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जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा के मुकाबले घर का बीमा कराने का चलन काफी नया है। इसके लिए हमने आपके लिए मुख्य बातें एक जगह एकत्रित करके यह आसान गाइड बनाई है।

जून 2015 में दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में 1200 लोगों के बीच किए गए सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं, इन आंकड़ों को कुछ लोग भयानक भी मान सकते हैं, देश में केवल 30 फीसदी लोगों ने घर या उसमें रखी चीज़ों का बीमा कराया है। सर्वे में शामिल लोगों में से 75 फीसदी की राय थी कि किसी न किसी प्रकार का घर का बीमा होना ज़रूरी है। लेकिन घर के बीमे से जुड़ी शर्तों और प्रोडक्ट्स को समझने में मुश्किल आती है। जिसकी वजह से लोग बीमा कवर नहीं लेते और अपने घरों को सुरक्षित नहीं कर पाए। इससे साफ होता है कि किस तरह जानकारी न होने की वजह से लोग बीमा न करवा कर अपने भविष्य और अपने घर के प्रति जोखिम ले रहे हैं।

घर का बीमा होता क्या है?

जब भी आपकी संपत्ति खो जाती है या फिर उसे हानि पहुंचती है जैसे कि आग लगने से। उस स्थिति में आपके घर के बीमे की पॉलिसी नुकसान की भरपाई करती है। आपको पर्याप्त मुआवजा मिल जाता है। हालांकि इसके साथ कुछ चेतावनी या कहें कि शर्तें भी जुड़ी होती हैं। इसमें सभी तरह के नुकसान की भरपाई नहीं होती। अलग अलग किस्म की घर के बीमे की पॉलिसी में अलग अलग चीज़ों की हानि की भरपाई होती हैं।

जैसे कि पॉलिसी में आग के अलावा भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में होने वाले नुकसान की भरपाई हो सकती है। स्वाभाविक तौर पर इस तरह की सुरक्षा मुहैया कराने वाली पॉलिसी महंगी होगी। हर महीने के हिसाब से भुगतान कर पाना शायद संभव हो। लेकिन ज़रूरी है कि आप खुद के हिसाब से जानकारी इकट्ठा करें और आपके घर और संपत्ति को सबसे बढ़िया कवर देने वाली बीमा पॉलिसी चुनें। जैसे कि जो लोग समुद्री इलाकों से दूर रहते हैं उन्हें टाइफून जैसे समुद्री तूफान के लिए कवर की चिंता नहीं करनी चाहिए। इसी तरह जो लोग हमेशा भूकंप के खतरे वाले इलाके में रहते हैं उन्हें ज्यादा बेहतर घर का बीमा (प्रीमियम होम इंश्योरेंस प्लान) लेना चाहिए। ज्यादा बेहतर घर का बीमा (प्रीमियम होम इंश्योरेंस प्लान) से भूकंप के आने पर बीमा कवर की सुरक्षा मिलेगी।

कुछ पॉलिसी निजी संपत्तियों के नुकसान की भी भरपाई करती हैं। मतलब अगर कुछ निजी सामान का नुकसान हो जाए तो उसके बदले में बीमा कंपनी पैसे देकर क्षतिपूर्ति करती है। जो लोग किराये के मकान में रहते हैं उनके संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए तो बीमा और भी ज्यादा जरूरी है। आपको लगता होगा मकान आपका नहीं है तो फिर आपको बीमा कराने की ज़रूरत ही नहीं है। लेकिन आपदा की स्थिति में बचाव के लिए मकान में रखे सामान का बीमा कराना जरूरी है।

आपकी पॉलिसी में कुछ और कवर भी जुड़े हो सकते हैं, जैसे लाइबिलिटी (देनदारी) का बीमा (उस हालत में जब आपके घर या उसकी चारदीवारी में रखी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुकदमा दाखिल किया जाए )

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क्या आपको घर का बीमा कराना चाहिए?

बेशक, इसमें कोई दो राय नहीं।

बीमा कंपनियां दावा करती हैं कि देश में घर के बीमे को लेकर जागरुकता का अभाव है। जिसकी वजह से घर के बीमे की बिक्री नहीं बढ़ पाती। आमतौर पर लोग प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से संभावित जोखिम को नज़रअंदाज़ करते हैं, जबकि ये आशंका वास्तविक हो सकती है। 

आप घर के बीमा कराने के लिए जो प्रीमियम अदा करते हैं वो बहुत सी चीज़ों पर निर्भर करता है। जैसे घर कितना पुराना है, कितने वर्गफुट एरिया का है, कंस्ट्रक्शन की लागत कितनी है, फर्नीचर, बिजली के उपकरण, कीमतें चीज़ें, अगर कलाकृतियां हैं तो उसकी वैल्यू कितनी है। लेकिन कई तरीके हैं जिनसे आप प्रीमियम घटा सकते हैं और घर के बीमे को अपने बजट के हिसाब से ढाल सकते हैं।

पहला, ये कि पॉलिसी खरीदने से पहले ये ज़रूरी है कि सभी बीमा कंपनियों की ओर से बेची जा रही पॉलिसी की गहन तुलना करें। इससे आपको ये पता चल सकेगा कि किस कंपनी की पॉलिसी खरीदने पर आपको सबसे बेहतर डील मिलेगी।

दूसरा, कई बीमा कंपनियां धुएं का अलार्म (स्मोक डिटेक्टर अलार्म) और चोरी होने पर बजने वाला अलार्म लगाने पर प्रीमियम में डिस्काउंट देती हैं। इससे न केवल आपका घर सुरक्षित होता है बल्कि प्रीमियम भी कम होता है।

अंतिम, पॉलिसी का चुनाव उन आपदाओं के जोखिम की भरपाई के लिए ही करें जिन आपदाओं से वाकई में आपके घर को खतरा हो। जैसे आमतौर पर सूखे वाले राज्य राजस्थान में अगर आप बाढ़ से जोखिम का कवर लेते हैं, तो इससे आपको असलियत में फायदा कम मिलेगा जबकि प्रीमियम का बोझ बढ़ जाएगा, क्योंकि राजस्थान जैसे राज्य में बाढ़ आने का जोखिम बहुत ही कम होता है।

जो लोग बहुत ज्यादा प्रीमियम की वजह से घर का बीमा कराने से हिचकिचाते हैं, वो इस बात के लिए निश्चिंत हो सकते हैं कि अगर सही प्लान का चुनाव किया जाए तो ये वाकई में काफी किफायती यानी आपके कवर लेने के सामर्थ्य के भीतर हो सकता है।

कुछ चीज़ें जो घर का बीमा कराने से पहले आपके लिए जानना जरूरी है

घर के बीमे के प्रकार

घर के बीमा कराने के लिए घर मालिकों के पास दो तरह के विकल्प हैं। बेसिक बिल्डिंग पॉलिसी जिसमें आग, तूफान और उससे जुड़ी चीजों को कवर किया जाता है। जबकि व्यापक पॉलिसी में मानवीय दखल यानी किसी इंसान की बदौलत होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है।  कुछ पॉलिसीज़ में ज्यादा आपदाओं से बचाव का कवर शामिल करने के लिए अतिरिक्त फीस देनी पड़ सकती है।

जैसे कि हमने पहले ही कहा, व्यापक बीमा पॉलिसी में घर और घर में रखे सामानों की क्षति और नुकसान की भरपाई होती है। लेकिन इस पॉलिसी में हमेशा कुछ शर्तें होती हैं। इसलिए क्या क्या चीज़ें पॉलिसी कवर के दायरे से बाहर होंगी उसका पहले ही पता लगा लेना चाहिए। किसी पॉलिसी को पसंद करने से पहले विशेषज्ञ से अवश्य सलाह लें।

मुआवजा के लिए दावा करना

ये नहीं कहा जा सकता है कि मुआवजे के लिए दावा  करना तकलीफदेह नहीं होता। आपको अपने घर मे हुई क्षति का सबूत पेश करना होगा। इसके अलावा बीमा कंपनी का सर्वेयर भी मुआवजे की रकम पास करने से पहले घर आकर नुकसान की जांच करेगा। आपकी पॉलिसी में घर में रखी चीज़ों का कवर भले ही शामिल हो। लेकिन आपको शर्तें ठीक से पढ़नी और समझनी होंगी। कुछ मामलों में घर में रखे सामान पॉलिसी कवर के दायरे से बाहर होते हैं। कई बार नुकसान बीमा कवर की रकम से भी ज्यादा होता है तो आपको उस बुरे दौर के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

बीमा कंपनियों की बिक्री के तरीकों से प्रभावित मत होइए

ज्यादा से ज्यादा एजेंटों से बात कीजिए और कोटेशन लीजिए ताकि आप एक जैसी पॉलिसीज़  की तुलना कर पाएं। हर बीमा कंपनी के प्लान की शर्त को जांचिए परखिये और देखिए कि आपके घर के लिए कौन सा प्लान सबसे उपयुक्त है।  

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अगर आपको विषय की समझ न हो तो घर का बीमा कराना पेचीदा मसला हो सकता है। गलत पॉलिसी चुनने पर आपको भारी वित्तीय हानि हो सकती है। जबकि सही पॉलिसी लेने पर चाहे हर साल आपकी आमदनी का थोड़ा हिस्सा प्रीमियम भरने में खर्च होगा, लेकिन किसी आपदा की स्थिति में आपका अच्छी तरह से बचाव करेगा। आपका घर केवल वित्तीय लिहाज़ से ही मूल्यवान नहीं है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी अहम है। इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने घर को बचाने के लिए वो सब कुछ करें जो आप कर सकते हैं।