पॉजिटिव पे क्या है और यह क्यों प्रासंगिक है?

क्या आपको 'पॉजिटिव पे’ से संबंधित इन नियमों को जानते हैं और क्या आपको पता है कि यह चेक लिमिट के अर्थ में सामान्य आदमी को कैसे प्रभावित कर सकता है?

पॉजिटिव पे क्या है और यह क्यों प्रासंगिक है?

‘पॉजिटिव पे’ एक ऐसा सिस्टम है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 जनवरी 2021 को क्रियान्वित किया ताकि उच्च-कीमत वाले चेक से संबंधित धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिल सके। यह सिस्टम कुछ बर्षों से दूसरे बाजारों में काम कर रहा है, और कुछ भारत में बैंक 2016 से इसे क्रियान्वित कर रहे हैं। इसके बावजूद यह आरबीआई की ओर से एक दिशानिर्देश है न कि कानून है, अर्थात यदि बैंकों को लगता है कि यह उनके लिए ठीक है तो वे इसका उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं।

पॉजिटिव पे कैसे काम करता है?

पॉजिटिव पे एक साधारण सिद्धांत पर काम करता है: उच्च मूल्य के चेक की स्थिति में, लाभार्थी को चेक देने से पहले चेक जारी किए जाने वाले व्यक्ति द्वारा बैंक को सूचित करना होता है, या चेक के क्लियरिंग में जाने पर बैंक एक बार इसे अकाउंट होल्डर के पड़ताल करता है। यदि बैंक को पहले से जारीकर्ता की ओर से सूचित किया जा चुका है, तो यह चेक के बारे में दिए गए विवरणों का सत्यापन करता है, और विवरण के मेल खाने पर ही इसे भुनाता है। बाद के सिस्टम में, प्रस्तुत किया गया चेक नहीं भुनेगा जब तक कि जारीकर्ता बैंक के कम्युनिकेशन का जबाव नहीं देता और इस बात की पुष्टि नहीं कर देता कि विवरण सही हैं।

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पॉजिटिव पे से किसे लाभ मिलेगा?

पहली बात, पॉजिटिव पे वैसे उपभोक्ताओं की मदद करता है जिनके साथ धोखा होने का जोखिम होता है। चेक की धोखाधड़ी में पूरी तरह से नया चेक बनाने से लेकर ऑथेंटिक चेक पर पहले से लिखी राशि को बदलकर अधिक राशि लिखने और चेक पर लाभार्थी के नाम को बदलने का काम किया जा सकता है। पॉजिटिव पे किसी व्यक्ति को धोखाधड़ी के कारण रुपए के नुकसान के जोखिम को कम करने में बहुत मदद करता है। जब कोई व्यक्ति ऐसी जालसाजी का शिकार होता है, तो देनदारी के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है, इसलिए बैंक आमतौर पर इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेते। 

दूसरी बात, पॉजिटिव पे बैंकों को भी धोखाधड़ी से बचाने में मदद करता है - बैंकों में प्रस्तुत किए जाने वाले चेकों की कुल संख्या में 50,000 रुपए से अधिक के चेक 20% ही होते हैं, किंतु लगभग 80% धनराशि का हस्तांतरण चेक के जरिए होता है। इस प्रकार पॉजिटिव पे बैंकों में प्रस्तुत किए जाने वाले चेकों के 80% वैल्यू को सुरक्षित करने में मदद करता है, जो एक अच्छी बात है।

इससे जुड़ी बातें: अपने चेक को जानिए

मैं जब पॉजिटिव पे जारी करता हूं तो क्या मुझे अपने चेक का सत्यापन करना होगा?

सरकार ने यह निर्देश जारी किया है कि 50,000 रुपए से अधिक के चेक को आदर्श रूप से पॉजिटिव पे के जरिए सत्यापित किया जाना चाहिए, और 5 लाख रुपए और इससे अधिक के चेक के लिऐसे अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। हालांकि, जैसा कि पहले बताया गया है, यह कोई कानून नहीं है - यह बैंकों द्वारा एक स्वैच्छिक निर्णय है कि वे इसे क्रियान्वित करते हैं या नहीं।

मैं पॉजिटिव पे का उपयोग कैसे कर सकता हूं?

हरेक बैंक का पॉजिटिव पे के लिए अलग-अलग सिस्टम है। उदाहरण के लिए, आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक के उनके संबंधित मोबाइल फ़ोन ऐप में एक प्रावधान है जहां चेक जारीकर्ता जारी किए हुए चेक का विवरण अपलोड कर सकता है। एचडीएफसी बैंक के लिए अकाउंट में रजिस्टर्ड ईमेल आईडी से एक खास फॉर्मैट में जारीकर्ता को एक ईमेल करना होता है। बैंक यह कह सकता है कि चेक को क्लियरिंग के लिए प्रस्तुत करने से कम से कम 24 घंटे पहले विवरण अपलोड होना चाहिए। अच्छा होगा कि अपने बैंक से पता करें कि आपके लिए सही प्रक्रिया क्या है।

हो सकता है कि अब तक पॉजिटिव पे कानून द्वारा अनिवार्य न हो, लेकिन इसका क्रियान्वयन बड़े लेनदेनों के लिए चेक की धोखाधड़ी को खत्म करने में मदद करने की दिशा में एक कदम हो सकता है। अपने क्रेडिट रिपोर्ट को फ्रॉड से कैसे बचाएं?




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