महिला ई-हाट पहल क्या है?

पूरी दुनिया डिजिटलाइजेशन की गाड़ी पर सवार हैं , तो भारत पीछे क्यों छूट जाए? उन महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की नई पहल की जाँच करें, जो बड़े सपने देखने की हिम्मत करती हैं।

महिला ई-हाट पहल क्या है?

डिजिटलीकरण और महिला सशक्तीकरण की तेजी से विकसित होती लहर पर सवार होकर, भारत सरकार ने हाल ही में एक शानदार ऑनलाइन पहल की शुरुआत की है, जिसे महिला ई-हाट कहा गया है। इस महिला केंद्रित मंच का उद्देश्य देश भर में व्यवसायी महिलाओं और महिला निर्माताओं को सशक्त बनाना है। यह आशा करता है कि कई और महिलाओं को उद्यमिता के अपने सपने को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
यहां वो सब है जो आपको माहिला ई-हाट के बारे में जानना चाहिए

महिला ई-हाट क्या है?

महिला ई-हाट मार्च 2018 में शुरू की गई ई-कॉमर्स वेबसाइट है। यह ऑनलाइन पोर्टल, महिला और बाल विकास मंत्रालय की देखरेख और निर्देशन में आता है। देश भर की महिला उद्यमी वेबसाइट का उपयोग कर के अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर सकती हैं और अन्य सेवाओं की पेशकश कर सकती हैं।

केंद्र सरकार की महिलाओं के लिए इस तरह की पहली पहल, महिला और बाल विकास की तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा शुरू की गई थी। यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्टैंड अप इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' प्रयासों के साथ संरेखित है।

महिला ई-हाट को किससे फायदा होने की उम्मीद है?

इस पहल को भारत की महिलाओं को सशक्त बनाने की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण योजना के रूप में देखा जा रहा है। यह उन्हें एक मंच प्रदान करके अधिक वित्तीय स्थिरता और स्वतंत्रता लाएगा जहां वे अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत का प्रदर्शन कर सकते हैं।

इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के शुरू होने के तुरंत बाद 1.25 लाख से अधिक महिलाओं और 10,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों द्वारा पंजीकरण अनुरोध प्राप्त हुए। इस पहल को आसानी से सुलभ बनाया जा सकता है - एक लैपटॉप या कंप्यूटर की आवश्यकता नहीं है; पंजीयक मोबाइल फोन के माध्यम से अपनी बिक्री का प्रबंधन कर सकते हैं।

महिला ई-हाट ज़रूरत पर ज़ोर देता है?

महिला ई-हाट महिलाओं को अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्रदर्शित करने देती है, जिससे उन्हें एक व्यापक बाजार तक पहुंच मिलती है। यह विभिन्न रुचि समूहों और उत्पादों के प्रकारों को शामिल करती है, जैसे कि कपड़े, मिट्टी के बर्तनों, आभूषण, घर की सजावट, बैग आदि। सिलाई जैसी नियमित सेवाओं को भी सूचीबद्ध किया जा सकता है।

प्लेटफॉर्म द्वारा प्रणाली में विक्रेताओं के साथ-साथ खरीदारों को भी फायदा पहुंचाने के लिए अधिक पारदर्शिता लाने की कोशिश है। वेबसाइट एक मंच के रूप में काम करेगी, जहां खरीदार और विक्रेता बिना किसी बिचौलियों के जुड़ सकते हैं। एक विक्रेता अपने उत्पादों और सेवाओं को एक खरीदार को बेच सकता है, और दूसरा सीधे पहले की क्षतिपूर्ति करता है।

महिला ई-हाट कैसे काम करती है?

महिला और स्वयं सहायता समूहों को महिला ई-हाट वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा। फिर वे अपने उत्पादों को तस्वीरों, कीमतों, अन्य प्रासंगिक विवरणों और निर्माता या विक्रेता की संपर्क जानकारी प्रकाशित कर सकते हैं। संभावित खरीदारों के पास उत्पादों या सेवाओं के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए सीधे फोन, ई-मेल, या यहां तक कि विक्रेताओं से सीधे संपर्क करने का विकल्प है।

मेनका गांधी के अनुसार, माहिला ई-हाट एक बहुत विस्तृत पहल का पहला चरण है। मंत्री ने बाद में वेबसाइट को अन्य ई-कॉमर्स पोर्टलों के साथ एकीकृत करने की योजना बनाई है ताकि निर्माता और उद्यमी अधिक ग्राहकों तक पहुंच सकें। आखिरकार, इस परियोजना का समापन महिला उद्यमी परिषद नामक संस्थान में होने की उम्मीद है।

महिला ई-हाट के लिए साइन अप करने के लिए कौन पात्र है?

यह पहल केवल उन भारतीय नागरिकों के लिए है जो निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैं:

  • 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं
  • महिला स्व-सहायता समूह
  • महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम

पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए आवेदकों को एक मोबाइल नंबर, आधार विवरण और एक बैंक खाता प्रदान करना होगा।

महिला ई-हाट कार्यक्रम के तहत नियम और शर्तें क्या हैं?

  • यहाँ कुछ चीजें हैं जो उद्यमियों, विक्रेताओं और निर्माताओं को पता होनी चाहिए:
  • ऑनलाइन पोर्टल पर दिए जाने वाले उत्पाद या सेवाएं कानूनी वैध होनी चाहिए। तस्करी के सामान या अवैध सेवाओं के परिणामस्वरूप विक्रेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
  • जो उत्पाद और सेवाएं विक्रेता प्रदान करते हैं उनकी गुणवत्ता के लिए विक्रेता ही पूरी तरह से जिम्मेदार हैं । उन्हें हर हाल में गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • उत्पादों में किसी भी दोष या क्षति के मामले में, ग्राहक की शिकायतों से निपटने की जिम्मेदारी विक्रेता की होगी ।
  • उत्पादों को 30 दिनों की न्यूनतम अवधि के लिए प्रदर्शित किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर वेबसाइट से हटाया जाया जाता है, तो उन्हें केवल 30 दिनों के अंतराल के बाद ही फिर से प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • ग्राहक को वस्तुओं और सेवाएं समय पर पहुँचाना सुनिश्चित करना विक्रेता का कर्तव्य है।
  • राष्ट्रीय महिला कोष (आर.एम.के.) इस पहल में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; इसके पास उन उत्पादों और सेवाओं को स्वीकृत या अस्वीकार करने का अधिकार है, जिन्हें प्लेटफ़ॉर्म पर सूचीबद्ध किया जा सकता है।
  • आर.एम.के. अपने उत्पादों या सेवाओं को मंजूरी देने के बाद विक्रेताओं को सूचित करेगा। विक्रेताओं को तब एक स्वीकृति पत्र और एक वचन पत्र प्रस्तुत करना होता है। इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही उत्पाद वेबसाइट पर लाइव होंगे।
  • सभी विक्रेताओं को देश के बाहर बिक्री करने से पहले देश की कानूनी औपचारिकताओं और कराधान नियमों का पालन करना होगा।
  • विक्रेताओं को अपनी श्रेणी के उत्पादों और सेवाओं पर लागू सभी करों का भुगतान करना होगा।
  • आर.एम.के. के पास किसी भी समय नियमों और पात्रता की शर्तों को बदलने का अधिकार है,जो उन्हें ठीक लगे|
  • विक्रेताओं को बिक्री और रिटर्न सहित सभी लेनदेन का रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए, जो की प्लेटफार्म पर मौजूद होता है। ये रिकॉर्ड तिमाही आधार पर आर.एम.के. को भेजे जाने चाहिए।
  • महिला ई-हाट पर बेचे जाने वाले सभी उत्पादों की पैकेजिंग में इसका लोगो होना चाहिए।

सारांश में

महिला ई-हाट की पहल कई महिलाओं के लिए एक राहत  है जिनके पास प्रतिभा है लेकिन उनके उत्पादों का प्रदर्शन करने के लिए तकनीकी जानकारी और मंच का अभाव है। यह महिलाओं को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाएगा और उन्हें दिशा प्रदान कर  केंद्रित करेगा।

महिला ई-हाट केवल एक शुरुआत है। कार्यक्रम के दूसरे और तीसरे चरण में कई और महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के अपने सपने को प्राप्त करने की संभावना है । यह पहल महिलाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने का एक शानदार तरीका है, जिसे मुख्य रूप से हमारे देश में एक पुरुष-प्रधान भूमिका माना जाता है।

महिलाओं के लिए वित्तीय स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है। एक ही समय में, पुरुषों और महिलाओं के लिए इसके अलग-अलग मायने हो सकता है। जानिये क्यों।
 




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