वे क्षेत्र जिन्‍हें यूक्रेन-रूस युद्ध से लाभ मिला

यूक्रेन युद्ध की आपातिक स्थिति जैसे-जैसे आगे बढ़ रही हैं, सीमा के दोनों ओर सामरिक और सैन्य हार्डवेयर एक भयंकर युद्ध के लिए तैयार हैं, साथ ही रूस सैनिकों और अतिरिक्‍त सैन्‍य को यूक्रेन की ओर ले जा रहा है और पूर्वी यूरोप की सीमाओं की रक्षा के लिए नाटो किलाबंदी कर रहा है। प्रत्येक पक्ष ने युद्ध और शस्त्रों के ऐलान के साथ इसे जारी रखा है, और यूक्रेन के प्रभावित क्षेत्रों में वास्तव में क्या हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी पाना मुश्किल है। विशेष रूप से, रूस ने, पिछले दो दशकों में अपने बड़े पैमाने पर अप्रयुक्त हथियारों को तेजी से अपडेट करने में काफी समय बिताया है, और वह हथियारों की बढ़ी हुई बिक्री से जुड़ी लागतों को तत्काल वसूलना चाहता है।

वे क्षेत्र जिन्‍हें यूक्रेन-रूस युद्ध से लाभ मिला

परिचय

संघर्ष का संकल्प सकारात्मक रूप से मदद करेगा, फिर भी रूसी सेना की नई खोजी गई ताकत के बारे में नाटो द्वारा चिंता व्‍यक्‍त करना कच्चे तेल के व्यवसाय, ऑटोमोबाइल क्षेत्रों आदि के लिए बहुत लाभदायक है। घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के विभिन्न क्षेत्र अचानक युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, और कुछ क्षेत्रों को बड़ी मात्रा में लाभ भी मिल रहे हैं। कच्चे तेल, सनफ्लावर ऑइल, कच्चे माल, आपूर्ति शृंखला, लॉजिस्टिकल लागत आदि के मूल्यों में काफी उतार-चढ़ाव आया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के आर्थिक लाभ क्या हैं?

पिछले साल, रूस यूरोपियन यूनियन को गैसीय पेट्रोल और तेल उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा सप्‍लायर था, और ये तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा करके जीडीपी विकास को प्रभावित कर रहे हैं। दुनिया भर में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की

कीमतों में बदलाव को नीचे दिए गए डेटा में देखा जा सकता है:

  • 2020 में तेल की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 0.4% थी।
  • 2022 में तेल की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 1.1% है
  • 2020 में गैस की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 0.32% थी।
  • 2022 के दौरान गैस की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 0.64% है।

यूक्रेन में रूस की घुसपैठ को देखते हुए, 2012 के आसपास से, तेल की कीमतें अपने उच्‍चतम स्‍तर तक बढ़ गई है, क्‍योंकि खरीदार लगातार रूस के कच्चे तेल को खरीदने से बच रहे हैं। रूस-यूक्रेन के चल रहे युद्ध, जिसने विभिन्न संगठनों में सामान के विज्ञापन सहित घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित किया है, ने विभिन्न देशों को अनरिफाइंड कंपोनेंट्स और पेट्रोलियम उद्योग के कच्चे माल के लिए रूस के विकल्पों की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है। यूक्रेन के साथ सैन्य तनाव के परिणामस्वरूप रूस पर लगाए गए मौद्रिक प्रतिबंधों को देखते हुए, यह एक आश्चर्य के रूप में आया।

पूरे भारत में फायदा पाने वाले क्षेत्र

इस जारी युद्ध से लाभ पाने वाले कुछ क्षेत्रों में भारत की लार्ज-कैप आईटी इंडस्‍ट्री, फाइनेंशियल, और कैपिटल गुड्स हैं। यूक्रेनी और पूर्वी यूरोपीय बाजारों से बाहर निकलने की इच्छुक कंपनियों को भारत का आईटी क्षेत्र आकर्षक लग सकता है।  
भारत में दूसरा सेक्‍टर जो संकट में लचीला रह सकता है वह कृषि क्षेत्र है, जिसके पास वर्तमान में अर्थव्‍यवस्‍था को चलाने के लिए पर्याप्‍त सामान है, भले ही रूस की सप्‍लाई बाधित हो जाती है। 
स्पाइक मुख्य रूप से आपूर्ति-साइड की गड़बड़ी की आशंका से प्रेरित है, क्योंकि यूक्रेन में एक रूसी हमले ने डोनेट्स्क और लुहान्स्क के असंतुष्ट क्षेत्रों में पुतिन की सेना की तैनाती के बाद संभावित खतरा पैदा कर दिया है। यूक्रेन में रूसी घुसपैठ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिफाइंड सप्‍लाई को बाधित कर सकती है और साथ ही अमेरिका और यूरोप द्वारा प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक रूस और वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का उत्पादक यूक्रेन, के बीच तनाव के बाद सप्‍लाई संबंधी चिंताओं के कारण पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।
एक बार फिर, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि परिस्थितियां और बाजार किस दिशा में जाएंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि हम ऊर्जा की उच्च लागत और कच्चे तेल की उच्‍च कीमतों के लिए तैयार हैं जो युद्ध से प्रेरित होती हैं और बाजार की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों के साथ जुड़ी होती हैं, जो ऐसी दर से बढ़ रही हैं जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले कभी नहीं देखी गई।

बढ़ती लागतें बाजार में ग्राहकों की वित्तीय स्थिति के प्रति असंवेदनशील है। अपनी गैस और ऊर्जा की मांगों को पूरा करने के लिए, सरकारें बिजली और पावर के उच्‍च बिलों का अनुरोध कर रही हैं। इसके अलावा, ऊर्जा की उच्च लागत अनिवार्य रूप से सभी लेबर और प्रोडक्‍ट की कीमत को बढ़ा रही हैं, जिससे दुनिया भर में मंदी और आर्थिक तनाव के खतरे बढ़ रहे हैं।

परिचय

संघर्ष का संकल्प सकारात्मक रूप से मदद करेगा, फिर भी रूसी सेना की नई खोजी गई ताकत के बारे में नाटो द्वारा चिंता व्‍यक्‍त करना कच्चे तेल के व्यवसाय, ऑटोमोबाइल क्षेत्रों आदि के लिए बहुत लाभदायक है। घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के विभिन्न क्षेत्र अचानक युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, और कुछ क्षेत्रों को बड़ी मात्रा में लाभ भी मिल रहे हैं। कच्चे तेल, सनफ्लावर ऑइल, कच्चे माल, आपूर्ति शृंखला, लॉजिस्टिकल लागत आदि के मूल्यों में काफी उतार-चढ़ाव आया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के आर्थिक लाभ क्या हैं?

पिछले साल, रूस यूरोपियन यूनियन को गैसीय पेट्रोल और तेल उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा सप्‍लायर था, और ये तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा करके जीडीपी विकास को प्रभावित कर रहे हैं। दुनिया भर में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की

कीमतों में बदलाव को नीचे दिए गए डेटा में देखा जा सकता है:

  • 2020 में तेल की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 0.4% थी।
  • 2022 में तेल की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 1.1% है
  • 2020 में गैस की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 0.32% थी।
  • 2022 के दौरान गैस की कीमतों में प्रतिशत वृद्धि 0.64% है।

यूक्रेन में रूस की घुसपैठ को देखते हुए, 2012 के आसपास से, तेल की कीमतें अपने उच्‍चतम स्‍तर तक बढ़ गई है, क्‍योंकि खरीदार लगातार रूस के कच्चे तेल को खरीदने से बच रहे हैं। रूस-यूक्रेन के चल रहे युद्ध, जिसने विभिन्न संगठनों में सामान के विज्ञापन सहित घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित किया है, ने विभिन्न देशों को अनरिफाइंड कंपोनेंट्स और पेट्रोलियम उद्योग के कच्चे माल के लिए रूस के विकल्पों की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है। यूक्रेन के साथ सैन्य तनाव के परिणामस्वरूप रूस पर लगाए गए मौद्रिक प्रतिबंधों को देखते हुए, यह एक आश्चर्य के रूप में आया।

पूरे भारत में फायदा पाने वाले क्षेत्र

इस जारी युद्ध से लाभ पाने वाले कुछ क्षेत्रों में भारत की लार्ज-कैप आईटी इंडस्‍ट्री, फाइनेंशियल, और कैपिटल गुड्स हैं। यूक्रेनी और पूर्वी यूरोपीय बाजारों से बाहर निकलने की इच्छुक कंपनियों को भारत का आईटी क्षेत्र आकर्षक लग सकता है।  
भारत में दूसरा सेक्‍टर जो संकट में लचीला रह सकता है वह कृषि क्षेत्र है, जिसके पास वर्तमान में अर्थव्‍यवस्‍था को चलाने के लिए पर्याप्‍त सामान है, भले ही रूस की सप्‍लाई बाधित हो जाती है। 
स्पाइक मुख्य रूप से आपूर्ति-साइड की गड़बड़ी की आशंका से प्रेरित है, क्योंकि यूक्रेन में एक रूसी हमले ने डोनेट्स्क और लुहान्स्क के असंतुष्ट क्षेत्रों में पुतिन की सेना की तैनाती के बाद संभावित खतरा पैदा कर दिया है। यूक्रेन में रूसी घुसपैठ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिफाइंड सप्‍लाई को बाधित कर सकती है और साथ ही अमेरिका और यूरोप द्वारा प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक रूस और वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का उत्पादक यूक्रेन, के बीच तनाव के बाद सप्‍लाई संबंधी चिंताओं के कारण पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।
एक बार फिर, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि परिस्थितियां और बाजार किस दिशा में जाएंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि हम ऊर्जा की उच्च लागत और कच्चे तेल की उच्‍च कीमतों के लिए तैयार हैं जो युद्ध से प्रेरित होती हैं और बाजार की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों के साथ जुड़ी होती हैं, जो ऐसी दर से बढ़ रही हैं जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले कभी नहीं देखी गई।

बढ़ती लागतें बाजार में ग्राहकों की वित्तीय स्थिति के प्रति असंवेदनशील है। अपनी गैस और ऊर्जा की मांगों को पूरा करने के लिए, सरकारें बिजली और पावर के उच्‍च बिलों का अनुरोध कर रही हैं। इसके अलावा, ऊर्जा की उच्च लागत अनिवार्य रूप से सभी लेबर और प्रोडक्‍ट की कीमत को बढ़ा रही हैं, जिससे दुनिया भर में मंदी और आर्थिक तनाव के खतरे बढ़ रहे हैं।

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