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क्या आपके पास ऐसा सोना है जिसका आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं? इस तरह से आप इस सोने से कमाई कर सकते हैं।

Things to know about Gold Monetization Scheme
जब साल 2015 में गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम शुरू की गई थी, तब भारत में सोना का भंडार 20,000 टन से ज्यादा होने का अनुमान था। लेकिन, हैरानी की बात थी कि इस सोने का न ही लेन-देन किया जा रहा था और न ही इसे मुद्रा में बदला जा रहा था। इस बात को देखते हुए इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य था कि लोगों और बैंकों जैसे संस्थानों के पास के इस्तेमाल न किए जाने वाले सोने का मुद्रीकरण किया जाए।
 
अगर आपके पास भी ऐसा सोना है जिसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो आप इस तरह उससे कमाई कर सकते हैं।
 
क्या है गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम?
 
इस स्कीम के तहत आपको सोना बचत खाता मिलता है जिसमें आप वास्तविक सोना जैसे गहने, सिक्के या छड़ जमा कर सकते हैं और उसपर ब्याज पा सकते हैं। ब्याज इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितना सोना जमा किया है और उसकी कीमत में कितना इजाफा हुआ है।
 
हालांकि, सोना बचत खाते में जड़ाऊ सोने के गहनो को जमा नहीं किया जा सकता है।
 
स्कीम कैसे काम करती है?
 
आप बैंक या एजेंसी के पास ये खाता खुलवाने के लिए जाएंगे, तब आपको इन दस्तावेजों को जरूरत पड़ेगी:
 
  • शुद्धता का प्रमाणपत्र
    आपको सोने को सरकार द्वारा प्रमाणित किसी भी कलेक्शन एंड प्यूरिटी टेस्टिंग सेंटर (सीपीटीसी) में ले जाना होगा। सीपीटीसी आपके सोने की जांच करेगी और उसकी शुद्धता की परख करेगी। जांच पूरी होने पर आपको सोने के वजन और शुद्धता की रसीद दी जाएगी।
          बैंक में इस रसीद जमा करने के बाद आपको सोने को जमा करने का प्रमाणपत्र मिलेगा। इस प्रमाणपत्र में आपने द्वारा जमा किए गए           सोने के बारे में पूरी जानकारी होती है।
          नो युवर कस्टमर (केवाईसी)
          बैंक या एजेंसी आपको केवाईसी जानकारी भरने और जमा करने के लिए कहेगी।
 
गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम के बारे में पूरी जानकारी:
गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम के तहत खाता खोलने के लिए जरूरी दस्तावेज
  • कस्टमर (केवाईसी) फॉर्म
  • पहचान प्रमाणपत्र
  • पते का वैध प्रमाण
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

इस स्कीम की मियाद क्या है?
सोना बचत खाते का न्यूनतम लॉक-इन पीरियड 1 साल है।
आप नीचे दिए गए विकल्पों में से चुनाव कर सकते हैं:
  • छोटी अवधि: 1 साल से 3 साल
  • मध्यम अवधि: 5 साल से 7 साल
  • लंबी अवधि: 12 साल से 15 साल
स्कीम की न्यूनतम जमा सीमा क्या है?
आप सिर्फ 30 ग्राम सोना जमा करके खाता खोल सकते हैं। जमा की कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
 
किस तरह से ब्याज की गणना होती है?
इस स्कीम के तहत दो तरह से ब्याज की गणना की जाती है, जो आपके द्वारा चुनी गई मियाद पर निर्भर करता है।
 
छोटी अवधि: आपको ब्याज सोने के ग्राम के रूप में मिलता है।
जैसे अगर सालाना ब्याज दर 1 फीसदी है तो आपको 100 ग्राम सोने पर 1 ग्राम का ब्याज मिलेगा, यानि आपके खाते में 101 ग्राम सोना हो जाएगा।
मध्यम और लंबी अवधि: इसके तहत आपको ब्याज रुपये में मिलता है जो जमा करने के वक्त पर सोने के मूल्य पर निर्भर करता है।
जैसे, आपने 1,50,000 रुपये के मूल्य के 50 ग्राम सोने को जमा किया है और सालाना ब्याज दर 2.5 फीसदी है, तो आपको 1 साल में ब्याज के तौर पर 3,750 रुपये मिलेंगे।
 
कैसे इस खाते को भुनाएं?
खाते की मियाद खत्म होने पर आप अपने जमा सोने को वास्तविक सोने के रूप में या फिर नकद में रूप में वापस पा सकते हैं। जब आप खाता खोलेंगे तब आपको इसमें एक विकल्प चुनना होगा। 
 
मियाद खत्म होने से पहले सोना निकालना
साल 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक मध्यम अवधि (5-7 साल) और लंबी अवधि (12-15 साल) के लिए मियाद खत्म होने से पहले जमा निकालने को छूट दे चुका है, हालांकि न्यूनतम लॉक-इन पीरियड को पूरा होना जरूरी है। मध्यम अवधि के लिए ये पीरियड 3 साल और लंबी अवधि के लिए ये 5 साल है। साथ ही, मियाद खत्म होने से पहले जमा निकालने पर कम दर से ब्याज मिलेगा।
 
इसखाते को क्यों खोला जाए?
गोल्ड मोनिटाइजेशन स्कीम खाते को खोलने के कई फायदे हैं:
  • स्कीम के जरिए आप इस्तेमाल न होने वाले सोने से कमाई कर सकते हैं।
  • आपका सोना बैंक या एजेंसी के पास सुरक्षित रहेगा
  • स्कीम के तहत सालाना ब्याज दर 2.25 फीसदी से 2.5 फीसदी के बीच है।
  • स्कीम द्वारा हुई कमाई पर आयकर नहीं लगेगा। साथ ही, पूंजी लाभ पर भी टैक्स नहीं लगेगा।
निष्कर्ष में
भारतीय अपने सोने के लगाव के लिए मशहूर हैं। लेकिन, अब भी ज्यादातर लोग सोने को लॉकर में रखने और कभी कभार इस्तेमाल करने की वस्तु समझते हैं। जब सोना आपकी संपत्ति में इजाफा कर सकता है तो फिर इसे क्यों इस्तेमाल न किया जाए?

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