पे-डे(वेतन दिवस) ऋण: भारत के उपभोक्ता ऋण बाजार की अगली बड़ी बात?

त्वरित निधियों का यह स्रोत, एक नए ऋण के प्रकार के रूप में बहुत सुविधाजनक लग सकता है, लेकिन इसके कई नकारात्मक पक्ष भी है।

पे-डे(वेतन दिवस) ऋण: भारत के उपभोक्ता ऋण बाजार की अगली बड़ी बात?

इसे कहने की ज़रूरत नहीं है कि हमें तत्काल धन की आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान इस ऋण से जीवन बहुत सरल हो गया है। चाहे एक नया घर लेना हो, एक नई कार, एक महंगी कॉलेज की डिग्री, या लंबे समय से प्रतीक्षित कोई विदेशी छुट्टी चाहिए हो - हर उद्देश्य को पूरा करने के लिए, हर इच्छा को पूरा करने के लिए ये ऋण बनाये गए हैं और ताकि हमारे परेशानी कम हो सके ।

लेकिन ये बड़े टिकट ऋण हैं, जहां हमारे क्रेडिट स्कोर की भूमिका शुरू होती है, और हमें ऋणदाता के निगरानी में रखा जाता है, ताकि हमारी ऋण पात्रता को सत्यापित किया जा सके। ये वे ऋण हैं जो बैंक हमें प्रदान करते हैं जब वे हमारे क्रेडिट इतिहास और उधार पात्रता से संतुष्ट होते हैं: जितना अधिक हम स्कोर करते हैं, उतनी ही ज्यादा सम्भावना होती है कि हमारे ऋण आवेदनों को मंजूरी मिल जाए।

और यह वही ऋण है जो हमारे ज़हन में तब आता है जब हम सामान्य रूप से ऋण की बात करते हैं; ऋण जो उधार लेने की एक कठिन प्रक्रिया का पर्याय बन गया है जो हमारी ऋण क्षमता और भुगतान करने की हमारी क्षमता स्थापित करता है |

पे-डे ऋण समाधान

परिदृश्य बदलाव ला सकता है, जो 'पे-डे ऋण ’ नाम से देश में जोश भर रहा था। आवेदक के क्रेडिट इतिहास पता किये बिना ही फंड का यह तेज़ स्रोत जल्दी विकास कर रहा है। यह वह प्राथमिक कारक है जो पे-डे ऋण (जिसे अक्सर एक 'अग्रिम नकद' कहा जाता है) को बहुत सुविधाजनक बनता है जब तत्काल थोड़े नकद की जरूरत होती है ।

मान लें कि यह महीने का अंत है और आपको अपना वेतन प्राप्त करने में कुछ दिन शेष हैं। लेकिन आपको तुरंत कुछ नकदी की आवश्यकता है। तो आप क्या करेंगे ? चिंता न करें ,पे-डे ऋणदाता आपको एक त्वरित समाधान प्रदान करते हैं - एक सीमित अवधि के लिए प्रतिभूति-रहित, अल्पकालिक ऋण जो ऋणदाता के ज़रूरत अनुसार एक दिन, सप्ताह, या लगभग तीन महीने का हो सकता है।

पे-डे ऋण को अक्सर चुकौती अवधि (क्रमशः 30 दिन और 24 घंटे) के अनुसार मासिक ऋण या दैनिक ऋण के रूप में दिया जाता है। हाथ में तुरंत कुछ आवश्यक नकदी प्राप्त करने के अलावा, इसका दोगुना फायदा यह है कि ऋण आवेदन केवल सरल नहीं हैं, लेकिन स्वीकृति भी त्वरित हैं - अक्सर मिनटों में हो जाता है।

यह ध्यान रखें कि 2,000 रुपये जैसी छोटी राशि ही नहीं है जो पे-डे ऋणदाताएँ प्रदान करते हैं|ऋण राशि कुछ लाख रुपये तक हो सकती है।

पे-डे ऋण के लाभ

ऊपर वर्णित कारकों के अलावा, पे-डे ऋणदाताओं के पास कई कारण हैं जो उनके अनुसार इस प्रकार के तात्कालिक ऋण को एक लाभदायक सौदा बनाता है।

उदाहरण के लिए, 'रुपीलेंड' नामक ऋणदाता की वेबसाइट के अनुसार, एक पे-डे ऋण उधारकर्ताओं को बैंक ओवरड्राफ्ट, बाउंस किए गए चेक और क्रेडिट कार्ड के ज्यादा उपयोग से बचने में मदद कर सकता है। साइट का दावा है कि पे-डे ऋण से बिलों में बढ़ते बकाया और अनुचित शुल्क के मामले से बचाता है|

आगे, पृष्ठभूमि की जाँच पे-डे ऋण के साथ बहुत आसान हो जाती है। यह कमजोर क्रेडिट स्कोर वाले लोगों के लिए एक ईश्वर द्वारा भेजी सहायता स्वरुप है, जो खुद को वित्तीय आपात स्थिति में पाते हैं, क्योंकि पे-डे ऋण दाता क्रेडिट इतिहास को महत्त्व नहीं देते हैं। यदि उधारकर्ता की क्रेडिट रिपोर्ट प्रतिकूल या अस्तित्वहीन है, तो भी ऋणदाता ऋण को मंजूरी दे सकते हैं, बशर्ते आवेदक ने एक वैध आई.डी. प्रमाण और आवश्यक पोस्ट-डेटेड चेक दिया हो।

अंत में, उधारकर्ता 18 वर्ष तक की न्यूनतम आयु के हो सकते हैं। रूपेलेंड का तर्क है कि इससे युवाओं को स्वतंत्र होने में मदद मिलती है और वे अपने व्यक्तिगत खर्चों की जिम्मेदारी लेते हैं।

पे-डे ऋण के नुकसान

जिस तरह एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह पे-डे ऋण के भी है। इसमें कुछ गंभीर कमियां हैं, जिससे संभावित उधारकर्ताओं को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।

सबसे पहले, ब्याज की दरें (ए.पी.आर. या वार्षिक प्रतिशत दर) बहुत अधिक हो जाती हैं, कई बार दिन के 1% भी। सामान्य तौर पर, भारत में पे-डे दरें 36% से शुरू होती हैं और सालाना 365% तक जाती हैं। इसके विपरीत, भारत में एक क्रेडिट कार्ड कंपनी महीने में 2-3% शुल्क लेती है। व्यक्तिगत ऋण 10% (फेडरल बैंक) से 20% (यस बैंक) की वार्षिक ब्याज दरों को आकर्षित करते हैं; एस.बी.आई., सिटी, स्टैनचार्ट और एच.एस.बी.सी. जैसे अन्य लोग की दरें,इनके बीच ही कहीं हैं।

और तो और,यदि आप अपना पे-डे ऋण चुकाने में देर करते हैं, तो आप प्रतिदिन के ब्याज शुल्क के अतिरिक्त आपको दैनिक जुर्माना भी चुकाना पड़ेगा। इस प्रकार, यह एक दोहरी मार है: पहला, आपके पास सामान्य से महंगा ऋण है, और दूसरा, किसी भी पुनर्भुगतान में देरी से आपके मूलधन राशि कई गुना अधिक हो जाती है जो नियमित उधार से ज्यादा जुर्माना है।

यह हमें इसके अन्य प्रमुख खामी की ओर ले जाता है: पुनः भुगतान की कम अवधि। इससे उधारकर्ता को राशि के पुनर्भुगतान के लिए बहुत कम समय दिया जाता है। कोई भी देरी पर जुर्माना लागु होता है।

भारत की कहानी

पे-डे ऋण उद्योग भारत में मुख्य रूप से आधार प्राप्त कर रहा है, हमारे वित्तीय क्षेत्र में फिनटेक क्रांति और इसके लिए लोगों की बढ़ती स्वीकृति को धन्यवाद। वर्तमान में, लगभग 22 पे-डे उधारदाता हैं - फिनटेक फर्म और एनबीएफसी - जिनके प्रस्ताव न केवल खराब क्रेडिट स्कोर वाले, बल्कि कॉलेज के छात्रों के बीच भी लोकप्रिय हैं, जिनपे बैंक जैसे नियमित उधारदाता ध्यान नहीं देते हैं।

भारत के त्रैमासिक उपभोक्ता ऋण बाजार की दूसरी तिमाही में 2019 में ट्रांसयूनियन सिबिल की औद्योगिक अंतर्दृष्टि रिपोर्ट में उद्धृत आंकड़े पाए गए है, जिसमें लगभग आधे उधारकर्ता प्रधान अनुभाग के नीचे पाए गए हैं ’ जिसमे ज्यादातर कॉलेज के छात्र थे। रिपोर्ट में कहा गया है, यह पिछले वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में 8.5% की वृद्धि थी, जिससे निष्कर्ष निकलता है: "उच्च जोखिम वाले स्तरों की उत्पत्ति (उधार) में बदलाव देखे गए है।"

यह आशंका जताई गई है कि छात्रों द्वारा पुनर्भुगतान में चूक - जो पहले ही शुरू हो चुकी है - केवल उनके क्रेडिट इतिहास को जोखिम में डाल सकता है। भारत में समस्या यह है कि नियामक, आर.बी.आई. के पास, पे-डे ऋण स्थान में परिचालन करने वाले फिनटेक के लिए कोई नियामक दिशानिर्देश नहीं है,इसके विपरीत (कह सकते हैं) अमेरिका या चीन में ऐसा है।

अमेरिका और चीन से सबक

पे- डे ऋण की अवधारणा, जो अमेरिका में उत्पन्न हुई थी, रीगन युग के बाद से ही अमेरिकियों के बीच लोकप्रिय रही है। लेकिन यह 2007 के पहले ऐसा नहीं था कि हार्वर्ड के प्रोफेसर एलिजाबेथ वारेन, जो अब एक अमेरिकी सीनेटर हैं , उन्होंने पहली बार उपभोक्ता वित्तीय सुरक्षा ब्यूरो (सी.एफ.पी.बी.) की स्थापना का प्रस्ताव किया था जो कि पे-डे की अधिकता के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करे ।

साथ ही, अमेरिकी राज्य कोलोराडो के कानून बनाने वाले भी पे-डे क्षेत्र पर नज़र रख रहे थे और सुधार लाने की योजना बना रहे थे क्योंकि उन्हें लगा कि यह राज्य में कर्जदारों का शोषण करने जैसा है। इस अभ्यास के हिस्से के रूप में, उन्होंने एक कानून पारित किया - 2007 में भी - जिसका उद्देश्य छोटे उधारकर्ताओं को काम खर्च पर काम-डॉलर के ऋण को पाने में मदद करना था |

जब यह कानून बाजार पर हावी बकाया-ऋण भुगतान की जांच करने में विफल रहा, तो कोलोराडो सांसदों ने 2010 में एक नया कानून बनाया जो कि ऋण को किश्तों में और कम दरों पर वापस चुकाना लागु करता था।

अमेरिका की तरह, चीन में अधिकारियों को भी 'अत्यधिक-ऋण देने ’, 'अनियमित चुकौती इकठ्ठा करने' और 'अत्यधिक उच्च ब्याज दरों ' के कारण पे-डे ऋणों की तेजी से हो रही वृद्धि के बाद यह कदम उठाना पड़ा है। दिसंबर 2017 में, चीन के केंद्रीय बैंक और बैंकिंग नियामक ने पे-डे क्षेत्र से जुड़े सभी संगठनों और व्यक्तियों को लाइसेंस प्राप्त करने और शुल्क सहित उनकी व्यापक दरों को स्पष्ट रूप से बताने के निर्देश दिया।

आखिरी शब्द

एक पे-डे ऋण में दो प्रमुख उपयोगकर्ता-अनुकूल विशेषताएं हैं जो ऋण के ज़रूरतमंद लोगो के लिए इसे बहुत आकर्षक बनाती हैं: त्वरित मंजूरी और क्रेडिट स्कोर की न्यूनतम उलझन । लेकिन ध्यान रखें कि अनौपचारिक वादों के बावजूद, पे-डे ऋण उधारदाता आप पर तब तक ध्यान नहीं देंगे जब तक कि आपके पास एक स्थिर नौकरी न हो या समय पर ऋण चुकाने की आपकी क्षमता के बारे में आप उन्हें समझाने में सक्षम हो

इसके अलावा, ब्याज दरें बहुत अधिक हैं; इसलिए यह सलाह दी जाती है कि समझौते में उल्लिखित नियमों और शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें, इससे पहले कि आप खुद एक पे-डे ऋण लें। सावधानी बरतने से आप बाद में होने वाली किसी बड़ी आपदा से बच सकते हैं!




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