Making and Registering a Will in India: भारत में वसीयत बनाने और उसे पंजीकृत कराने से संबंधित कानून!:भारत में वसीयत बनाने और उसे पंजीकृत कराने से संबंधित कानून!

अपने बाद आप अपनी संपत्ति किसे देना चाहते हैं इसके लिए कानूनी दस्तावेज यानी वसीयतनामा तैयार कराना होता है।

वसीयत का पंजीकरण

Laws related to making and registering a Will in India: वसीयत एक कानूनी दस्तावेज होता है। अपने बाद आप अपनी संपत्ति किसे देना चाहते हैं इसके लिए जीवित रहते कानूनी दस्तावेज तैयार कराना होता है। इसे वसीयतनामा कहा जाता है। इसमें वसीयत करनेवाला एक या कई व्यक्तियों के नाम पर अपनी संपत्ति छोड़ जाता है। वसीयत कराने वाले की मृत्यु के बाद जिसके नाम से वसीयत है, वह व्यक्ति उसकी संपत्ति और कारोबार का मालिक बन जाता है। वसीयत करानेवाला अपने जीवन में कभी भी इसे रद्द करवा सकता है या किसी और के नाम भी कर सकता है। व्यक्ति अपनी इच्छा से जितनी बार चाहे वसीयत बदल सकता है, लेकिन उसकी मृत्यु से पहले तैयार की गई उसकी अंतिम वसीयत लागू होती है।

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

वसीयत कराना और उसका पंजीकरण

कोई भी वसीयत करा सकता है। वसीयत बनाने से पहले, व्यक्ति को अपनी सभी संपत्तियों से संबंधित विवरण इकट्ठा करने चाहिए। आजकल बिना कानूनी सहायता के सहायता लिए बिना, ऑनलाइन वसीयत लेखन सेवाओं की सहायता से, ऐसी वसीयत तैयार की जा सकती है जिसे आसानी से समझा जा सके और जो कानूनी तौर पर सही और व्यवहार्य हो। अपनी

संपत्ति या व्यवसाय के उत्तराधिकार सौंपने के लिए वसीयत तैयार करने में परिवार के किसी सदस्य या कानूनी पेशेवर, धन सलाहकार की सहायता ली जा सकती है। आजकल www.willjini.com जैसी कई सेवाएं मार्गदर्शन और निष्पादन के लिए उपलब्ध हैं।

वसीयत हाथ से लिखी गई या टाइप की हुई हो सकती है। इसमें वसीयत करनेवाले के व्यक्तिगत और पारिवारिक विवरण के अलावा उसकी संपत्ति के विवरण, जिसके नाम वसीयत की जा रही है, उसका विवरण लिखा जाना चाहिए। इसके अलावा वसीयत के दोनों गवाहों का विवरण भी लिखा जाना चाहिए। जिसका दिमाग संतुलित न हो तो वह व्यक्ति वसीयत नहीं कर सकता। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि वसीयत करने वाले ने अपनी वसीयत बिना किसी भय, बल, जबरदस्ती या अनुचित प्रभाव के बनाई है और वसीयत बनाने के समय वह मानसिक रूप से स्वस्थ है।

वसीयत का पंजीकरण

वसीयत सादे कागज पर भी तैयार की जा सकती है। सादे कागज पर बनाए गए वसीयत के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते समय, दो गवाहों के सामने सभी पृष्ठों पर हस्ताक्षर किया जाना चाहिए। इसे पूरे भारत में सभी अधिकारियों और अदालतों द्वारा स्वीकार किया जाता है। संदेहों से बचने के लिए इसे पंजीकृत भी करवा सकते हैं। वसीयत को रजिस्ट्रर्ड करवाने के लिए गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय जाना होगा। रजिस्ट्रड करवाने के बाद वसीयत एक शक्तिशाली कानूनी प्रमाण बन जाता है।

भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 में वसीयत को सुरक्षित रखने का प्रावधान है। वसीयतकर्ता या उसके एजेंट का नाम लिखा हुआ वसीयत का सीलबंद लिफाफा सुरक्षित रखने के लिए किसी भी रजिस्ट्रार के पास जमा करवाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

Mistakes to avoid while writing a Will

Laws related to making and registering a Will in India: वसीयत एक कानूनी दस्तावेज होता है। अपने बाद आप अपनी संपत्ति किसे देना चाहते हैं इसके लिए जीवित रहते कानूनी दस्तावेज तैयार कराना होता है। इसे वसीयतनामा कहा जाता है। इसमें वसीयत करनेवाला एक या कई व्यक्तियों के नाम पर अपनी संपत्ति छोड़ जाता है। वसीयत कराने वाले की मृत्यु के बाद जिसके नाम से वसीयत है, वह व्यक्ति उसकी संपत्ति और कारोबार का मालिक बन जाता है। वसीयत करानेवाला अपने जीवन में कभी भी इसे रद्द करवा सकता है या किसी और के नाम भी कर सकता है। व्यक्ति अपनी इच्छा से जितनी बार चाहे वसीयत बदल सकता है, लेकिन उसकी मृत्यु से पहले तैयार की गई उसकी अंतिम वसीयत लागू होती है।

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वसीयत कराना और उसका पंजीकरण

कोई भी वसीयत करा सकता है। वसीयत बनाने से पहले, व्यक्ति को अपनी सभी संपत्तियों से संबंधित विवरण इकट्ठा करने चाहिए। आजकल बिना कानूनी सहायता के सहायता लिए बिना, ऑनलाइन वसीयत लेखन सेवाओं की सहायता से, ऐसी वसीयत तैयार की जा सकती है जिसे आसानी से समझा जा सके और जो कानूनी तौर पर सही और व्यवहार्य हो। अपनी

संपत्ति या व्यवसाय के उत्तराधिकार सौंपने के लिए वसीयत तैयार करने में परिवार के किसी सदस्य या कानूनी पेशेवर, धन सलाहकार की सहायता ली जा सकती है। आजकल www.willjini.com जैसी कई सेवाएं मार्गदर्शन और निष्पादन के लिए उपलब्ध हैं।

वसीयत हाथ से लिखी गई या टाइप की हुई हो सकती है। इसमें वसीयत करनेवाले के व्यक्तिगत और पारिवारिक विवरण के अलावा उसकी संपत्ति के विवरण, जिसके नाम वसीयत की जा रही है, उसका विवरण लिखा जाना चाहिए। इसके अलावा वसीयत के दोनों गवाहों का विवरण भी लिखा जाना चाहिए। जिसका दिमाग संतुलित न हो तो वह व्यक्ति वसीयत नहीं कर सकता। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि वसीयत करने वाले ने अपनी वसीयत बिना किसी भय, बल, जबरदस्ती या अनुचित प्रभाव के बनाई है और वसीयत बनाने के समय वह मानसिक रूप से स्वस्थ है।

वसीयत का पंजीकरण

वसीयत सादे कागज पर भी तैयार की जा सकती है। सादे कागज पर बनाए गए वसीयत के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते समय, दो गवाहों के सामने सभी पृष्ठों पर हस्ताक्षर किया जाना चाहिए। इसे पूरे भारत में सभी अधिकारियों और अदालतों द्वारा स्वीकार किया जाता है। संदेहों से बचने के लिए इसे पंजीकृत भी करवा सकते हैं। वसीयत को रजिस्ट्रर्ड करवाने के लिए गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय जाना होगा। रजिस्ट्रड करवाने के बाद वसीयत एक शक्तिशाली कानूनी प्रमाण बन जाता है।

भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 में वसीयत को सुरक्षित रखने का प्रावधान है। वसीयतकर्ता या उसके एजेंट का नाम लिखा हुआ वसीयत का सीलबंद लिफाफा सुरक्षित रखने के लिए किसी भी रजिस्ट्रार के पास जमा करवाया जा सकता है।

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Mistakes to avoid while writing a Will

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