हेलमेट पहने बिना क्यों ना करें दोपहिया की सवारी।

बहुत से राज्यों में कानूनन हेलमेट पहनना ज़रूरी है लेकिन इसके बावजूद दोपहिया चलाने वाले अक्सर बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते हैं। इसके कारण दुर्घटना होने पर सिर की चोट का ख़तरा बढ़ता है जिससे सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ती है।

Things to know about Two wheeler Insurance

बिहार के पटना की रहने वाली निकिता के साथ ज़बरदस्त दुर्घटना हुई जब उनके स्कूटर पर एक बाइक ने पीछे से टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी भयंकर थी कि वह तीन महीने तक ना तो कुछ बोल पा रही थी और ना ही कुछ खा पा रही थी। इसके घटना के बाद निकिता को हेलमेट की अहमियत समझ आई। निकिता ने कहा, “इस घटना के बाद मैं स्कूटर चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनती हूँ।” लेकिन हर कोई इतना भाग्यशाली नहीं होता कि हेलमेट के ना पहनने के कारण लगी सिर की चोट से बच जाए।

वर्ष 2014 के आँकड़ों के अनुसार भारत में हर घंटे 56 सड़क दुर्घटनाएं और उनके कारण 16 मौतें होती हैं। इन आँकड़ों से समझ आता है कि स्थिति कितनी खतरनाक है। यातायात के नियमों का पालन नहीं करना इन दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह है और इसमें भी 25% दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों से जुड़ी हैं। हेलमेट पहनना भी एक ऐसा नियम है जिसका बहुत कम पालन किया जाता है। दोपहिया चलाते समय आपको सुरक्षित रखने में हेलमेट बहुत अहम भूमिका निभाता है। यह उतना ही ज़रूरी है जितना कार के चलाते समय सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना। 

कानूनी अनिवार्यता

तीन वर्ष पहले तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों ने दोपहिया चलाते समय हेलमेट पहनना जरूरी कर दिया। इसे नहीं मानने वालों पर जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, देश भर में बड़ी संख्या में लोग बिना हेलमेट पहने दोपहिया चलाते हैं। ओडिशा में राज्य सरकार ने डीलर के लिए ज़रूरी बना दिया कि वह दोपहिया बेचते समय साथ में हेलमेट भी शामिल करे। बिहार में नीतीश सरकार ने दोपहिया में तेल भरवाने के लिए हेलमेट पहनना जरूरी कर दिया। इन सबके बावजूद हेलमेट नहीं पहनना राज्य की राजधानी पटना में दोपहिया दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है।

हेलमेट का महत्व और इससे जुड़े कुछ आँकड़ें

अकेडमी ऑफ फॉरेन्सिक मेडिसन के अध्ययन में सामने आया है कि दोपहिया दुर्घटनाओं में सिर की चोट से मरने वालो में 74% मौतें हेलमेट नहीं पहनने से होती हैं। पटना के ट्रैफिक सुपरिंटेंडेंट पी के दास का कहना है कि हेलमेट पहनने से सिर की गंभीर चोट के खतरे को 80% और मौतों की संख्या में 50% तक की कमी की जा सकती है। 

हेलमेट सुरक्षा का असली मतलब

अधिकतर लोग भले ही हेलमेट का महत्व ना समझते हों लेकिन वे कानून के डर से हेलमेट पहनते हैं। बाइक से गिरने की स्थिति में हेलमेट आपके सिर को चोट से बचाता है। चोट से बचने का सबसे बेहतर तरीका है कि चोट लगने की संभावना को बेहद कम कर दिया जाए और हेलमेट ठीक यही काम करता है। 

हेलमेट को इस तरह बनाया जाता है कि वह सिर पर लगने वाली चोट के असर को बेहद कम कर देता है। यह सिर को भयंकर चोट और खोपड़ी को टूटने से बचाता है। मस्तिष्क शरीर का सबसे अहम हिस्सा है। यह तंत्रिका तंत्र पर नियंत्रण रखता है और हमारी रीढ़ की हड्डी से जुड़ा होता है। ये दोनों मिलकर हमारे शरीर के हिलने और प्रतिक्रिया करने को नियंत्रित करते हैं। इसका मतलब है कि भले ही सिर की चोट से आपकी मौत ना हो लेकिन ऐसा हो सकता है कि आपको पूरी ज़िंदगी बिस्तर पर बितानी पड़े। 

 सरकार से मान्यता प्राप्त हेलमेट को खरीदने का खर्च एक हज़ार से दो हज़ार रूपयों के बीच आता है, सिर पर लगने वाली चोट के ख़तरों और उसके इलाज पर होने वाले भारी खर्च को देखते हुए यह कुछ भी नहीं है। 

 निष्कर्ष 

हम हर दिन सड़क सुरक्षा से जुड़े सबक सीखते हैं और बेहतर यही है कि ये सबक हमारे लिए दुखदायी ना साबित हों। 

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