बढ़ती उम्र आपके दिल की सेहत को कैसे प्रभावित करती है?

जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, उम्र से जुड़े बदलाव हमारे दिल की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन स्‍वस्‍थ आहार और जीवनशैली से जुड़े स्‍वस्‍थ बदलाव अपनाने से हम दिल की धड़कन को स्‍वस्‍थ रख सकते हैं।  

Effect of ageing

रॉक म्‍यूजिक के शौकीन यह जानकर बेहद खुश होंगे कि जिस आदमी ने 1965 के हिट एलबम माइ जेनेरेशन का प्रसिद्ध गीत ‘आई होप आई डाई बिफोर आई गेट ओल्‍ड’ गाया था, वह आज भी जिंदा है। वह अभी भी एलबम तैयार कर रहा है और अभी भी शो कर रहा है।  

लेकिन सर्किट पर 53 साल बिताना एक लंबा वक्‍त होता है और ग्रुप ‘द हू’ के प्रमुख सदस्‍य रोजर डाल्‍ट्रे अब उम्रदराज हो चुके हैं। आज, 74 साल की उम्र में, उन्होंने अपने  अजीबो-गरीब तरीके छोड़ दिए हैं । वे हर्बल चाय पीते हैं और कहते हैं कि हम सभी को "हमारी मौत के बारे में थोड़ा अधिक जागरूक होना" चाहिए। 

तो आइए उम्रदराज रॉक स्टार की बातों से एक सबक लेते हैं और अपनी मृत्यु से अवगत होने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए हमें उम्र बढ़ने की अपरिहार्य प्रक्रिया की भी स्‍वीकार करना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि जैसे हमारी उम्र बढ़ेगी, वैसे ही हमारे अंग जैसे कि हमारी आंखे, कान, हड्डियां, दिमाग- और हमारा दिल भी बूढ़े होंगे।  

हम उम्र को बढ़ने से नहीं रोक सकते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ हम अपनी सेहत का ख्‍याल जरूर रख सकते हैं। या फिर ये कहें कि अपने बूढ़े होते अंगों का ख्‍याल रख सकते हैं।  

उम्र बढ़ने की प्रक्रिया 

उम्र बढ़ने के साथ, हमारे अंग कुशलतापूर्वक कार्य करने की क्षमता खोने लगते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हर अंग काम करने के लिए अपनी कोशिकाओं पर निर्भर होता है और जैसे उनकी (हमारी) उम्र बढ़ती है वैसे ही कोशिकाएं अपनी शक्ति खोने लगती हैं।   

सामान्य परिस्थिति में जब हमारी कोशिकाएं मर जाती हैं तो नई कोशिकाएं उन्‍हें प्रतिस्थापित कर देती हैं; वहीं, जब हमारी उम्र बढ़ती है, लीवर, किडनी और दूसरे अंगों की मृत कोशिकाएं प्रतिस्‍थापित नहीं हो पाती हैं। जब किसी अंग की कोशिकाओं की संख्‍या एक स्‍तर से कम हो जाती हैं, तब वह अंग काम करना बंद कर देता है। हम सभी ने  

‘किडनी फेल होना’ जैसे डरावने शब्‍द सुने होंगे, इसी के चलते ऐसा होता है।  

हालांकि, सभी अंगों के मामले में ऐसा नहीं होता: दिमाग इन्‍हीं में से एक है। बूढ़े लोग यदि स्‍वस्‍थ है, तो ऐसे में जरूरी नहीं कि वे अधिकतर मस्‍तिष्‍क कोशिकाएं खो दें। हालांकि उम्र से जुड़े कुछ बदलावों के चलते संभव है कि उनका दिमाग उन्‍हें धीरे प्रतिक्रिया करने और कोई काम करने को कहे। फिर भी यह जरूरी नहीं है कि वे गलती ही करें।  

मस्तिष्क के उम्र-संबंधी बदलावों में से एक में रक्त प्रवाह में गिरावट भी है। 

दिल  

आइए दिल की बात करते हैं: हमारा दिल एक तरह से हमारे शरीर का ‘फ्यूल पंप’ है। दिल में एक पेसमेकर प्रणाली होती है जो दिल की धड़कन (या 'रक्त की' पम्पिंग) को नियंत्रित करती है। उम्र बढ़ने के प्रभाव दिल के ऊपर महसूस किए जाते हैं। हमारा दिल रक्त वाहिकाओं की तरह कठोर हो जाता है।  

जानते हैं कि यह कैसे होता है: जब हमारी उम्र बढ़ती है, तो हृदय और रक्‍तकोशिकाओं से जुड़े कुछ भाग- जिसमें शिराएं और धमनी शामिल हैं - इसमें रेशेदार ऊतक तथा वसा जमा हो सकता है। इसके चलते धमनियां कठोर हो जाएंगी (विशेष रूप से महाधमनी, जो कि दिल की एक प्रमुख धमनी है) जिसके बाद जब अधिक रक्‍त उनके माध्‍यम से पंप किया जाएगा तो वे इसके अनुरूप फैल नहीं पाएंगी।  

परिणाम स्‍वरूप, युवावस्‍था की तुलना में दिल बहुत धीमी गति से रक्‍त से भर पाएगा।  

उम्र बढ़ने से दिल में एक और महत्‍वपूर्ण बदलाव यह आता है कि उसका आकार बढ़ जाता है। खासतौर पर बाएं वेंट्रिकल का आकार। दिल की दीवारें भी मोटी होने लगती हैं, ऐसे में दिल का आकार बढ़ने के बावजूद भी यह चेंबर में रक्‍त भरने की क्षमता को घटा देती हैं।   

यही कारण है कि जब हम बूढ़े हो जाते हैं तो दिल में रक्त भरने की रफ्तार भी धीमी हो जाती है। 

हृदय गति  

बढ़ती उम्र हृदय गति को भी प्रभावित करती है। एक मिनट में जितनी बार दिल धड़कता है उसे हृदय गति कहते हैं। उम्र बढ़ने पर यह रफ्तार घटने लगती है। हृदयगति प्राकृतिक पेसमेकर के कारण लगातार चलती रहती है। दूसरे अंगों की तरह, यह भी उम्र बढ़ने के साथ अपनी कुछ कोशिकाओं को खोने लगता है। फलस्‍वरूप, एक बूढ़ा दिल उतनी जल्दी ब्‍लड पंप नहीं कर सकता, जितना जल्दी तब करता था जब वह युवा था। यही हमें ऑक्‍सीजन के लिए सांस लेने को मजबूर करता है। अब आपको पता चला? यही वह मुख्य कारण है कि पुराने एथलीट युवाओं के साथ तालमेल रखने में असमर्थ क्यों होते हैं। 

  

यदि आपका दिल सामान्‍य है, तो उम्र बढ़ने पर आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह आपकी युवावस्‍था के जैसे ही धड़केगा, पहले जैसे काम करता था वैसे ही करेगा और शरीर के विभिन्‍न हिस्‍सों को पर्याप्‍त रक्‍त भेजेगा। ठीक इसी प्रकार तनाव की स्थिति में जैसे जब आप बीमार पड़ जाते हैं या कोई तनावपूर्ण काम करते हैं, उस समय दिल को खून पंप करने के लिए ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ती है।   

यहां कुछ महत्‍वपूर्ण कारक दिए गए हैं जो आपके बूढ़े होने पर आपके दिल से ज्‍यादा काम करवा सकते हैं:  

विशेष दवाएं (कभी-कभी हम इसे ‘साइड एफेक्‍ट्स’ कहते है)  

भावनात्मक तनाव (आपके बच्‍चे का रिपोर्ट कार्ड आपको परेशान कर देता है, हैं ना?) 

शारीरिक थकावट (लिफ्ट फिर से खराब हो जाए और आपको सीढि़यां चढ़नी पड़ें) 

बीमारी, इन्‍फेक्‍शन और चोट ( ये घिसटने जैसी भी हो सकती हैं!) 

नियमित व्‍यायाम इसमें मदद कर सकता है, हम इस पर बाद में बात करेंगे।  

हृदय रोग  

यदि कोई अंग आयु-संबंधी तनाव से प्रभावित होता है, तो क्‍या इससे जुड़ी बीमारियां बहुत बाद में पता चलेंगी? जी नहीं, और बूढ़े दिल पर भी यही बात लागू होती है; आइए दिल की कुछ बीमारियों और हृदय रोगों के बारे में जानते हैं:  

एंजाइना सीने का दर्द होता है। यह तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह अस्थायी रूप से कम हो जाता है। इसके चलते मेहनत करने पर सांस लेने में तकलीफ होती है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है लेकिन यह कोरोनरी धमनी रोग का एक संभावित लक्षण है। 

एरिथेमिया  दिल की विभिन्‍न प्रकार की असमान्‍य धड़कनों वाली स्थिति है।  

एनीमिया वह स्‍थिति है जहां लाल रक्‍त कोशिकाओं या हीमोग्‍लोबिन की कमी हो जाती है। जिसके चलते अस्‍वास्‍थकर पीलापन या थकावट आती है। यह कुपोषण, पुराने संक्रमण, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट से रक्त हानि, या अन्य बीमारियों या दवाओं की गड़बड़ी के कारण हो सकता है। 

आर्टेरिओस्क्लेरोसिस   के बारे में पहले चर्चा की गई है। इसमें धमनियां कठोर होने लगती हैं। यह एक आम स्थिति है जहां रक्त वाहिकाओं के अंदर फैटी प्लेक जमा होने लगता है और पूरी तरह से रक्त प्रवाह को अवरुद्ध करता है।  

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर वृ‍द्ध लोगों में होने वाली एक और आम बीमारी है। युवाओं की तुलना में 75 साल से ऊपर के लोग दस गुना ज्‍यादा इस बीमारी से प्रभावित पाए गए हैं। यह एक लंबे समय तक चलने वाली स्थिति है जहां तरल पदार्थ दिल के चारों ओर तैयार बनता है और यह हृदय को पंप करने में अक्षम बनाने का कारण बनता है। 

कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ काफी आम है और स्‍टेबल एंजाइना, अनस्‍टेबल एंजाइना और सडन कार्डियक डेथ जैसी बीमारियों के समूह से संबंधित होती है। यह अक्सर आर्टेरिओस्क्लेरोसिस  के चलते होती है। 

हाई ब्‍लड प्रैशर और ऑर्थोस्‍टेटिक हाइपोटेंशन – यह एक प्रकार का लो ब्‍लड प्रैशर है जो तब पैदा होता है जब आप बैठने या लेटने के बाद खड़े होते हैं। यह बढ़ती उम्र से संबंधित होता है। (कभी कभी हाई ब्‍लड प्रैशर की ज्‍यादा दवाएं ले लेने से भी लो बीपी होता है क्‍योंकि ओवरडोज़ प्रैशर कम करती है।  

हार्ट वॉल्‍व डिजीज़ उम्र बढ़ने के साथ सामान्‍य बीमारी है। इसमें से सबसे प्रचलित एओर्टिक स्टेनोसिस या महाधमनी वाल्व का संकुचन है।  

स्‍ट्रोक्‍स या ट्रांसिएंट इस्‍केमिक अटैक तब होता है जब दिमाग की ओर रक्‍त का प्रवाह रुकता है। यह आम तौर पर अधिक उम्र के लोगों को होता है।   

इसके अलावा, दिल (या यहां तक कि मस्तिष्क में) से एक प्रमुख धमनी विकसित हो सकती है जिसे 'एन्यूरीसिम' कहा जाता है। धमनी दीवार की कमजोरी उस धमनी में सूजन या उभार लाती है। एन्यूरीसिम के फटने से मौत हो सकती है।  

सतर्कतापूर्ण कदम  

दिल की बीमारी वैश्विक स्तर पर मौत के प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे भाग्य के भरोसे छोड़ दें। आपके दिल की सेहत बेहतर बनाने और इसे बनाए रखने के कई तरीके हैं। यद्यपि आनुवंशिकता और उम्र जैसे कारकों को नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन फिर भी हाई ब्‍लड प्रैशर, कोलेस्ट्रॉल के स्तर, डायबिटीज़, मोटापे और धूम्रपान जैसी आदतों पर थोड़ा नियंत्रण अवश्‍य रख सकते हैं।  

 दिल की बीमारियों को नियंत्रण में रखने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:   

सबसे पहले, दिल को स्‍वस्‍थ रखने वाले आहार नियम का पालन करें। सैचुरेटेड फैट और कोलेस्‍ट्रोल का ध्‍यान रखें, वजन कम करें और बढ़ते ब्‍लड प्रैशर, उच्‍च कोलेस्‍ट्रोल,  या डायबिटीज के इलाज के लिए डॉक्‍टर की सलाह लें।  

दूसरा, धूमपान छोड़ें। नियमित रूप से व्‍यायाम करने वाले लोगों में अक्‍सर वसा की मात्रा कम होती है और वे व्‍यायाम न करने वाले लोगों के मुकाबले कम धूम्रपान करते हैं। उनमें रक्तचाप और दिल की बीमारी की समस्‍या भी कम होती है।  

तीसरा, ज्‍यादा व्‍यायाम करें: यह मोटापे को रोकने में मदद करता है और ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करता है (मधुमेह के लोग, कृपया ध्यान दें)। 

चौथा और अंतिम कदम, नियमित रूप से दिल की सेहत की जांच कराएं। 65 से 75 की उम्र के बीच के पुरुष जो धूम्रपान करते हैं (या पहले धूम्रपान करते थे), उन्‍हें अपने एब्‍डॉमिनल अओर्टा में एन्यूरीसिम की जांच करनी चाहिए। 

अंतत:  

हमारा दिल काफी कुछ गुजरे जमाने की जोंगा जीप की तरह है। भारतीय सेना के लिए निसान से प्राप्‍त लाइसेंस के तहत रक्षा मंत्रालय द्वारा इसे तैयार किया गया था। अपने मजबूत इंजन के चलते इस वाहन को काफी तारीफ मिली। इसमें शायद ही कोई यांत्रिक समस्या आई हो। ठीक वैसे ही हमारा दिल भी है। जोंगा का प्रोडक्‍शन 1999 में बंद कर दिया गया। लेकिन आप आज भी बेहतर तरीके से रखी गई कई जोंगा सड़कों पर देख सकते हैं जो पहले की तरह शान से चल रही हैं। 
 
सेना को जोंगा के लिए उपयुक्त रिप्‍लेसमेंट नहीं मिला है, और न ही हमें अपने दिल के लिए कोई रिप्‍लेसमेंट मिला है। हमारे दिल को भी मरम्‍मत की जरूरत होती है। भारत के दिग्‍गज हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ.देवी शेट्टी कहते हैं कि स्‍वास्‍थ्‍य आहार लें, समोसा और मसाला डोसा जैसे जंक फूड से परहेज करें, रोज व्‍यायाम करें, धूम्रपान न करें और 30 की उम्र पार कर ली है तो 6 महीने में कम से कम एक बार मेडिकल चैकअप कराए।  

 
हालांकि, हृदय रोग होंगे ही, और चूंकि यह हैल्‍थ प्‍लान के अंतर्गत कवर होते हैं, ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि आप अपने लिए हैल्‍थ प्‍लान अवश्‍य लें। उदाहरण के लिए, पॉलिसी अवधि के भीतर क्षतिपूर्ति क्‍लॉज़ के तहत यदि जरूरी हो तो बीमा एंजियोप्‍लास्‍टी को भी कवर करता है। एंजियोप्‍लास्‍टी बंद रक्‍त शिरा को खोलने के लिए एक शल्‍य प्रक्रिया होती है। इसमें महंगी सर्जरी को शामिल किया जाता है जिसकी मदद से आप अपने लिए एक सुखी भविष्य सुनिश्चित करते हैं। 

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