भारत में सोने की कीमत 50,000 से नीचे आ गई है: सोने के निवेश पर विशेषज्ञों की राय। क्या आपको और सोना खरीदना चाहिए?

युद्ध हो या आर्थिक उथल-पुथल, सोने का अपना मूल्य होता है और समय के साथ हमेशा बढ़ता रहता है। जब भी आपके पास अतिरिक्त फंड्स हों इसे खरीद लें।

भारत में सोने की कीमत

भारत में सोने की कीमत

भारतीय संदर्भ में सोना निस्संदेह एक सुरक्षित निवेश है। वर्तमान में यह करीब 52,000 रुपये पर कारोबार कर रहा है जो कि 49,000 रुपये की सीमा से काफी ऊपर है और जब तक ऐसा है, यह सुरक्षित है। सीमा तब प्रभावित होती है जब आप पीक पर लेते हैं और लगभग 10% घट जाते हैं। यदि यह निर्धारित अवधि में सीमा से नीचे चला जाता है, तो उस निवेश से बाहर निकलना और दूसरे की तलाश करना बेहतर होता है।

सोना हमेशा से एक सुरक्षित निवेश रहा है और विशेष रूप से भारत में यह उपयुक्‍त रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा सोना भारतीय खरीदते हैं। क्‍योंकि इस समय सोने की दरें स्थिर हैं, इसलिए अब पीली धातु खरीदना, हमेशा लाभांश (डेविडेंट्स) का भुगतान करता है क्योंकि कीमतें समय के साथ बढ़ती रहती हैं। सोने के दाम क्यों गिरते हैं? आमतौर पर, यह कम मांग और उच्च आपूर्ति है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यूक्रेन-रूस का युद्ध बहुत जोर पर है और प्रथानुसार सोने की कीमतों में वृद्धि के बजाय, कीमतें लगभग एक महीने से स्थिर हैं। भारत पर रूस यूक्रेन युद्ध के प्रभाव ने कुकिंग ऑयल, पेट्रोल और डीज़ल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमत बढ़ा दी है, लेकिन सोने की कीमतें स्थिर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ऐसा ही है!   

भारत में सोने की मांग परंपरागत रूप से बहुत अधिक रही है, इसलिए अतिरिक्त फंड्स का उपयोग हमेशा सोना खरीदने के लिए किया जा सकता है। लगभग सभी सरकारी मान्यता प्राप्त ज्‍वैलरी स्टोर लोगों से सोना खरीदते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा दैनिक आधार पर खरीद और बिक्री दरें बतायी जाती हैं।

किन्‍हीं कारण से, सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसा लगता है कि यह बहुत धीमी गति से ऊपर की ओर ले जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के ठीक बाद, मार्च 2022 के पहले सप्ताह के आसपास प्राप्त ऊंचाई, कोविड महामारी के कारण अगस्त 2020 में प्राप्त ऊंचाईयों के समान है। इसलिए, हम देख सकते हैं कि आर्थिक उथल-पुथल या भूराजनीतिक संघर्ष के दौरान सोने की कीमत बढ़ती रहती हैं, जबकि अन्य निवेश प्रभावित होते हैं। कीमत की परवाह किए बिना भारत में सोने की मांग हमेशा अधिक रहेगी। इसलिए, जब कीमतें स्थिर हों तो सोना खरीदना सुरक्षित होता है क्योंकि भारतीय बाजार में मांग सोने की कीमत बढ़ाती रहती है।

रिद्धि सिद्धि बुलियन्स के प्रबंध निदेशक, पृथ्वीराज कोठारी का दावा है कि 50,000 रुपये का निशान जो सोने ने तोड़ा है, वह धातु के लिए एक सफलता है। इसे हमेशा निवेशकों के लिए एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में माना जाएगा और उन्हें आने वाले दिनों में उच्च मांग की उम्मीद है। कोठारी को अगले छह महीनों में कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। रेलिगेयर की वाइस प्रेसिडेंट सुगंधा सचदेवा को भी सोने की उच्च मांग की उम्मीद है और कीमतों में स्थिरता के कारण उच्च रिटेल सेल्‍स की उम्मीद है। उन्हें लगता है कि जहां तक न्‍यूनतम स्‍तर की बात है, तो 48,800 रुपये बेंचमार्क है। लेकिन इससे ऊपर का कोई भी आंकड़ा निश्चित रूप से एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। दुनिया भर में, मुद्रास्फीति, उच्च ब्याज दरों, और इसी तरह के अन्‍य दबाव के कारण शेयर की कीमतें नीचे आ रही हैं। इसलिए सोने में, हालांकि बहुत अधिक अस्थिरता दिख रही है, फिर भी यह विश्लेषकों के अनुसार अन्य कॉमोडिटीज़ और इक्विटी की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सुगंधा को लगता है कि हालांकि इस समय सोने की कीमतें क्षैतिज रूप से आगे बढ़ रही हैं, मुद्रास्फीति के दबाव, यूक्रेन में युद्ध और दुनिया भर में अनिश्चितताएं जल्द ही पीली धातु की कीमत को बढ़ाने वाली हैं। इसलिए अभी सोना खरीदें और जब कीमतें बढ़ेंगी तो अपनी संपत्ति बढ़ाएं।

सोने की कीमतों में गिरावट की तुलना चांदी की कीमतों में गिरावट से करते हुए, सुगंधा का दावा है कि चांदी एक मिश्रित धातु है और इसे तांबे और सीसा जैसे अन्य अयस्कों से निकाला जाता है। सोना अपने प्राकृतिक रूप में पाया जाता है न कि अन्य अयस्कों के साथ। इसलिए सोने की शुद्धता इसे और अधिक विश्वसनीय बनाती है। क्षेत्रीय कीमतों के होस्ट के अलावा सोने का एक स्पॉट प्राइस और एलबीएमए (लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन) मूल्य भी होता है। भारत जैसे अधिकांश देशों में एक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) है जहां सोने का ट्रेड होता है और सोने की दरें आधिकारिक तौर पर हर दिन तय की जाती हैं। सोने की मांग को दुनिया भर में स्वीकार किया गया है और इसलिए यह उच्च तरलता और स्वीकार्यता का समर्थन करता है। इसलिए, अन्य धातुओं के साथ चांदी की अधिक बिक्री हुई है और सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन सोना अपनी मांग को बरकरार रखा है। निवेश के रूप में सोना अब तार्किक है क्योंकि 6 महीने में रिकवरी कर्व आसन्न है। 

भारत में गोल्ड लोन का बहुत बड़ा बाजार भी है। लोग वित्तीय ऋण लेने के लिए विभिन्न बैंकों या वित्तीय संस्थानों में अपना सोना गिरवी रखते हैं। लोग गोल्ड लोन के माध्यम से बिजनेस शुरू करते हैं और कई अन्य अप्रत्याशित खर्चे सोने को दांव पर लगाकर किए जाते हैं। गोल्ड लोन पर ब्याज एसबीआई जैसे ज्यादातर बैंकों से सालाना 7.3% जितना कम है।

लोग अपना सोना बेचने के बजाय गिरवी रख देते हैं और लोन राशि वापस करने और सोने को फिर से प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इससे ऋण लेने वाले और वित्तीय संस्थानों दोनों को लाभ होता है।

गोल्ड लोन चाहने वाले लोगों को कम ब्याज दरों पर नकद में लोन के लिए अपना सोना गिरवी रखना होता है। चूंकि यह एक पारिवारिक विरासत की तरह है, लोन मांगने वाले व्यक्ति को सोना बेचना नहीं पड़ता है और परिवार के सोने का स्वामित्व बनाए रखना गर्व की बात है। इसी तरह, वित्तीय संस्थान कम ब्याज दरों पर लेकिन व्यापक दर्शकों को अपने पैसे उधार दे सकते हैं, जहां लोन सोने द्वारा समर्थित होता है। इस तरह वित्तीय संस्थान द्वारा ग्राहकों की सिबिल रेटिंग की असुरक्षा और अंततः लोन न देना अस्‍वीकार कर दिया जाता है और यह अपना व्यवसाय करने में सक्षम होता है। 

यह सब साबित करता है कि सोना भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। इसलिए लंबे समय में सोने की कीमतें बढ़ती रहेंगी और इसलिए यह वास्तव में एक सुरक्षित निवेश है।

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