जीवन बीमा उत्पादों के लिए आईआरडीएआई के नए दिशानिर्देश

नए प्रस्तावित दिशानिर्देशों से बीमा लेने वालों को बहुत फायदा मिलेगा

जीवन बीमा उत्पादों के लिए आईआरडीएआई के नए दिशानिर्देश
पिछले पांच वर्षों में जीवन बीमा उत्पादों में बहुत बदलाव देखने को मिले हैं। आज के ग्राहकों की ज़रूरतों को समझते हुए बीमा कंपनियों ने उत्पादों में ज़रूरी बदलाव किए हैं।

भारत के बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई)ने बाज़ार के बदलते रूप को देखते हुए लिंक्ड और नॉन-लिंक्ड जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अच्छी ख़बर यह है कि इन प्रस्तावित दिशानिर्देशों से बीमा खरीदने वालों को बहुत फायदा मिलेगा।
 
इस लेख में हमने उन बदलावों के बारे में बताने की कोशिश की है, जिनके बारे में बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले आपको जानकारी होनी चाहिए:
 
 लिंक्‍ड पॉलिसीधारक विशेष परिस्थितियों में आंशिक पैसा निकाल सकेंगे
 
इस दिशानिर्देश से मौजूदा प्रावधानों में व्यापक परिवर्तन हो सकता है। इसके कारण बीमित व्यक्ति पैसे की ज़रूरत होने पर आंशिक पैसा निकाल सकेगा। हालांकि, यह कुछ ख़ास कारणों जैसे गंभीर बिमारी या दुर्घटना के कारण हुई अपंगता आदि पर ही लागू होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी समस्या आने पर जीवन बीमा व्यक्ति के उसी तरह काम आ सकता है जैसे जानलेवा स्थितियों में काम आता है। पैसा निकालने की यह सुविधा जीवन बीमा के बारे में ग्राहकों की सोच को बदल देगी।
 
बीमा खरीदने के बाद भी समय सीमा में बदलाव संभव

यह दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव है जिससे ग्राहकों को फायदा होगा। अधिकतर लोग अपनी उम्र के तीसरे या चौथे दशक में जीवन बीमा खरीदते हैं। जिसका मतलब है कि वे कम उम्र में ही अगले 20-25 वर्ष का वादा कर रहे हैं। उम्र और तजुर्बा बढ़ने के साथ उनकी आवश्यकताएं और लक्ष्य भी बदल जाते हैं। हो सकता है कि कम उम्र में खरीदी पॉलिसी उनके भविष्य के लक्ष्यों के हिसाब से सही ना हो। पॉलिसी के दौरान उसके समय सीमा में परिवर्तन करने की सुविधा मिलने पर ग्राहक अपनी ज़रूरतों और लक्ष्यों के हिसाब से अपने निवेश का उपयोग कर पाएंगे।
 
पेंशनधारक किसी भी बीमा कंपनी से पॉलिसी रिन्यू करवा सकेंगे

इस दिशानिर्देश से पेंशन पॉलिसी लेने वाले किसी भी बीमा कंपनी से एन्युटी खरीद सकेंगे। वर्तमान नियमों के हिसाब से आपको उसी  बीमा कंपनी से रिन्यू करवाना होता था जिसके साथ आपकी पॉलिसी चल रही होती थी। इसके कारण बीमा कंपनी कोई भी ब्याज़ दर दे आप उसे बदल नहीं सकते थे। नए दिशानिर्दश से गेंद ग्राहकों के पाले में आ जाएगी। अब वे अलग-अलग बीमा कंपनियों की ब्याज़ दरों और सेवाओं की तुलना करके अपने लिए सही कंपनी चुन सकते हैं। इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
 
सरेंडर करने की सीमा को घटाकर दो वर्ष किया गया

नए प्रस्तावित नियमों के अनुसार नॉन-लिंक्ड पॉलिसी में सरेंडर वैल्यू प्रीमियम चुकाने की समय सीमा पर निर्भर करेगी। 10 वर्ष से कम समय की पॉलिसी में दो वर्ष तक लगातार प्रीमियम चुकाने पर गारंटीड सरेंडर वैल्यू मिलेगी।10 वर्ष से ज्यादा समय वाली पॉलिसी में गारंटीड सरेंडर वैल्यू की सुविधा लेने के लिए कम से कम तीन वर्ष तक प्रीमियम चुकाना होगा।
 
इसके अलावा, अपनी लैप्स हो चुकी पॉलिसी को फिर से शुरू करने के लिए पॉलिसीधारक को ज़्यादा समय दिया गया है। पॉलिसी लैप्स होने पर, पॉलिसी के अमान्य होने की तारीख से पांच वर्ष बाद तक उन्हें फिर से शुरू किया जा सकेगा। इससे बीमा पॉलिसी को चलाए रखने के लिए काफी समय मिल जाएगा। अभी यह समय केवल दो वर्ष तक ही है।
 
दूसरे पेंशन उत्पादों की तरह ही कम्युटेशन लाभ

पेंशन उत्पादों के मामलें में पेंशनधारक बाज़ार मूल्य का 60% पैसा एक बार में निकाल सकता है, जिसे कम्युटेशन कहा जाता है। बाकि बचे 40% पैसे से एन्युटी प्लान लेना होगा। पहले कम्युटेशन के समय आप कुल राशि का 1/3 पैसा ही निकाल सकते थे।
 
सेटलमेंट के लिए लंबा समय देने से ज़्यादा वित्तीय स्थिरता मिलेगी

सेटलमेंट समय को वर्तमान के पांच वर्ष से बढ़ा कर 10 वर्ष किया गया है जिससे पॉलिसी लेने वाले को धीरे-धीरे मृत्यु या मेचुरिटी लाभ मिलेगा। इसके कारण पॉलिसी लेने वाला लंबे समय में अपने पैसे का बेहतर प्रबंधन कर पाएगा।
 
युवा पॉलिसीधारकों के लिए मृत्यु लाभ में कमी
 
दूसरी तरफ, सभी आयु वर्ग में न्यूनतम लाभ का मानकीकरण कर दिया गया है। नियमित प्रीमियम उत्पादों के मामले में यह वार्षिक आय का सात गुना और एकल प्रीमियम पॉलिसी के मामले में 1.25 गुना होगा। पहले 45 वर्ष से ज़्यादा उम्र के बीमा धारक के लिए ऊपर बताया अनुपात ही लागू था लेकिन 45 वर्ष से कम उम्र के ग्राहक को 10 गुना लाभ दिया जाता था।
 
आईआरडीएआई ने सभी प्रस्तावित दिशानिर्देशों को इससे जुड़े हितधारकों के सामने रखा है और उनसे 15 नवम्बर 2108 तक अपने सुझाव देने को कहा है।
 

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