुगतान करते हैं। ऐसे में सारे भुगतान बैंक के खातों से किए जा रहे हों तो उन पर ध्यान रखते हुए आप अनाधिकृत भुगतान आसानी से ढूँढ़ सकते हैं। अपने तमाम खर्चों को आप लेनदेन के खाते और मुख्य बैंक खाते के आधार पर अलग-अलग कर सकते हैं। डिजिटल भुगतान के खाते में एक सीमित रकम रखें जिससे धोखाधड़ी के मामले में अधिक नुकसान टाला जा सकता है। अपने सभी खर्चों को सूचीबद्ध कर लें और साथ ही उन्हें भुगतान के आधार पर क्रमबद्ध कर लें ताकि उन पर बराबर नज़र रखी जा सके।

पिछले तीन सालों में 42% भारतीयों के साथ फ्रॉड 

जैसे-जैसे जीपे (Gpay ) फ़ोनपे (Phonepe) एवं अन्य ऐप के माध्यम से डिजिटल भुगतान की संख्या बढ़ रही है। उसी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। एक निजी कंपनी द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत में पिछले तीन वर्षों में लगभग 42% लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले हो चुके हैं। इसमें गंभीर मसला यह है कि इन सभी मामलों में 74% लोगों को पैसे वापस नहीं मिले हैं। 

अक्टूबर 2021 में किए गए लोकल सर्किल सर्वेक्षण के अनुसार 29% नागरिकों ने अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड के पिन अपने नजदीकी लोगों के साथ साझा किए। 4% नागरिकों ने पिन को अपने घरेलू और कार्यालय के कर्मचारियों को बताया। इसी सर्वेक्षण से यह भी तथ्य सामने आया कि 33% नागरिक अपने बैंक खातों, डेबिट या क्रेडिट कार्ड और एटीएम कार्ड के पासवर्ड भी कंप्यूटर पर स्टोर करके रखते हैं। आधार और पैन नंबर को भी मेल पर ही स्टोर किया जाता है। 11% उन लोगों का था जिन्होंने यह जानकारी अपनी मोबाइल फ़ोन के संपर्क में दर्ज कर रखी है। 

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