भारत के बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार से निवेशक कैसे लाभ उठा सकते हैं? | How can investors benefit from India’s growing forex reserves

भारत के बढ़ते विदेशी भंडार के साथ निवेश और डायवर्सिफिकेशन के नए रास्ते और साधन तलाशें.

भारत के बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार

 

2020 की एक प्रमुख घटना केवल COVID-19 नहीं था. महामारी से पैदा हुए कहर के बीच, एक ऐसी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण घटना भी घटी जिस पर लोगों का ज़्यादा ध्यान नहीं गया. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने रूस को पीछे छोड़ दिया, जिसने चीन, जापान और स्विट्ज़रलैंड के बाद दुनिया में देश की रैंक को चौथे स्थान पर पहुंचा दिया. 

यह विश्वास करना कठिन लग सकता है, लेकिन यह सच है. भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने 560.63 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छू लिया. बेशक यह एक सराहनीय उपलब्धि थी क्योंकि 2013 के बाद से विदेशी मुद्रा भंडार 275 अरब डॉलर से दोगुना हो गया था. 

भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या अर्थ है

भारत में विदेशी मुद्रा में वृद्धि के साथ, भारतीय निवेशकों के लिए तस्वीर बदलती दिख रही है. यहां बताया गया है कि निवेशक भारत के बढ़ते विदेशी भंडार से कैसे लाभ उठा सकते हैं.

1. बढ़ता बाज़ार

अर्थव्यवस्था में कोरोना के चलते मंदी के बावजूद, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है. बढ़ते घरेलू मध्यम वर्ग और बढ़ती युवा और कामकाजी आबादी ने बढ़ते उपभोक्ता बाजार में निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है. 

एक अन्य प्रमुख कारण देश की सामरिक भौगोलिक स्थिति और बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार के साथ सटी इसकी सीमाएं हैं. यह भारत को इन अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ व्यापार करने के लिए एक आदर्श प्रवेशद्वार बनाता है क्योंकि यह स्वचालित रूप से व्यापार की पहुंच को बढ़ाता है.

सलाह: भारत के टियर 2 और टियर 3 शहरों में उभरते बाज़ारों में इंफ़्रा प्रोजेक्ट्स में निवेश करने पर विचार करें. 

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2. व्यापार करने में आसानी

2015 और 2020 के बीच, भारत ने अपनी 'डूइंग बिजनेस रिपोर्ट्स' में विश्व बैंक द्वारा तय किए गए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पैरामीटर पर लगभग 79 जगहों को पीछे छोड़ दिया. मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारत में कारोबार करना आसान बनाकर निवेशकों के डर को दूर करने पर ज़्यादा ध्यान किया है. 

राज्य सरकारें भी अपने-अपने क्षेत्रों में घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तैयार करती रही हैं. पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है. 

सलाह: टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े सुधार के साथ, भारतीय निवेशक टेलीकम्यूनिकेशन्स के क्षेत्र में भी अवसर तलाशने की मंशा जता सकते हैं. 

3. अच्छी तरह से मैनेज किए गए पब्लिक फाइनेंसेज़

राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम, 2003 ने सरकारी ऋण और राजकोषीय घाटे पर कुछ सीमाएं लगाईं. इसने यह भी सुनिश्चित किया कि सरकार का आचरण बड़े पैमाने पर विवेकपूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह बना रहे. 

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने के साथ, इसने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए एकदम सही वातावरण तैयार किया है क्योंकि बाहर से होने वाली समस्याएँ अपने न्यूनतम स्तर पर हैं. 

सलाह: ऐसे निवेश साधनों की तलाश करनी चाहिए जो डाइवर्स हैं और यील्ड देते हैं जिससे कैपिटल इनफ्लो में ज़्यादा उतार-चढ़ाव होता है. 

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4. एक मज़बूत और शानदार फाइनेंशियल सिस्टम

भारतीय रिजर्व बैंक ने उभरते मार्किट सेंट्रल बैंकों के साथ मिलकर देश में एक संपन्न और विशिष्ट रूप से समृद्ध पेमेंट इकोसिस्टम की सफलतापूर्वक नींव रखी है. कई गैर-बैंकिंग पार्टनरों के मार्किट में उतरने और देश के फाइनेंशियल सिस्टम को ज़्यादा मज़बूत और आसान बनाने के साथ इस सीमा का विस्तार हुआ है. 

वायरस के प्रकोप के दौरान भी, देश के वित्तीय संस्थान सामान्य रूप से कार्य करते रहे. इससे अपने-आप ही निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, विशेष रूप से स्थानीय शेयर बाजार में.

सलाह: 2020 में ही विदेशी निवेशकों द्वारा 6.47 बिलियन डॉलर की शेयर खरीद के साथ, अलग-अलग उद्योगों के शेयरों की कीमतें भी बढ़ी हैं. इसलिए, निवेशकों को बहकना नहीं चाहिए और इसके बजाय अच्छे मूल्यांकन वाले शेयर चुनकर उनमें बने रहना चाहिए.

5. एक मज़बूत इन्फ्रास्ट्रक्चरल बेस

परंपरागत रूप से एक मजबूत और विविध विनिर्माण आधार, भारत ने पीपीपी मॉडल को सफलतापूर्वक और व्यवस्थित रूप से शुरू किया है, जिससे उच्च मांग वाले बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता वाली सार्वजनिक उपयोगिताओं और सेवाओं के वितरण को प्राथमिकता दी जा रही है। 

इसके अलावा, भारत राजनीतिक रूप से स्थिर देश बना हुआ है. भौगोलिक क्षेत्र के भीतर सौहार्दपूर्ण संबंधों के साथ, भारत ने ग्लोबल स्टार्ट-अप्स के लिए एक शानदार प्लेटफार्म देकर विश्व के सामने अपना नाम ऊँचा किया है. इसने सोशल एसेट्स बनाकर एफ़ीशिएन्सी बढ़ाई है, विशेष रूप स्थानीय अर्थव्यवस्था में कैपिटल इनफ्लो के साथ. 

सलाह: एएए-रेटेड कॉरपोरेट डॉलर बॉन्ड में निवेश करने पर विचार करें जो सॉवरेन क्रेडिट की तुलना में बेहतर रिटर्न प्रदान कर सकते हैं. 

6. विनिमय दर नीति और विदेशी मुद्रा भंडार

देश में पेमेंट और विनिमय व्यवस्था के प्रगतिशील उदारीकरण ने बाजार को और अधिक खुला बना दिया है. बाज़ार की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे सटीक और बहुत कम अस्थिर होने वाली विनिमय दर नीतियों में से एक के साथ, भारत समय पर मुनाफे का पेमेंट करने और पोर्टफोलियो की सुरक्षा की गारंटी देता है. 

विदेशी मुद्राओं का बढ़ता इनफ्लो, भारत की बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स को मैनेज करने की क्षमता में विश्वास पैदा करता है. 

सलाह: अपने सोने के निवेश को बढ़ाएं और अधिक डॉलर खरीद कर इसे डाइवर्सिफाई करें; यह सॉवरेन क्रेडिट की तुलना में बेहतर रिटर्न की पेशकश करेगा. 

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और आखिर में

जब देश के हिसाब से विदेशी मुद्रा भंडार की बात आती है, तो भारत को स्पष्ट लाभ हासिल है. विदेशी मुद्रा भंडार के इतना बढ़ जाने ने, निवेशकों की झिझक को दूर करने में ब्रह्मास्त्र का काम किया है. इसने एक सकारात्मक भावना विकसित की है कि देश में अपने विदेशी ऋण दायित्व और विदेशी मुद्रा की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है. 

यह उपलब्धि बाहरी एसेट्स द्वारा घरेलू मुद्रा को समर्थन देने को भी उजागर करती है. इससे यह पक्का होता है कि भारत के पास राष्ट्रीय आपदाओं और किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त भंडार है. आरबीआई द्वारा कुशल प्रबंधन के लिए धन्यवाद, बढ़ती विदेशी मुद्रा से भारतीय निवेशकों को बेशक लाभ होगा. भारत में बड़ी राशि कैसे ट्रांसफर करें?

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