एक मज़बूत फाइनेंशियल प्लान कैसे बनाएं? | How to build a robust financial plan

अगर आपके पास एक शानदार फाइनेंशियल प्लान है तो आप अपने खर्चों को अच्छे से मैनेज कर सकते हैं, अपने निवेश से ज़्यादा पैसे बना सकते हैं और अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं.

एक मज़बूत फाइनेंशियल प्लान कैसे बनाएं

एक मजबूत फाइनेंशियल प्लान वह है जो आपको अच्छे समय के दौरान समृद्ध होने और मुश्किल वक्त से निपटने में मदद करे. यह आपकी फाइनेंशियल लाइफ की सभी चीज़ों पर विचार करता हो, कैशफ्लो से लेकर खर्चों तक, और टैक्स-सेविंग इन्वेस्टमेंट से लेकर डैट तक, और उन रणनीतियों को परिभाषित करता हो जो आपके फाइनेंशियल गोल्स को हासिल करने में आपकी सहायता करें. आपकी आय चाहे कितनी भी हो, अपनी ज़िंदगी के लिए एक मज़बूत फाइनेंशियल प्लान बनाने के लिए इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें.

लक्ष्य निर्धारित करना

यह एक मामूली औपचारिकता की तरह लगता है जब प्रतिद्वंद्वी फुटबॉल टीमों के कप्तान एक सिक्का उछालते हैं ताकि यह तय किया जा सके कि वे किस गोल पोस्ट के लिए शूट करेंगे. लेकिन सबसे ज़्यादा मायने यह रखता है कि आप मैच किस जगह पर खेल रहे हैं. फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में भी यही सच है. अगर आपके फाइनेंशियल लक्ष्य स्पष्ट हैं, तो आपको अपनी बचत, खर्च और रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा. आपको ऐसे लक्ष्य निर्धारित करने होंगे जिन्हें आप अपने सक्रिय जीवन के दौरान (और अंत तक) हासिल करना चाहते हैं. फिर आपको अपने लक्ष्य के लिए एक धनराशि भी जोड़नी होगी जो आप हासिल करना चाहते हैं और एक समय सीमा तय करनी होगी. फाइनेंशियल प्लानिंग के उद्देश्य बड़े होने के साथ-साथ हासिल किए जा सकने वाले भी होने चाहिए, ताकि आप उन्हें लगातार फाइनेंशियल अनुशासन के साथ प्राप्त कर सकें. 

लक्ष्य के लिए अपना रास्ता तैयार करें 

आपके लक्ष्य छोटी अवधि, मध्यम अवधि या लंबी अवधि के हो सकते हैं. कार खरीदना या छुट्टी के लिए विदेश जाना एक छोटी अवधि का लक्ष्य होगा, जबकि अपने बच्चों की हायर स्टडीज़ के लिए बचत करना एक मध्यम अवधि का लक्ष्य माना जा सकता है. वहीं दूसरी ओर, अपने रिटायरमेंट के लिए पैसे जोड़ना आपके जीवन का एक लंबी अवधि का लक्ष्य होना चाहिए. अपने लक्ष्यों को अलग-अलग समय सीमा में विभाजित करने से आपकी टू-डू लिस्ट ज़्यादा स्पष्ट होगी और आपको उन्हें हासिल करने के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी.

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प्लान बनाएं और बजट से जुड़े रहें 

आपको अपनी नियमित आय और खर्चों के आधार पर एक फाइनेंशियल बजट तैयार करना चाहिए. आप बजट में विभिन्न नियमित खर्चे, बचत, निवेश और लोन रीपेमेंट जोड़ सकते हैं, और यह पक्का करें कि यह सब आपकी आय के दायरे से बाहर न निकलें. एक सामान्य बजट नीचे दी गई टेबल की तरह दिख सकता है:

खर्च प्रतिशत 
बचत 20
हाउसिंग 20
यूटिलिटी बिल 5
खाना-पीना 7
आना-जाना 5
चिकित्सा/दवाएं 5
जीवन बीमा 4
शिक्षा 4
निजी 10
डैट 0
टैक्स 20

हालांकि, आप जहाँ रहते हैं वहाँ रहने की लागत के आधार पर वास्तविक प्रतिशत अलग हो सकता है.

निवेश के मूल मन्त्र 

यह स्पष्ट है कि आपकी आय का एक हिस्सा बचत और निवेश में जाना चाहिए. अपनी बचत और निवेश को हमेशा अलग-अलग एसेट कैटेगरी में रखें ताकि आपका जोखिम संतुलित रहे. अगर आप अपनी निश्चित-आय से बहुत ज़्यादा निवेश करते हैं, तो आप मार्किट ग्रोथ और महंगाई के साथ तालमेल बिठाने से चूक सकते हैं, जबकि इक्विटी में भारी निवेश से आपको बाज़ार के जोखिमों का खतरा बढ़ सकता है. नकदी का एक हिस्सा बचाकर रखना जैसे कि बचत खाते में, आपको किसी भी अप्रत्याशित आपात स्थिति या नकदी की कमी को पूरा करने में मददगार होगा. 

लोकप्रिय निवेश विकल्पों में फिक्स्ड डिपॉज़िट और पब्लिक प्रोविडेंट फंड जैसे सुरक्षित निवेश शामिल हैं, जो आपको आय की गारंटी देते हैं. वहीं दूसरी ओर, शेयर निवेश और इक्विटी म्युचुअल फंड बाज़ार में बदलाव पर निर्भर हैं और बाज़ार से जुड़े दो लोकप्रिय निवेश विकल्प हैं.

   

रिटायरमेंट प्लानिंग

एक मज़बूत रिटायरमेंट स्ट्रेटेजी के बिना क्या आपकी फाइनेंशियल प्लान पूरी होगी? लंबी अवधि के बचत विकल्पों को देखें जो एक अच्छी ब्याज दर प्रदान करते हैं ताकि कंपाउंडिंग की पावर से आपका छोटा और नियमित कॉन्ट्रिब्यूशन आपको एक मोटा पैसा बना कर दे. अपनी रिटायरमेंट के बाद की ज़रूरतों का आकलन करना भी बहुत ज़रूरी है. रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित जीवन जीने के लिए आपको कितने पैसों की ज़रूरत पड़ेगी, यह तय करने से पहले आपको अपनी जीवनशैली, देनदारियों, अल्टरनेटिव कैश इनफ्लो पर विचार करना चाहिए. 

जरूरी नहीं कि रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ आपकीफाइनेंशियल आज़ादी ही हो. एक सही जीवन बीमा पॉलिसी यह सुनिश्चित करती है कि आपके असामयिक निधन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में भी आपका परिवार आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहे. अपना, अपने परिवार, अपने स्वास्थ्य और अपने एसेट्स का बीमा करवाना फाइनेंशियल प्लानिंग प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए.

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टैक्स प्लानिंग

जैसे-जैसे आपकी आय बढ़ेगी, वैसे-वैसे आपकी टैक्स देनदारी भी बढ़ेगी. आपको पता होना चाहिए कि अपनी तनख्वाह से हुई आय को समझदारी से निवेश करके पैसे कैसे बचाएं. ऐसे कई टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स हैं जिनका इस्तेमाल आप क्लेम डिडक्शन और अपनी टैक्स देनदारी को कम करने के लिए कर सकते हैं. आपको किसी टैक्स एक्सपर्ट से परामर्श लेना चाहिए या अपनी टैक्स प्लानिंग के लिए टैक्स के लाभों को अच्छी तरह समझना चाहिए. उदाहरण के लिए, आप आयकर अधिनियम की धारा 54ईसी के तहत 50 लाख रुपये तक के नोटिफाइड बॉन्ड में रिइन्वेस्टमेंट करके घर या ज़मीन की बिक्री पर कैपिटल गेंस पर टैक्स बचा सकते हैं.

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डैट को कैसे मैनेज करें और इमरजेंसी में क्या करें

अधिक ब्याज वाले लोन धीरे-धीरे आपकी फाइनेंशियल वर्थ को कम कर सकते हैं, जबकि इमरजेंसी की स्थिति एक झटके में आपकी जेब खाली कर सकती है. दोनों ही स्थितियों से निबटने के लिए एक मज़बूत प्लानिंग के साथ तैयार रहें. अगर आपके बजट में बहुत बड़ा डैट है, तो सबसे पहले उसे घटाने पर ध्यान दें. इसी तरह, नौकरी छूटने या स्वास्थ्य संबंधी समस्या जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक निश्चित धनराशि अलग से सुरक्षित रखें. पक्का करें कि आपकी आर्थिक स्थिति पर इन चीज़ों का कोई बुरा असर न हो. 

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अपनी आय को मैनेज करें

जहाँ एक ओर आप खर्चों को मैनेज करने में ज़्यादा बिज़ी हो सकते हैं, आपको किसी पार्ट-टाइम जॉब के ज़रिए अपनी आय को बढ़ाने का भी लक्ष्य रखना चाहिए. अपने बिज़नस का विस्तार करने या अपनी टेक-होम सैलरी को बढ़ाने के अलावा, आप आय के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर सकते हैं जैसे प्रॉपर्टी को किराये पर देने से होने वाली आय. आपके रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी के लिए, अतिरिक्त आय का एक स्थिर स्रोत काम आ सकता है. क्या आपके कोई शौक हैं? इन्हें काम के तौर पर करके अपनी कमाई में बदलने का तरीका जानें .

अपने फाइनेंशियल जीवन के सभी पहलुओं पर ध्यान देने से आपको ज़्यादा पैसा बचाने, अपने निवेश से ज़्यादा कमाने और रिटायरमेंट के बाद ज़्यादा सुरक्षित ज़िंदगी जीने में मदद मिलती है. अगर आपको कभी भी किसी ख़ास मदद की ज़रूरत महसूस हो, तो किसी फाइनेंशियल प्लानर या सलाहकार से बात करें जो आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग में ज़्यादा अनुशासन और सही तरीका जोड़ सके. फाइनेंशियल सलाहकार की मदद लें या नहीं: इससे क्या फर्क पड़ेगा?

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