New SEBI rules: सेबी ने किया नियमों में परिवर्तन, म्यूचुअल फंड का भुगतान त्वरित

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नियमों में संशोधन किए हैं जिनके चलते अब AMC को पहले से जल्दी लाभांश का भुगतान करना होगा।

म्यूचुअल फंड का भुगतान त्वरित

New SEBI rules for faster Mutual Fund payments: म्यूचुअल फंड में निवेशकों ने भारी रुचि दिखाई है, जिसके चलते बाजार में निवेशकों की राह आसानी बनाने के लिए कई परिवर्तन किए गए हैं। सेबी ने इस दिशा में कदम उठाते हुए भुगतान संबंधित नियमों को बदला है जिसके तहत अब म्यूचुअल फंड के यूनिटधारकों को लाभांश भुगतान में आसानी होगी। लाभांश प्राप्त करने और यूनिट बेचने से मिलने वाली रकम के लिए अब भुगतान का समय तय कर दिया गया है। एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) के लिए अब लाभांश का भुगतान 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह समय सीमा 15 दिनों की थी। 

सेबी के नियम 

सेबी ने स्पष्ट किया कि लाभांश के भुगतान के लिए भी 7 कामकाजी दिनों का समय दिया जाएगा। इसके भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। यूनिट बेचने से प्राप्त राशि के ट्रांसफर के लिए भी केवल तीन कामकाजी दिनों का समय तय किया गया है। इसके पहले यह समय सीमा 10 कामकाजी दिनों की थी। म्यूचुअल फंड के यूनिट धारकों के नकदीकरण की दिशा में यह बहुत अच्छा कदम है। 

यह भी पढ़ें: वैल्यू फंड कैसे अलग है?

विदेशों में निवेश की स्थिति 

यदि ऐसे निवेश शामिल हैं जहाँ 80% रकम विदेशों में स्वीकृत उत्पादों में लगाई गई हो तो उस स्थिति में यूनिट बेचने पर भुगतान के लिए 5 कामकाजी दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। उन 5 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। 

अपवाद की स्थितियाँ 

उद्योग संगठन एसोसिएश्न ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) को विचार-विमर्श करने के बाद अपवाद की परिस्थितियों की सूची प्रकाशित करने के लिए कहा है। इस सूची में उन निवेशकों के बारे में जानकारी होगी जो निर्धारित समय सीमा के भीतर रकम का भुगतान कर पाने में असमर्थ होंगे। इतना ही नहीं इस सूची में इन विशेष परिस्थितियों में यूनिटधारक को कितने समय में अपने भुगतान की राशि प्राप्त होगी यह बताना आवश्यक होगा। सूची के प्रकाशन के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। 

समय सीमा बीतने पर मिलेगा ब्याज 

नियामक सेबी ने स्पष्ट किया है कि अगर लाभांश के भुगतान और यूनिट बेचने पर मिलने वाली राशि में देर हो जाए तो यूनिटधारक को प्राप्त होने वाली रकम पर 15% वार्षिक की दर से ब्याज मिलेगा। ब्याज का भुगतान संपत्ति प्रबंधन कंपनियाँ (एएमसी) को करना होगा और साथ ही इस पूरे भुगतान का विवरण अनुपालन रिपोर्ट के अंतर्गत सेबी के पास जमा कराना होगा। 

यह भी पढ़ें: अपना म्यूच्यूअल फण्ड पोर्टफोलियो के सुझाव

SEBI Sets New Rules For IPO?

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सेबी के नियम 

सेबी ने स्पष्ट किया कि लाभांश के भुगतान के लिए भी 7 कामकाजी दिनों का समय दिया जाएगा। इसके भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। यूनिट बेचने से प्राप्त राशि के ट्रांसफर के लिए भी केवल तीन कामकाजी दिनों का समय तय किया गया है। इसके पहले यह समय सीमा 10 कामकाजी दिनों की थी। म्यूचुअल फंड के यूनिट धारकों के नकदीकरण की दिशा में यह बहुत अच्छा कदम है। 

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विदेशों में निवेश की स्थिति 

यदि ऐसे निवेश शामिल हैं जहाँ 80% रकम विदेशों में स्वीकृत उत्पादों में लगाई गई हो तो उस स्थिति में यूनिट बेचने पर भुगतान के लिए 5 कामकाजी दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। उन 5 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। 

अपवाद की स्थितियाँ 

उद्योग संगठन एसोसिएश्न ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) को विचार-विमर्श करने के बाद अपवाद की परिस्थितियों की सूची प्रकाशित करने के लिए कहा है। इस सूची में उन निवेशकों के बारे में जानकारी होगी जो निर्धारित समय सीमा के भीतर रकम का भुगतान कर पाने में असमर्थ होंगे। इतना ही नहीं इस सूची में इन विशेष परिस्थितियों में यूनिटधारक को कितने समय में अपने भुगतान की राशि प्राप्त होगी यह बताना आवश्यक होगा। सूची के प्रकाशन के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। 

समय सीमा बीतने पर मिलेगा ब्याज 

नियामक सेबी ने स्पष्ट किया है कि अगर लाभांश के भुगतान और यूनिट बेचने पर मिलने वाली राशि में देर हो जाए तो यूनिटधारक को प्राप्त होने वाली रकम पर 15% वार्षिक की दर से ब्याज मिलेगा। ब्याज का भुगतान संपत्ति प्रबंधन कंपनियाँ (एएमसी) को करना होगा और साथ ही इस पूरे भुगतान का विवरण अनुपालन रिपोर्ट के अंतर्गत सेबी के पास जमा कराना होगा। 

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