Dollar Index: डॉलर इंडेक्स क्यों महत्वपूर्ण है? अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी मुद्रा की इतनी चलती क्यों है?

डॉलर अमेरिकी मुद्रा अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए सिर्फ एक महत्वपूर्ण मुद्रा है और इस पर सभी का ध्यान बना रहता है।

डॉलर इंडेक्स पर क्यों नजर रखती है सारी दुनिया

Importance of Dollar Index: जब भी अंतरराष्ट्रीय कारोबार की चर्चा होती है तो डॉलर इंडेक्स का आकलन जरूर होता है। फिर चाहे उसमें यूरोपीय यूरो या पाउंड के चढ़ने-उतरने की बात हो, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बाजार में मंदी की बात हो, चीन और रूस की आर्थिक स्थिति की बात हो या फिर अन्य विदेशी मुद्राओं के फिसलने और उछलने की बात हो जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार में मुद्रा (करेंसी) के बारे में कोई भी चर्चा हो। आइए जानते हैं कि अमेरिकी मुद्रा या डॉलर इंडेक्स सभी कारोबारियों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? 

डॉलर इंडेक्स का मतलब क्या है? 

डॉलर इंडेक्स सिर्फ अमेरिकी मुद्रा ही नहीं बल्कि दुनिया की 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती आर कमजोरी के आकलन का इंडेक्स है। इन 6 अलग-अलग करेंसियों में उन देशों की मुद्राएँ सम्मिलित हैं जो अमेरिका कारोबार में भागीदार हैं। इन 6 मुद्राओं में, यूरो, ब्रिटिश पाउंड, स्वीडिश क्रोना, स्विस फ्रैंक आदि यूरोपीय मुद्राएँ शामिल हैं, साथ ही जापानी येन और कनाडाई डॉलर भी सम्मिलित हैं।   

 डॉलर इंडेक्स से अमेरिकी डॉलर की मजबूती का संकेत मिलता है। डॉलर इंडेक्स जितना चढ़ता है अमेरिकी मुद्रा अन्य मुद्राओं की तुलना में मजबूत होती है। वहीं डॉलर इंडेक्स के फिसलने से यह माना जाता है कि अमेरिकी मुद्रा कमजोर हो रही है। 

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

डॉलर इंडेक्स में अन्य मुद्राओं का वेटेज 

डॉलर इंडेक्स पर हर मुद्रा के विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) का अलग प्रभाव पड़ता है। इस मामले में  सर्वाधिक वेटेज यूरो को दिया जाता है जबकि स्विस फ्रैंक का न्यूनतम वेटेज होता है। 

यूरो 57.6%, जापानी येन 13.6%, ब्रिटिश पाउंड 11.9%, कैनेडियन डॉलर का वेटेज 9.1% है। वहीं स्वीडिश क्रोना 4.2% का वेटेज रखता है और स्विस बैंक 3.6% का। 

इसका सीधा मतलब है जिस करेंसी का जितना अधिक वेटेज है उस करेंसी के उतार-चढ़ाव का इंडेक्स पर सर्वाधिक असर पड़ेगा। 

डॉलर इंडेक्स के इतिहास पर नजर 

1973 में अमेरिका की सेंट्रल बैंक यूएस फेडरल रिज़र्व ने डॉलर इंडेक्स की शुरुआत की थी और उसका आधार (बेस) 100 रखा था। तब से लेकर आज तक डॉलर इंडेक्स में सिर्फ एक बार परिवर्तन किया गया है जब यूरोप के सभी देशों ने मिलकर एक साझा मुद्रा का चलन शुरू किया था। फ्रांसीसी फ्रैंक, जर्मन मार्क, इटालियन लीरा, डच गिल्डर और बेल्जियम फ्रैंक आदि के स्थान पर यूरोप की साझा मुद्रा यूरो को इंडेक्स में सम्मिलित किया गया था। शुरुआत के समय से ही लेकर अब तक डॉलर इंडेक्स 90 से 110 अंकों के बीच बना रहा है। इसका उच्चतम स्तर 1984 में 165 अंकों के साथ था। 2007 में मंदी के दौर में इसका न्यूनतम स्तर आया 70 अंकों का था। 

डॉलर इंडेक्स महत्वपूर्ण क्यों है? 

पूरी दुनिया की नज़र जिस इंडेक्स पर बनी रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण है अंतरराष्ट्रीय कारोबार अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। यूएस फेड के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 1999 से लेकर 2019 के बीच अमेरिकी महाद्वीप में 96% कारोबार डॉलर में हुआ था। यूएस फेड की मानें तो 2021 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों द्वारा घोषित किए गए कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 60% भाग अमेरिकी डॉलर का है। 

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

US Dollar Index Explained (USDX / DXY)

Importance of Dollar Index: जब भी अंतरराष्ट्रीय कारोबार की चर्चा होती है तो डॉलर इंडेक्स का आकलन जरूर होता है। फिर चाहे उसमें यूरोपीय यूरो या पाउंड के चढ़ने-उतरने की बात हो, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बाजार में मंदी की बात हो, चीन और रूस की आर्थिक स्थिति की बात हो या फिर अन्य विदेशी मुद्राओं के फिसलने और उछलने की बात हो जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार में मुद्रा (करेंसी) के बारे में कोई भी चर्चा हो। आइए जानते हैं कि अमेरिकी मुद्रा या डॉलर इंडेक्स सभी कारोबारियों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? 

डॉलर इंडेक्स का मतलब क्या है? 

डॉलर इंडेक्स सिर्फ अमेरिकी मुद्रा ही नहीं बल्कि दुनिया की 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती आर कमजोरी के आकलन का इंडेक्स है। इन 6 अलग-अलग करेंसियों में उन देशों की मुद्राएँ सम्मिलित हैं जो अमेरिका कारोबार में भागीदार हैं। इन 6 मुद्राओं में, यूरो, ब्रिटिश पाउंड, स्वीडिश क्रोना, स्विस फ्रैंक आदि यूरोपीय मुद्राएँ शामिल हैं, साथ ही जापानी येन और कनाडाई डॉलर भी सम्मिलित हैं।   

 डॉलर इंडेक्स से अमेरिकी डॉलर की मजबूती का संकेत मिलता है। डॉलर इंडेक्स जितना चढ़ता है अमेरिकी मुद्रा अन्य मुद्राओं की तुलना में मजबूत होती है। वहीं डॉलर इंडेक्स के फिसलने से यह माना जाता है कि अमेरिकी मुद्रा कमजोर हो रही है। 

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डॉलर इंडेक्स में अन्य मुद्राओं का वेटेज 

डॉलर इंडेक्स पर हर मुद्रा के विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) का अलग प्रभाव पड़ता है। इस मामले में  सर्वाधिक वेटेज यूरो को दिया जाता है जबकि स्विस फ्रैंक का न्यूनतम वेटेज होता है। 

यूरो 57.6%, जापानी येन 13.6%, ब्रिटिश पाउंड 11.9%, कैनेडियन डॉलर का वेटेज 9.1% है। वहीं स्वीडिश क्रोना 4.2% का वेटेज रखता है और स्विस बैंक 3.6% का। 

इसका सीधा मतलब है जिस करेंसी का जितना अधिक वेटेज है उस करेंसी के उतार-चढ़ाव का इंडेक्स पर सर्वाधिक असर पड़ेगा। 

डॉलर इंडेक्स के इतिहास पर नजर 

1973 में अमेरिका की सेंट्रल बैंक यूएस फेडरल रिज़र्व ने डॉलर इंडेक्स की शुरुआत की थी और उसका आधार (बेस) 100 रखा था। तब से लेकर आज तक डॉलर इंडेक्स में सिर्फ एक बार परिवर्तन किया गया है जब यूरोप के सभी देशों ने मिलकर एक साझा मुद्रा का चलन शुरू किया था। फ्रांसीसी फ्रैंक, जर्मन मार्क, इटालियन लीरा, डच गिल्डर और बेल्जियम फ्रैंक आदि के स्थान पर यूरोप की साझा मुद्रा यूरो को इंडेक्स में सम्मिलित किया गया था। शुरुआत के समय से ही लेकर अब तक डॉलर इंडेक्स 90 से 110 अंकों के बीच बना रहा है। इसका उच्चतम स्तर 1984 में 165 अंकों के साथ था। 2007 में मंदी के दौर में इसका न्यूनतम स्तर आया 70 अंकों का था। 

डॉलर इंडेक्स महत्वपूर्ण क्यों है? 

पूरी दुनिया की नज़र जिस इंडेक्स पर बनी रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण है अंतरराष्ट्रीय कारोबार अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। यूएस फेड के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 1999 से लेकर 2019 के बीच अमेरिकी महाद्वीप में 96% कारोबार डॉलर में हुआ था। यूएस फेड की मानें तो 2021 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों द्वारा घोषित किए गए कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 60% भाग अमेरिकी डॉलर का है। 

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US Dollar Index Explained (USDX / DXY)

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