क्रिप्टो बनाम सोना: अंतर, कैसे चुनना है, किसे चुनना है

सोना और क्रिप्टोकरेंसी आपके पोर्टफोलियो में विविधता लाने के बेहतरीन निवेश साधन हो सकते हैं। दोनों स्थिरता और उच्च रिटर्न प्रदान करते हैं।

क्रिप्टो बनाम सोना: बेहतर विकल्प कौन है

नए वैश्विक निवेश साधन क्रिप्टो के प्रति भारतीय निवेशकों की भी रुचि बढ़ी है। बिटकॉइन, इथीरियम, टीथर और यहां तक कि मेम-आधारित डॉगकोइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी ने कम समय में ही चौंकाने वाला रिटर्न दिया है। दूसरी तरफ 2020 की महामारी के दौरान उच्चतम स्तर बनाने वाले सोने के रिटर्न में गिरावट आई है।

जो लोग वैकल्पिक निवेश विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, उनके लिए सोना और क्रिप्टो में से किसी एक को चुनना सचमुच मुश्किल है! तो दोनों एक दूसरे से अलग कैसे हैं?

बिटकॉइन जैसी स्थापित क्रिप्टोकरेंसी और सोना दोनों ही किसी के निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने और पारंपरिक परिसंपत्ति वर्गों के खिलाफ बचाव के रूप में प्रभावी तरीके हैं। हालांकि, कुछ समय पहले तक निवेश पेशेवरों और अनुभवी निवेशकों ने दोनों के बीच गंभीर तुलना नहीं की थी।

सोने का मामला 

सोना हजारों वर्षों से विनिमय का माध्यम रहा है और हर तरह की आर्थिक पृष्ठभूमि और भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों के बीच इसकी स्वीकार्यता बेजोड़ है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी केवल नए जमाने के डिजिटल निवेशकों के लिए सुलभ है और इसे विशेषाधिकार प्राप्त उपकरण के रूप में माना जाता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो संपत्ति कभी भी उसी तरह की सार्वभौमिक स्वीकृति प्राप्त नहीं कर सकती है जैसा  सोने के मामले में है। 

सोने के पक्ष में एक और तर्क यह है कि केंद्रीय बैंक और अन्य सरकारी और वित्तीय संस्थान संपत्ति का बड़ा भंडार रखते हैं और इसका समर्थन करते हैं। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी अभी भी भारत में वैधता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है। गुमनामी और विकेन्द्रीकृत लेनदेन प्रक्रिया सरकार के साथ ठीक तरह से तालमेल नहीं बैठा पा रही है। क्रिप्टो क्या निवेश साधन के रूप में नाकाम होगी या स्थायी संपत्ति के रूप में स्वीकार्य होगी, ये देखा जाना बाकी है।

हालांकि कई प्रगतिशील अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां जैसे टेस्ला, माइक्रोसॉफ्ट, होम डिपो, पेपाल, ट्विच और स्क्वायर समेत कई कंपनियां क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान स्वीकार कर रही हैं। वैश्विक वित्तीय दिग्गज फिडेलिटी ने हाल ही में बिटकॉइन की कस्टोडियनशिप ली है। ब्लॉकचेन लेज़र की सुरक्षा, तरलता और लेन-देन में आसानी क्रिप्टोकरेंसी को सोने की तुलना में बहुत अधिक गतिशील बनाती है। 

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क्या आपके पोर्टफोलियो में सोना या क्रिप्टो होनी चाहिए? 

हां, लेकिन दोनों से किसे चुनना है, इस पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है। सोना और क्रिप्टोकरेंसी दोनों ही विविधीकरण का काम कर सकते हैं। हालांकि दोनों आपके पोर्टफोलियो में अलग भूमिका निभाएंगे। यदि वैकल्पिक परिसंपत्तियों के लिए आपका आवंटन पोर्टफोलियो का 5% -10% है, तो आप एक्सपोजर को दोनों के बीच समान रूप से विभाजित करने पर विचार कर सकते हैं।

पिछले 50 वर्षों में सोने ने लगातार 8% के करीब रिटर्न दिया है। यह मुद्रास्फीति का मुकाबला करने में मदद करता है। सोने के मामले में अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक मूल्य-स्थिर संपत्ति है। क्रिप्टोकरेंसी ने पिछले 10 वर्षों में हर दूसरे परिसंपत्ति वर्ग से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन यह बहुत अस्थिर है। अस्थिरता और जोखिम का मुकाबला करने के लिए, निवेश प्लेटफार्मों द्वारा या म्युचुअल फंड के माध्यम से पेश किए गए एसआईपी के माध्यम से 3-5 शीर्ष क्रिप्टो संपत्तियों की एक टोकरी में निवेश कर सकते हैं।

अपनी पसंद के बावजूद, जल्दी अमीर बनने की उम्मीद मत कीजिए। इसके बजाय, परिसंपत्ति आवंटन बनाए रखें और लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण पर फोकस करें। क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार करने की योजना बना रहे हैं? क्रिप्टो चार्ट पढ़ने का तरीका यहां दिया गया है 

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य सूचना उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश या कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में निर्णय लेते समय आपको अलग से स्वतंत्र सलाह लेनी चाहिए।. 

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