अपने डिविडेंट आय को दुबारा निवेशित करने के अलग-अलग तरीके हैं

अपने स्टॉक पोर्टफोलियो से अर्जित डिविडेंड को दुबारा निवेशित करने के प्रभावी तरीकों के बारे में जानें।

अपने डिविडेंट आय को दुबारा निवेशित करने के अलग-अलग तरीके हैं

क्या आपने कभी ग्रेस गोनर के बारे में सुना है? बेहद सादगीपूर्ण मूल से आई हुई, उनकी नियुक्ति 1930 के दशक के शुरूआत में अबॉट लैब में सेक्रेटरी के रूप में हुई थी। 1935 में, उन्होंने कंपनी के तीन शेयर खरीदे, जिनकी कीमत 180 डॉलर के लगभग थी। उन्होंने डिविडेंड का निवेश करना जारी रखा लेकिन कभी भी किसी अतिरिक्त आय के ट्रेडिंग नहीं की। 2010 में, ग्रेस की मृत्यु के बाद, अबॉट में उनका निवेश 7 मिलियन डॉलर बन गया।

यह डिविडेंड के दुबारा निवेश करने का प्रभाव है। अधिक जानने के लिए पढ़ें।

डिविडेंड क्या है?

कंपनी शेयर जारी करती है जो स्टॉक ऐक्सचेंज पर सूचीबद्ध होते हैं और प्रतिदिन उन शेयर का ट्रेड होता है। कंपनी के स्टॉक से किसी व्यक्ति को प्राप्त होने वाला लाभ डिविडेंड कहलाता है। क्रेडिटर्स, प्रिफरेंस शेयरहोल्डर्स और बैलेंस शीट पर प्रदर्शित अन्य देयताओं का भुगतान करने के बाद कंपनी द्वारा अर्जित लाभों को एक डिविडेंड के रूप में शेयरहोल्डरों में वितरित कर दिया जाता है। हालांकि, रिटर्न के रूप में डिविडेंड का भुगतान अनिवार्य नहीं है। अप्रैल 2020 और सितंबर 2020 के बीच, भारत की 600 से अधिक कंपनियों ने 49,674 रुपए के डिविडेंड की घोषणा की।

डिविडेंड का दुबारा निवेश

कुछ खास व्यक्ति और परिवार हैं जिन्होंने दशकों से निवेश किया है और इसलिए लाखों या करोड़ों रुपए में डिविडेंड प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन ये आउटलायर या अपवाद हैं। सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों द्वारा विशिष्ट डिविडेंड लाभ 1% से 4% तक होता है। बीएसई सेंसेक्स और बीएसई इंडेक्स के औसत डिविडेंड लाभ लगभग 1.5% है। इसलिए, 5 लाख रुपए से निवेशित पूंजी पर किसी व्यक्ति को 7500 रुपए प्रति वर्ष डिविडेंड मिल सकता है। हालांकि यह कोई पॉकेट चेंज नहीं है, यह कोई बहुत बड़ी रकम नहीं है। 

फिर भी, निवेशक इस राशि को अच्छे उपयोग में लगाना चाहता है और वे अपने डिविडेंड को दुबारा निवेशित करना चाहते हैं। आइए हम ऐसे निवेशकों के लिए कुछ विकल्प देखें।

दुबारा निवेश का विकल्प विचार करने के महत्वपूर्ण बिंदु
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) कम जोखिम, दीर्घ कालिक, लाभ हासिल करता है
सावधि जमा (फ़िक्स्ड डिपॉजिट) कम जोखिम, कम से अधिक समय, व्यक्ति बेहतर ब्याज (त्रैमासिक, अर्ध-वार्षिक या वार्षिक) प्राप्त करने के लिए फंड्स का निवेश कर सकता है
म्यूचुअल फंड्स किसी व्यक्ति के निवेश सीमा, जोखिम सहन करने की क्षमता और उद्देश्यों के अनुरूप अनेक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है
स्टॉक्स (ऐक्युमुलेशन या ड्रिप रणनीति) उच्च जोखिम, दीर्घ कालिक, लाभ हासिल करता है

इससे जुड़ी बातें: डिविडेंड आय पर किस तरह टैक्स लगता है?

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)

कोई व्यक्ति पीपीएफ स्कीम में कम से कम 500 रुपए निवेश कर सकता है। इसलिए, पीपीएफ में डिविडेंड का निवेश करना सुविधाजनक हो सकता है। पीपीफ में निवेश करने के कई फायदे हो सकते हैं, जैसे:

  • अपकी निवेशित पूंजी सुरक्षित रहती है
  • आप 7.1% चक्रवृद्धि ब्याज प्राप्त कर सकते हैं
  • आपको आयकर अधिनियम की धारा 80C के तरह 1.5 लाख रुपए की कर छूट मिलती है।

आपके पीपीएफ निवेश की परिपक्वता तिथि उस वित्तीय वर्ष के अंत से 15 वर्ष मानी जाती है जिस वित्तीय वर्ष में आपने अपना डिपॉजिट चालू किया था। इसलिए, यदि आपको जोखिम पसंद नहीं है, लंबे समय तक रख सकते हैं, और प्रति वर्ष अपने डिविडेंड का निवेश कर सकते हैं, तो आपको पीपीएफ लेना चाहिए। 

सावधि जमा (फ़िक्स्ड डिपॉजिट)

अपने समय विस्तार और पास में उपलब्ध डिविडेंड राशि के आधार पर, आप फ़िक्स्ड डिपॉजिट खोल सकते हैं। यह भी लगातार लाभ प्रदान करता है और आपकी पूंजी को सुरक्षित रखता है। एफडी की सलाह उन लोगों को दी जाती है जो इस बात से आश्वस्त नहीं होते कि वे अपने डिविडेंड लाभ का निवेश कहां करें। वे लोग जो कम से समय में कुछ नगद प्राप्त करना चाहते हैं वे यह तरीका अपना सकते हैं। एफडी खोलने की न्यूनतम राशि 1000 से 10,000 रुपए है जो बैंक पर निर्भर करती है। फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवालदेखें। 

इससे जुड़ी बातें: एफडी लाभ बनाम मुद्रास्फीति: यहां इसके बारे में बताया गया है कि आप अपनी खरीद क्षमता को कैसे बनाए रख सकते हैं

म्यूचुअल फंड्स

कुछ निश्चित म्युचुअल फंड में 100 रुपए से निवेश करने की सुविधा है। यदि आप मध्य से दीर्घ कालिक निवेश कर सकते हैं और जोखिम उठा सकते हैं, तो आप एकमुश्त राशि के रूप में डिविडेंड लाभ का निवेश कर सकते हैं या एक एसआईपी शुरू कर सकते हैं। आप इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, इंडेक्स फंड्स इत्यादि पर विचार कर सकते हैं।

ऐसे लोग जो मध्य से दीर्घ कालिक निवेश कर सकते हैं और जोखिम उठा सकते हैं, वे इक्विटी फंड्स पर विचार कर सकते हैं। कम जोखिम लेने वाले और दीर्घ-कालिक निवेश करने वाले निवेशक इंडेक्स फंड्स पर विचार कर सकते हैं। अल्ट्रा-लिक्विड या लिक्विड फंड्स कम जोखिम पर कम समय के लिए डिविडेंड के निवेश के लिए उपयुक्त है।

इससे जुड़ी बातें: म्युचुअल फंड्स के अंतर्गत अनेक प्रकार के फंड्स उपलब्ध होते हैं

स्टॉक्स

स्टॉक्स में डिविडेंड निवेश करने के लिए, निवेशक इन दो रणनीतियों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं:

  • ऐक्युमुलेशन रणनीति: इसके जरिए, निवेशक डिविडेंड्स को जमा होने दे सकता है। डिविडेंड लाभों को अल्ट्रा-लिक्विड फंड या सेविंग अकाउंट में निवेश किया जा सकता है। जब बाजार में गिरावट आती है, तो इस धनराशि का उपयोग सस्ती कीमतों में आधारभूत रूप से मजबूत स्टॉक्स को खरीदने में किया जा सकता है।
  • ड्रिप (डीआरआईपी) रणनीति: डीआरआईपी का पूरा रूप है डिविडेंड रीइंवेस्टमेंट प्लान। जैसा कि शब्द का अर्थ है, इसका उपयोग निवेशकों द्वारा अपने डिविडेंड लाभों को स्टॉक्स में निवेश करने के लिए किया जा सकता है। किसी निवेश द्वारा अर्जित नगद डिविडेंड को उसी स्टॉक या दूसरे मजबूत स्टॉक्स में पुनर्निवेशित किया जा सकता है। समय के साथ, यह रणनीति निवेशक को एक मजबूत पोर्टफोलियो बनाने में सक्षम बनाता है।

इससे जुड़ी बातें: स्टॉक SIPs क्या होते हैं?

अंतिम शब्द

निवेशक अनेक प्रकार की रणनीतियों पर विचार कर सकते हैं यदि वे अपने डिविडेंड आय का दुबारा निवेश करना चाहें। इस बात की अत्यधिक सलाह दी जाती है कि ऐसे निर्णय लेने से पहले उन्हें किसी विश्वसनीय व्यक्तिगत वित्तीय नियोजक से सलाह लेनी चाहिए। पार्टिंग नोट पर, जब ग्रेस की मृत्यु हुई, उन्होंने अपने संपूर्ण होल्डिंग को अपनी शिक्षण संस्था (लेक फॉरेस्ट कॉलेज) को वसीयत कर दी ताकि इसका इस्तेमाल स्कॉलरशिप के रूप में किया जा सके। पूंजी लाभ बनाम डिविडेंड आय: क्या अंतर है?

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संवादपत्र

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