डायरेक्ट शेयर या फिर इक्विटी म्युचुअल फंड आपके लिए फायदेमंद कौन?

क्या आप सीधे शेयर या इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश को लेकर उलझन में हैं, तो यहां जानिए आपके लिए कौन फायदेमंद होगा।

डायरेक्ट शेयर या फिर इक्विटी म्युचुअल फंड आपके लिए फायदेमंद कौन?

अगर आप शेयरों में पैसे लगाने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके पास दो विकल्प हैं-पहला, या तो आप  सेबी रजिस्टर्ड किसी शेयर ब्रोकर के पास डीमैट, ट्रेडिंग और सेविंग्स अकाउंट खुलवाकर सीधे ही किसी शेयर या कई शेयरों में पैसे लगाएं और दूसरा, या फिर इक्विटी म्युचुअल फंड के जरिये शेयरों में पैसे लगाएं। शेयरों की खरीद-बिक्री शेयर बाजार (बीएसई, एनएसई) से करनी होती है जबकि इक्विटी म्युचुअल फंड्स स्कीम अलग अलग म्युचुअल फंड कंपनियां लांच करती हैं। अब आप सोचे रहे होंगे कि इन दोनों में फर्क क्या है और दोनों में से आपके लिए ज्यादा फायदेमंद कौन है?

शेयर बाजार या शेयरों से जुड़े निवेश साधनों जैसे कि म्युचुअल फंड में पैसे लगाना जोखिमभरा होता है। 'लाभ जोखिम का पुरस्कार है'। प्रो० हॉले का ये कथन व्यापार जगत से लेकर निवेश बाजार के लिए सटीक बैठता है। कहने का मतलब हुआ कि जोखिम और लाभ का गुणा-भाग करके ही कहीं भी पैसे लगाना चाहिए। 

बाजार में सीधे निवेश में अपेक्षाकृत जोखिम ज्यादा है। आपको स्टॉक और उसके वर्ग विशेष के बारे में सारी जानकारियां लेनी होती है। इसके बाद आप अपने लिए शेयर का चुनाव करते हैं। स्टॉक एक्सचेंज (शेयर बाजार) में सूचीबद्ध हजारों कंपनियों में से कुछ का चुनाव भारी काम है और यही नहीं, चुने हुए स्टॉक्स में निवेश के बाद उनके प्रदर्शन पर नजर भी रखनी पड़ती है।

इक्विटी म्युचुअल फंड में स्टॉक का चुनाव फंड प्रबंधक करते हैं जो इस काम में निपुण होते हैं। आपको सिर्फ उस फंड के प्रदर्शन की जानकारी से सरोकार रखना होता है, उस फंड के प्रत्येक स्टॉक के प्रदर्शन से नहीं। म्युचुअल फंड्स आपको निवेश में लचीलापन देते हैं जैसे वृद्धि के साथ/लाभांश विकल्प, टॉप-अप, सुनियोजित निकासी/ स्थानान्तरण या बदली आदि ऐसी सुविधायें जो सीधे स्टॉक निवेश में नहीं होती हैं। इसके अलावा, म्युचुअल फंड्स SIP के माध्यम से छोटे छोटे नियमित निवेश कर बाजार के उतार-चढ़ाव और अस्थिरता पर अंकुश रखने में कारगर साबित होते हैं।

सीधे शेयर बाजार में निवेश आपके लिए तभी फायदेमंद हो सकता है अगर आप जानकार हैं, शेयर बाजार में ट्रेडिंग को लेकर कहीं से आपने प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली है, शेयरों के बारे में रिसर्च करने और शेयरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आपके पास पर्याप्त समय है और कंपनियों की गतिवधियों को अच्छी तरह से समझते हैं। एक आम निवेशक के लिए, खासकर जो नए होते हैं, शेयरों में निवेश के लिए कंपनियों पर रिसर्च करना एक मुश्किल काम है। लेकिन, इक्विटी म्‍युचुअल फंड आम निवेशकों के इन सब कामों को आसान करते हैं। 

इक्विटी म्‍युचुअल फंड एक ही साथ कई कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। इस वजह से किसी एक कंपनी से होने वाले नुकसान आपके निवेश पोर्टफोलियो को प्रभावित नहीं करता है। अगर आप म्‍युचुअल फंड के माध्यम से निवेश करते हैं तो उसका प्रबंधन प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स करते हैं। फंड मैनेजर बाजार के मूवमेंट को एक आम निवेशक के मुकाबले अच्छी समझ रखते हैं। इसके अलावा निवेश पोर्टफोलियो डायवर्सिफाइड होने से उतार-चढ़ाव का खतरा भी कम हो जाता है।

अगर आप किसी एक कंपनी के शेयर 500 रुपए प्रति शेयर खरीद सकते हैं तो किसी खास इक्विटी म्युचुअल फंड स्कीम में पैसे लगाने पर इसी 500 रुपए में कई अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में पैसे लगाए जा सकते हैं। कुछ म्युचुअल फंड कम से कम 100 रुपए के निवेश की भी सुविधा देते हैं। 

शेयर बाजार के ज्यादातर जानकार मानते हैं कि जिन्हें शेयर बाजार की, शेयर कैसे खरीदा जाए, कैसे बेचा जाए, कैसे चुना जाए जैसी बातों की जानकारी नहीं होती है, उन्हें प्रोफेशनल मैनेजमेंट के जरिये म्‍युचुअल फंड में निवेश करना चाहिए। इसमें सब कुछ अनुशासन के तहत होता है। उन्हें हर महीने एसआईपी के जरिये पैसे लगाना चाहिए। जानकारों का ये भी मानना है कि अगर किसी के पास पूरा समय है, वह मार्केट के बारे में जानता है, साथ ही उसके पास रिसर्च के लिए बहुत समय है, तो फिर वो डायरेक्ट शेयर के लिए जा सकता है, वरना म्‍युचुअल फंड सबसे बेहतर विकल्‍प है।

आप सीधे शेयर में पैसे लगाएं या फिर इक्विटी म्युचुअल फंड में एक बाद याद रखिये, लंबी अवधि तक निवेशित रहने पर ही आपको बेहतर रिटर्न की उम्मीद करनी चाहिए। झटपट अमीर बनने के चक्कर में आपके पैसे डूब सकते हैं। साथ ही निवेश करने से पहले ये भी सोच लें कि आपका निवेश लक्ष्य और आदर्श निवेश समय सीमा क्या है और जोखिम सहने की क्षमता कितनी है।  




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