FD पर ब्याज भुगतान: ओवरड्यु सावधि जमा पर RBI का नया नियम

अगर सावधि जमा निवेशक समय पर परिपक्वता राशि का दावा नहीं करते हैं, तो वे लाभ से वंचित रह सकते हैं।

RBI की नवीनतम मौद्रिक नीति समीक्षा FD निवेशकों को कैसे प्रभावित करती है

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी नवीनतम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में कुछ घोषणाएँ की जो लाखों सावधि जमा निवेशकों को प्रभावित करेंगी। जिसके अपडेट निम्न हैं।

रेपो और रिवर्स रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं

RBI ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट को क्रमश: 4% और 3.35% पर अपरिवर्तित रखा है। इसका मतलब है कि सावधि जमा निवेश पर कम लाभ फिलहाल बना रहेगा। वर्तमान में अधिकांश बैंक गैर-वरिष्ठ नागरिक जमा के लिए प्रति वर्ष 4.25% और 5.75% के बीच ब्याज प्रदान कर रहे हैं, जबकि कुछ निजी बैंक 7.25% तक प्रदान करते हैं। 

चूँकि, बैंक जमा पर लाभ निवेशक के टैक्स स्लैब के आधार पर पूरी तरह से कर योग्य है, इसलिए यह ध्यान में रखना चाहिए कि वास्तविक लाभ और कम हो जाएगा।

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दावा न की गई जमाराशियों के संबंध में नए नियम 

नए नियमों के अनुसार, अगर कोई सावधि जमा परिपक्व हो जाती है और आय का भुगतान नहीं किया जाता है, तो दावा न की गई राशि पर बचत खाते पर लागू ब्याज या परिपक्व जमा पर अनुबंधित ब्याज दर, जो भी कम हो, की दर से ब्याज मिलेगा। यह परिवर्तन सभी वाणिज्यिक बैंकों, छोटे वित्त बैंकों, सहकारी बैंकों और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों में जमा पर लागू हैं।

अब तक, दावा न की गई जमाराशियों पर केवल उस स्थिति में बचत खाते पर लागू ब्याज दर लगाई जा सकती थी, जब जमा परिपक्व हो जाती थी और आय का भुगतान नहीं किया जाता था। इस बदलाव के साथ, बैंक अब दावा न किए गए जमा पर ब्याज का भुगतान करते समय दो अलग-अलग बेंचमार्क में से चुन सकते हैं। 

यह देखते हुए कि दावा न किए गए बैंक जमा की मात्रा लगातार बढ़ रही है, इस निर्देश का उद्देश्य निवेशकों को उनके फंड को बेकार छोड़ने से हतोत्साहित करना है। दावा न किए गए जमा का मूल्य 2018 में ₹14,307 करोड़ से 28% से अधिक बढ़कर 2019 में ₹18,380 करोड़ हो गया।