कोविड-19 के दौरान आपके मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली की देखभाल करने का एक प्रभावी तरीका

आप अपने साथियों के साथ मीटिंग का समय निर्धारित करते हैं; अब अपने चिंताजनक विचारों के साथ एक मीटिंग का समय निर्धारित करें!

कोविड-19 के दौरान आपके मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली की देखभाल करने का एक प्रभावी तरीका

वर्तमान लॉकडाउन के साथ, आपको एक रेस्तरां गए काफी समय हो गया होगा । क्या आप पीछे मुड़कर देखते हैं और अपने सभी पसंदीदा रेस्तरां, स्वादिष्ट भोजन, सुन्दर परिवेश, और शानदार साथियों के बारे में मन से विचार करते हैं? लेकिन डाइनिंग के कुछ और औसत अनुभवों के बारे में सोचने की कोशिश करें। वे स्थान जहाँ खाना परोसने वाले ज्यादा उत्सुक होते हैं, आपको हर कुछ मिनटों में परेशान करते हैं, आपसे पूछते हैं कि क्या आप कुछ और चाहते हैं, या आपको कैसा लगा । निरंतर रुकावट, बातचीत के प्रवाह को बर्बाद कर देती है और आपके भोजन के सम्पूर्ण अनुभव को भी ,है न ?

अपने दिमाग में चल रहे चिंता और चिंता-उत्प्रेरण विचारों के साथ किसी भी काम को करने की कोशिश करना इस तरह के भोजन के अनुभव की तरह है। यह केवल घर से काम करने या घर के सभी काम करवाने के दौरान उत्पादक बनने की कोशिश करने के बारे में नहीं है। सामान्य चीजें जैसे समय पर बिस्तर पर जाना और अच्छी नींद लेना, सुबह उठना और ऊर्जावान महसूस करना, टीवी शो या अच्छी किताब का आनंद लेना - इस तरह की दिनचर्या के चीजों में भी बाधा आती है अगर आपके विचार लगातार दूसरी तरफ चले जाते हैं।

‘दुनिया खत्म होने जा रही है|' हम सब तबाह हो जाएंगे । ’ टीका बनने में एक साल लगेगा; तब तक हम सभी अपने घरों में कैद रहेंगे।' ’महामारी के बाद वित्तीय संकट होने वाला है।’ कोरोनोवायरस महामारी और लॉकडाउन के दौरान इस तरह के विचारों का आना सामान्य है। सच कहूँ तो, यह बहुत अपरिहार्य है। हालांकि, लगातार ऐसे विचार करना अस्वास्थ्यकर है और यह आपके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

चिंता स्थगित करना

कोरोनावायरस के दौरान सभी तनावपूर्ण और चिंताजनक विचारों से निपटने के लिए एक सहायक और आसान तकनीक चिंता स्थगन करना है। यह पूरे दिन इसमें डूबे रहे बिना ,उस बात को स्वीकार करने का एक स्वस्थ तरीका है जो आपको परेशान करता है। इसमें एक विशिष्ट 'चिंता अवधि' निर्धारित करना शामिल है, मान लें,प्रतिदिन शाम 7 बजे 15 मिनट और उस अवधि के दौरान केवल चिंताजनक विचारों में लिप्त हो।

यदि किसी अन्य समय में आपको कोई भी परेशान करने वाले विचार आते हैं, तो बस अपने आप को याद दिलाएं कि आपके पास चिंता के लिए बाद की अवधि निर्धारित है और तब आप इसे संभाल लेंगे। यह पहली बार में थोड़ा मूर्खतापूर्ण लग सकता है, लेकिन एक बार जब आप इसे आज़माते हैं, तो आप देखेंगे कि यह कितना प्रभावी हो सकता है।

यहां कुछ बातें याद रखने योग्य हैं ताकि आप महामारी के दौरान चिंता स्थगन को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।

एक चिंता अवधि निर्धारित करें

दिन में एक ऐसे समय के बारे में सोचें जिसमे आपको लगता है कि आप अपनी चिंताओं के बारे में विचार करने के लिए सबसे अच्छे मिज़ाज़ में होंगे। यह एक ऐसा समय होना चाहिए जब आपके परेशान होने की संभावना न हो और साथ ही काम की समय सीमा या किसी और चीज के बारे में भी आप बेचैन न हो। 15-30 मिनट की अवधि आमतौर पर आपके दैनिक चिंता की अवधि के लिए पर्याप्त होती है। आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आप एक निश्चित समय रखें और इसे दिन-प्रतिदिन न बदलें, क्योंकि निरंतर रहने से आपके मस्तिष्क को प्रशिक्षित करने में मदद मिलती है।

समस्या वास्तविक है या काल्पनिक?

अपने चिंता के समय के दौरान भी, आपके पास ऐसी समस्याएं और चिंताएँ होंगी जिन्हें आप वास्तविक और काल्पनिक में वर्गीकृत कर सकते हैं।वर्गीकरण का विशिष्ट कारक है: क्या आप अभी इसके लिए कुछ कर सकते हैं? उदाहरण के लिए, यदि आप किसी ऐसी चीज के बारे में चिंता कर रहे हैं, जिसके लिए आप तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं, तो यह एक वास्तविक समस्या है। लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे होंगे जिसे आप बाद में निपटा सकते हैं, लॉकडाउन समाप्त होने के बाद। इसलिए दूसरे वर्ग को कुछ समय के लिए छोड़ दें |

अपनी चिंता के समय का प्रभावी ढंग से उपयोग करें

''चिंता'' के लिए अपने इस समय का उपयोग करें! एक अच्छा अभ्यास यह है कि आप अपने मन की उन सभी बातों को लिख लें जो आपको दिन भर परेशान कर रही थीं। सोचें कि कैसे और क्यों आपको इसकी चिंता होती है। यह सब लिखें ताकि यह आपके दिमाग से दूर हो। ध्यान दें कि क्या आप इन चिंताओं के लिए कोई व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप शारीरिक रूप से निष्क्रिय होने से चिंतित हैं, तो आप निर्देशित कसरत सत्रों के साथ फिटनेस ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं।

अपनी चिंता अवधि से बाहर निकलें

कभी-कभी, जब आप चिंता अवधि के दौरान अपने सभी तनावपूर्ण विचारों में लिप्त रहते हैं, तो आप के लिए उस छोटे छेद में ही रह जाना आसान हो सकता है। इसलिए, उस चिंता की अवधि से बाहर निकलने का भी एक तरीका होना आवश्यक है। पांच मिनट के मैडिटेशन सत्र के साथ इसका समापन करें या अपने विचारों को व्यवस्थित करने के लिए एक कार्यों की सूची बनाएं। आप ''चेतना की प्रवाह'' लेखन को भी आज़मा सकते हैं, जहाँ आप बिना किसी रोक-टोक के या अपने व्याकरण के बारे में अधिक विचार किए या बिना ये सोचे की इसके कोई मायने है या नहीं , बस लिखते रहते हैं । बस अपने विचार की धारा में बह जाते हैं ।

याद रखें, यदि दिन के किसी भी समय आप अपने मन को परेशान करने वाले विचारों में भटका पाते हैं, तो आपको दृढ़ता से कहना होगा, 'नहीं, मुझे इस बारे में बाद में चिंता करनी होगी'। कुछ दिनों तक ऐसा करने के बाद, आपके लिए चिंता को स्थगित करना आसान हो जाएगा । आप भी अपने प्रियजनों को इस तकनीक की सिफारिश करते मिल सकते हैं।

कोरोनावायरस महामारी और लॉकडाउन सभी के लिए एक मुश्किल की घडी है, इसलिए कुछ भी करके आपको खुद का ध्यान रखना ज़रूरी है।

 

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