पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड) और जीवन बीमा में तुलना : क्या पहले होना चाहिए ?

सबसे अच्छी बात यह है कि पहले सुरक्षा, बचत बाद में आनी चाहिए। आपकी बचत योजना सुरक्षा और बचत इन दो स्तम्भ पर निर्धारित होनी चाहिए।

Comparison of PPF and life insurance: Which comes first?

कुछ लोग जीवन बीमा की तुलना पीपीएफ जैसे अन्य बचत के साधनों के साथ करते हैं, क्योंकि दोनों ही बचत के रास्ते हैं और साथ ही व्यक्ति इनसे अपने टैक्स पर जानेवाली धनराशी भी बचा सकते हैं। हालांकि, यह कहा जाना चाहिए कि पीपीएफ और जीवन बीमा वास्तव में बचत के दो विभिन्न साधन हैं जिनमे कुछ विशेषताएं सामान्य हैं। एक मजबूत आर्थिक नियोजन सुरक्षा और बचत इन जुड़वां उपायों पर निर्भर होता है, संरक्षण हमेशा पहले आता है क्योंकि एक बार जब आप पूरी तरह से बीमा कर लेते हैं और आपके साथ कुछ दुर्भाग्यपूर्ण होता है, तो आपका परिवार किसी भी परेशानी के बिना अपने जीवन स्तर को बनाए रखने में सक्षम हो सकता है। आर्थिक संरक्षण सुनिश्चित करने के बाद ही आप अपने लक्ष्य जैसे कि आपके बच्चों की शिक्षा, उनकी शादी, आपकी सेवानिवृत्ति आदि के लिए बचत करने के बारे में सोच सकते हैं।

 

पीपीएफ (लोक भविष्य निधि योजना)


पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) एक निवेशक और टैक्स-सेवर की पसंदीदा दीर्घकालिक ऋण योजना है जो सरकार के तत्वावधान में है। एक वित्तीय वर्ष में पीपीएफ खाते में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। यह जमा राशि आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर योग्य आय से घटाई जा सकती है। जैसा कि पीपीएफ एक ईईई योजना है, योगदान, ब्याज और परिपक्वता राशि, तीनों सभी कर मुक्त हैं।

जीवन बीमा

लाइफ इंश्योरेंस में सुरक्षा या जोखिम संरक्षण का लाभ उठाने के लिए नियमित अंतराल पर प्रीमियम का भुगतान करना होता है। किसी भी पॉलिसी द्वारा प्रदान किए गए रिस्क कवर की राशि को पॉलिसी के तहत बीमाकृत राशि (सम अश्युअर्ड) कहा जाता है। इस बीमा राशि को मृत्यु या परिपक्वता की स्थिति पर, जिस प्रकार की जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी गई है – एक सादा टर्म प्लान या टर्म और बचत प्लान के आधार पर, भुगतान किया जाता है। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए किये जानेवाले प्रीमियम पर भी  आपको धारा 80 सी के तहत टैक्स भुगतान में लाभ मिलता है। यह भी कुछ शर्तों के अधीन एक ईईई योजना है।

दोनों में तुलना कैसे करें

पीपीएफ और जीवन बीमा दोनों की तुलना करने का सबसे अच्छा तरीका यह देखना होगा कि ग्राहकों द्वारा चुने गए निवेश विकल्पों के मानदंडों को ये कहाँ तक पूरा कर पाते हैं।  हालांकि, तुलनात्मक प्रयोजनों के लिए हम केवल जीवन बीमा पॉलिसी को ही बचत योजना के रूप में सोच सकते हैं, क्योंकि केवल इस प्रकार की योजना को बचत के साधन के रूप में देखा जा सकता है और इसलिए इसकी तुलना पीपीएफ से की जा सकती है।

निवेश के लिए किसी प्लान का चयन करते समय ग्राहक क्या देखते हैं ? किसी भी निवेश में सभी आवश्यक सुविधाएँ नहीं होती।  इनमें से कुछ आपस में एक जैसी होती है। जरूरतों, निवेश के उद्देश्य, जोखिम उठाने की क्षमता, समय की कमी आदि के आधार पर समझौते और संतुलन तय कर इनका चयन किया जा सकता है।

 

हम इन दो साधनों की तुलना निवेश के कई मानदंडों पर करते हैं :

 

सुरक्षा और वैधता

पीपीएफ और जीवन बीमा दोनों ही कानूनी निवेश के रास्ते हैं और इन्हें काफी सुरक्षित माना जाता है। पीपीएफ एक केंद्रीय सरकार की योजना है और भारत में जीवन बीमा सरकारी स्वामित्व वाली जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों द्वारा किया जाता है, जो सरकार द्वारा स्थापित आईआरडीएआई द्वारा विनियमित होती हैं।

प्राप्तियां

पीपीएफ से वर्तमान में प्रतिवर्ष 8.7% वार्षिक वृद्धि प्राप्त होती है, लेकिन सरकार द्वारा इसमें बदलाव किये जा सकते हैं। जीवन बीमा में परिपक्वता लाभ बीमाकर्ताओं द्वारा ली गई पॉलिसी के अनुसार हर पॉलिसी पर भिन्न भिन्न होते हैं। आमतौर पर, परिपक्वता लाभ पर प्राप्ति 4% से 6% तक हो सकती है, लेकिन मृत्यु लाभ के लिए "प्राप्ति" का अनुमान लगाना संभव नहीं है क्योंकि यह पॉलिसी की आरंभ की तिथि से मृत्यु के समय तक किये गए प्रीमियम भुगतान (या निवेशित राशि) के कई गुना हो सकती है।

निवेशित योजना द्वारा लचीलेपन की पेशकश

पीपीएफ में, निवेशक प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.50 लाख रुपये के बीच किसी भी राशि का निवेश कर सकता है। यह राशि वर्षभर में एकमुश्त या 12 किश्तों में निवेश की जा सकती है। जीवन बीमा में यह योगदान (एक बार / वार्षिक / अर्ध वार्षिक / तिमाही / मासिक) के प्रीमियम पर किया जाता है और लचीला नहीं होता है। खरीदार बीमित राशि का चयन कर सकता है और उसकी आवश्यकताओं और भुगतान क्षमता के अनुसार पॉलिसी खरीदने के समय उसका देय प्रीमियम तय होता है।  हालांकि, एक बार जब पॉलिसी खरीद ली जाती है, किया जानेवाला पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान भिन्न नहीं हो सकता है। अधिकतर खरीदी जानेवाली पॉलिसी में, निश्चित शर्तों के अधीन कोई अधिकतम निश्चित सीमा तय नहीं होती है।

पीपीएफ और जीवन बीमा दोनों योजनाओं में यदि आप कुछ समस्याओं के कारण प्रीमियम का भुगतान / निवेश समय पर नहीं कर पाते हैं, इन्हें बीच में कभी भी आसानी से पुनर्जीवित किया जा सकता है। पीपीएफ की समयावधि 15 साल है, जिसे बारह वर्षों तक 5 साल से लेकर 25 साल तक बढ़ाया जा सकता है। जीवन बीमा में पॉलिसी की अवधि कुछ प्रतिबंध / शर्तों के अधीन, आपके द्वारा चुनी जा सकती है, जो हर पॉलिसी में भिन्न भिन्न होती है। यह मृत्यु तक भी हो सकती है।  किसी भी व्यक्ति द्वारा अनेक जीवन बीमा पॉलिसियां ली जा सकती है लेकिन प्रति व्यक्ति द्वारा केवल एक ही पीएफएफ खाता खोला जा सकता है।

लिक्विडिटी (तरलता)

पीपीएफ में, खाता खोलने के वर्ष से 7 वें वित्तीय वर्ष के बाद से प्रतिवर्ष वापसी ली जा सकती है। राशि वापस लेने की कुछ शर्तें होती हैं और खाता बंद नहीं किया जा सकता है और न ही 15 वर्ष पूरे होने से पहले पूरी रकम वापस ली जा सकती है। पीपीएफ खाता खोलने के 3 वर्ष के बाद से ऋण सुविधा उपलब्ध है। आम तौर पर, जीवन बीमा पॉलिसी में न्यूनतम लॉक-इन अवधि,  (यानी सरेंडर वैल्यू का अधिग्रहण) 3 वर्ष का होता है। आप पॉलिसी की लॉक इन अवधि के बाद आप अपनी पॉलिसी पर ऋण / नकद मूल्य ले सकते हैं।


एक वित्तीय साधन के रूप में उपयोग

जीवन बीमा पॉलिसी कानूनी रूप से एक "संपत्ति" है, इस संपत्ति को आप, इन प्रक्रियाओं के लिए लागू कानून के अनुसार स्थानांतरित, गिरवी, बंधक, भेंट देना या बेच सकते हैं।

 

जीवन बीमा पॉलिसी जीवित रहने की स्थिति में विविध प्रकार के लाभ प्रदान करती है:

आप बीमाकर्ता कंपनी से पॉलिसी पर ऋण ले सकते हैं। पॉलिसी के नकद मूल्य को अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण, जैसे व्यक्तिगत ऋण, कार ऋण आदि की सहायक धनराशी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है । इन सभी के लिए आपको बैंक को या उस संस्था को पॉलिसी सौंपनी होगी जो ऋण देता है। आप पॉलिसी सौंपने के साथ अपने बैंक से ओवरड्राफ्ट सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। ओवरड्राफ्ट राशि आमतौर पर सरेंडर मूल्य के भीतर होगी, हालांकि, हर प्रीमियम के भुगतान के साथ यह राशि बढ़ती जाती है। आवास ऋण लेने के लिए भी पॉलिसी का उपयोग किया जा सकता है। यहां ऋण की राशि सरेंडर वैल्यू तक सीमित नहीं होती है, यह पॉलिसी की परिपक्वता या मृत्यु लाभ के दावे के बराबर होती है।

 

पीपीएफ को गिरवी नहीं रखा जा सकता है ना ही सहायक राशि के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि इसे लेनदारों या अदालत के डिक्री से जोड़ा नहीं जा सकता है।

कर की बचत

दोनों निवेश में आयकर अधिनियम के अनुसार, धारा 80 सी के तहत अधिकतम 1.50 लाख तक (इस सीमा को धारा 80 सी के तहत अन्य बचत सहित) छूट मिलती हैं। पीपीएफ में प्राप्ति कर मुक्त है। लाइफ इंश्योरेंस में यदि प्रति वर्ष प्रीमियम का भुगतान बीमा राशि के 10% से अधिक होने पर परिपक्वता दावे को कर योग्य आय के रूप में माना जाएगा। अन्यथा, यह भी कर मुक्त है। मृत्यु लाभ पूरी तरह कर मुक्त है।

देखभाल के लिए सुविधा / स्वतंत्रता

पीपीएफ पोस्ट ऑफिस या नामित बैंकों में खोला जा सकता है। पीपीएफ खाते में निवेश समय पर करना होता है, इसके लिए आपको कोई अनुस्मारक / सूचनाएं नहीं भेजी जाती हैं।  हालांकि, बीमा कंपनियां आपको एजेंट के माध्यम से और पोस्ट / एसएमएस के माध्यम से अनुस्मारक भेजती हैं। दोनों में आप अपनी मृत्यु होने की स्थिति में राशि प्राप्त करने के लिए किसी को नामित कर सकते हैं।

निवेश बनाए रखने के लिए बाध्यता

इसके लिए दोनों में कोई अनिवार्यता नहीं है। पीपीएफ में यदि आप किसी भी समय राशी जमा करना बंद कर देते हैं, तब भी आप 15 साल के अंत में अपनी रकम निकाल सकते हैं। यदि आप कुछ वर्षों के अंतराल के बाद अपने पीपीएफ खाते में फिर से योगदान शुरू करना चाहते हैं तो आप कुछ शर्तों के अधीन ऐसा कर सकते हैं।  बीमा पॉलिसी के मामले में, यदि शुरू में प्रीमियम को पूर्व-निर्धारित न्यूनतम वर्षों (आमतौर पर तीन साल) के लिए भुगतान किया जाता है तो पॉलिसी एक पेड-अप स्थिति या पेड-अप वैल्यू प्राप्त करती है। उस कालावधि के बाद, आप पॉलिसी को समर्पण कर, हालांकि हानि सह कर कुछ रिफंड प्राप्त कर सकते हैं।

वैकल्पिक रूप से आप अगले प्रीमियम का भुगतान किये बिना अपनी पॉलिसी को जारी रख सकते हैं (अनुपात में कम सम अश्युर्ड के साथ)। हालांकि, यदि आप पॉलिसी के शुरुआती तीन (या पॉलिसी में निर्दिष्ट संख्या) वर्षों के भीतर प्रीमियम का भुगतान करना रोक देते हैं तो पॉलिसी पूरी तरह से रद्द हो जाती है और कुछ भी राशि प्राप्त नहीं होती है।

हालांकि, बीमा कंपनी आपको बार-बार उस स्कीम को जारी रखने के लिए याद दिलाती है। जीवन बीमा पॉलिसियों को कुछ शर्तों के अधीन और अन्य शुल्कों के साथ बकाया प्रीमियम को ब्याज के साथ भुगतान कर पुनर्जीवित किया जा सकता है।


ऋणदाताओं द्वारा अनुलग्नक

पीपीएफ राशि को लेनदारों द्वारा संलग्न नहीं किया जा सकता है।  सामान्य तौर पर, जीवन बीमा पॉलिसियों को जोड़ा जा सकता है। हालांकि, विवाहित महिला संपत्ति (एमडब्ल्यूपी) अधिनियम के तहत पॉलिसी लेना संभव है, जिसे लेनदारों द्वारा संलग्न नहीं किया जा सकता।

अचानक मृत्यु होने पर क्या होगा ?

पीपीएफ में, जो कुछ भी मृत्यु तक बचाया जाता है वह ब्याज के साथ नामांकित व्यक्ति को दिया जाता है। लाइफ इंश्योरेंस में सम अश्युर्ड (बीमा की गई पूरी रकम), यदि लागू हो तो दुर्घटना लाभ के साथ, चाहे कितने भी वास्तविक संख्या में प्रीमियम का भुगतान किया गया हो, नामांकित व्यक्ति को भुगतान की जाती है।

एक उदाहरण द्वारा यह बात समझाई जा सकती है कि आर्थिक नियोजन में जीवन की जोखिम यह तत्व प्राथमिक आवश्यकता क्यों है, जैसे पहले सुरक्षा, बाद में बचत : एक व्यक्ति, जिसकी आयु 30 वर्ष है और उसकी एक अच्छी कर योग्य आमदनी है, 15 वर्ष बाद वह अपनी बेटी जो अब 5 साल की है, के विवाह के लिए एक कॉर्पस बनाना चाहता है। उसका कोई बीमा नहीं है, वह पीपीएफ में 15 साल के लिए प्रति वर्ष 100,000 रुपये जमा करने की योजना बना रहा है, यह इस अपेक्षा के साथ कि, 15 वर्ष के अंत में उसे 31,17,278 रुपये मिलेगा और यह टैक्स फ्री होगा।

उदाहरण के तौर पर मौजूदा एंडोमेंट प्लान को लेकर, अगर वह 15 साल के लिए दुर्घटना लाभ के साथ एलआईसी की कोई एन्डॉवमेंट पॉलिसी लेता है और प्रति वर्ष लगभग 1,00,000 रुपये का भुगतान करता है तो वह लगभग 15 लाख रुपये का बीमा कवर बोनस के साथ प्राप्त कर सकता है। 38 रुपये प्रति 1000 की बोनस दर मान कर, 15 साल के अंत में पॉलिसी की परिपक्वता पर उसे 23,55,000 रुपये की कर मुक्त धनराशी मिल जाएगी।

अब अगर यह जवान आदमी 3 साल बाद, उदाहरण के लिए उसकी गाड़ी चलाते समय ही मर जाता है, तो पीपीएफ से परिवार को केवल 3,55,294 रुपये मिलेंगे। जीवन बीमा पॉलिसी से, परिवार को मूल बीमा राशि का रु. 15,00,000, तीन साल का बोनस रु. 1,71,000  और दुर्घटना लाभ 15,00,000 रुपये, कुल 31,71,000 रुपये से अधिक प्राप्त होंगे। यहां तक कि अगर मृत्यु किसी दुर्घटना के कारण नहीं होती है और दुर्घटना लाभ नहीं मिलता है, तब भी परिवार को 16,71,000 रुपयों की कर मुक्त धनराशी मिलेगी।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जीवन बीमा के मामले में उसने जब वह पॉलिसी खरीदी उसने एक संपत्ति (यहां विवाह के लिए प्रावधान) निर्माण की और 15 साल तक या जब तक वह जीवित रहा तब तक वह इस संपत्ति के लिए भुगतान करता रहा।

पीपीएफ के मामले में उसे 15 साल के लिए भुगतान करना पड़ता है, अर्थात पहले संपत्ति बनाता है और भुगतान के बाद ही कॉर्पस मिलता है, क्यूंकि अंतिम भुगतान के बाद ही संपत्ति तैयार होती है। यदि अचानक मृत्यु भी होती है तो केवल उसे उतनी ही धनराशी ब्याज के साथ मिलेगी जितनी उसने भुगतान की है।

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे प्रस्ताव किये गए दोनों साधनों की प्राप्ति की जांच करें और निवेश करने का फैसला करते समय अपने आंकड़े देख लें और तुलना करें। हालांकि, यहां यह बताया जा रहा है कि जीवन बीमा में आप संपत्ति बनाकर बचाते हैं। बचत के अन्य तरीकों में आप बचत करते हैं और फिर उस योजना को पूरा करने के लिए जीते हैं।

 

अब आपको तय करना है कि भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने का एक बेहतर तरीका कौन सा है और कौन सा साधन अधिक बहुमुखी और प्रभावशाली है ?

 

पहले सुरक्षा, बचत बाद में, सबसे अच्छी कार्यनीति है। आपकी योजना सुरक्षा और बचत इन दो स्तंभों पर खड़ी होनी चाहिए।

 

लेखक भारतीय जीवन बीमा निगम के सेवानिवृत्त कार्यकारी निदेशक हैं।

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