Do not believe these myths of gold loan

स्वर्ण ऋण से संबंधित कई ग़लतफ़हमियाँ है। यह लेख स्वर्ण ऋण से सम्बंधित आपके ज़हन में सारे मिथकों का भंडाफोड़ करता है ।

स्वर्ण ऋण के इन मिथकों पर विश्वास मत कीजिए

भारत को 1991 से 3 तिमाहियों द्वारा उनके घुटनो पर लाया जा रहा था ।पहला भारतीय सामानों के सबसे बड़ा खरीददार सोवियत यूनियन छितरो में टूटने की कगार पर था, एक प्रमुख आय के के मार्ग को ख़त्म करते हुए। दूसरा ,भारत के दो बड़े तेल आपूर्तिकर्ता में  गल्फ युद्ध छिड़ गया ( इराक़ और कुवैत ), एक घटना जो आगे चलकर नई दिल्ली की क्रेडिट रेखाओं को भी प्रभावित करती हैं , क्योंकि वैश्विक तेल की क़ीमतें घुमावदार है । देश के भीतर राजनैतिक उथल पुथल के कारण भारत से बाहर निकलने वाले अंतिम लोग विदेशी निवेशक थे ।

सारी तरफ़ से दब जाने के बाद सरकार ने यह जाना कि उनके हिस्से में तीन हफ़्ते के आयात को बनाए रखने के लिए पर्याप्त छोड़ दिया गया था ।कोई अन्य विकल्प नहीं बाक़ी रहने पर,उसने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 3.9 करोड़ डॉलर के ऋण के बदले  67 टन सोने की प्रतिज्ञा ली । उस वक़्त के लिए भारत के लिए बहुत बड़ी राशि थी, नए फंड की आगमन ने सरकार को आपातकाल संभालने की सहायता की। जो भारतीय नीति निर्माता तीन दशक पहले करते थे वो एक नियमित,दैनिक वित्तीय सलाह का अनुसरण करते थे और स्वर्ण को एक मृत पूंजी की तरह न रखते हुए, उस के मूल्य को किसी आपात काल के वक़्त , उसके बदले ऋण लेने के लिए इस्तेमाल करते थे। यह एक सिद्ध सत्य हैं कि भारतियो के पास पीढ़ियों से बैंक हैं - एक अच्छी पारिवारिक शादी के लिए फंड इकट्ठे करने से लेकर एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए पूंजी इकट्ठे करने तक इसे कहते हैं एक स्वर्ण ऋण।

इतने अमूल्य धातु के बदले ऋण लेना भारत की एक बहुत पुरानी परंपरा है ,और यह तामझाम का कांटा भी हैं,1991 में भारतीय सरकार ने यही रास्ता अपनाया था।

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स्वर्ण ऋण क्या है?

स्वर्ण ऋण वह ऋण है जिसे आप अपने किसी भी पारिवारिक गहने को गिरवी रखकर ऋण लेते हैं,जैसे 1991 में भारत सरकार ने लिया था,वैसे ही आप भी किसी बैंक या नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी से 18-24 कैरेट शुद्धता वाले सोने के बदले स्वर्ण ऋण ले सकते हैं ।

बैंकों के मामले में, बैंकों द्वारा बेचे गए कोई भी स्वर्ण गहने या विशेष रूप से गड़े हुए स्वर्ण सिक्कों को गिरवी रख सकते हैं , हालाँकि,सोने के सिक्के जिनके वज़न 50 ग्राम से ज़्यादा है उनके लिए ऋण नहीं दिया जा सकता । 

एन.बी.एफ.सी के साथ, सिर्फ़ सोने के आभूषण ही गिरवी रखे जा सकते हैं ।साथ ही,किसी भी प्रकार के सोने की ख़रीदी के लिए ऋण नहीं दिया जाता है ।

सबसे बड़ी बात यह है कि ऋण एक घंटे के अंदर ही संसाधित होता है क्योंकि सोना अत्याधिक तरल होता है,जो आपातकाल के वक़्त काम आता है । परंतु फिर , अगर यह आपातकाल नहीं होता ,तो आप सोने को गिरवी क्यों रखते?

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कुछ मिथको का भांडाफोड़ 

जैसे की पहले भी बताया गया है ,सोने की जगह पर ऋण भारत में एक लम्बे समय से सम्मानित परंपरा है | फिर भी,जब बात पारिवारिक आभूषणों से पैसे इकट्ठे करने की आती है,यहां तक की  आपातकाल स्थिति में भी, तो बहुत से लोग संकोच करते हैं | पहला, कुछ ऐसी चीज़ो से दूर होने में आंतरिक अनिच्छा होती है  जिन्हे भारतीय शुभ मांगते हैं | उसके बाद ,स्वर्ण ऋण की अवधारणा और काम करने को लेकर गलत धारणाएं हैं |

यदि आप उनमे से एक हैं जो मानते हैं की स्वर्ण ऋण असुरक्षित होते हैं ,तो आइये सम्बोधित करते हैं उन समस्याओं को ,जो आपको परेशान कर रहे हैं और देखते हैं की हम आपके संशय को दूर कर पाएंगे क्या ?

मिथक १: सिर्फ ज्वेलर ही स्वर्ण ऋण प्रदान कर सकते हैं 

कहने की आवश्यकता नहीं है की , सभी अवधारणाओं में यह सबसे बड़ी गलतफेहमी है | जैसे की पहले भी बताया गया है, बैंक ( यहां तक की राज्य स्वामित्व वाले भी) और एन.बी.एफ.सी आसानी से स्वर्ण ऋण प्रदान करता है ,दरअसल,यहां एन.एफ.बी.सी हैं जो केवल स्वर्ण ऋण प्रदान करते हैं | और, यहाँ इन नियमो से सम्बंधित ,कुछ विशिष्ट सरकारी नियम हैं ,इसिलए सब कुछ वैध और बोर्ड से ऊपर है | इस मानसिकता से ऊपर उठिये की केवल पड़ोस के ज्वेलर  ही आपको स्वर्ण ऋण दे सकते हैं , क्यों न अपने लोकल बैंक के पास जाएं -या एक एन.एफ.बी.सी यदि एक हो तो ?

मिथक २: आपका सोना बदला या घुमा जा सकता है 

एक बार फिर, यह बहुत दूर की सोच है | एक घूमने वाला साहूकार आपके आभूषणों को उससे मिलते जुलते आभूषणों के साथ बदल सकता है ,परन्तु लाइसेंस्ड बैंक या एन.एफ.बी.सी नहीं | आपका सोना उनके साथ बिलकुल सुरक्षित है , क्युकी वह एक मजबूत कमरे की तिजोरी मर सुरक्षा के इन्तेज़ामो के साथ रखा जाता है, जो आपके कीमती चीज़ो की सुरक्षा सुनिश्चित करता है | आप अपने मन को पूरी तरह शांत कर सकते हैं |

मिथक ३: स्वर्ण ऋण में उच्च ब्याज दर होती है 

इसके विपरीत ,स्वर्ण ऋण बहुत औसतन दरों के साथ आती है, कभी कभी फिर भी प्रतियोगी दरों पर , जैसे की वह एक सुरक्षित प्रकार का ऋण हैं , जिसका आमतौर पर कम ब्याज दर होता है | हालांकि यह हर बैंक में भिन्न होता है , इसका वार्षिक शुल्क 1 -2 % के प्रोसेसिंग शुल्क के साथ 11 -17 % है|ऍन.बी.एफ.सी की कम ऋण बनाम मूल्य अनुपात होने के बावजूद ,वे 15 -26 %तक चार्ज करते हैं (ऋण की राशि जो ऋणदाता गिरवी रखे हुए सामान के मूल्य के बदले में दिया जाता है |

हालांकि, ब्याज दर ज्यादातर ऋण लेने वाले  के प्रोफाइल से प्रभावित होता है | इसकी तुलना में, सरकारी क्षेत्रो और प्राइवेट क्षेत्र के बैंक और ऍन.एफ.बी.सी से व्यक्तिगत ऋण ,11 % से लेकर 28 % तक बदल सकता है |

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मिथक ४: पारम्परिक आभूषण नहीं लिए जाते हैं 

साफ़ तौर पर, यह सही नहीं है | सरकार के साफ़ सीधे नियम हैं की किस तरह के स्वर्ण वस्तुओं को स्वर्ण ऋण के लिए गिरवी रखे जा सकते हैं ,और उसमे उल्लेख है 'आभूषण' ,न की 'मॉडर्न आभूषण' | बहुत लोग सोचते हैं की बैंक और एन.बी.एफ.सी केवल नए और नवीनतम स्वर्ण आभूषणों पर स्वर्ण ऋण देते हैं | परन्तु ,मॉडर्न आभूषण या मॉडर्न डिज़ाइन की परिभाषा कौन करता है ? स्वर्ण ऋण के नियम एवं क़ानून तो नहीं करते हैं |

तो आइये इस पर स्पष्ट रहते हैं, की बैंक पुराने स्वर्ण आभूषणों पर ऋण प्रदान करते है ,वे सिर्फ गिरवी रखे गए सोने की शुद्धता को देखते हैं ,जो कम से कम स्टैण्डर्ड 18 कैरेटहोना चाहिए |

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मिथक ५: इसकी प्रक्रिया में बहुत समय लगता है 

यह असल में सभी मिथको में सबसे ज्यादा हास्यप्रद मिथक है , क्यूंकि स्वर्ण ऋण केवल एक ही ऋण है जो आपको तुरंत मिलता है | दरअसल, बैंक और एन.एफ.बी.सी स्वर्ण ऋण को स्वीकृत करके ,उसी दिन राशि वितरित करते हैं, कुछ स्थितियों में एक घंटे के भीतर ही,बस उन्हें आपकी क्रेडिट प्रोफ़ाइल और गिरवी रखे जाने वाले सोने की शुद्धता से संतुष्टि होनी चाहिए ।

स्वर्ण ऋण के इन मिथकों पर विश्वास मत कीजिए


आख़िरी शब्द:

अगर आपको तत्काल फंड की आवश्यकता है,तो आपको ज़रूर ही एक स्वर्ण ऋण पाने के बारे में सोचना चाहिए । आपके आभूषणों को किसी भी बैंक के किसी भी ब्रांच या एन.बी.एफ.सी पर लेकर जाइए , जो स्वर्ण ऋण प्रदान करते हैं और तुरंत ही किसी भी मूल्य का ऋण प्राप्त कीजिए । साधारण और आसान दस्तावेज़ों की प्रक्रिया के साथ, यह ऋण आसानी से पाया जा सकता है । चिंता मत कीजिए;आपका सोना बिलकुल सुरक्षित है शायद आपके अपने घर से भी ज़्यादा सुरक्षित !

संवादपत्र

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