TomorrowMakers

अन्य प्रकार के इंश्योररेंस के विपरीत, ऑटो इंश्योरेंस अनिवार्य कानूनी आवश्यकता है और, दुर्भाग्य से, यह वह इंश्योरेंस है जो काफी महंगा हो सकता है।

hincarinsu

लेखक: संजीव सिन्हा

 

अन्य प्रकार के इंश्योररेंस के विपरीत, ऑटो इंश्योरेंस अनिवार्य कानूनी आवश्यकता है और, दुर्भाग्य से, यह वह इंश्योरेंस है जो काफी महंगा हो सकता है। हालांकि, जहाँ कोई भी वाहन मालिक ऑटो इंश्योरेंस से बच नहीं सकता, वहीं इंश्योरेंस प्रीमियम पर बचत करने के लिए कम से कम कुछ उपाय किए जा सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि पहले प्रचलित चार मानकों अर्थात भौगोलिक क्षेत्र, इंजन क्षमता, मूल्य, और वाहन की उम्र से परे प्रीमियम रेटिंग मानकों के लिए मानदंड बदल गए हैं।

 

आज के गैर टैरिफ वाले युग में, प्रीमियम की दरों का निर्धारण करने के लिए कई नए मानकों पर विचार किया जा रहा है, जो इस प्रकार अपना इंश्योरेंस बिल कम करने के लिए विभिन्न तरीके प्रदान कर रहे हैं।  उदाहरण के लिए, केवल इंश्योरेंस कंपनी को समुचित जानकारी देकर आप प्रीमियम पर बचत कर सकते हैं। यहाँ हम 10 चीजों पर नज़र डालेंगें जिनसे मोटर इंश्योरेंस का प्रीमियम कम करने में मदद मिल सकती है:

 

1. कार का निर्माण और मॉडल

हर एक निर्माण और मॉडल का अपना क्लेम रिकॉर्ड होता है और इंश्योयरेंस कंपनी अपने क्लेम के अनुभव के आधार पर वाहन की कीमत निर्धारित करती है। कुछ मॉडल अपनी संरचना या उपयोग की वजह से अधिक क्लेम-प्रोन होते हैं, और इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर प्रीमियम निर्धारित किया जाता है।

रॉयल सुंदरम एलायंस इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के प्रवक्ता का कहते हैं "इंश्योरेंस कंपनी की नजर में निर्माण / मॉडल के पिछले प्रदर्शन पर छूट निर्भर करती हैं। अनुकूल हानि अनुपात वाले निर्माण / मॉडल के लिए,  उस निर्माण / मॉडल की तुलना में अधिक छूट प्रदान की जाती है जो अक्सर दुर्घटनाओं की शिकार होती है। दुर्घटना की घटना स्थान के साथ ही चालक की खूबियों पर भी निर्भर करती है। कुछ निर्माण / मॉडलों की निषेधात्मक मरम्मत लागत होती है। कुछ विशेष निर्माण / मॉडलों पर आने वाली मरम्मत की लागत पर भी छूट निर्भर हो सकती है, "

 

2. ड्राइवर का लिंग

चालक का लिंग भी मोटर इंश्योरेंस का प्रीमियम कम करने में मालिक की मदद कर सकता है। बहरहाल, पुरुष ड्राइवरों को अधिक छूट मिलती है या महिला ड्राइवरों को, यह इंश्योरेंस कंपनियों की पॉलिसी पर निर्भर करता है।

उदाहरण के लिए बजाज आलियांज जैसी कुछ इंश्योररेंस कंपनियां, , पुरुष ड्राइवरों की तुलना में महिला ड्राइवरों को बेहतर मानती हैं और इसलिए उन्हें कुछ छूट भी देती हैं। हालांकि, अन्य इंश्योरेंस कंपनियां पुरुष ड्राइवरों के लिए छूट देती हैं। हालांकि, यह तरीका पश्चिम में अधिक प्रचलित है, और अभी भारत में जड़ें नहीं जमा पाया है।

 

3. शहर जहां वाहन चलाया जाएगा

शहर, जहां वाहन चलाया जाएगा, को भी अब ध्यान में रखा जाता है। पहले के दो क्षेत्रों से, अब शहरों और कस्बों, जहां वाहन पाइल्ड या पंजीकृत है का ध्यान रखा जाता है।

 

4. चालक का पेशा

ग्राहक का व्यवसाय काफी हद तक वाहन का उपयोग निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए,कार्यालय जाने वाला अधिकांश समय केवल कार्यालय और घर के बीच आने-जाने के लिए वाहन का प्रयोग करता है, जबकि खुदरा व्यापार में लगा व्यक्ति बड़े पैमाने पर शहर के कोने-कोने में चलाने के लिए वाहन का उपयोग करता है। इस बात में कोई आश्चर्य नहीं, कि मोटर इंश्योरेंस का प्रीमियम निर्धारित करते समय लोगों का पेशा भी ध्यान में रखा जाता है।

 

5. नो-क्लेम बोनस (एनसीबी)

यदि खत्म होने वाली पॉलिसी की अवधि के दौरान कोई दावा नहीं किया गया होता है, तो नवीकरण के लिए देय प्रीमियम में रियायत दी जाती है। यदि वाहन को हुए नुकसान के लिए दावा नहीं किया जाता है, तो यह छूट ‘औन डैमेज प्रीमियम' पर प्रतिशत के रूप में दी जाती है और अगले स्लैब तक इसे हर साल बढ़ाया जाता है, । इस छूट को 'नो-क्लेम बोनस (छूट)' के रूप में जाना जाता है।

यहां तक कि यदि वाहन बेच भी दिया जाता है या यदि ग्राहक इसे अपने उसी तरह के वाहन के लिए हस्तांतरित करवाना चाहता है, तो भी यह छूट 50% तक जाती है और अर्जित छूट पॉलिसी धारक के पास बनी रहती है। अर्जित एनसीबी स्थगित भी रखी जा सकती है और बाद की तिथि में कार खरीद पर उपयोग में लाई जा सकती है।  हालांकि यह जरूरी है कि ग्राहक पॉलिसी का समय से नवीकरण कराए क्योंकि बिलंब से नवीकरण (निर्धारित समयावधि से परे इंश्यो रेंस में अंतराल) की स्थिति में एनसीबी निरस्‍त हो जाती है । इसलिए, एनसीबी एक महत्वपूर्ण मानक है और आवश्यक साक्ष्य के साथ इसका खुलासा किया जाना चाहिए या कोई भी गलत जानकारी क्लेम को प्रभावित कर सकती है।

 

6. स्वैच्छिक कटौतियां

यदि ग्राहक ऐसा चाहता है,  तो वह मामूली क्षति के लिए छोटे दावों को छोड़ सकता/ सकती है। इसके लिए, स्वैच्छिक कटौती छूट प्रदान की जाती है और वाहन क्षति के लिए छूट प्रीमियम के 35% तक हो सकती है। इस कवर को प्राथमिकता देकर, ग्राहक स्वेच्छा से क्लेम की निर्धारित राशि का भार उठाने के लिए सहमति जताता है और इंश्योरेंस कंपनी स्वैच्छिक कटौती की इस सीमा से अधिक मात्रा में केवल नुकसान के लिए क्लेंम का भुगतान करती है। आप इस तरीके से भी प्रीमियम पर बचत कर सकते हैं।

 

7. सुरक्षा खूबियां

चोरी रोकने वाला डिवाइस या अन्य सुरक्षा फीचर्स को लगवाने से इंश्योंरेंस कंपनी की नजर में वाहन का जोखिम बोध कम हो जाता है और इसलिए, छूट मिलती है।  हालांकि, छूट का दावा करने के लिए अनुमोदित निर्माण फिट करवाना जरूरी है। अपने वाहन का इंश्योरेंस कराते समय, आपको चोरी रोकने वाला डिवाइस, एयर बैग, आदि जैसी वाहन की सुरक्षा खूबियों सहित वाहन के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि सुरक्षा सुखूबियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने से प्रीमियम में 2-5% की छूट मिल सकती है।

 

8. ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के सदस्य

यदि ग्राहक किसी भी नामित ऑटोमोबाइल एसोसिएशन का सदस्य है, तो वह अपने 'औन डैमेज' प्रीमियम (निजी कार और मोटर चालित दुपहिया पॉलिसियों के लिए लागू) पर छूट का लाभ उठा सकता है। निजी कार के लिए अधिकतम 200 रुपये और दुपहिया वाहन के लिए रुपये 50 / - के अधीन, औन डैमेज प्रीमियम पर 5% की छूट दी जाती है।

 

9. खड़े वाहनों के लिए रियायत

यदि वाहन गैराज में खड़ा है या कुछ समय (न्यूनतम दो महीने) से उपयोग से बाहर है, तो मौजूदा पॉलिसी के दायरे को पार्किंग जोखिम तक सीमित किया जा सकता है और ग्राहक या तो एक्सपायरी के बाद की अवधि बढ़ाने या नवीकरण प्रीमियम के लिए क्रेडिट के माध्यम से पॉलिसी के नवीकरण के दौरान रियायत का लाभ उठा सकता है। हालांकि, इंश्योरेंस कंपनी को सूचित करना आवश्यक है।

 

10 ऑनलाइन खरीद / नवीकरण

जब आप ऑनलाइन निजी कार खरीदते / रिन्यू करते हैं, तो कुछ इंश्शरेंस कंपनियां अधिक छूट प्रदान करती हैं। इसका कारण यह है कि जब ग्राहक मध्यस्थ के माध्यम से जाने की बजाय इंश्योरेंस कंपनी के साथ ऑनलाइन लेनदेन करता है, तो इंश्योरेंस कंपनी की प्रोसेसिंग और वितरण लागत पर काफी बचत हो है जिसे ग्राहकों को प्रदान कर दिया जाता है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट हमेशा स्पष्ट रूप से प्रपोजल फार्म भरने और जहां तक संभव  हो ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्रदान करने का सुझाव देते हैं। वे कहते हैं, "चूंकि ये मानक हमेशा ठीक-ठाक होते हैं और नए मानक जोड़े जाते रहते हैं इसलिए जहां तक संभव हो सभी जानकारियां प्रदान करनी चाहिए और आप कभी भी नहीं जान सकते हैं कौन सा मानक प्रीमियम कम करने में मदद कर सकता है"।

 

स्रोत: इकनॉमिक टाइम्स

संबंधित लेख