मैंने 40 वर्ष की उम्र में अपनी सेहत पर ध्यान देना क्यों शुरू किया?

इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि उम्र बढ़ने के साथ मेरे शरीर ने नए और अप्रत्याशित तरीकों से व्यवहार करना शुरू कर दिया। यह देखकर मैंने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया जिससे मैं आगे एक लंबा और सेहतमंद जीवन जी सकूं।

why paying attention to health is impt.

मेरा मानना है कि उम्र के हर दशक में एक क्षण ऐसा जरूर आता है जब आपको यह महसूस होता है कि आप पहले जैसे जवान नहीं रहे। 22-25 की उम्र के दिनों में एक दिन मैं अम्यूज़मेंट पार्क गया। मुझे वहां चक्कर आने लगे और लगा कि शरीर साथ नहीं दे रहा था। किशोरावस्था में तो ऐसा कभी नहीं हुआ था।


मैंने सोचा, “आह- तो उम्र बढ़ने पर ऐसा महसूस होता है!”


जब उम्र 30 के पार हुई तो मुझे अहसास हुआ कि अब मैं पहले की तरह बेहिसाब शराब पीने के बाद अगले दिन तरोताजा नहीं रह पाता। मुझे लगता है कि 22-25 की उम्र में तो मुझे पता भी नहीं था कि हैंगओवर क्या चीज होती है। हे भगवान! तो मैं बूढ़ा हो रहा था। 


हालांकि मेरे साथ 40 की उम्र तक पहुंचने के बाद जो कुछ हुआ उसके सामने यह कुछ भी नहीं था। एक दिन मैं जमीन पर बैठकर अपनी बेटी के स्कूल का होमवर्क पूरा करवा रहा था। एक घंटे के बाद, जब मैंने उठने की कोशिश की तो मेरे घुटनों ने जवाब दे दिया और पैर लड़खड़ा गये। मैं बिना सहारे के खड़ा नहीं हो सका। 


यह मेरे लिए एक तरह की लाल झंडी थी! यही वह समय था जब मैंने इस बात को स्वीकार किया कि मेरे शरीर में अहम बदलाव हो रहे थे। अब इन लक्षणों को ऐसे ही टाला नहीं जा सकता था। इस समय से मैंने अपने शरीर पर ध्यान देना शुरू किया। 


यह समझ आने पर स्वास्थ्य मेरे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया।


4 स्थास्थ्य समस्याएं जिन्हें आप नजरअंदाज नहीं कर सकते


हालांकि संपूर्ण स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन कुछ ऐसे पहलू हैं जिन पर 40 की उम्र पार करने के बाद गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है जैसे: 


स्तन का स्वास्थ्य: राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के मुताबिक सात में से एक महिला को जीवन के किसी पड़ाव पर स्तन कैंसर होगा। बचाव के उपाय अपनाने से पहले आप कितने खतरे में है इस बात को  सही से समझें। खुद की जांच करते रहें और हर वर्ष मैमोग्राम करवायें। 


ऑस्टियोपोरोसिस: महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना पुरूषों की तुलना में चार गुना ज्यादा होती है और 40 की उम्र के बाद इसकी संभावना बढ़ जाती है। कमजोर और भुरभुरी हड्डियां आपकी जिंदगी पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। अपना बोन डेन्सिटी टेस्ट करवायें और बढ़ने से पहले ही इसे बिमारी को रोक दें।


दिल की बिमारी: अस्वास्थ्यकर जीवन शैली और तनाव दिल की बिमारियों के प्रमुख कारण हैं।  तनाव से भरी नौकरी, बच्चों की देखभाल, घर और ऑफिस के बीच संतुलन बनाने की कोशिश आदि से स्थिति और भयावह हो जाती है। अपने दिल का ख्याल रखें। अपने डॉक्टर से बात करें और हर वर्ष अपना स्ट्रेस टेस्ट करवायें। 


रक्तचाप: उच्च रक्तचाप का प्रमुख कारण भी तनाव ही है। अपने काम और जीवन के बीच में संतुलन बनाएं और शांत रहने की कोशिश करें। 


40 की उम्र को अब 30 माना जाता है: फिट हो जाओ!


अब तक आपको समझ आ गया होगा कि जिंदगी लगातार चलने वाला चक्र है।अगर आप सेहत का ध्यान नहीं रखेंगे तो आपके लिए चीजें बिगड़ती चली जायेंगीं। 


अपने लिए ऐसा फिटनेस प्लान बनाएं जिसका आप लंबे समय तक पालन कर सकें। खुद को प्रेरित करने के लिए छोटे लक्ष्यों से शुरूआत करें। आपको हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट व्यायाम करना चाहिए। इसमें कार्डियोवैस्कुलर, स्ट्रेन्थ ट्रेनिंग और फ्लेक्सिबिलिटी सभी तरह के व्यायाम होने चाहिए। 


कार्डियो आपके दिल के लिए बहुत अच्छा है। प्रतिदिन 10-15 मिनट से शुरूआत करें और कोशिश करें कि हफ्ते में 3-4 दिन 45 मिनट प्रतिदिन व्यायाम जरूर करें। ट्रेडमिल पर दौड़ें, तैरें, साइकिल चलायें, पार्क में जॉगिंग करें या जुम्बा की क्लास में हिस्सा लें। या इन सब को मिलाकर करें। 

पूरी ताकत, हड्डियों की सेहत, और ढीली त्वचा से छुटकारा पाने के लिए वेट ट्रेनिंग करें।  हफ्ते में 2-3 बार मध्यम से भारी व्यायाम अपने ट्रेनिंग कार्यक्रम में शामिल करें, इससे आपकी ताकत वापस आयेगी। 

उम्र बढ़ने पर शरीर का लचीलापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप चाहे कार्डियो करें या वेट ट्रेनिंग लें लेकिन स्ट्रेचिंग आपके कार्यक्रम में जरूर शामिल होना चाहिए। 


40 की उम्र में बेहतर स्वास्थ्य के लिए 6 शानदार सुझाव!


अच्छा भोजन करें: पोषक भोजन का संबंध सीधे आपके स्वास्थ्य से है। पौष्टिक और भरे-पूरे नाश्ते के साथ दिन की शुरूआत करें। इससे आप पूरे दिन सक्रिय रहेंगे। इस बात को पक्का करें कि संतुलित खाना खायें। केवल स्नैक्स या बचा खुचा खाना खाने पर निर्भर ना रहें। 


पूरक आहार लें: अपने जोड़ों की सेहत पर ध्यान दें क्योंकि उम्र का तीसरा दशक पूरा करते-करते बोन डेन्सिटी कम होने लगती है। कैल्शियम से भरा खाना खायें या  पूरक के तौर पर कैल्शियम लें। प्रतिदिन की विटामिन डी की जरूरत को सूर्य की रोशनी या पूरक आहार से पूरा करें। विटामिन बी कॉम्पलेक्स को भी अनदेखा ना करें। 

तनाव को दूर करें: कोई शौक अपनायें जिससे आप खुश रहें। यह नाचना, गाना, संगीत, कला, योग, ध्यान कुछ भी हो सकता है। खुद के लिए समय निकालें यह आपके मानसिक स्वास्थ्य और शांति के लिए बहुत जरूरी है। 


स्वास्थ्य जांच करवायें: नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना पैसे या समय की बर्बादी नहीं है। अपने परिवार के स्वास्थ्य से जुड़े इतिहास को जानना और उसके हिसाब से कदम उठाना जरूरी है। हर वर्ष अपनी स्वास्थ्य जांच करवायें । अगर आपको बिमारियों का खतरा ज्यादा है तो हर छ: महीने में जांच करवायें। खुद नियमित अपने स्तन की जांच करें। किसी भी लक्षण को नकारें नहीं। 


धूम्रपान छोड़ें: अगर आप धुम्रपान करते हैं तो इसे तुरंत छोड़ दें। हम सभी तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में जानते हैं। कभी-कभी वाइन पीना आपके लिए अच्छा है। कम मात्रा में शराब पीयें। 


साहसी बनें: छुट्टी पर जायें। ऐसे साहसिक खेलों को आजमाने की कोशिश करें जिन्हें आप जवानी के दिनों में करना चाहते थे जैसे रिवर राफ्टिंग, स्कूबा डाइविंग, माउंटनियरिंग आदि। अपनी महिला मित्रों के साथ बाहर घूमने जाएं - यह किसी इलाज से बेहतर काम करता है। खुल कर जिंदगी जियें... बिंदास जियें!

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