पेट्रोल की बढ़ती कीमत आपनी वित्तीय स्थिति को किस तरह प्रभावित करेगी

पेट्रोल की कीमत 100 रुपए के पार होना और यह आपकी वित्तीय स्थितियों के लिए क्या मायने रखता है इसके बीच के संबंध को समझें।

पेट्रोल की बढ़ती कीमत आपनी वित्तीय स्थिति को किस तरह प्रभावित करेगी

फरवरी 2021 में भारत में पहली बार राजस्थान और मध्यप्रदेश में पेट्रोल की कीमत 100 रुपए तक पहुंच गई। कच्च तेल की कीमत में हाल की वृद्धि भारतीय वित्तीय स्वास्थ्य और वित्तीय बाजारों के लिए एक चिंता का कारण रहा है। अंतर्राष्ट्रीय रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमत इस समय देश की मैक्रो स्टैबिलिटी (समष्टि स्थिरता) के लिए कोई गंभीर चुनौती नहीं है। ऐसा कहा जाता है, कि भारत को तेल की कीमत बढ़ने से उत्पन्न मौजूदा वित्तीय घाटे और इसके कारण होने वाली महंगाई को संभावलने के लिए बैक फुट पर जाने की जरूरत नहीं है। 

भारत में इंधन तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

मांग में कमी होने के कारण अप्रैल-मई 2020 के दौरान अंतर्राष्ट्रीय तेल की कीमतों में दो दशकों की रिकॉर्ड कमी आई, इसका कारण रहा बढ़ती वैश्विक महामारी के कारण लगाए जाने वाले प्रतिबंध। यह मार्च 2020 में शुरू होने वाले रूस और सऊदी अरब के बीच होने वाले तेल मूल्य युद्ध के प्रभाव से और अधिक जटिल हो गया। 

21 अप्रैल 2021 को, कच्चे तेल की कीमतें 2020 के शुरुआत में $ 70 प्रति बैरल की तुलना में $ 9.12 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। हालांकि, ज्यों ही देश लॉकडाउन से बाहर आए और ओपेक (ओपीईसी) देशों ने तेल उत्पादन में कमी लाने का फैसला किया, तो अब कच्चे तेल की कीमतें 6 अप्रैल 2021 तक 62.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं।

भारत में तेल की ऊंची कीमतों के पीछे के कारणों की व्याख्या करने से पहले, साल 2010 के बाद से हुई ईंधन की कीमतों के नियंत्रण के बारे में बात करना महत्वपूर्ण है। 2010 में पेट्रोल पर और 2014 में डीजल पर से नियंत्रण खत्म होने के बाद, तेल विपणन कंपनियों को सरकार से सब्सिडी मिलना बंद हो गया। 2017 के बाद से, ये कंपनियां रोज-रोज तेल की कीमतों में बदलाव लाने के लिए स्वतंत्र हो गईं। 

भारत में, पूरे 2020 में तेल की कीमतों में वृद्धि होती रही और 2021 के पहले कुछ महीनों में भी लगातार बढ़ोतरी होती रही। 1 जनवरी 2020 को, मुम्बई में पेट्रोल की कीमत 80.8 रुपए प्रति लीटर थी और डीजल की कीमत 71.3 रुपए प्रति लीटर थी। 26 फरवरी 2021 तक, मुम्बई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रामश: 97.3 रुपए प्रति लीटर और 88.4 रुपए प्रति लीटर हो गई थी। परिस्थिति इतनी बिगड़ गई कि अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर के निकट के इलाके में रहने वाले कुछ लोगों ने पड़ोसी देशों से इंधन की स्मग्लिंग करनी शुरू कर दी। 

जैसा कि स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी होने के बावजूद, भारत में तेल की कीमतें उच्च बनी हुई हैं। यह मुख्य रूप से इसलिए हो रहा है क्योंकि:

  • वैश्विक महामारी के कारण भारत सरकार को देशव्यापी लॉकडाउन लागू करना पड़ा, जिसके कारण आर्थिक गतिविधि रुक गई। इससे जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स, इनकम टैक्स के साथ-साथ लिकर और पेट्रोलियम पर लगाए गए उपकर से सरकार का राजस्व प्रभावित हुआ।
  • सरकार द्वारा विभिन्न स्टेकहोल्डरों को सहायता प्रदान देने के लिए घोषित किए गए वित्तीय पैकेजों के लिए धन्यवाद, जो लॉकडाउन से प्रभावित थे, जिसके कारण सरकारी खर्चे बढ़ गए। 
  • सरकार ने उपरोक्त परिस्थितियों के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले करों में वृद्धि की। संयोग से, कर लगभग 60% है जिसका भुगतान उपभोक्ता फ्यूल पंपों पर करते हैं।

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नीचे दिए गए टेबल में तेल की कीमत के कॉम्पोनेंट्स की एक संपूर्ण तस्वीर दी गई है 

तेल की कीमत के कॉम्पोनेंट्स

मई 2014 (दिल्ली में तेल की कीमत = रु. 71.41 प्रति लीटर)

फरवरी 2021 (दिल्ली में तेल की कीमत = रु. 86.30 प्रति लीटर)

तेल की आधार कीमत

63% (रु. 44.98)

36% (रु. 31.07)

डीलर कमीशन

3% (रु. 2.14)

4% (रु. 3.45)

राज्य कर

18% (रु. 12.85)

23% (रु. 19.84)

केंद्रीय कर

16% (रु. 11.42)

37% (रु. 31.93)

अर्थव्यवस्था और आपकी वित्तीय स्थितियों पर तेल की कीमतों में उछाल का प्रभाव

प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल की कीमतों में वृद्धि से सभी उद्योग, संगठन और देश के लोग प्रभावित होते हैं। प्रभावित होने वाले कुछ सबसे प्रमुख क्षेत्रों के बारे में जानने के लिए पढ़ें।

ईंधन बिल में वृद्धि

यदि आपके पास एक निजी वाहन है जो पेट्रोल या डीजल पर चलता है, तो आप पहले से ही तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव महसूस करेंगे। उदाहरण के लिए, मान लें कि किसी व्यक्ति के पास एक कार है प्रति दिन 36 km चलती है।  यह चार पहिया वाहन शहर के अंदर 12 km प्रति लीटर का माइलेज देता है। इसका मतलब है कि वाहन प्रति दिन 3 लीटर पेट्रोल की खपत करता है। जब जनवरी 2020 में पेट्रोल की कीमत 80 रुपए प्रति लीटर थी, तो यह व्यक्ति प्रति दिन पेट्रोल पर लगभग 240 रुपए खर्च कर रहा था। फरवरी 2021 तक, पेट्रोल की कीमत 97 रुपए हो जाने पर, यह व्यक्ति प्रति दिन पेट्रोल पर लगभग 291 रुपए खर्च करेगा। यह भारी रूप से 20% की वृद्धि है।

प्रोफेशनल सुझाव: आप व्यक्तिगत परिवहन का उपयोग कम करके और आवश्यकता पड़ने पर ही अपनी गाड़ी निकालकर ऐसे खर्च को कम कर सकते हैं। साप्ताहिक बाहर घूमना कम हो सकता है क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए अपने अवकास और मनोरंजन की दिशा में समर्पित संसाधनों को दुबारा निर्धारित करने पर मजबूर हो सकते हैं।

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एयर ट्रैवल किराए में वृद्धि

आमतौर पर, कुल घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा भी महंगी हो सकती है क्योंकि एयरलाइंस भी अपने टिकट की कीमतों को बढ़ा सकते हैं ताकि तेल की दरों में हुई वृद्धि की क्षतिपूर्ति की जा सके। एयर ट्रिब्यूनल फ्लूय (एटीएफ) में भारतीय एयर कैरियर कंपनी का 40% परिचालन खर्च शामिल होता है। पिछले कुछ महीनों में जेट फ्यूल दरों में वृद्धि हुई है। 

एटीएफ किलोलीटर की कीमत मुम्बई एयरपोर्ट पर 1 जून 2020 को 26,456 रुपए थी। 1 जनवरी 2021 तक, यह बढ़कर 39,267 रुपया हो गया। यह उछाल एयरफेयर मेंदिखाई देता है जैसा कि इस तथ्य से जाहिर है कि मुम्बई से दिल्ली तक के टिकट की कीमत रु. 3500-रु.10,000 से बढ़कर रु. 3900-रु. 13,000 हो गई।

प्रोफेशनल सुझाव: अपनी यात्रा की योजना बनाएं और एडवांस में टिकटें बुक करें। यदि आपका बजट सीमित है, तो आप ट्रेन से यात्रा करने पर भी विचार कर सकते हैं।

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आवश्यक वस्तुओं की कीमत में वृद्धि

पेट्रोल की तेजी से बढ़ती कीमतों के कारण इन वस्तुओं की देशभर में परिवहन की खर्च में वृद्धि के परिणामस्वरूप आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। ट्रेनों और ट्रकों के डीजल पर चलने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर आवश्यक वस्तुओं का परिवहन पेट्रोल पर चलने वाले वाहनों के जरिए किया जाता है। स्पष्ट रूप से, स्थानीय ट्रांसपोर्टर पर अंतिम ग्राहक के लिए मूल्य में वृद्धि का बोझ होता है, जो कि वस्तुओं की कीमत में दिखाई देता है। हाल के दिनों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कहीं भी 10% से 30% के बीच वृद्धि हुई।

उदाहरण के लिए, लॉजिस्टिक फर्म्स ने अपनी दरों में खाद्य पदार्थों और सब्जियों के परिवहन के लिए 1 रुपया प्रति किलोग्राम की वृद्धि की। मध्यवर्गीय परिवारों को झटका महसूस होगा क्योंकि उनके ग्रॉसरी शॉपिंग बास्केट में सब्जियां अधिक मात्रा में होती हैं। वे सब्जियों की खरीदारी के समय 5%-7% अधिक खर्च कर सकते हैं।

प्रोफेशनल सुझाव: यदि आप ऑफलाइन खरीदारी करते हैं, तो आप एक उचित छूट के बदले नियमित रूप से अपने एक ही वेंडर से खरीद सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, आप ऐसे ऑनलाइन विकल्पों को आजमा सकते हैं जो कुछ निश्चित प्रावधानों पर बेहतरीन डील दे सकते हैं। साथ ही महंगे आयटमों को हटाकर सस्ते विकल्प लेने पर विचार करें। परिवार के सदस्यों को विश्वास में लेकर और इसका कड़ाई से पालन करके अपना मासिक फिक्स कर सकते हैं। 

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विदेश में शॉपिंग करना या पढ़ाई करना महंगा हो सकता है

क्योंकि पेट्रोल की कीमत बहुत ऊंची है, इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से एक और असर यह है कि घाटे के साथ आयात की लागत भी लगातार बढ़ रही है। अंतिम असर यह होता है कि रुपया बहुत दबाव में आ जाता है। रुपये के अवमूल्यन का अर्थ है कि आपको विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के लिए और भी बहुत कुछ करना होगा। इसलिए, यदि आप विदेश यात्रा करने या विदेश में कोर्स करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके खर्चों में वृद्धि होगी।

प्रोफेशनल सुझाव: यदि संभव हो तो, अब अंतर्राष्ट्रीय यात्रा या एक विदेशी शिक्षा की योजनायों को ठंडे बस्ते में रखें और दिनों के लिए घरेलू विकल्प आजमाएं। 

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अंतिम शब्द

इस बात में कोई शक नहीं कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है। इसका उपभोक्ताओं की खर्च करने की आदतों पर पुनर्विचार करने के साथ उनके आत्मविश्वास से सीधा-सीधा जुड़ाव है। इन परिस्थितियों में सबसे अच्छा तरीका यह है, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि सरकार के पास इस घटना को नियंत्रित करने का सीमित विकल्प है, अपनी वित्तीय स्थितियों को बदलना होगा। कच्चे तेल के स्टॉक्स: क्या वे निवेश के अच्छे प्रकार है?




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