TomorrowMakers

शिक्षा की लागत, विशेष रूप से उच्च शिक्षा की, दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। उदाहरण के तौर पर अप्रैल 2016 में आईआईटी में स्नातक शिक्षा के लिए ट्यूशन फीस 90,000 रुपये प्रतिवर्ष से बढकर 2 लाख रुपये प्रतिवर्ष हो गई।

Education Loan

शिक्षा की लागत, विशेष रूप से उच्च शिक्षा की, दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। उदाहरण के तौर पर अप्रैल 2016 में आईआईटी में स्नातक शिक्षा के लिए ट्यूशन फीस 90,000 रुपये प्रतिवर्ष से बढकर 2 लाख रुपये प्रतिवर्ष हो गई। इसी प्रकार भारत में आज एक मेडिकल, इंजिनियरिंग या मैनेजमेंट कोर्स की लागतें 10 लाख से 20 लाख के बीच हैं, जबकि इन्हीं कोर्सों के लिए विदेशों में लागतें 50 लाख तक हैं।
कोई भी उदाहरण हो, एक बच्चे की शिक्षा का खर्च स्वयं उठाना सबसे अच्छा विकल्प है। लेकिन कई बार व्यक्ति सभी खर्चों को पूरा नहीं कर पाता। शिक्षा के लिए ऋण लेना व्यक्ति की सहायता करता है क्योंकि इससे खर्च की भरपाई की जा सकती है। लेकिन जब आपका बच्चा शिक्षा के लिए विभिन्न संस्थानों में फाॅर्म भर रहा हो और परीक्षाएं दे रहा हो तभी से लोन के लिए पूछताछ शुरू करनी चाहिए। अधिकतर संस्थान विद्यार्थियों को प्रवेश देने से पहले परीक्षाएं लेते हैं जिन्हें विद्यार्थियों द्वारा क्लीयर करना होता है।


खोजना शुरू करें: व्यक्ति न केवल बैंकों से शिक्षा के लिए लोन ले सकता है बल्कि अन्य सक्षम संस्थाओं से भी लोन ले सकता है। इसके अलावा उनके पास कोर्सों और संस्थानों की एप्रूवड सूची होती है जिससे उचित नियम एवं शर्तों पर आवेदन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढाने में सहायता मिलती है। इससे ऋणददाताओं द्वारा संस्थानों की गहन जांच करने का अवसर भी मिल जाता है।


विचार करने योग्य कारक: शिक्षा के लिए लोन लेते समय व्यक्ति को प्रक्रिया शुल्क, और मार्जिन राशि का भुगतान करना पड़ता है व एक उचित आनुषंगिक सिक्युरिटी प्रदान करनी होती है।
लेकिन, ऐसे कोर्स या संस्थाएं हैं जिनके लिए बैंक शुल्क में छूट दे सकते हैं, और कोई मार्जिन राशि नहीं लेते या अनुषांगिक सिक्युरिटी नहीं लेते। ऋणदाता लोन प्रदान करते समय अपनी तरफ से मुख्य रूप से इन चार चीजों पर करते हैं-विद्यार्थी का शैक्षणिक प्रदर्शन, युनिवर्सिटी और कोर्स, प्रदान की गई अनुषांगिक सिक्युरिटी और सह-उधार लेने वाले की प्रोफाइल।

अधिकतर उधारकर्ता ब्याज की परिवर्तनीय दर प्रदान करते हैं। वास्तविक ब्याज दर आगे विभिन्न मानकों पर निर्भर करती है जैसे कोर्स का प्रकार, संस्थान, विद्यार्थी का शैक्षणिक प्रदर्शन, आनषांगिक सिक्युरिटी, क्रेडिट स्कोर और वह देश जहां अध्ययन किया जाएगा।

 
लोन वापिस चुकाने के विकल्प: एक शैक्षिक लोन को वापिस चुकाने के विकल्प लोन के अन्य प्रकारों से भिन्न होते हैं। ईएमआई को तुरंत चुकाने की जरूरत नहीं होती क्योंकि इसके लिए विलम्ब काल होता है, अर्थात वह अवधि जिसके दौरान ईएमआई का भुगतान करने की जरूरत। यह अवधि कोर्स की अवधि के बराबर होती है। इस अवधि के दौरान केवल साधारण ब्याज चुकाना होता है। वास्तविक ईएमआई कोर्स के बाद शुरू होती हैं। त्नइपुनमण्बवउ के संस्थापक एवं सीईओ का कहना है, ”प्रत्येक लोन की एक अलग ग्रेस अवधि होती है। व्यक्ति नौकरी मिलते ही तुरंत लोन की राशि को वापिस लौटाना शुरू नहीं कर सकता। एक बैंक लोन देने के बाद प्रत्यक वर्ष के अंत में ब्याज लागाना शुरू करता है या यह एक सेमेस्टर भी हो सकता है। इससे ऋण का बोझ बढ़ जाता है। इसलिए, यदि संभव होता है तो कुछ ब्याज अध्ययन के दौरान भी चुकाया जा सकता है ताकि ऋण का बोझ कम हो सके।“

कितनी राशि उधार ली जा सकती है: एक शैक्षिक लोन की अधिकतम राशि भारतीय बैंक संघ द्वारा निर्धारित की जाती है, जो कि भारत में पढ़ रहे विद्यार्थी के लिए 10 लाख रुपये और विदेश में पढ़ने वाले विद्यार्थी के लिए 20 लाख रुपये है। लेकिन यह बैंकों और अन्य ऋणदाताओं पर निर्भर है कि वे कोर्स और संस्था के आधार पर कितनी राशि निर्धारित करते हैं। मुख्य संस्थानों द्वारा प्रदान किए जाने वाले कोर्सों के लिए ऋणदाता अन्य काॅलिजों की अपेक्षा अधिक राशि उधार देते हैं।
गारंटी और अनुषांगिक सिक्युरिटी: 4 लाख रुपये तक के शैक्षिक लोन पर अनुषांगिक सिक्युरिटी की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन लोन का सह-ऋण प्राप्तकर्ता होना चाहिए जो विद्यार्थी का अभिभावक हो सकता है। अधिक राशि के लिए, जैसे 4 लाख और 7.5 लाख के लिए, सह-ऋण प्राप्तकर्ता के अतिरिक्त ऋणदाता किसी तीसरे पक्ष की गारंटी भी मांग सकते हैं। 7.5 लाख रुपये से अधिक के लोन के लिए बैंक सामान्यतः समान कीमत की धरोहर सिक्युरिटी मांगते हैं। जो कि सम्पत्ति के कागजात, डाकघर की बचतें, जीवन बीमा पाॅलिसी, शेयर या म्युचुअल फंड, और बैंक जमा, आदि हो सकते हैं।
लेकिन अनुषांगिक सिक्युरिटी की आवश्यकता कई मामलों में हो सकती है। हो सकता है कि कोर्स और संस्थान के आधार पर ऋणदाता अनुषांगिक सिक्युरिटी न मांगें।
मार्जिन राशि : कुछ उदाहरणों में आपसे मार्जिन राशि भी मांगी जा सकती है (4 लाख से अधिक के लोन के लिए) जो कि भारत में कोर्स के लिए ऋण की राशि का 5 प्रतिशत हो सकती है और विदेश में अध्ययन के लिए 15 प्रतिशत तक हो सकती है। कुछ बैंकों के मामले में मार्जिन राशि की कोई आवश्यकता नहीं होती क्योंकि वे विद्यार्थी की फीस का 100 प्रतिशत देने के लिए तैयार हो सकते हैं।


सावधानी : सिंह सुझाव देते हैं, ”आपके ऋण की स्थिति जो भी हो, आपको यह जानने की जरूरत है कि आप पर बैंक का कितना कर्ज है। प्रत्येक लोन की ब्याज दर और उसे वापिस करने के नियम भिन्न होते हैं। एक बार यह पता लगने पर कि आपको कितनी राशि को वापिस लौटाना है, आप उसे लौटाने की योजना बना सकते हैं।“
शैक्षिक लोन का सबसे महत्वपूर्ण भाग यह होता है कि इसके ब्याज का भुगतान कोर्स के दौरान निरंतर करना पड़ता है। यदि इसमें चूक होती है तो ब्याज इकट्ठा होता रहता है। अभिभावक ब्याज का भुगतान कर सकते हैं और आयकर अधिनियम 1961 के सेक्शन 80 ई के अंतर्गत इस प्रकार के ब्याज पर कर में भी छूट मिलती है। च्ंपेंइं्रंतण्बवउ के सह-संस्थापक एवं सीईओ नवीन कुकरेजा का कहना है, ”शिक्षा के लिए लोन पर ब्याज की गणना आपको लोन दिए जाने के समय से ही की जाती है। लेकिन यह राशि विलम्बकाल के अंत तक जुड़ती रहती है। जब आप ब्याज का भुगतान शुरू करते हैं तभी से कर लाभ प्राप्त करना शुरू कर सकते हैं।“
इसके अतिरिक्त, ब्याज दर पर 1 प्रतिशत की छूट भी मिल सकती है यदि साधारण ब्याज नियमित रूप से अदा किया जाता है।

इसके अलावा अगर साधारण ब्याज का भुगतान नियमित रूप से किया जाता है तो ब्याज दर पर 1 प्रतिशत की छूट दी जा सकती है। विलम्ब अवधि के समाप्त होने के बाद और विद्यार्थी द्वारा कमाना शुरू करने के बाद वह अपनी ईएमआई बैंक में जमा करता है। कर में छूट प्राप्त करने के लिए ब्याज की राशि पर कोई सीमा नहीं है आय से इस प्रकार की कटौती आठ साल तक प्राप्त की जा सकती है। लेकिन मूलधन के भुगतान पर करों में कोई छूट नहीं दी जाती।
सिंह चेतावनी देते हैं, ”ये छूट एक ऐसे व्यक्ति द्वारा प्राप्त की जा सकती हैं जिसके नाम लोन लिया गया है। अगर आपके माता पिता, जीवन साथी या भाई-बहन ने आपकी शिक्षा के लिए लोन लिया है तो आपको करों में कोई लाभ नहीं मिलेगा।“

क्या करें: बैंक से लोन की अवधि और ईएमआई के बारे में जानकारी हांसिल करें जिन्हें कोर्स समाप्त होने के बाद भरने की जरूरत होती है। आदर्शतः ईएमआई घर में आने वाले वेतन के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इस प्रकार शैक्षिक लोन न केवल ट्यूशन फीस को बल्कि कोर्स पर आने वाली सम्पूर्ण लागत को कवर करता है। कुकरेजा सुझाव देते हैं, “सुनिश्चित करें कि लोन की कुल राशि में ट्यूशन फीस, जीवन के खर्चे और अतिरिक्त खर्च जैसे यात्रा का खर्च, उपकरण, किताबें आदि खरीदने का खर्च।“

निष्कर्
लोन के विरुध बीमा सुरक्षा आवश्यक है, उचित होगा शुद्ध सावधि बीमा योजना हो। सुनिश्चित करें कि ब्याज और मूलधन का भुगतान समय पर हो ताकि साफ क्रेडिट स्कोर को सुनिश्चित किया जा सके। याद रखें, यह विद्यार्थी का पहला लोन होता है और एक अच्छा क्रेडिट इतिहास भविष्य में अन्य लोन लेने में उसकी सहायता करेगा।
 

स्रोत: इकनॉमिक टाइम्स

संबंधित लेख