Discover the Double Benefit of Tax Savings and High Returns with Mutual Funds for Salaried Individuals

म्यूचुअल फंड नौकरीपेशा लोगों को देगा दोहरा लाभ, बेहतर लाभ के साथ-साथ कर में छूटकर

ज्यादा रिटर्न पाने का रास्ता

ELSS tax benefit: म्यूचुअल फण्ड में निवेश वेतनभोगियों के लिए क्यों बेहतर है

वेतनभोगी वर्ग अपने कर्मजीवन में अपनी आय का अनुमान लगा सकते हैं। उन्हें पता होता है कि पूरे वर्ष में उन्हें कितनी आमदनी होनेवाली है और वे अपनी जरूरतों के हिसाब से अपना बजट बना सकते हैं। वे यह भी जानते हैं कि अवकाश के बाद उनके पास आय का कोई जरिया नहीं रह जाएगा, इसलिए भविष्य को ध्यान में रखकर उन्हें अपनी कमाई के कुछ हिस्से का इस तरह से निवेश करना चाहिए, जिससे उन्हें आयकर में छूट मिलने के साथ-साथ अच्छा रिटर्न भी मिले।

ऐसे में म्यूचुअल फंड उन के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में बहुत मददगार हो सकता है। साथ ही यह भी सच है कि अधिकतर वेतनभोगी निवेश के लिए म्यूचुअल फंड योजनाओं का चयन करते समय असमंजस में रहते हैं। बाजार में उपलब्ध अनेक विकल्पों से उन्हें यह तय करने में मुश्किल होती है कि वे अपनी कमाई किस योजना में लगाएं, जिससे वह सुरक्षित रहे और अच्छा लाभ भी दे। उनकी इस परेशानी को दूर करने के लिए आज हम कुछ ऐसी ही योजनाओं पर चर्चा करेंगे। 

ईएलएसएस में निवेश से कर में छूट

ईएलएसएस निवेशकों को इक्विटी म्यूचुअल फंड योजना में निवेश करने की अनुमति देता है। एक वित्तीय वर्ष में, इस निवेश पर कर में 1.5 लाख रुपये तक की छूट का लाभ मिलता है। यह वेतनभोगियों के लिए एक अच्छा विकल्प है, वे अपनी पसंद के इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश कर अच्छे लाभ के साथ कर में छूट भी पा सकते हैं। यहाँ इस बात को जान लेना भी ज़रूरी है कि ईएलएसएस एक इक्विटी-ओरिएंटेड योजना है, इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव के आधार पर इसमें जोखिम भी होता है। निवेशकों को यह सलाह दी जाती है कि बाजार के अस्थिर होने और उससे हो सकने वाले जोखिम को कम करने के लिए उन्हें एसआईपी मोड में निवेश करना चाहिए, इससे लंबे समय में लाभ पाने की भी पूरी संभावना रहती है।

यह भी पढ़ें: मार्केट में निफ़्टी ५० से रिटर्न कैसे पाए?

कम समय के डेट फंड में कर सकते हैं निवेश

नौकरीपेशा लोगों को कर में बचत के साथ-साथ अचानक आ जाने वाली वित्तीय समस्याओं का सामना करने के लिए आय में निरंतरता की भी ज़रूरत होती है। वेतनभोगी लोगों को किसी जरूरी या अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए अपने पास पर्याप्त आकस्मिकता निधि या कंटीजेंसी फंड बनाए रखना चाहिए। इसके लिए अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन म्यूचुअल फंड, लिक्विड फंड या आर्बिट्रेज फंड जैसे अल्प समय के डेट फंडों में निवेश किया जा सकता है। इन योजनाओं में कम जोखिम होता है और किसी भी अप्रत्याशित व्यय के लिए बगैर परेशानी उठाये जल्दी से पैसों का प्रबंध हो सकता है।

इक्विटी फंड में निवेश भी है अच्छा विकल्प 

इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाएं कई तरह के विकल्प प्रस्तावित करती हैं। इन योजनाओं में आपका लाभ आपके द्वारा उठाए जाने वाले जोखिम पर आधारित होता है। अगर आप अधिक लाभ चाहते हैं और इसके लिए अधिक जोखिम लेने से नहीं हिचकते, तो निवेश के लिए किसी छोटी या मिड-कैप म्यूचुअल फंड स्कीम को चुन सकते हैं। पर अगर आप अधिक जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं हैं, तो आपको लार्ज-कैप फंड में निवेश करना चाहिए।

म्यूचुअल फंड योजना में निवेश करते समय ध्यान रखें ये बातें

अगर आप निवेश के लिए किसी म्यूचुअल फंड योजना को चुनने जा रहे हैं तो यह ज़रूरी है कि निवेश करने से पहले एक्सपेंस के अनुपात, पिछले और मौजूदा परफॉर्मेंस, पोर्टफोलियो में निवेश जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर योजनाओं की तुलना करें। उन्हें ठीक से परख लें। 

Bankbazaar.com के सीईओ आदिल शेट्टी कहते हैं कि निवेशक अक्सर यह सोचते हैं कि अच्छा लाभ पाना है तो उन्हें बड़ी रकम का निवेशा करना होगा। पर यह सच नहीं है। एसआईपी के जरिए हर महीने 500 रुपये का छोटा सा निवेश भी किया जा सकता है। आप चाहें तो हर महीने 2,000 रुपये का योगदान करके भी 20 वर्षों में 200,000 रुपये पा सकते हैं। हालांकि इसके लिए वार्षिक रिटर्न 12 प्रतिशत होनी चाहिए। 

तो अच्छी तरह होम वर्क करने के बाद ही निवेश कीजिए और लाभ कमाइए, साथ ही भविष्य के लिए निरंतर आय की व्यवस्था कीजिए।

यह भी पढ़ें: ७ वित्तीय नियम

संवादपत्र

संबंधित लेख