Things to know before making a rent agreement! : किराया समझौता बनाने से पहले इन्हें जानना ज़रूरी है!

किराया समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले उसमें लिखी शर्तें ध्यान से पढ़ लें।

रेंट एग्रीमेंट

Importance of rent agreement: अगर आप किसी मकान में किराये पर रहते हैं या रहने जा रहे हैं तो किराया समझौता बनवाना बहुत ज़रूरी है। समझौते में शर्तों के लिखे होने पर मकानमालिक और किरायेदार दोनों को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों का पता होता है और विवाद की संभावना कम रहती है। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों को किराये कि प्रतिपूर्ति या आयकर में छूट पाने के लिए भी किराये की रसीद और समझौता जमा करना होता है। किराया समझौता बनाने के लिए कुछ बातों का जानना बहुत ज़रूरी होता है। आइए उन बातों पर विस्तार से चर्चा करते हैं। 

पहली बात किराया कितना होगा और कितने समय के बाद इसे बढ़ाया जाएगा और किस अनुपात में बढ़ाया जाएगा।अगर समझौते वृद्धि का उल्लेख नहीं किया गया है तो आप इस बारे में मोलभाव कर सकते हैं। अब किराया समझौता 11 महीने के लिए होता है और उसके बाद उसे फिर से नवीकृत कराया जाता है। इस समझौते को पंजीकृत कराना भी ज़रूरी है। अक्सर मकान मालिक साल में 10 प्रतिशत तक किराया बढ़ाते हैं। इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट और मकान खाली करने के समय लागू होने वाली शर्तों को भी जानना होगा। साथ ही इसमें समझौते के रद्द होने और इसके लिए तय नोटिस पीरियड की बात भी होती है। 

यह भी देख लें कि समझौते में किराया देर से देने पर कोई जुर्माना देने की बात तो नहीं है। किराया चुकाने की तारीख भी साफ तौर पर लिखी होनी चाहिए। किराया समय से चुकाना चाहिए। इसके अलावा बिजली, पानी के बिल, हाउस टैक्स और अन्य सुविधाओ के बदले किए जाने वाले भुगतान पर भी ध्यान देना चाहिए। ।

मकान को किराये पर लेने से पहले, उसे अच्छी तरह देख लें। दीवार, फर्श, पेंट, बिजली के सामान, किचन, बाथरूम की फिटिंग सबकी जांच कर लें। कुछ ठीक न हो तो मकान मालिक से उसे ठीक कराने को कहें। ऐसा न करने पर आपको उस खराबी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

यह भी साफ कर लें कि घर के नियमित रखरखाव और रंगाई-पुताई की जिम्मेदारी किसकी होगी। समझौते में यह साफ़-साफ़ लिखा होना ज़रूरी है। यह भी साफ कर लें कि अगर आप मरम्मत पर खर्च करेंगे तो वह किराये में कटेगा या मकान मालिक उसे वापस करेगा।

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सभी नियमों और शर्तों पर ध्यान देना ज़रूरी

किराये के समझौते में कुछ और नियम एवं शर्तें भी लिखी होती हैं। इसलिए इसे ध्यान से पढ़ें। कई मकान मालिक पालतू जानवर रखने या आमिष खाने और देर से आने जाने पर पाबन्दी जैसी बातें भी इस समझौते में लिखवाते हैं। यह भी पता कर लें कि आप सीधे मकान मालिक से किराये पर मकान ले रहे हैं या किसी और से। सेल डीड जैसे दस्तावेज़ों को ठीक से जांच लें।

अगर आप इन सारी बातों को ध्यान रखकर, सारी शर्तें पहले तय करके मकान लेंगे तो बाद में उत्पन्न होने वाले किसी भी विवाद से बचे रहेंगे।

यह भी पढ़ेंमार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

Importance of rent agreement: अगर आप किसी मकान में किराये पर रहते हैं या रहने जा रहे हैं तो किराया समझौता बनवाना बहुत ज़रूरी है। समझौते में शर्तों के लिखे होने पर मकानमालिक और किरायेदार दोनों को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों का पता होता है और विवाद की संभावना कम रहती है। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों को किराये कि प्रतिपूर्ति या आयकर में छूट पाने के लिए भी किराये की रसीद और समझौता जमा करना होता है। किराया समझौता बनाने के लिए कुछ बातों का जानना बहुत ज़रूरी होता है। आइए उन बातों पर विस्तार से चर्चा करते हैं। 

पहली बात किराया कितना होगा और कितने समय के बाद इसे बढ़ाया जाएगा और किस अनुपात में बढ़ाया जाएगा।अगर समझौते वृद्धि का उल्लेख नहीं किया गया है तो आप इस बारे में मोलभाव कर सकते हैं। अब किराया समझौता 11 महीने के लिए होता है और उसके बाद उसे फिर से नवीकृत कराया जाता है। इस समझौते को पंजीकृत कराना भी ज़रूरी है। अक्सर मकान मालिक साल में 10 प्रतिशत तक किराया बढ़ाते हैं। इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट और मकान खाली करने के समय लागू होने वाली शर्तों को भी जानना होगा। साथ ही इसमें समझौते के रद्द होने और इसके लिए तय नोटिस पीरियड की बात भी होती है। 

यह भी देख लें कि समझौते में किराया देर से देने पर कोई जुर्माना देने की बात तो नहीं है। किराया चुकाने की तारीख भी साफ तौर पर लिखी होनी चाहिए। किराया समय से चुकाना चाहिए। इसके अलावा बिजली, पानी के बिल, हाउस टैक्स और अन्य सुविधाओ के बदले किए जाने वाले भुगतान पर भी ध्यान देना चाहिए। ।

मकान को किराये पर लेने से पहले, उसे अच्छी तरह देख लें। दीवार, फर्श, पेंट, बिजली के सामान, किचन, बाथरूम की फिटिंग सबकी जांच कर लें। कुछ ठीक न हो तो मकान मालिक से उसे ठीक कराने को कहें। ऐसा न करने पर आपको उस खराबी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

यह भी साफ कर लें कि घर के नियमित रखरखाव और रंगाई-पुताई की जिम्मेदारी किसकी होगी। समझौते में यह साफ़-साफ़ लिखा होना ज़रूरी है। यह भी साफ कर लें कि अगर आप मरम्मत पर खर्च करेंगे तो वह किराये में कटेगा या मकान मालिक उसे वापस करेगा।

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किराये के समझौते में कुछ और नियम एवं शर्तें भी लिखी होती हैं। इसलिए इसे ध्यान से पढ़ें। कई मकान मालिक पालतू जानवर रखने या आमिष खाने और देर से आने जाने पर पाबन्दी जैसी बातें भी इस समझौते में लिखवाते हैं। यह भी पता कर लें कि आप सीधे मकान मालिक से किराये पर मकान ले रहे हैं या किसी और से। सेल डीड जैसे दस्तावेज़ों को ठीक से जांच लें।

अगर आप इन सारी बातों को ध्यान रखकर, सारी शर्तें पहले तय करके मकान लेंगे तो बाद में उत्पन्न होने वाले किसी भी विवाद से बचे रहेंगे।

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संवादपत्र

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