यहां बताया गया है कि लॉकडाउन के बाद अपने धन का प्रबंधन अलग तरह से कैसे करें

हम वह नियंत्रित नहीं कर सकते जो जीवन हमारे समक्ष पेश करता है, लेकिन हम नियंत्रित कर सकते हैं कि हम इस पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं - और यह कोरोनोवायरस लॉकडाउन के संदर्भ में और हम अपने वित्त का प्रबंधन कैसे करते हैं,इस सन्दर्भ में भी सही है।

यहां बताया गया है कि लॉकडाउन के बाद अपने धन का प्रबंधन अलग तरह से कैसे करें

सभी को कोरोनोवायरस के बुरे सपने के खत्म होने का इंतजार है। इसने दुनिया भर के लोगों के जीवन को इस तरह से प्रभावित किया है जो हाल के इतिहास में कभी नहीं हुआ है। वित्तीय अर्थों में कड़े शब्दों में कहें तो, जो लोग घर से काम करना जारी रख पा रहे हैं, उन्होंने देखा होगा कि उनकी कमाई वैसे ही बनी है, लेकिन उनके खर्चे कम हो गए हैं। यदि आप उनमें से एक हैं, तो आप अच्छे से समझ गए होंगे कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं।

हां, इसे लॉकडाउन के सकारात्मक पहलु के रूप में देखा जा सकता है, और ऐसे तरीके हैं जिनसे आप लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी अपने खर्च से अधिक बचत कर सकते हैं। जानिए कैसे :

1.नए व्यवहार और आदतों को बनाये रखें

महीनों तक बाहर न खाने, खरीदारी न करने या यात्रा न करने के बाद, आपके मन को अब इसकी आदत हो गई होगी। आपने कुछ स्वस्थ आदतें बनाई होंगी जैसे कि खाना बनाना सीखना या निकटतम थिएटर की बजाय यूट्यूब पर फिल्मों का आनंद लेना। एक बार जब लॉकडाउन ख़त्म हो जाएगा, तो भी इन अच्छी आदतों को बनाये रखें । न केवल वे आपको बहुत सारे पैसे बचाने में मदद करेंगे,साथ ही, वे आपको अधिक स्वस्थ जीवन जीने में भी मदद करेंगे, जहां आप अपने बुनियादी निर्वाह और खुशियों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं होंगे। बेशक, आप अभी भी कभी-कभी इन चीजों में लगे रह सकते हैं। एक स्वस्थ संतुलन बनाए रखना याद रखें; लॉकडाउन के महीनों के लिए अत्यधिक कमी पूर्ति न करें।

2. कुछ व्यय-वर्गों के साथ दुरी बनाये रखें

लॉकडाउन में यह स्पष्ट हो गया होगा कि आपके बजट में कौन सी चीज़ें जरूरतें हैं और कौन सी चाहतें। कुछ चीजें पहले अपरिहार्य लग सकती थीं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान आपको महसूस हुआ होगा कि उनके बिना भी आपका काम अच्छी तरह से चल सकता है । उदाहरण के लिए, यदि आपको अपने कार्यस्थल के पास एक कैफे से अपनी सुबह की कॉफी पीने की आदत थी , तो आपने उसके बदले लॉकडाउन में, अपने घर से काम करने के वक़्त बैठने से पहले खुद कॉफी बनाना शुरू कर दिया होगा । लॉकडाउन के बाद भी ऐसे बदलाव जारी रखे जा सकते हैं, जिससे आप अपनी कुछ व्यय-वर्गों को पूरी तरह से खत्म कर सकते हैं।

3. अन्य व्यय वर्गों में कटौती

आपके बजट में कुछ व्यय वर्ग को पूरी तरह से हटाया नहीं जा सकता हैं। हालांकि, उन्हें काफी कम किया जा सकता है। यदि आप लॉकडाउन के दौरान के अपने खर्चों की लॉकडाउन से पहले के अपने बजट से तुलना करते हैं, तो आपको कुछ गतिविधियों जैसे कि बाहर खाना, खरीदारी, आवागमन आदि के आंकड़ों में एक स्पष्ट अंतर दिखाई देगा| हालांकि आपके दैनिक आवागमन जैसे व्यय-वर्ग लॉकडाउन खुलने पर वापस शुरू हो सकते हैं ,परन्तु आपके विवेकाधीन खर्चों को शुरू करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अपनी बचत को बढ़ाने के लिए उन खर्चों को 20-30 प्रतिशत तक काटने की कोशिश करें।

4. अपना आपातकालीन कोष बढ़ाएँ

कोई भी कोरोनावायरस महामारी की भविष्यवाणी नहीं कर सकता था। फिर भी ऐसा हुआ, और जैसा कि हम जानते हैं कि इससे जीवन बदल गया है। इन जैसी आपात स्थितियों से यह साबित होता है कि नकदी का जमा होना कितना महत्वपूर्ण होता है, जो सुलभ भी हो । यदि आपके पास ऐसा कोई 'लिक्विड फंड' नहीं है, तो छह महीने के खर्च के बराबर की राशि (किराया, किराने का सामान, यूटिलिटी बिल आदि) को अलग रखकर शुरुआत करें। यदि आपके पास पहले से कोई आपातकालीन फंड है जो आप छह महीने तक चला सकते हो, तो इसे बढ़ाएं ताकि यह 9 से 12 महीनों तक काम आ सके।

5. बचत किये गए पैसे को निवेश करें

एक सामान्य कारण है जिससे लोग कहते हैं कि उन्होंने अभी तक निवेश इसलिए नहीं किया है क्योंकि उनके पास पैसे बचते नहीं है। लॉकडाउन का आभार कि आपके पास कुछ पैसे बच सकते हैं जो अन्यथा आपके पास नहीं होते। अपने अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों के आधार पर रणनीतिक निवेश करने के लिए इस पैसे का उपयोग करें। लॉकडाउन के बाद, अपनी मानसिकता को उपभोक्ता से निवेशक के रूप में बदलने की कोशिश करें। एक बार जब आप अपने निवेश पोर्टफोलियो का निर्माण शुरू कर देते हैं, तो आप अपने उपभोक्ता-केंद्रित इच्छाओं को पूरा करने वाले धन के बजाय उस संपत्ति निर्माण से खुशी और संतुष्टि प्राप्त करते हैं जो आप बना लेते हैं।

हालांकि लॉकडाउन खत्म होने के बाद ,आप कुछ चीज़ों को किये बिना नहीं रह सकते हैं - जैसे कि अपने पसंदीदा रेस्तरां में भोजन करना या मॉल में खरीदारी करना - पर एक संतुलन बनाए रखना न भूलें!