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चिकित्सा बीमा के मामले में आईआरडीएआई ने ग्राहक को राजा बना दिया है। चिकित्सा बीमा पोर्टेबिलिटी की मदद से आप इंश्योरर ए में मिल रहे लाभ के साथ ही इंश्योरर बी में अपनी पॉलिसी का हस्तांतरण कर सकते हैं।

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आसान शब्दों में पोर्टेबिलिटी का मतलब: अगर आप मौजूदा इंश्योरर या पॉलिसी से नाखुश हैं तो आपके पास इंश्योरर बदलने की सुविधा है। आप अपनी पॉलिसी को दूसरी इंश्योरर कंपनी में पोर्ट (सिर्फ हस्तांतरण ही नहीं) कर सकते हैं। पहले पॉलिसी हस्तांतरण करने के बाद पॉलिसीधारक को नई पॉलिसीधारक के रूप में चिन्हित किया जाता था लेकिन अब आप पूर्व मौजूदा स्थितियों के लिए क्रेडिट हस्तांतरण कर सकते हैं। यह बात एक इंश्योरर से दूसरे इंश्योरर में पॉलिसी हस्तांतरण करने पर तो लागू होती ही है, एक ही इंश्योरर के भीतर एक प्लान से दूसरे प्लान में हस्तांतरण करने पर भी लागू होती है।

प्रक्रिया: पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया आसान है। यह खुद से करने वाला काम है। इसके लिए किसी दूसरी कंपनी मान लीजिए इंश्योरर बी को अपनी पॉलिसी पोर्ट करने के लिए आपको आवेदन देना होता है। ठीक तरह से भरा यह आवेदन फॉर्म इंश्योरर बी के पास जमा करना होता है। लेकिन याद रखें इस फॉर्म को आपकी मौजूदा पॉलिसी के नवीनीकरण की आखिरी तारीख से 45 दिन पहले पहुंचना चाहिए।

अब अगर इंश्योरर बी से आपको अपनी मौजूदा पॉलिसी पोर्ट करने का प्रस्ताव मिले, तो अपनी जरूरत के मुताबिक अपना उत्पाद (प्रोडक्ट) को चुन लें। इसके बाद आवेदन फॉर्म को अपनी मौजूदा बीमा कंपनी यानी इंश्योरर ए के पास जमा कर दें।

इंश्योरर ए सात कार्यकारी दिनों के भीतर इंश्योरर बी को सारा विवरण देने के लिए बाध्य है। इंश्योरर ए से विवरण मिलने के बाद इंश्योरर बी को हर हाल में 15 कार्यकारी दिनों के भीतर फैसला लेना होता है।  

ध्यान देने वाली बात: इंश्योरर बी को हामीदारी मानदंड़ों के आधार पर प्रीमियम तय करने की मंजूरी मिली हुई है। इसका मतलब हुआ कि उसी कवर के लिए आपको ज्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है जिसके लिए पहली वाली बीमा कंपनी यानी इंश्योरर ए को कम प्रीमियम देना पड़ता था। अगर आपने बीच में अपनी पॉलिसी कभी बंद करवाई होगी, तो हो सकता है कि पोर्टेबिलिटी संबंधी आवेदन खारिज हो जाए। ध्यान रहे अपनी मौजूदा पॉलिसी को पोर्ट उसकी समाप्ति तिथि से पहले करें। अगर आपकी स्वीकृति पॉलिसी के नवीनीकरण की आखिरी तारीख को भी लंबित है तो आप मौजूदा इंश्योरर से इसका कवरेज बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं।

बात अगर प्रतीक्षा अवधि की करें तो इंश्योरर बी की इंश्योरेंस ए से अलग प्रतीक्षा अवधि हो सकती है यहां तक कि अगर बीमारी एक ही हो तो भी। इसके अलावा, इंश्योरर के नियम और शर्तें अलग-अलग हो सकते हैं। अपनी पॉलिसी को पोर्ट करने के फैसले से पहले  समावेशन और बहिष्करण के बारे में पूरी जानकारी ले लें। अगर आप इंश्योरर के किसी समूह चिकित्सा बीमा का हिस्सा है तो सबसे पहले आपको इंश्योरर ए के ही किसी व्यक्तिगत प्लान में स्विच करना होगा, उसके बाद ही आप इंश्योरर बी को पोर्टबिलिटी के लिए आवेदन दे सकते हैं।

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