कोविड-19 महामारी के दौरान अपने ऋण का पुनर्गठन कैसे करें? ऋण पुनर्गठन सुविधा का लाभ कौन कौन उठा सकता है?

कर्ज पुनर्गठन उन लोगों को प्रदान की जाने वाली एक सुविधा है, जो अस्थायी तौर पर वित्तीय तनाव में हैं। इसके जरिये ऐसे लोग अपने क्रेडिट स्कोर को खराब किए बिना अपने पुनर्भुगतान शेड्यूल में बदलाव कर सकते हैं।

हर किसी को कोविड-19 महामारी के दौरान ऋण पुनर्गठन के बारे में जरूर जानना चाहिए

कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में लोगों की रोजी-रोटी पर असर डाला है। लाखों लोगों ने अपनी नौकरी खो दी और दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आय के नुकसान के कारण बहुत सारे लोग अपने ऋण की ईएमआई का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। यह न केवल उनके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित कर सकता है बल्कि उन्हें अपनी संपत्ति खोने का भी कारण बन सकता है।

इस परिदृश्य में आरबीआई ने विभिन्न प्रकार के ऋणों के कर्जदारों की सहायता के लिए ऋण पुनर्गठन को लागू किया था। 6 अगस्त 2020 को आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों, गैर-वित्तीय संस्थानों, सहकारी समितियों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए ऋण पुनर्गठन दिशानिर्देश जारी किए और उन्हें कर्जदारों को ऋण पुनर्गठन की सुविधा देने के लिए कहा।

ऋण पुनर्गठन योजना क्या है?

इस महामारी से पैदा हुए संकट में कर्जदारों के बीच वित्तीय तनाव के मुद्दे को हल करने के लिए आरबीआई का ऋण पुनर्गठन ढांचा भारत में सभी बैंकों और ऋण देने वाली संस्थाओं पर लागू होता है। इस ढांचे के तहत, ऋण चुकौती संरचना को उन कर्जदारों के लिए बदला जा सकता है जो आर्थिक रूप से प्रभावित हैं (उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति ने अपनी आय का स्रोत खो दिया है)। आरबीआई के इस स्वागत योग्य कदम से उन व्यक्तियों और संस्थाओं को राहत मिलेगी जो मूल ऋण चुकौती अनुसूची के अनुसार अपना ऋण चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आरबीआई का ऋण पुनर्गठन कैसे काम करता है?

आरबीआई ने ऋणों के पुनर्गठन के लिए एक समग्र दिशानिर्देश जारी किया है। हालांकि, व्यक्तिगत ऋण देने वाली संस्थाओं को अपने स्वयं के दिशा-निर्देश लागू करने की छूट दी गई है। पुनर्भुगतान अनुसूची या ऋण अवधि को बढ़ाकर ऋण पुनर्गठन किया जा सकता है। ब्याज दर को भी कम किया जा सकता है।

यदि ऋण अवधि बढ़ा दी जाती है, तो मूल राशि अधिक महीनों में बंट जाएगी, जिससे ईएमआई कम हो जाएगी। ऐसे समय में, जब आय अब तक के सबसे निचले स्तर पर है, कम ईएमआई एक बड़ी मदद हो सकती है। एक और तरीका यह हो सकता है कि ऋण पर वसूली जाने वाली सभी ब्याज राशि को एक नए ऋण खाते में स्थानांतरित किया जाए। इससे कुछ समय के लिए कर्जदार पर वित्तीय बोझ कम होगा।

यदि आप अपने ऋण का पुनर्गठन करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको यह पता लगाना होगा कि आपके बैंक/ऋणदाता संस्थान ने किस दृष्टिकोण को चुना है। दृष्टिकोण को जाने बिना आपको पुनर्गठन प्रस्ताव को कभी भी स्वीकार या अस्वीकार नहीं करना चाहिए। लोन के पुनर्गठन के बाद आपको जो नई ईएमआई चुकानी होगी, उसकी जांच के लिए लोन कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें।

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इस सुविधा का लाभ कौन उठा सकता है?

निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं ऋण पुनर्गठन के लिए पात्र हैं:

  • 1 अप्रैल 2021 तक अगर आपको बैंक के साथ एक मानक व्यक्ति या संस्था के रूप में वर्गीकृत किया गया है
  • कोविड-19 महामारी के कारण आपकी आय कम हो गई है या बंद हो गई है
  • आपने 1 अप्रैल 2021 से पहले कर्ज लिया हो 

बैंक सबसे पहले यह पता करेगा कि क्या कर्जदार वास्तव में वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। यदि हां, तो यह पता लगाएगा कि आमदनी में कितने प्रतिशत की कमी आई है, यह उनकी (और उनके परिवार की) जीवन शैली को कैसे प्रभावित कर रहा है और व्यक्ति पुनर्गठित ईएमआई का भुगतान कर सकता है या नहीं।

इनके अलावा, बैंक कर्जदार के क्रेडिट इतिहास और अन्य ऋणों के पुनर्भुगतान के उनके ट्रैक रिकॉर्ड का भी मूल्यांकन करेगा। अंत में, बैंक 2020 में स्थगन का लाभ उठाने पर कर्जदार की प्रतिक्रियाओं पर गौर करेगा।

यह आरबीआई के अनुसार पात्रता के लिए बुनियादी ढांचा है। हालांकि, आपके बैंक के और अधिक कठोर मानदंड हो सकते हैं जिसका पालन आपको करना होगा। इसलिए, ऋण पुनर्गठन के लिए जाते समय अपने बैंक द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पहले सही से समझ लीजिए। 

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इस ढांचे के अंतर्गत कौन से ऋण आते हैं?

भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, पुनर्गठन के इस ढांचे के अंतर्गत आने वाले वित्तीय उत्पादों में शामिल हैं :

  • दोपहिया और कारों पर ऋण
  • क्रेडिट कार्ड प्राप्तियां
  • व्यक्तिगत ऋण
  • शैक्षिक ऋण
  • पेशेवरों को व्यक्तिगत ऋण
  • अचल संपत्ति बनाने या बढ़ाने के लिए गृह ऋण और अन्य ऋण
  • उद्यम प्रमाणपत्र के माध्यम से एमएसएमई को प्रदान किया गया ऋण

ऋण पुनर्गठन के लिए आपको कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे?

यदि आप एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं, तो आपको निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे: 

  • मार्च 2021 की वेतन पर्ची और आवेदन करने की तारीख से पहले के अंतिम दो महीनों के लिए
  • नौकरी छूटने की स्थिति में, सेवामुक्ति पत्र 
  • पुनर्गठन की अवधि के बाद अपेक्षित आय की घोषणा
  • वेतन खाते का बैंक स्टेटमेंट अक्टूबर 2020 से आज तक 

यदि आप स्व-नियोजित हैं, तो आपको निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • सीसी या चालू खाते का बैंक स्टेटमेंट 1 अप्रैल 2020 से आज तक
  • अक्टूबर 2020 से अब तक जीएसटी रिटर्न
  • वित्तीय वर्ष 2019, 2020 और 2021 के लिए आईटी रिटर्न (भरा हुआ) 
  • पिछले दो वर्षों की बैलेंस शीट और पी एवं एल खाता
  • एमएसएमई के मामले में उद्यम प्रमाणपत्र
  • महामारी से प्रभावित व्यवसाय या पेशे की स्व-घोषणा 

यदि आपने अपने ऋण का पुनर्गठन करने का निर्णय लिया है, तो आप अपने ऋणदाता संस्थान के साथ पुनर्गठन प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकते हैं। सुनिश्चित करें कि आप ऊपर उल्लिखित सभी दस्तावेज जमा कर दें। एक बार जब ऋण देने वाली संस्था सभी दस्तावेजों और डेटा का सत्यापन कर लेती है, तो वे आपके साथ पुनर्गठन के दृष्टिकोण पर चर्चा करेंगे। यदि आप उनके नियमों और शर्तों से सहमत हैं, तो आपके ऋण चुकौती का पुनर्गठन किया जाएगा।

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कर्जदारों को ऋण पुनर्गठन से कैसे लाभ हो सकता है?

पुनर्गठन के बाद सबसे पहले ईएमआई की रकम कम हो जाएगी। इससे ऐसे कर्जदार को काफी राहत मिलेगी, जिसकी आय में कमी आई है। दूसरे, कर्जदार का क्रेडिट स्कोर उतना प्रभावित नहीं होगा जितना कि अगर उनका ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) बन जाता। अंत में, कर्जदार भविष्य में भी बिना किसी कठिनाई के ऋण सुविधा का लाभ उठा सकता है क्योंकि उन्होंने केवल ऋण का पुनर्गठन किया होगा, चूक नहीं।

आखिरी शब्द 

महामारी की चपेट में आने के बाद हममें से कई लोगों के लिए जीवन अनिश्चित हो गया है। यहां तक कि शीर्ष स्तर के अधिकारियों और अच्छी तरह से स्थापित व्यापार मालिकों को भी अब उनकी आय का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कर्ज का पुनर्गठन कर्जदारों के लिए वरदान साबित हो सकता है। 2020 में कर्जदारों को उनके कर्ज के लिए मोराटोरियम का विकल्प दिया गया था, लेकिन सभी की आय एक तरह से प्रभावित नहीं हुई। इसलिए, आरबीआई ने इस पुनर्गठन नीति को विशेष रूप से उन कर्जदारों की मदद करने के लिए तैयार किया है जिनकी आय संकट के कारण कम हो गई थी या खो गई थी।