आपके म्यूचुअल फंड निवेश पर कोविड-19 का प्रभाव

कुछ फंड हाउसों ने निवेशकों के मार्गदर्शन के लि स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने के लिए और, साथ ही , हमेशा की तरह व्यवसाय चलने के लिए सहायता सेवा कार्यक्रम शुरू किया है ।

आपके म्यूचुअल फंड निवेश पर कोविड-19 का प्रभाव

सबकी आशंकाओं के विपरीत, मई में भी भारत में कोविड-19 का बे-लगाम प्रसार बंद नहीं हो पाया है। पॉजिटिव पाए गए मामलों की संख्या में भरी वृद्धि के बावजूद, इस महीने में उच्च स्वस्थ सुधार दर से कुछ अच्छे संकेत दिखाई दिए हैं । इसने देश के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन को खोलने की बातचीत को बंद कर दिया है, यहां तक ​​कि कोरोनावायरस सावधानियों को 'कंटेंटमेन्ट जोन’ में बढाकर लॉकडाउन 4.0 के रूप में चिह्नित किया गया है।

राहत के कुछ साँसों के बावजूद, कोरोनोवायरस ने बाजारों को काफी प्रभावित किया है। रिटर्न में काफी गिरावट आई है, जबकि निवेशक अपने निवेश को निकाल रहे हैं, जिससे तरलता की कमी भी हो रही है।

सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक म्यूचुअल फंड है, जहां कई कारकों के कारण निवेशकों का भरोसा उठ चूका है। उदाहरण के लिए, हाल के सप्ताहों में सरकार द्वारा लागू प्रतिबंधों की बढ़ती संख्या के कारण डेब्ट फंड में निवेश को जोखिम की श्रेणी में डाल दिया गया है।

नतीजतन, छोटे व्यवसाय खतरे में हैं, जो उनकी ऋण चुकाने की क्षमता पर सवालिया निशान लगाता है, जिससे डिफ़ॉल्ट का जोखिम और बढ़ता है। डिफॉल्ट्स , सबसे अधिक डेब्ट फंडों द्वारा महसूस किया जाएगा, हालांकि यह कम जोखिम वाला निवेश होता है , फिर भी क्रेडिट जोखिमों की अलग-अलग स्तर का सामना करना पड़ता है: कम से कम जोखिम वाले फंड वो होते हैं जो केवल सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदते हैं, और सबसे ज्यादा जोखिम वाले वो जो निम्न-श्रेणी के कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश करते हैं।

अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण डेब्ट फंडों के अलावा अन्य फंड वर्गों को भी खतरे में डाल दिया गया है। वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म मॉर्निंगस्टार द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, सभी इक्विटी स्कीम श्रेणियां (ई.एल.एस.एस., लार्ज-कैप, स्मॉल-कैप, मिड-कैप और मल्टी-कैप) में 19 फरवरी से 18 मार्च के बीच एक महीने में रिटर्न में लगभग 25% की गिरावट देखी गई है।

क्रेडिट-ओरिएंटेड डेब्ट फंड्स को एक अलग चुनौती का सामना करना पड़ रहा है - वह है रिडेम्पशन , क्योंकि कई निवेशकों ने निवेश से अपने पैसे वापस निकाल लिए हैं। इस कारण बाकि निवेशकों को जोखिम भरे ऋणों में अब ज्यादा जोखिम उठाना पड़ेगा ।

सहायक सेवा कार्यक्रम

बेशक, डेब्ट फंड लिक्विडिटी को बढ़ाने के लिए विभिन्न तरीकों का सहारा ले सकते हैं, जैसे कि बैंकों से रिडेमेशन्स की राशि को चुकाने के लिए ऋण लेना, अधिक निकास भार जुर्माना लागू करना , और किसी एक निवेशक द्वारा डेब्ट योजना में निवेश की गई राशि को सीमित करना। विभिन्न फंड हाउस अपनी ऋण राशि से सम्बंधित चुनौतियों से निपटने की योजना कैसे बनाते हैं, यह आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा।

म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह क्यों दी जाती है?

लेकिन एक और तरीका भी है। म्यूचुअल फंड के फायदों को उजागर करने के लिए अच्छे जागरूकता अभियानों के माध्यम से निवेशक का विश्वास फिर से बहाल किया जा सकता है। कई फंड हाउस जैसे डीएसपी म्यूचुअल फंड, एडलेवेसिस और अन्य - बस सहायक सेवा प्रोग्राम लॉन्च करके ऐसा कर रहे हैं।

उदाहरण के लिए, डी.एस.पी. म्यूचुअल फंड, जो पांच मुख्य फंड वर्गों (इक्विटी फंड, डेट फंड, हाइब्रिड फंड, विदेशी फंड और सोल्युशन फंड) में काम करता है, ने अपने ईएलएसएस श्रेणी में आउटडोर जागरूकता और शैक्षिक अभियान शुरू किया है।’बचाओ’, कार्यक्रम एक दोहरे उद्देश्य की पूर्ति करता है: यह मुंबई में होर्डिंग और बस शेल्टर पर संदेशों के माध्यम से कोरोनवायरस के प्रति जागरूकता फैलाता है, और साथ में यह भी रेखांकित करता है कि यह समय संपत्ति-निर्माण का समय कैसे हो सकता है।

कई अन्य कंपनियां और फंड हाउस, अपनी ओर से, सामाजिक और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर संकट से निपटने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर लगातार काम कर रहे हैं। सबसे पहले, उन्होंने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी है;जिससे व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को सम्मिश्रण करके उनकी सुरक्षा और उत्पादकता सुनिश्चित किया गया है । वे कोरोनोवायरस सावधानियों के बारे में जागरूकता फैलाने के प्रयास कर रहे हैं जैसे कि सामाजिक दुरी बनाए रखना और खांसी और जुकाम जैसे लक्षणों ’पर डॉक्टर की सलाह लेना।

हालांकि अन्य कंपनियां सभी उपस्थित कर्मचारियों और आगंतुकों के तापमान को रिकॉर्ड करने के लिए इन्फ्रारेड थर्मामीटर का उपयोग करने और रिसेप्शन पर सैनिटाइटर की बोतलें उपलब्ध कराने जैसे उपाय कर रही हैं। फिर भी ,हाथ धोना अनिवार्य कर दिया गया है। इस तरह वे दोनों, भागीदारों और निवेशकों के साथ जिम्मेदारी से काम रहे हैं।

निवेशकों के लिए विकल्प क्या हैं?

कोविड -19 के प्रकोप को देखते हुए , जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में आयी मंदी के बाद , निवेशकों को ​​म्यूचुअल फंड के परिपेक्ष्य में क्या करना चाहिए ? निवेशित बने रहे ,बेच दें या इस मंडी को अधिक निवेश करने के अवसर के रूप में देखें?

मीडिया रिपोर्टों में उद्धृत विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि अलग-अलग निवेशक बाजार में अस्थिरता के ख़त्म होने का इंतजार करते हैं, और स्मॉल और मिड-कैप शेयरों को तब तक हाथ नहीं लगाते जब तक कि बाजार सामान्य नहीं हो जाते। उनके अनुसार , इन व्यक्तिगत निवेशकों को बिना घबराये या भटके बिना आदर्श रूप से अपनी निवेश योजनाओं पर ही ध्यान केंद्रित रखना चाहिए , और दीर्घकालिक तस्वीर पर नज़र गड़ाई रखनी चाहिए, भले ही निकट अवधि में अस्थिरता जारी रहे।

निवेशकों को एक ऐसे पोर्टफोलियो बनाए रखने की सलाह दी गई है, जिसमें म्यूचुअल फंड्स का सकारात्मक ट्रैक रिकॉर्ड हो , सूचीबद्ध स्टॉक और कर-मुक्त बॉन्ड शामिल हो ; विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव में मदद करेगा । कुछ विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि निवेशक मूल्य निवेश पर ज्यादा विचार करते हैं।

व्यवस्थित हस्तांतरण योजनाओं (एस.टी.पी.) पर विचार करें

वे यह भी सुझाव देते हैं कि म्यूचुअल फंड निवेशक एसटीपी (व्यवस्थित हस्तांतरण योजना) पर अधिक ध्यान देते हैं। इसके तहत एक ही फंड हाउस में किसी फंड को एक स्कीम से दूसरे में ट्रांसफर किया जाता है। वे प्रतिकूल बाजार की स्थितियों और मंदी के कारण एस.आई.पी. (व्यवस्थित निवेश योजना) से निवेश बाहर नहीं निकलने सलाह देते हैं। इसके बजाय, वे यह सलाह देते हैं कि निवेशक अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो को निश्चित अंतराल पर पुनः संतुलित करें।

आंकड़ों से पता चलता है कि जितने लंबे समय तक आप एस.आई.पी. में निवेश करते है, उतनी अधिक संभावना है कि आपको लाभ हो । हालांकि, एसआईपी के मामले में भी खराब फंड निवेशकों को हताश कर देते हैं। इसलिए अगर कोई निवेशक फंड के ख़राब प्रदर्शन से दुखी होता है, तो उसके लिए पोर्टफोलियो का पुनः आंकलन करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसके अलावा, एसआईपी में निहित लाभ होता है, क्योंकि इसमें निवेशक हर महीने एक निश्चित तिथि पर इकाइयां खरीदते है, जिसका अर्थ है कि मार्किट टाइमिंग जैसी गलतफहमी होने की गुंजाईश ही नहीं है। जब एक स्कीम की एन.ए.वी. कम हो तो निवेशक उस राशि में अधिक इकाई खरीद सकते हैं और जब एन. ए. वी. अधिक हो तो निवेशक कम इकाई खरीदता है। इस तरह, लागत का औसत निकल जाता है। मंदी अधिक इकाइयों को खरीदने का अवसर प्रदान करती है।

आखरी पंक्तियाँ

अंत में, आपको अपने लक्ष्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है, और निवेश के बारे में सोचने पर भी कोरोनोवायरस सावधानी ज़रूर बरतें। साथ ही, जब कोई स्वास्थ्य संकट होता है जैसे कि प्रचलित महामारी, तो किसी भी आकस्मिकता का सामना करने के लिए और वित्तीय रूप से तैयार होने के लिए, टर्म बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में निवेश करने के लिए विचार करना चाहिए । ये तब महत्वपूर्ण हैं जब कोई दीर्घकालिक निवेश ढूंढ रहा हो।

नज़दीकी दृष्टिकोण वाले लोगों के लिए, अपर्याप्त रिटर्न देखकर घबराना नहीं है क्योंकि बाजार कुछ समय के लिए गिरे रहेंगे ; पिछले रुझान ये आश्वासन देते हैं कि वे अंततः ठीक हो जाएंगे। जब दीर्घकालिक निवेश की बात आती है, तो निवेशकों को यह याद रखने की सलाह दी जाती है कि विश्लेषकों का क्या कहना है: निवेश करते रहें और एक उपयुक्त फंड में एक एसआईपी शुरू करें जो आप के लक्ष्यों से मेल खाता हो।

निवेशकों के लिए नियमित रूप से अपने निवेश की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है। और निश्चित रूप से, जैसा कि इन लेखों में बार-बार जोर देकर कहा गया है, उन्हें एक विश्वसनीय और योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

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