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कार बीमा पॉलिसी लेने से पहले ये जानना जरूरी है कि प्रीमियम किस आधार पर तय किया जाता है। इसके लिए आईडीवी की जानकारी होना अहम है।

What is IDV and Why Is it important

आसान शब्दों में आईडीवी आपकी कार का मौजूदा बाजार भाव है। आईडीवी का मतलब है कि बीमा कंपनी आपको कार के लिए अधिकतम कितनी रकम देगी। यानि बीमा पॉलिसी के तहत दु्र्घटना में कार पूरी तरह खराब होने पर या फिर कार चोरी होने पर आप आईडीवी के बराबर ही बीमा कंपनी से हर्जाने की मांग कर सकते हैं।

जैसे, बीमा पॉ़लिसी लेते वक्त अगर आपकी कार का बाजार अगर आपने योग्य बीमा न लिया हो तो सड़क दुर्घटना, कार का खराब होना और उसकी दुरुस्ती आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। बेहतर सुरक्षा के लिए आपको किफायती प्रीमियम और उपयुक्त राइडर वाले विस्तृत कार बीमा की जरूरत है। इसके लिए आपको पता होना चाहिए आप किन बातों के लिए बीमा का खर्च कर रहें हैं। यहीं आईडीवी का महत्व सामने आता है।

भाव 7 लाख रुपये तय हुआ है, तो आप बीमा कंपनी 7 लाख रुपये तक ही भरपाई करेगी।

 

इंश्योर्ड डिक्लेर्ड वैल्यू की गणना

आईडीवी जानने के लिए बीमा कंपनियां नीचे दिए गए डेटा इस्तेमाल करती हैं और इंडियन मोटर टैरिफ के स्टैंडर्ड डिप्रीशीएशन रेट के मुताबिक इसका समायोजन करती हैं:

कार रजिस्ट्रेशन की जानकारी

शहर जहां कार का रजिस्ट्रेशन हुआ है – रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर जानकारी मौजूद होती है

पहली खरीद या रजिस्ट्रेशन - रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर जानकारी मौजूद होती है

कार का निर्माता, किस्म और मॉडल

क्यूबिक क्षमता: (निर्माता और मॉडल की जानकारी पर आधारित)

कार का विवरण: (निर्माता और मॉडल की जानकारी पर आधारित)

एक्स-शोरूम कीमत: (कार का मूल्य+ राज्य कर)

 

इंश्योर्ड डिक्लेर्ड वैल्यू

आईडीवी=(निर्माता द्वारा तय की गई कार की कीमत-डिप्रीशीएशन)+ (कीमत में न जोड़ी गई एक्सेसरीज-डिप्रीशीएशन)

आईडीवी का मतलब है कि बीमा कंपनी आपको कार के लिए अधिकतम कितनी रकम देगी।

 

आईडीवी और प्रीमियम

आईडीवी के आधार पर ही बीमा प्रीमियम तय होता जाता है। इस वजह से ही जैसे-जैसे आपकी कार पुरानी होती चली जाती है, प्रीमियम भी कम होता जाता है। आईआरडीएआई (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) के नियमों के मुताबिक कार की अधिकतम एक्स-शोरूम कीमत का 95 फीसदी ही डिक्लेर्ड वैल्यू तय किया जा सकता है। यानि, कार खरीदने के 6 महीनों में ही कार की कीमत 5 फीसदी घट जाती है।

कार की डिप्रीशीएशन के बाद कीमत जानने के लिए नीचे दिए गए सूची का इस्तेमाल किया जाता है:

 

गाड़ी की आयु                   डिप्रीशीएशन चार्ट

नई कार – 1 साल               एक्स-शोरूम कीमत के 95 फीसदी मूल्य पर बीमा होता है।                               5 फीसदी डिप्रीशीएशन लागू होता है।

दूसरे साल                      20 फीसदी डिप्रीशीएशन लगता है। एक्स-शोरूम कीमत के 80 फीसदी मूल्य पर बीमा होता है।

तीसरे साल                     30 फीसदी डिप्रीशीएशन लगता है। एक्स-शोरूम कीमत के 70 फीसदी मूल्य पर बीमा होता है।

चौथे साल                      40 फीसदी डिप्रीशीएशन लगता है। एक्स-शोरूम कीमत के 60 फीसदी मूल्य पर बीमा होता है।

पांचवे साल                     50 फीसदी डिप्रीशीएशन लगता है। एक्स-शोरूम कीमत के 50 फीसदी मूल्य पर बीमा होता है।

छठे साल और आगे              पिछले साल के आईडीवी पर हर साल 10-15 फीसदी डिप्रीशीएशन लगता है।

 

आईडीवी की गणना करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

आईडीवी कार की एक्स-शोरूम कीमत के आधार पर बीमा कंपनी तय करती है। कार के मालिक होकर आईडीवी पता न होने से हो सकता है कि आपको योग्य हर्जाना नहीं मिले।

साथ ही, कार के बाजार भाव से काफी कम आईडीवी तय करने का भी फायदा नहीं होता है। क्योंकि इससे चाहे आपका प्रीमियम घटता हो, लेकिन बीमा कवर भी कम होता है।

वैसे ही आईडीवी का बढ़ाकर तय करने से हर्जाने की रकम नहीं बढ़ती है। साथ ही, कार बेचचे वक्त आपको ऊंचे आईडीवी से कार की ज्यादा कीमत नहीं मिलेगी। इसके अलावा ध्यान रखिए की चाहे आपको मिलने वाला हर्जाना आईडीवी के आधार पर तय होता है, लेकिन दुर्घटना या नुकसान की वजह को भी बीमा कंपनी ध्यान में लेती है।

आपको आईडीवी के बारे में जानकारी हासिल हो गई है, अब आप जानिए कि भरपाई की मांग करते वक्त कौन सी 6 मोटर बीमा शर्तों को ध्यान में रखना जरूरी है।

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