प्रोत्साहन पैकेज 3.0 : आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के बारे में वो सब जो आपको जानना चाहिए

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना ने उन नियोक्तओं के लिए अग्रिम सब्सिडी की पेशकश की है जो नए या पुराने निकाले गए कर्मचारियों को नौकरी पर रख रहे हैं |

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के बारे में वो सब जो प्रोत्साहन पैकेज 3.आपको जानना चाहिए

वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने 12 नवंबर 2020 को तृतीय प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की ,जिसमे इ.पी.एफ.ओ. योगदान के लिए आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना शामिल है | इस योजना द्वारा नियोक्ताओं को सब्सिडी देकर नयी नौकरियों के अवसर बनाने का लक्ष्य रखा गया है | कर्मचारी प्रोविडेंट फंड संगठन (इ.पी.एफ.ओ.) में पंजीकृत संगठन, नए नियुक्त कर्मचारियों के लिए इस सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं| 30 जून 2021 तक की गई नियुक्तियां इसके लिए पात्र होंगी|

इ.पी.एफ.ओ. में पंजीकृत संगठन कम से कम 2 कर्मचारियों को जोड़कर इस योजना के पात्र हो सकते हैं | तदनुसार, यदि सितम्बर 2020 तक किसी संगठन के 50 या उससे कम कर्मचारी थे,तो वह उस योजना के तहत कवर किये जाएंगे यदि उन्होंने कम से कम 2 नए कर्मचारियों को शामिल किया हो | यदि कर्मचारियों की संख्या 50 से अधिक हो गई हो तो कंपनी को इस योजना के योग्य होने के लिए 5 या उससे अधिक कर्मचारियों को जोड़ना होगा |

1 अक्टूबर 2020 से 30 जून 2021 के बीच कार्यबल में लोगों को जोड़ने पर,संगठनों को अगले दो वर्षों के लिए इस योजना का लाभ उठाने मिलेगा | यह योजना तब भी लागू होगी यदि नियोक्ता उन कर्मचारियों को नौकरी पर रखें, जिन्होंने 1 मार्च 2020 से 30 सितम्बर 2020 के बीच अपनी नौकरी खोयी थी | वे कर्मचारी जो 15000 रुपये तक की मासिक आय के साथ नौकरी शुरू करेंगे,वे सभी इस योजना के पात्र होंगे |

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के अंतर्गत सरकार, कर्मचारियों की ओर से उनके इ.पी.एफ.ओ. खाते में प्रोविडेंट फंड की राशि का योगदान करेगी | 1000 कर्मचारियों से कम संख्या वाले संगठनों में सरकार, कर्मचारियों और नियोक्ताओं द्वारा किये जाने वाले 12-12% योगदान स्वयं की ओर से करेगी| 1000 कर्मचारियों से ज्यादा संख्या वाले बड़े संगठनों में सरकार केवल कर्मचारियों द्वारा की जाने वाले 12% योगदान में मदद करेगी | यह सब्सिडी कर्मचारी के आधार लिंक्ड इ.पी.एफ.ओ. खाते में तुरंत स्थानांतरित की जाएगी|

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना से किसे लाभ होता है और कैसे?

नियोक्ता और कर्मचारी,दोनों ही इस योजना से लाभान्वित होते हैं | नियोक्ताओं के लिए, इससे इ.पी.एफ. में नियोक्ता द्वारा किये जाने वाले 12% योगदान का खर्चा बचेगा | छोटे संगठनों के कर्मचारी अपने वेतन से 12% कम कटौती होता देखेंगे | इससे उनको कम से कम दो वर्ष के लिए अतिरिक्त तरलता देखने को मिलेगी | इससे महामारी में नौकरी खोये लोगों की उम्मीद वापस जागती है क्यूंकि यह योजना कंपनियों को नौकरी से निकाले गए लोगो को फिर से नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहित करती है |

प्रोत्साहन पैकेज 3.0 के तहत अन्य क्या लाभ प्रदान किये गए हैं ?

इ.पी.एफ.ओ. लाभ के अलावा, एक आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना भी व्यापारों के लिए जारी की गई है जिसमे एम.एस.एम.इ.,एकल व्यापार और जिन लोगों ने व्यावसायिक उद्देश्य से ऋण लिया था,वे मुद्रा कर्ज़दार भी शामिल हैं | लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के फंड के लिए 10 क्षेत्रों का चयन किया गया है जिससे उनकी घरेलु उत्पादन,निवेश,नियुक्ति और निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके |

पी.एम. आवास योजना (शहरी) के लिए 18,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी निर्धारित की गई है| सरकारी निविदाओं पर प्रदर्शन सुरक्षा राशि और बयाना जमा राशि ,जो पहले 5-10% थी ,अब घटकर 3% हो गई है | इसके अलावा, घर खरीदारों और बिल्डरों के लिए आयकर में राहत भी दी गई है , इंफ्रास्ट्रक्चर के फाइनेंस के लिए,कृषि सहायता के लिए ,ग्रामीण रोजगार के लिए, प्रोजेक्ट के निर्यात के लिए,उद्योगी और पूंजी खर्चों के लिए और कोविड के वैक्सीन के अनुसंधान और विकास के लिए सरकारी निवेश की घोषणा की गई है |

प्रोत्साहन पैकेज में अभी तक क्या पेश किया गया है ?

इस वर्ष के शुरुआत में, सरकार ने महामारी के प्रभाव को संभालने के लिए बहु-प्रचारित 'जी.डी.पी. का 10%' प्रोत्साहन पैकेज जारी किया था | इसमें गरीबों के लिए गरीब कल्याण योजन ,राज्यों के लिए आर.बी.आई. द्वारा अग्रिम भुगतान और ओवरड्राफ्ट सीमा को बढ़ाना, आयकर रिफंड का शीघ्र वितरण, आपातकालीन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया पैकेज के लिए 15,000 करोड़ रुपये, बैंकों की उधार लेने की सीमा को बढ़ाना, एम.एस.एम.इ. समेत अन्य व्यापारों के लिए ऋण, इ.पी.एफ. योगदान ,एन.बी.एफ.सी. और एच.एफ.सी. के लिए 30,000 करोड़ की तरलता योजना ,कृषि ऋण, प्रवासियों और शहरी गरीबों के लिए सहायता ,उद्योगी क्षेत्रों के लिए शीघ्र निवेश मंजूरी प्रक्रिया ,मनरेगा के लिए 40,000 करोड़ रुपये आदि शामिल थे