जीवन बीमा प्रीमियम पर टैक्स छूट लेने के नियम

जीवन बीमा पॉलिसियों पर मिलने वाली टैक्स छूट और टैक्स से जुड़ी बातों पर 2 हिस्सों में लिखी श्रंखला का यह पहला लेख है। यह लेख आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत जीवन बीमा के प्रीमियम पर मिलने वाली टैक्स छूट के बारे में है। श्रंखला का दूसरा लेख इन पॉलिसियों से होने वाले फायदों के टैक्स प्रबंध से जुड़ा है।

जीवन बीमा प्रीमियम पर टैक्स छूट लेने के नियम

जीवन बीमा के प्रीमियम पर मिलने वाली टैक्स छूट बीमा लेने का एक अतिरिक्त फायदा है। जीवन बीमा से जुड़े इस लाभ का फायदा लेने के लिए इसके सभी पहलुओं को सही तरह से समझें। वर्तमान आयकर कानून के हिसाब से हम इसके सभी पहलुओं पर विस्तार से बात करेंगे। टैक्स के मामले में पेंशन पॉलिसी का प्रबंध अलग तरह से किया जाता है, कुछ पेंशन पॉलिसियों में जीवन बीमा भी जुड़ा होता है। इसलिए इस लेख में पेंशन पॉलिसी पर विचार नहीं किया गया है।

जीवन बीमा प्रीमियम पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी के तहत टैक्स लाभ

  आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी(2) के तहत जीवन बीमा पॉलिसी को खरीदने या रिन्यू के लिए किए गए भुगतान पर बीमा खरीदने वाला कुल आय में से कटौती का दावा कर सकता है। इसका मतलब है कि टैक्स योग्य आय निकालने के लिए बीमा प्रीमियम की राशि को कुल टैक्स योग्य आय में से घटाया जा सकता है।

जीवन बीमा प्रीमियम पर टैक्स लाभ किसे मिल सकता है?

 केवल कोई अकेला व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार (“एचयूएफ”) ही जीवन बीमा के प्रीमियम भुगतान पर टैक्स छूट ले सकते हैं।


क्या केवल एलआईसी से ली गई पॉलिसी ही धारा 80सी के तहत आती है?

  इस प्रश्न का जवाब है ‘नहीं’। आईआरडीएआई से मान्यता प्राप्त किसी भी सार्वजनिक या निजी बीमाकर्ता से लिए गए बीमा पर टैक्स छूट ली जा सकती है। टैक्स छूट के मामले में आईआरडीएआई से मान्यता प्राप्त निजी बीमा कंपनी से ली गई पॉलिसी भी एलआईसी से ली गई पॉलिसी जैसी ही है।

धारा 80सी के तहत खुद, जीवनसाथी या बच्चों के खातिर लिए गए बीमा पर ही टैक्स लाभ लिया जा सकता है


  कोई व्यक्ति आयकर अधिनियम,1961 की धारा 80सी के तहत खुद, जीवनसाथी या बच्चों के नाम पर ली गई पॉलिसी पर ही टैक्स छूट ले सकता है। लोग अक्सर पूछते हैं कि अधिकतम कितने बच्चों के लिए बीमा लिया जा सकता है। इसका जवाब है: आप कितने भी बच्चों के लिए बीमा ले सकते हैं , चाहें वे नाबालिग हों, बालिग हों, विवाहित हों, अविवाहित हों या गोद लिए गए हों। इनके अलावा किसी के नाम पर ली गई पॉलिसी के लिए आप टैक्स छूट के हकदार नहीं होंगे। हिन्दू अविभाजित परिवार के मामले में परिवार के किसी भी सदस्य के लिए पॉलिसी ली जा सकती है।
 
जीवन बीमा प्रीमियम पर धारा 80सी के तहत छूट उसी वित्तीय वर्ष में ले सकते हैं जिस वर्ष भुगतान किया गया हो 

 धारा 80सी(2) के तहत बीमा प्रीमियम की राशि पर छूट लेने के लिए उसी वित्तीय वर्ष में दावा करना होगा जिसमें भुगतान किया गया हो। उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए टैक्स छूट लेने के लिए प्रीमियम का भुगतान 1.4.2014 से 31.3.2015 के बीच ही होना चाहिए( दोनों तारीखें शामिल)।

उदाहरण के लिए, मान लेते हैं कि आपको 26.3.2015 तक अपना प्रीमियम भरना था लेकिन आप प्रीमियम भरने में देरी कर देते हैं और 31.3.2015 के बाद प्रीमियम भरते हैं भले ही आप प्रीमियम का भुगतान बीमा कंपनी के बताए ग्रेस पीरियड में कर देते हैं। आमतौर पर 15 दिन का ग्रेस पीरियड दिया जाता है इसलिए इस मामले में बीमाकर्ता 10.04.2016 तक भी प्रीमियम स्वीकार कर सकता है लेकिन इस प्रीमियम पर आपको वित्तीय वर्ष 2014-15 में टैक्स छूट नहीं मिलेगी। इस राशि पर टैक्स छूट के लिए आपको वित्तीय वर्ष 2015-16 (वह वित्तीय वर्ष जिसमें प्रीमियम का भुगतान किया गया) में दावा करना होगा।

धारा 80सी के तहत अधिकतम टैक्स लाभ


  आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत जीवन बीमा प्रीमियम पर लाभ लेने के लिए कुल कर योग्य आय में अधिकतम 1,50,000 रूपये की कटौती ली जा सकती है। धारा 80सी में टैक्स लाभ लेने से जुड़े सभी निवेश विकल्पों की सूची दी गई है। इसका मतलब है कि सूची में बताए सभी विकल्पों को मिलाकर या किसी एक विकल्प में किए गए 1.5 लाख रूपये तक के निवेश को आपकी कुल कर योग्य आय में से घटा कर आपके टैक्स की गणना की जाएगी। अगर बीमा प्रीमियम के साथ आपका कुल निवेश 1.5 लाख रूपये से ज़्यादा है तो आपकी कर योग्य आय में से 1.5 लाख रूपये की ही कटौती की जाएगी। 
 
  यहां इस बात का ध्यान रखें कि धारा 80सी के तहत बहुत से निवेश विकल्प आते हैं। इसलिए जीवन बीमा के अलावा भी कुछ जगहों पर निवेश करके यह टैक्स छूट ली जा सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जीवन बीमा को बीमा के उद्देश्य से खरीदा जाना चाहिए ना कि टैक्स लाभ लेने के लिए। 

 इसी के साथ याद रखें कि अगर आपने ऐसा निवेश किया है जिस पर धारा 80सीसीसी और 80सीसीडी के तहत टैक्स छूट मिलती है तो ये सभी निवेश 80सी के तहत किए निवेश के साथ जोड़ दिए जाएंगें और इसके बाद आपकी 1.5 लाख रूपये की सीमा वाली टैक्स लाभ राशि की गणना की जाएगी। 

 धारा 80सी का लाभ लेने के लिए प्रीमियम की अधिकतम सीमा

 धारा 80सी(3) के तहत, 31.3.2012 को या उससे पहले जारी की गई जीवन बीमा पॉलिसी के मामले में अगर किसी वर्ष में कुल चुकाए गए प्रीमियम की राशि वास्तविक सम अश्युर्ड के 20% से ज़्यादा होती है तो वास्तविक सम अश्युर्ड की 20% राशि को ही कर योग्य आय में से घटाया जाएगा। धारा 80सी(3ए) में की गई व्याख्या के अनुसार, वास्तविक सम अश्युर्ड का मतलब है वह सम अश्युर्ड जो पॉलिसी जारी रहने के सभी वर्षों के दौरान सबसे कम रहा और उसमें सम अश्युर्ड के अलावा मिलने वाली किसी बोनस राशि को नहीं जोड़ा जाएगा। इस ‘वास्तविक सम अश्युर्ड’ में बीमित व्यक्ति को वापस दिए जाने वाले प्रीमियम को भी नहीं जोड़ा जाएगा।

 1.4.2012 को या उसके बाद जारी कि गई बीमा पॉलिसी के मामले में ऊपर बताई गई 20% की सीमा को घटाकर 10% कर दिया गया है। 

 अगर बीमित व्यक्ति को आयकर अधिनियम और नियमों के अनुसार कोई गंभीर अक्षमता या बिमारी हो जाती है और पॉलिसी 1.4.2013 को या उसके बाद जारी की गई है तो 10% की सीमा को बढ़ाकर 15% कर दिया जाएगा। इसके तहत धारा 80यू की सूची के हिसाब से अक्षमता भी एक वजह है जैसे, आटिज़्म, और मानसिक मंदता । इसी के साथ आयकर अधिनयम धारा 80डीडीबी और नियम 11डीडी के हिसाब से बताई गई अक्षमता  भी इसमें शामिल हैं जैसे, अंधापन। तो अगर आप अपने विकलांग पुत्र के लिए जीवन बीमा लेते हैं तो इस बात को सुनिश्चित करें प्रति वर्ष कुल प्रीमियम राशि कुल सम अश्युर्ड के 15% से ज़्यादा ना हो क्योंकि 15% से ज्यादा कि राशि पर टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलेगा। 

 धारा 80सी के तहत टैक्स लाभ के लिए पॉलिसी रखने की न्यूनतम समय सीमा

 बीमा लेने वाले को टैक्स लाभ लेने के लिए जीवन बीमा पॉलिसी को बनाए रखना होगा और धारा 80सी में बताए गए न्यूनतम वर्षों तक प्रीमियम नियमित रूप से भरना होगा। अगर बीमा लेने वाला स्वेच्छा से पॉलिसी सरेंडर करता है या प्रीमियम ना भरने की वजह से बीमाकर्ता पॉलिसी को समय से पहले बंद कर देता है तो उस पॉलिसी पर चुकाए गए प्रीमियम पर धारा 80सी के तहत टैक्स लाभ नहीं मिलेगा। 


इसका मतलब है कि पॉलिसी को सरेंडर/समाप्त करने के वर्ष में चुकाए प्रीमियम पर टैक्स छूट हासिल नहीं होगी। साथ ही पिछले वर्षों में चुकाए गए प्रीमियम को भी पॉलिसी सरेंडर/ समाप्त होने के वित्तीय वर्ष में आपकी आय में शामिल किया जाएगा और नियमानुसार टैक्स लगाया जाएगा। 
चुकाए गए प्रीमियम पर टैक्स लाभ लेने के लिए पॉलिसी को बनाए रखने की न्यूनतम समय सीमा:

  >> एकल प्रीमियम जीवन बीमा के मामले में यह सीमा पॉलिसी शुरू होने से 2 वर्ष तक होगी। 

  >> यूलिप के मामले में- पॉलिसी शुरु होने के बाद कम से कम 5 वर्ष तक प्रीमियम चुकाया हो।

  >> अन्य जीवन बीमा पॉलिसी में- कम से कम 2 वर्ष के लिए प्रीमियम चुकाया गया हो।

 क्या 80सी का लाभ लेने के लिए जीवन बीमा के प्रीमियम चुकाने का कोई खास तरीका है?

 नहीं, 80सी के तहत लाभ लेने के लिए जीवन बीमा के प्रीमियम को किसी भी तरीके जैसे, नकद, चेक, अकाउंट ट्रांसफर आदि से चुकाया जा सकता है। इसके अलावा यह बताना ज़रूरी है कि विदेशी बीमाकर्ता ( जो भारत में पंजीकृत नहीं है) से जीवन बीमा लेने पर कुछ अतिरिक्त नियम लागू होंगे। ये नियम हर मामले के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। 

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