Mistakes to avoid while writing a Will: वसीयत बनाते समय किन गलतियों से बचना चाहिए

एक सही वसीयत में वसीयतकर्ता और गवाह के हस्ताक्षर के साथ एक्ज़िक्यूटर का उल्लेख भी होता है

वसीयत से जुड़ीं अहम बातें

Making a will: निधन के बाद अपने वारिस और परिजनों को अपनी ओर से कुछ देने की इच्छा सभी की होती है। इसके लिए यदि वसीयतनामा अच्छी तरह जाँचते-परखते हुए कानूनी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में बनाया जाना चाहिए। इस महत्त्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज के लिए मसौदा तैयार करते समय ज़रा सी भी चूक भ्रम पैदा कर सकती है। 

विशेषाधिकार युक्त वसीयत 

साहसिक यात्रा, युद्ध में जाने वाले सिपाही, वायु सैनिकों और नौ-सैनिकों द्वारा जो अनौपचारिक वसीयत बनाई जाती है उसे विशेषाधिकार युक्त वसीयत कहते हैं। यह वसीयत लिखित या मौखिक दोनों रूप में हो सकती है जो उनके अपनी जान जोखिम में डालने के पहले नोटिस द्वारा तैयार की जा सकती है। 

बिना विशेषाधिकार वसीयत 

विशेषाधिकार युक्त वसीयत के अतिरिक्त अन्य सभी वसीयतनामे बिना विशेषाधिकार वसीयत की श्रेणी में आते हैं। इनके लिए सभी तरह की औपचारिकताएँ अनिवार्य होती हैं उदाहरण के तौर पर हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और लिखित वसीयतनामा आदि।

नीचे वसीयत बनाते समय की जाने वाली गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय बताए जा रहे हैं; 

वर्तनी की गलतियाँ (स्पेलिंग मिस्टेक्स) 

कानूनी दस्तावेज़ में वर्तनी में चूक नहीं होनी चाहिए। यदि घर के पते, आई डी प्रूफ या एड्रेस प्रूफ में कहीं भी एक ही व्यक्ति के नाम की अलग-अलग स्पेलिंग हो तो भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में वोटर आईडी जैसा कार्ड भी नहीं बन पाता। इसलिए वसीयतनामे में नाम की वही स्पेलिंग होनी चाहिए जो अन्य दस्तावेजों में लिखी हो। 

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

तथ्यात्मक गलतियाँ 

तिथि और स्थान वसीयतनामा की वैधता निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनका उल्लेख करते समय गलतियाँ नहीं होनी चाहिए। 

वसीयत में अपने नाम तारीख, पते और स्थान का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए। साथ ही लाभार्थियों के साथ संबंधों का भी उल्लेख करना चाहिए। वसीयतनामे को कानूनन दर्ज करवाना अनिवार्य नहीं होता लेकिन उसकी वैधता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक पृष्ठ पर वसीयतनामा लिखने वाले के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान होने चाहिए।

स्पष्टता की कमी 

वसीयत में लिखा गया प्रत्येक वाक्य स्पष्ट रूप से आपकी मंशा को व्यक्त करता है। अलग-अलग अर्थ वाले वाक्यों से भ्रम पैदा होगा और लाभार्थियों के बीच गलतफहमी बढ़ सकती है।

नाबालिग के नाम संपत्ति छोड़ते समय अभिभावक नियुक्त करना अनिवार्य है क्योंकि नाबालिग बच्चा टाइटल होल्डर नहीं हो सकता। अभिभावक की अनुपस्थिति में अदालत को संपत्ति को देखभालकर्ता के रूप में हस्तक्षेप करना होगा । 

अक्सर वसीयतकर्ता निष्पादक एक्ज़िक्यूटर नियुक्त करना भूल जाते हैं। ध्यान रखें कि नाबालिग व्यक्ति निष्पादक नहीं हो सकता। निष्पादक परिवार का कोई भी व्यक्ति हो सकता है। लेकिन वकील को निष्पादक के रूप में नियुक्त करना ज्यादा अच्छा होगा। 

अपने वृद्धावस्था में स्वास्थ्य के देखभाल के लिए पर्याप्त राशि न छोड़ना बड़ी गलती हो सकती है। वसीयतनामा लिखने के पहले अपने लिए प्रावधान न रखते हुए सब कुछ दे देना एक गलत तरीका होगा। 

वसीयत का मसौदा तैयार करते समय वसीयतकर्ता द्वारा होश हवास में निर्णय लेने की शपथ लेते हुए वसीयत करना अच्छा होगा। इससे वसीयत को चुनौती देना मुश्किल हो सकता है। 

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

Mistakes to avoid while writing a Will

Making a will: निधन के बाद अपने वारिस और परिजनों को अपनी ओर से कुछ देने की इच्छा सभी की होती है। इसके लिए यदि वसीयतनामा अच्छी तरह जाँचते-परखते हुए कानूनी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में बनाया जाना चाहिए। इस महत्त्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज के लिए मसौदा तैयार करते समय ज़रा सी भी चूक भ्रम पैदा कर सकती है। 

विशेषाधिकार युक्त वसीयत 

साहसिक यात्रा, युद्ध में जाने वाले सिपाही, वायु सैनिकों और नौ-सैनिकों द्वारा जो अनौपचारिक वसीयत बनाई जाती है उसे विशेषाधिकार युक्त वसीयत कहते हैं। यह वसीयत लिखित या मौखिक दोनों रूप में हो सकती है जो उनके अपनी जान जोखिम में डालने के पहले नोटिस द्वारा तैयार की जा सकती है। 

बिना विशेषाधिकार वसीयत 

विशेषाधिकार युक्त वसीयत के अतिरिक्त अन्य सभी वसीयतनामे बिना विशेषाधिकार वसीयत की श्रेणी में आते हैं। इनके लिए सभी तरह की औपचारिकताएँ अनिवार्य होती हैं उदाहरण के तौर पर हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और लिखित वसीयतनामा आदि।

नीचे वसीयत बनाते समय की जाने वाली गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय बताए जा रहे हैं; 

वर्तनी की गलतियाँ (स्पेलिंग मिस्टेक्स) 

कानूनी दस्तावेज़ में वर्तनी में चूक नहीं होनी चाहिए। यदि घर के पते, आई डी प्रूफ या एड्रेस प्रूफ में कहीं भी एक ही व्यक्ति के नाम की अलग-अलग स्पेलिंग हो तो भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में वोटर आईडी जैसा कार्ड भी नहीं बन पाता। इसलिए वसीयतनामे में नाम की वही स्पेलिंग होनी चाहिए जो अन्य दस्तावेजों में लिखी हो। 

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

तथ्यात्मक गलतियाँ 

तिथि और स्थान वसीयतनामा की वैधता निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनका उल्लेख करते समय गलतियाँ नहीं होनी चाहिए। 

वसीयत में अपने नाम तारीख, पते और स्थान का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए। साथ ही लाभार्थियों के साथ संबंधों का भी उल्लेख करना चाहिए। वसीयतनामे को कानूनन दर्ज करवाना अनिवार्य नहीं होता लेकिन उसकी वैधता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक पृष्ठ पर वसीयतनामा लिखने वाले के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान होने चाहिए।

स्पष्टता की कमी 

वसीयत में लिखा गया प्रत्येक वाक्य स्पष्ट रूप से आपकी मंशा को व्यक्त करता है। अलग-अलग अर्थ वाले वाक्यों से भ्रम पैदा होगा और लाभार्थियों के बीच गलतफहमी बढ़ सकती है।

नाबालिग के नाम संपत्ति छोड़ते समय अभिभावक नियुक्त करना अनिवार्य है क्योंकि नाबालिग बच्चा टाइटल होल्डर नहीं हो सकता। अभिभावक की अनुपस्थिति में अदालत को संपत्ति को देखभालकर्ता के रूप में हस्तक्षेप करना होगा । 

अक्सर वसीयतकर्ता निष्पादक एक्ज़िक्यूटर नियुक्त करना भूल जाते हैं। ध्यान रखें कि नाबालिग व्यक्ति निष्पादक नहीं हो सकता। निष्पादक परिवार का कोई भी व्यक्ति हो सकता है। लेकिन वकील को निष्पादक के रूप में नियुक्त करना ज्यादा अच्छा होगा। 

अपने वृद्धावस्था में स्वास्थ्य के देखभाल के लिए पर्याप्त राशि न छोड़ना बड़ी गलती हो सकती है। वसीयतनामा लिखने के पहले अपने लिए प्रावधान न रखते हुए सब कुछ दे देना एक गलत तरीका होगा। 

वसीयत का मसौदा तैयार करते समय वसीयतकर्ता द्वारा होश हवास में निर्णय लेने की शपथ लेते हुए वसीयत करना अच्छा होगा। इससे वसीयत को चुनौती देना मुश्किल हो सकता है। 

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