How I managed my finances after my child was born

बच्चे के भविष्य के लिए अपने खर्चों का सही प्रबंधन करना चाहते हैं तो लेख में बताई बातों पर ध्यान दें।

बच्चे के खर्चों का प्रबंधन: एक मां का दृष्टिकोण

जिस दिन मुझे पता चला कि मैं मां बनने वाली हूँ उस दिन खुशी और चिंता के साथ मुझे थोड़ा डर भी था। यह डर हर माता-पिता को होता है- बच्चे की सही परवरिश न कर पाने का डर। बच्चे की परवरिश के लिए पैसा बहुत ज़रूरी है।क्या मेरी आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर है कि मैं बच्चे को बेहतर भविष्य दे सकूं? 

मैंने बच्चों की सही परवरिश के बारे में काफी कुछ पढ़ा और मुझे समझ आया कि इसके लिए कितने पैसे की ज़रूरत होगी- साथ ही यह भी पता चला कि अभिभावक होने के नाते 

पैसे का समझदारी से प्रबंधन कैसे करना है।टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बच्चे के गर्भ में आने से लेकर उसके कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने तक 67.4 लाख रूपये खर्च हो जाते हैं! 

तो अब आपको समझदारी से पैसे के इस्तेमाल के बारे में सोचना होगा। एक मां के तौर पर मेरे बच्चे के बड़े होने के साथ-साथ मैं समझदार होती गई लेकिन इस मामले में मैंने पहले से भी काफी तैयारी की थी। मैं हमेशा अनुभवी माताओं और दादीयों से सलाह लेती थी।

मैंने इस विषय से जुड़े लेख पढ़े और सुझावों पर ध्यान दिया। इन सबके आधार पर मैंने निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले:

मैंने अपने बजट और बिना बजट वाले खर्चों का अंदाज़ लगाया। बजट वाले खर्चों में स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च सबसे ज़रूरी है।स्वास्थ्य बीमा लेना बहुत ज़रूरी है क्योंकि छोटे या नवजात बच्चों के बीमार होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की काफी संभावना रहती है।मेरा एक दोस्त दवाईयों का डिस्ट्रीब्यूटर था इसलिए मुझे दवाईयां सस्ते दामों पर मिल गई।आप इंटरनेट के ज़रिए दवाईयों के ऑनलाइन स्टोर और बाज़ार की दुकानों के बीच कीमतों के अंतर का पता कर सकते हैं। 

शिक्षा का खर्च:  जब बच्चा स्कूल जाना शुरू करेगा तो उसकी शिक्षा का खर्च शुरू हो जाएगा।मैंने बीमा की एंडाउमन्ट और मनी बैक योजनाओं में निवेश किया जिससे उन योजनाओं के पूरा होने पर मिले पैसे से बच्चे की शिक्षा से जुड़े खर्चों को पूरा किया जा सके।स्वास्थ्य और शिक्षा ये दो ऐसे खर्च हैं जिनमें आप गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं कर सकते लेकिन समय से योजना बनाकर आप उस खर्च के बोझ को कम कर सकते हैं। 

इन दो खर्चों पर ध्यान देने के बाद मैंने बच्चे के लिए बीमा योजना लेने पर ध्यान दिया। बच्चा होने के समय मैंने बड़ा घर नहीं लिया।

मेरा मानना था कि थोड़ी सी कोशिश करके बच्चे को पुराने घर में आराम से रखा जा सकता है और मुझे गोदी में बैठने वाले अपने छोटे से बच्चे के लिए अलग कमरे की बिल्कुल ज़रूरत नहीं थी। इसके साथ ही बड़ा घर लेने पर घर बदलने के खर्च के साथ घर के किराये पर भी ज़्यादा पैसा खर्च करना पड़ता। 

हालांकि बजट के खर्चे का पहले से हिसाब लगाया जा सकता है लेकिन बहुत से खर्च बिना बजट के भी होते हैं। अचानक आने वाले ये खर्च माता-पिता को आश्चर्य में डाल देते हैं। 

भोजन – पारंपरिक तरीके से बच्चे की देखभाल किफायती पड़ती है और लंबे समय से लोग इन पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।इसलिए मैंने जितना हो सके पारंपरिक तरीकों को अपनाने का फैसला किया। अगर मेरी दादी ने कहा कि चावल की पुडिंग या जड़ी-बूटियों का काढ़ा बच्चों के लिए बेहतर है तो मैंने पैकिंग में आने वाले अनाज और दवाईयों की जगह जितना हो सके इन पारंपरिक तरीकों का प्रयोग किया। 

शौचालय की आदतें–मैंने बच्चे को जल्दी ही शौचालय से जुड़ी आदतें सिखाई। जिसके कारण मैंने बहुत जल्दी डाइपर खरीदना बंद कर दिया।मैंने शायद ही कभी डायपर रैश क्रीम का इस्तेमाल किया होगा क्योंकि मैं बहुत कम डायपर इस्तेमाल करती थी। 

कपड़े और सामान–मैं कभी भी एक साथ बहुत से कपड़े नहीं खरीदती थी। उपहार में मिले कपड़ों से मेरे बच्चे की ज़्यादातर ज़रूरतें पूरी हो जाती थीं।अगर अगले महीने आपके बच्चे का जन्मदिन आने वाला है तो उसे बहुत से कपड़े दिलाकर खुश करने की कोशिश न करें।हो सकता है कि उसे जन्मदिन वाले दिन उपहार में ही बहुत से कपड़े मिल जाएं। 

बच्चों के सामान–स्ट्रोलर, वॉकर, क्रिब्स, ऊंची कुर्सियां.. यह सूची बहुत लंबी है।अगर ऊँची कुर्सी को मोड़ कर बच्चे के बैठने की सामान्य कुर्सी में बदला जा सके या क्रिब को बच्चों के बिस्तर में बदला जा सके तो एक से ज़्यादा मकसद पूरा कर रही इस चीज़ों को खरीदने के बारे में सोचा जा सकता है और आपको एक सामान कम भी खरीदना पड़ेगा।बेहतर होगा कि ऐसी चीज़ों को सेकंड हैंड खरीदा जाए या परिवार और दोस्तों से ले लिया जाए। 

बच्चे के लिए कुछ नया और ख़ूबसूरत खरीदने में खुशी होती है और इन चीजों के कारण आपके बच्चे के चहरे पर आई खुशी अनमोल होती है।एक मां होने के नाते मैं भी इन चीज़ों में खुशी तलाश करती थी। लेकिन समय के साथ मैंने कम खर्च वाली आदतों को अपनाया और सही तरह से पैसे का प्रबंध करने की कोशिश की!

संवादपत्र

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